कुट्टू, दही और स्ट्रॉबेरी से बनाएं व्रत का ये खास डेजर्ट, Kunal Kapur ने शेयर की है रेसिपी
नवरात्रि के व्रत में साबूदाने की खीर, मखाने की बर्फी और आलू का हलवा तो हम अक्सर खाते हैं। लेकिन अगर इस बार व्रत में कुछ नया, हल्का और स्वाद से भरपूर खाने का मन है, तो मशहूर शेफ कुणाल कपूर की यह व्रत वाली स्ट्रॉबेरी पारफे आपके लिए एक अलग और स्वादिष्ट विकल्प हो सकती है।
पारफे एक विदेशी मीठी डिश है, जिसमें केक, बिस्कुट, दही या क्रीम और फलों की अलग-अलग परतें बनाई जाती हैं। शेफ कुणाल कपूर ने इसे व्रत के हिसाब से तैयार किया है। इसमें कुट्टू के आटे और एयर फ्रायर का इस्तेमाल किया गया है, जिससे पारंपरिक व्रत की सामग्री को एक नए अंदाज में परोसा जाता है।
स्ट्रॉबेरी पारफे के लिए सामग्री
कुट्टू का आटा: 1 कप
देशी घी: 1 से 2 छोटे चम्मच
स्ट्रॉबेरी: 1 कप, बारीक कटी हुई
गाढ़ा दही: 1.5 कप, फेंटा हुआ
इलायची पाउडर: आधा छोटा चम्मच
शहद या धागे वाली मिश्री का पाउडर: स्वाद के अनुसार
कटे हुए बादाम, काजू और पिस्ता: सजाने के लिए
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ऐसे बनाएं व्रत वाली स्ट्रॉबेरी पारफे
सबसे पहले कुट्टू के आटे में थोड़ा घी और हल्की सी मिश्री मिलाएं। इसे अच्छी तरह मिलाकर भुरभुरा मिश्रण तैयार कर लें।
अब इस मिश्रण को एयर फ्रायर में 160 डिग्री सेल्सियस पर 8 से 10 मिनट तक पकाएं। इसे तब तक पकाएं, जब तक यह सुनहरा और कुरकुरा न हो जाए। इसके बाद इसे बाहर निकालकर ठंडा होने दें।
एक बाउल में गाढ़ा दही लें। इसमें इलायची पाउडर और स्वाद के अनुसार शहद या मिश्री पाउडर डालकर अच्छी तरह फेंटें। दही को तब तक फेंटें, जब तक वह क्रीमी न हो जाए।
अब एक पारदर्शी गिलास या जार लें। सबसे पहले उसमें कुट्टू के कुरकुरे मिश्रण की एक परत डालें। इसके ऊपर मीठे दही की परत लगाएं और फिर बारीक कटी स्ट्रॉबेरी डालें।
इसी तरह दो से तीन परतें तैयार करें। सबसे ऊपर स्ट्रॉबेरी के टुकड़े और बारीक कटे बादाम-पिस्ता डालकर सजाएं। इसे तुरंत परोस सकते हैं या थोड़ी देर फ्रिज में ठंडा करके खा सकते हैं।
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व्रत में क्यों खास है यह डेजर्ट?
कुट्टू का आटा नवरात्रि के व्रत में खाई जाने वाली आम चीजों में शामिल है। शेफ कुणाल कपूर ने इसी आटे से एयर फ्रायर में कुरकुरा मिश्रण तैयार किया है। इसे दही और ताजी स्ट्रॉबेरी के साथ मिलाकर एक अलग तरह की मीठी डिश बनाई गई है। एयर फ्रायर में इसे बनाने के कारण इसमें बहुत कम तेल या घी इस्तेमाल होता है। ऐसे में यह व्रत के दौरान हल्की और स्वादिष्ट डिश का विकल्प बन सकती है।
AIADMK के 6 विधायकों की अयोग्यता पर 2 महीने में आएगा फैसला, बोले Speaker JCD Prabhakar
तमिलनाडु विधानसभा के स्पीकर जेसीडी प्रभाकर ने बुधवार को कहा कि मद्रास हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक, विधायकों की अयोग्यता के मामले में दो महीने के अंदर फैसला सुनाया जाएगा। चेन्नई के पास कुंद्रथुर में एक प्राइवेट कॉलेज में पत्रकारों से बात करते हुए स्पीकर ने बताया कि इस मामले की जांच पहले से ही चल रही है। उन्होंने बताया कि उपचुनाव की घोषणा के कारण कार्यवाही रोक दी गई थी। तमिलनाडु विधानसभा के स्पीकर ने कहा कि अयोग्यता के मामले की जांच अपने आखिरी चरण में पहुंच गई है। प्रभाकर ने साफ़ किया कि दोनों पक्षों यानी शिकायत करने वाले AIADMK गुटों और जिनका जवाब मांगा गया है—की बात आमने-सामने सुनी जाएगी। कर ने बताया कि जांच का एक दौर पहले ही हो चुका है और अधिकारी अब कार्यवाही के अगले चरण का इंतज़ार कर रहे हैं।
विधानसभा के कामकाज पर बात करते हुए स्पीकर ने कहा कि विधानसभा की बैठक हर छह महीने में एक बार होगी और भरोसा दिलाया कि ज़रूरत पड़ने पर सत्र ज़रूर बुलाया जाएगा।
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प्रभाकर का यह बयान मद्रास हाई कोर्ट द्वारा तमिलनाडु विधानसभा स्पीकर JCD प्रभाकर के उस फ़ैसले को सही ठहराने के बाद आया है, जिसमें उन्होंने 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) में शामिल होने वाले छह AIADMK विधायकों के इस्तीफ़े मंज़ूर किए थे। न विधायकों के नाम हैं—मरगथम कुमारवेल, सत्यभामा, इसक्की सुब्बैया, जयकुमार, MR विजयभास्कर और C विजयभास्कर।
बेंच ने माना कि इस्तीफ़ा मंज़ूर करना संवैधानिक रूप से सही था और किसी विस्तृत जांच की ज़रूरत नहीं थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि विधायकों के अयोग्य ठहराए जाने की कार्यवाही जारी रह सकती है।
अयोग्यता की याचिका इस आरोप पर दायर की गई थी कि इन छह विधायकों ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) सरकार के समर्थन में वोट दिया था।
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याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि विधायकों के ख़िलाफ़ अयोग्यता की कार्यवाही लंबित होने के बावजूद बिना उचित जांच के उनके इस्तीफ़े मंज़ूर कर लिए गए।
इससे पहले, विधानसभा स्पीकर JCD प्रभाकर ने छह AIADMK विधायकों के इस्तीफ़े मंज़ूर किए थे। सी संदर्भ में, AIADMK के व्हिप एग्री कृष्णमूर्ति और 'नेशनल पीपल्स पावर पार्टी' के नेता रवि ने स्पीकर के इस्तीफ़ा मंज़ूर करने के आदेश को रद्द करने के लिए केस दायर किए थे। चीफ़ जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस G अरुलमुर्गन की बेंच ने इन मामलों की सुनवाई की।
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