Bigg Boss 20: गु्ल्लू और नकुल धुल की हाथापाई में माही ने उठाया हाथ, किया बिग बॉस के रूल्स का उल्लंघन, होगा एक्शन?
Bigg Boss 20: बिग बॉस 20 (Bigg Boss 20) को शुरू एक महीने से ज्यादा हो गया है और घर के सदस्यों हर दिन अपना नया गेम दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. स्काउ, काजी तौकीर, कनिका मान, गुल्लू, माही विज, अरिश्फा और आसिफ हर रोज किसी न किसी मुद्दे पर झगड़ा और बहस करते हुए नजर आ रहे हैं. पिछले एपिसोड में नॉमिनेशन टास्क के दौरान भारी हंगामा देखने को मिला, जहां ज्यादातर कंटेस्टेंट्स झगड़ा करते हुए नजर आए. वहीं, गुल्लू और नकुल धुल के बीच की लड़ाई में माही विज हाथ उठाती हुई नजर आई थीं. जिसके बाद कहा जा रहा है कि उन्होंने बिग बॉस के अहम रूल्स का उल्लंघन कर दिया है.
गुल्लू और नकुल धुल की हाथापाई में माही ने उठाया हाथ
बिग बॉस के पिछले एपिसोड में घर के अंदर झगड़े की शुरुआत काजी तौकीर और स्काउट ओपी की वजह से हुई. दरअसल, दोनों फन कर रहे थे, इस दौरान काजी ने स्काउट के कान में थूक दिया. इसके बाद काजी घर के सदस्यों को बताते हुए नजर आए कि उन्होंने स्काउट के कान में थूक दिया. काजी की इस बात को नकुल धुल ने स्काउट को बताई. जिसके बाद घर में थोड़ी गहमा-गहमी देखने को मिली. हालांकि, मामला तब बिगड़ गया जब नकुल ने गुल्लू पर हाथ उठा दिया. जिसके बाद दोनों के बीच जमकर हाथापाई हुई. बताया जा रहा है कि पहले नकुल ने हाथ उठाया लेकिन गुल्लू ने भी नकुल के मारा था. वहीं, जहां घर के सारे कंटेस्टेंट्स लड़ाई छुड़वाते हुए दिखे तो वहीं, माही कथित तौर पर नकुल पर हाथ उठाती हुई नजर आईं.
माही ने किया बिग बॉस के रूल्स का उल्लंघन
माही विज गुल्लू को अपना दोस्त मानती हैं, जब गुल्लू और नकुल के बीच लड़ाई हुई तो माही का गुस्सा सातवें आसमान चढ़ गया और उन्होंने भी झगड़े के बीच नकुल पर हाथ उठा दिया. सोशल मीडिया पर इससे जुड़े वीडियो सामने आ रहे हैं. जिसमें माही नकुल की पीठ पर थप्पड़ मारती हैं, हालांकि, अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है कि उन्होंने हाथ उठाया है या नहीं. बहरहाल माही विज के इस एक्शन को लेकर सोशल मीडिया पर तरह की बातें हो रही हैं. कहा जा रहा है कि अगर एक कंटेस्टेंट हाथ उठाता है तो उसे बाहर किया जाता है, तो इसी के तहत माही को भी शो से बाहर होना चाहिए.
two boys having the fight of their lives meanwhile mahi ???????????? pic.twitter.com/6JjGQaCb5T
— ´ (@amayqore) October 13, 2026
होगा एक्शन?
सोशल मीडिया पर माही के नकुल को मारने के वीडियो तो सामने आ रहे हैं लेकिन उसे देखकर ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि उनके खिलाफ भी एक्शन होगा. दरअसल, कल की लड़ाई में सबसे बड़ी गलती नकुल ने की थी. उन्होंने ही सबसे पहले गुल्लू को धक्का दिया. जिसके बाद दोनों के बीच भयंकर झगड़ा हुआ. माही विज लगातार नकुल पर चिल्लाती हुई नजर आईं. उन्होंने कहा कि ये क्या घर में लोगों को मारने के लिए आया है. वहीं, कई घर वाले कहते हुए नजर आए थे, नकुल को शो से बाहर किया जाना चाहिए. वहीं, माही के मुद्दे को लेकर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है कि ऐसे में आज के एपिसोड का इंतजार करना पड़ेगा.
