तीसरी तिमाही में एचएएल का शानदार प्रदर्शन, मुनाफा करीब 30 प्रतिशत बढ़कर 1,867 करोड़ रुपए हुआ
मुंबई, 12 फरवरी (आईएएनएस)। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (दिसंबर तिमाही) में शानदार वित्तीय प्रदर्शन किया है। रक्षा क्षेत्र की इस सरकारी कंपनी का शुद्ध मुनाफा पिछले साल की तुलना में 29.6 प्रतिशत बढ़ गया है।
कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि इस तिमाही में उसका शुद्ध मुनाफा (पीएटी) 1,866.66 करोड़ रुपए रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 1,439.79 करोड़ रुपए था।
इस तिमाही में कंपनी की आय (रेवेन्यू) भी बढ़ी है। एचएएल की संचालन से आय 10.65 प्रतिशत बढ़कर 7,698.80 करोड़ रुपए हो गई।
तिमाही नतीजों के साथ ही एचएएल के निदेशक मंडल ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पहला अंतरिम लाभांश (डिविडेंड) घोषित किया है। कंपनी ने प्रत्येक 5 रुपए फेस वैल्यू वाले शेयर पर 35 रुपए का डिविडेंड देने की घोषणा की है।
कंपनी ने 18 फरवरी को रिकॉर्ड डेट तय की है। इस तारीख तक जिन निवेशकों के पास कंपनी के शेयर होंगे, उन्हें यह डिविडेंड मिलेगा। एचएएल ने कहा है कि यह राशि 14 मार्च 2026 तक पात्र निवेशकों को दे दी जाएगी।
एचएएल पिछले कई वर्षों से नियमित रूप से डिविडेंड देती आ रही है। 28 मार्च 2019 से अब तक कंपनी 14 बार डिविडेंड घोषित कर चुकी है।
पिछले एक साल में कंपनी ने कुल 40 रुपए प्रति शेयर का डिविडेंड दिया है, जिससे डिविडेंड यील्ड 0.98 प्रतिशत रही है। इससे पहले कंपनी ने 15 रुपए प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया था, जिसकी रिकॉर्ड डेट 21 अगस्त 2025 थी। तो वहीं इससे पहले कंपनी ने अपने निवेशकों को 25 रुपए का डिविडेंड दिया था, जिसके लिए रिकॉर्ड डेट 18 फरवरी 2025 थी।
बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक, एचएएल का शेयर प्राइस 4,161 रुपए है। स्टॉक का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 5,166 रुपए और 52 हफ्ते का निम्नतम स्तर 3,045.95 रुपए है। वहीं कंपनी का मार्केट कैप 2,78,812.30 करोड़ रुपए है (2.21 बजे, 12 फरवरी 2026 तक)।
--आईएएनएस
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बलूचिस्तान मानवाधिकार संकट: पाकिस्तानी सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं ने जताई गहरी चिंता
क्वेटा, 12 फरवरी (आईएएनएस)। बलूचों पर पाकिस्तानी सेना की ज्यादती की खबरें अब आम हो चली हैं। मानवाधिकार संगठन लगातार मुद्दा उठा रहे हैं लेकिन सत्ता की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। स्थानीय मीडिया ने बताया कि लाहौर में अस्मा जहांगीर कॉन्फ्रेंस के दौरान बलूच कार्यकर्ताओं, सियासी दलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने बलूचिस्तान के हालात पर चिंता जताई।
बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) के सदस्य सैमी दीन बलूच ने कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया और राजनयिकों, सियासतदांओं और पत्रकारों के साथ बैठक की। बीवाईसी ने कहा कि बलूच ने कॉन्फ्रेंस का इस्तेमाल गंभीर मानवाधिकार मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए किया और बताने की कोशिश की कि आखिर बलूचिस्तान के रहवासी इस बारे में क्या सोचते हैं।
द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, सम्मेलन के दौरान, सैमी दीन बलूच ने संयुक्त राष्ट्र के कई अधिकारियों से मुलाकात की। इनमें शांति से इकट्ठा होने और एसोसिएशन बनाने की आजादी के अधिकारों पर यूएन की विशेष प्रतिवेदक (साक्ष्य के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाली) जीना रोमेरो, महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा पर यूएन की विशेष प्रतिवेदक रीम अलसलेम (जॉर्डन की रहने वाली), और ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स (रक्षकों) की स्थिति पर यूएन विशेष प्रतिवेदक के मुख्य सलाहकार एड ओडोनोवन शामिल थे।
