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अभिजीत दीपके को देखकर एयरपोर्ट पर मचा बवाल, लोगों ने कहा- क्यों देश को खराब कर रहा है भाई

कॉकरोच जनता पार्टी इन दिनों सुर्खियो में हैं. कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके बुधवार को दिल्ली पहुंचे. एयरपोर्ट से बाहर निकलते वक्त भीड़ उन पर चिल्लाने लगी. इस दौरान, एक पैसेंजर ने कहा कि क्यों देश को खराब कर रहा है भाई. इस पर दीपके ने बस थम्सअप का इशारा किया और चुपचाप चले गए. 

सौरव-रांका को 5 दिनों के लिए भेजा तिहाड़ जेल

इसके अलावा, सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली की स्पेशल कोर्ट ने 5 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया है. दोनों को मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था. दोनों की हिरासत पर CJP की लीगल टीम प्रमुख रत्ना सिंह ने कहा कि दोनों पर बिना इजाजत जंतर-मंतर में घुसने, बॉन्ड की शर्तें तोड़ने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप हैं।

50-50 हजार के मुचलके पर रिहा हुए थे सौरव-रांका

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और SIR के विरोध में CJP ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बुलाया था. पुलिस ने CJP फाउंडर अभिजीत दीपके, प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट से ही हिरासत में लिया था. अगले दिन यानी 11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने उन्हें दिल्ली कैंट की कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया था, जहां उन्हें 50-50 हजार रुपये के जमानती मुचलके पर रिहा कर दिया गया था. रिहाई की शर्तों के अनुसार, तीनों को एक साल तक शांति बनाकर रखनी थी. उनको शर्तों के अनुसार, ऐसा कोई भी काम नहीं करना था, जिससे शांति भंग हो, इसके लिए बॉन्ड साइन करने की बात सामने आई थी. 

 जंतर-मंतर पर सरकार ने प्रदर्शन बैन किया

12 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने दिल्ली के जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटा दिया था. 33 साल पहले जंतर-मंतर को प्रदर्शन की जगहों में शामिल किया गया था. यहीं पर अन्ना आंदोलन से लेकर पहलवानों के प्रदर्शन और कॉकरोच जनता पार्टी का धरना प्रदर्शन हुआ था. गृह मंत्रालय की बनाई गई कमेटी की सिफारिश पर दिल्ली का रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड प्रदर्शन स्थल बनाए गए हैं. 12 अक्टूबर को सीजेपी ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एआईआर पर रोक की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की परमिशन मांगी थी. लेकिन पलिस ने इससे इनकार कर दिया था. 

 

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आसमान साफ और खेतों में सफेद फूल! पुराने समय में इन संकेतों से पता लगाते थे मानसून की विदाई

खेती-किसानी में मानसून का आना जितना जरूरी है, उतना ही उसकी विदाई का समय जानना भी महत्वपूर्ण माना जाता है. पहले के समय में किसान प्रकृति में होने वाले बदलावों से बारिश के मौसम का अंदाजा लगाते थे. अमेठी के बुजुर्ग सूर्यपाल यादव बताते हैं कि खेतों में कास के सफेद फूल खिलना, आसमान साफ होना और धान-बाजरे की फसलों में बालियां निकलना मानसून की विदाई के पारंपरिक संकेत माने जाते थे. जानिए, क्या हैं ये पुराने संकेत और इनके पीछे किसानों का अनुभव.

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सिर्फ 2 टेस्ट मैच खेले, अब ये गेंदबाज बनेगा टीम इंडिया का सेलेक्टर, कभी धोनी के साथ जड़ी थी फिफ्टी

अजीत अगरकर के जाने के बाद से ही मेंस सेलेक्शन कमेटी में एक जगह खाली और नियमों के हिसाब से वेस्ट जोन से ही नया सेलेक्टर भी चुना जाएगा. ऐसे में मुंबई के इस पूर्व खिलाड़ी का नाम रेस में आगे है. Thu, 15 Oct 2026 17:06:14 +0530

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