गुल्लू और नकुल के बीच क्यों हुआ झगड़ा
दरअसल, गुल्लू और नकुल धुल के बीच झगड़ा एक तरह से काजी की वजह से होता है. काजी गुल्लू को बताते हैं कि उन्होंने स्काउट के कान में थूक दिया. ये बात नकुल सुन लेते हैं और वह स्काउट से बताते हैं. जिसके बाद स्काउट काजी से पूछते है कि क्या वह उनका इस वजह से मजाक उड़ा रहे थे. इसके बाद काजी कहते हैं कि मजाक था. वहीं. गुल्लू और नकुल भी साथ में बैठे हुए होते हैं. जिसके बाद देखते-देखते ये थूक वाला मुद्दा नकुल और गुल्लू के बीच चला जाता है और दोनों के बीच झगड़ा हो जाता है.
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पैक्ड पानी की गुणवत्ता पर एफएसडीए की सख्ती, अब बीआईएस प्रमाणन के बिना नहीं मिलेगा यूपी में लाइसेंस
लखनऊ, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। बोतल बंद पानी की शुद्धता को लेकर उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश में नई इकाइयों को भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) का प्रमाणन मिलने के बाद ही राज्य में खाद्य सुरक्षा लाइसेंस या पंजीकरण जारी किया जाएगा। पहले से संचालित सभी इकाइयों को 31 मार्च 2027 तक प्रमाणन प्राप्त करना होगा। तय समयसीमा तक प्रमाणन नहीं लेने वाली इकाइयों का लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित रहेगा और उत्पादन बंद रहेगा। जनस्वास्थ्य को सर्वोपरि रखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने यह आदेश जारी किया है।
यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश की सीमा में तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। प्रदेश में संचालित केंद्रीय लाइसेंस प्राप्त विनिर्माण इकाइयां भी इसके दायरे में होंगी। आदेश का सीधा संदेश है कि पैक्ड पानी के उत्पादन और कारोबार में गुणवत्ता मानकों का अनुपालन अब केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि लाइसेंस और उत्पादन जारी रखने की अनिवार्य शर्त होगा। दरअसल, एफएसडीए ने पिछले एक वर्ष के दौरान प्रदेश की 811 पैक्ड पेयजल और पैक्ड मिनरल वॉटर विनिर्माण इकाइयों का निरीक्षण कर प्रवर्तन कार्रवाई की। प्रदेश में पैक्ड पेयजल और पैक्ड मिनरल वॉटर की विनिर्माण इकाइयों से लिए गए 660 नमूनों में 176 स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित और 337 अधोमानक मिले। यानी जांचे गए नमूनों में 513 निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।
असुरक्षित नमूनों में ई-कोलाई, कोलीफार्म बैक्टीरिया, यीस्ट और मोल्ड जैसे सूक्ष्मजीवों की मौजूदगी सामने आई। कहीं पानी के शोधन की व्यवस्था में कमी मिली तो कहीं स्वच्छता और भंडारण के मानकों का उल्लंघन पाया गया। दूसरी ओर, अधोमानक नमूनों में कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे खनिजों की मात्रा सामान्य स्तर से कम पाई गई। इस दौरान सामने आई खामियां केवल कागजी अनुपालन तक सीमित नहीं थीं, बल्कि पानी के शोधन, उत्पादन प्रक्रिया और स्वच्छता व्यवस्था से भी जुड़ी थीं। कई इकाइयों में पानी के स्रोत की जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं मिली। आवश्यक फिल्टर, अल्ट्रावायलेट (यूवी) ट्रीटमेंट प्लांट और ओजोनीकरण जैसी शोधन सुविधाओं का अभाव भी सामने आया।