बैठक के दौरान, सैमी दीन बलूच ने कहा कि शांति से इकट्ठा होने और बोलने की आजादी पर रोक लगाई जा रही है और लोगों को बलूचिस्तान में सरकार की कार्रवाइयों के खिलाफ प्रदर्शन करने या बोलने की इजाजत नहीं दी जा रही है। उन्होंने बलूच महिलाओं के खिलाफ कथित हिंसा पर चिंता जताई। महिलाओं और नाबालिगों को जबरन गायब करने और फिर उनकी गैर-कानूनी तरीके से दिखाई जा रही गिरफ्तारी पर अफसोस जताया।
उन्होंने ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स को सिस्टमैटिक तरीके से टारगेट करने पर भी बात की। बताया कि उन्हें धमकियां दी जा रही हैं, उत्पीड़न कर मनमानी गिरफ्तारी की जा रही है। उन्होंने महरंग बलूच, बीबो बलूच, गुलजादी बलूच और दूसरों के मामलों का जिक्र कर बेहद कठिन हालातों का जिक्र किया।
बीवाईसी ने इसे लेकर बयान जारी किया। बयान के मुताबिक, यूएन के प्रतिनिधियों ने रिपोर्ट किए गए ह्यूमन राइट्स उल्लंघन पर चिंता जताई और घोषणा की कि वे इन मुद्दों को संबंधित यूएन मंच पर उठाएंगे।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए, बलूचिस्तान नेशनल पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष सरदार अख्तर मेंगल ने बलूचिस्तान में सुरक्षा की स्थिति को चिंतनीय बताया। उन्होंने कहा कि सरकार जिन समूहों को आतंकवादी कहती है उन्हें बलूच अपना रक्षक मानते हैं।
उन्होंने उस मंजर का जिक्र किया जो सुरक्षा बलों के शहरों में प्रवेश करते ही बन जाता है। उन्होंने कहा कि जब सिक्योरिटी फोर्स शहरों में घुसते हैं तो लोग अक्सर डर के मारे खुद को घरों के अंदर बंद कर लेते हैं, जबकि हथियारबंद बलूच लड़ाकों का वहां के लोग अलग तरह से स्वागत करते हैं।
द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने बलूचिस्तान से जुड़े पहले के समझौतों के बारे में बात की, जिसमें कलात के खान और मुहम्मद अली जिन्ना के बीच का समझौता भी शामिल था। उन्होंने बताया कि स्वायत्तता के बारे में किए गए वादों का पालन नहीं किया गया।
अपने भाषण में, बलूचिस्तान के पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल मलिक बलूच ने कहा कि जब भी वह अपने चुनाव क्षेत्र में जाते हैं, तो उन्हें लापता लोगों के बारे में शिकायतें मिलती हैं। ये स्थिति काफी चिंताजनक है।
उन्होंने सरकार और राजनीतिक नेतृत्व से आग्रह किया कि वे तुरंत और ठोस समाधान के जरिए समस्याओं को सुलझाएं।
उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान को सिर्फ एक सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा मानने से स्थिति और खराब होगी। उन्होंने राजनीतिक बातचीत और चुने हुए प्रतिनिधियों को शामिल करने की जरूरत पर बल दिया।
द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में सियासी दलों के घटते कद पर भी फिक्र जाहिर की।
बाद में, पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री राणा सनाउल्लाह के बलूचिस्तान और जबरन गायब किए जाने के बारे में टिप्पणी करने के बाद कॉन्फ्रेंस के दौरान विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।
वहां मौजूद लोगों ने उनकी टिप्पणियों पर आपत्ति जताई क्योंकि सनाउल्लाह जबरन गायब किए जाने की घटनाओं को आतंकवाद से जोड़ते हुए सही ठहरा रहे थे। लगातार असहमति के बाद, सामाजिक कार्यकर्ता शीमा करमानी और सैमी दीन बलूच समेत बड़ी संख्या में लोगों ने वॉकआउट कर दिया।
--आईएएनएस
केआर/
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