कुछ इकाइयों में उत्पादन प्रक्रिया के दौरान हाथों से काम किया जा रहा था, जिससे स्वच्छता और संदूषण संबंधी जोखिम पैदा हो सकते थे। इन गंभीर खामियों के मद्देनजर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने पैक्ड पानी की विनिर्माण इकाइयों पर नियामकीय शिकंजा कस दिया है। गुणवत्ता जांच के साथ भौतिक निरीक्षण में मिली कमियों के आधार पर एफएसडीए ने 152 इकाइयों के लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित कर दिए। आवश्यक सुधार होने तक इन इकाइयों का उत्पादन बंद करा दिया गया। असुरक्षित नमूने मिलने से संबंधित इकाइयों में भी नियमानुसार उत्पादन बंद कराने की कार्रवाई की गई। इसके अतिरिक्त केंद्रीय लाइसेंस प्राप्त 55 इकाइयों के लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति की गई है। इसी क्रम में विभाग का नया आदेश कारोबारियों के लिए अनुपालन की स्पष्ट समयसीमा तय करता है।
नई इकाइयों के लिए बीआईएस प्रमाणन लाइसेंस प्राप्त करने की अनिवार्यता होगी, जबकि मौजूदा इकाइयों को निर्धारित अवधि में प्रमाणन लेकर अपनी पात्रता सुनिश्चित करनी होगी। समयसीमा बीतने के बाद प्रमाणन के अभाव में लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित रहने और उत्पादन बंद होने का प्रावधान लागू होगा। एफएसडीए के आदेश में पैक्ड पानी के कारोबार से जुड़ी नियामकीय पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया गया है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विक्रय प्रतिषेध एवं निर्बंधन) विनियम, 2011 के तहत पैक्ड पेयजल और पैक्ड मिनरल वॉटर की बिक्री के लिए आईएसआई प्रमाणन आवश्यक था।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने 18 अक्टूबर 2024 से यह अनिवार्यता समाप्त कर दी थी। इसके बाद इन उत्पादों को उच्च जोखिम वाले खाद्य उत्पादों की श्रेणी में रखते हुए विनिर्माण इकाइयों के लाइसेंस के लिए बीआईएस प्रमाणन की शर्त भी हटा दी गई थी।विभाग के अनुसार, इस बदलाव के बाद प्रदेश में पैक्ड पेयजल और पैक्ड मिनरल वॉटर की विनिर्माण इकाइयों की संख्या बढ़ी और वर्तमान में इनकी कुल संख्या 968 है। हालांकि, निरीक्षण और प्रयोगशाला जांच में गुणवत्ता, स्वच्छता तथा शोधन व्यवस्था से जुड़ी गंभीर कमियां सामने आईं। ऐसे में विभाग ने प्रमाणन की व्यवस्था को दोबारा अनिवार्य बनाने का फैसला किया है, ताकि उत्पादन इकाइयों की गुणवत्ता संबंधी जवाबदेही को मजबूत किया जा सके।
आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन डॉ रोशन जैकब के अनुसार, पैक्ड पेयजल का कारोबार उपभोक्ता के उस भरोसे पर टिका है, जिसके तहत वह पानी की शुद्धता और सुरक्षा सुनिश्चित मानकर कीमत चुकाता है। जब प्रयोगशाला जांच में पानी के नमूनों में हानिकारक सूक्ष्मजीव मिलते हैं या शोधन प्रक्रिया में खामियां सामने आती हैं, तो मामला केवल कारोबारी नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सीधे जनस्वास्थ्य से जुड़ जाता है।
इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए एफएसडीए ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत यह निर्णय लिया है। आदेश के जरिए नई इकाइयों के लाइसेंस, मौजूदा इकाइयों के संचालन और केंद्रीय लाइसेंस प्राप्त विनिर्माताओं के लिए प्रमाणन संबंधी व्यवस्था स्पष्ट कर दी गई है। अब प्रदेश की सभी संबंधित इकाइयों को निर्धारित समयसीमा के भीतर बीआईएस प्रमाणन हासिल करना होगा।
आदेश के तीन प्रमुख प्रावधान- नई इकाइयों के लिए: पैक्ड पेयजल और पैक्ड मिनरल वॉटर की नई निर्माण इकाइयों को बीआईएस प्रमाणन मिलने के बाद ही लाइसेंस या पंजीकरण जारी किया जाएगा। पहले से संचालित इकाइयों के लिए:सभी मौजूदा इकाइयों को 31 मार्च 2027 तक बीआईएस प्रमाणन प्राप्त करना होगा। ऐसा न करने पर प्रमाणन मिलने तक उनका लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित रहेगा और उत्पादन बंद रहेगा। केंद्रीय लाइसेंस वाली इकाइयों के लिए: उत्तर प्रदेश में संचालित केंद्रीय अनुज्ञप्ति प्राप्त निर्माण इकाइयों को भी निर्धारित समयसीमा तक बीआईएस प्रमाणन लेना होगा।
--आईएएनएस
विकेटी/डीकेपी
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