पानी में खेलने से मछली पकड़ने तक, खराब सड़कों से तंग ब्रिटेन की महिला ने यूं सिखाया सबक, वीडियो बनाकर उड़ाया मजाक
सड़क पर गड्ढे कई बार बड़ी परेशानी का कारण बन जाते हैं. दुर्घटनाओं की संभावना भी अधिक हो जाती है. शिकायतें मिलने के बाद भी स्थानीय काउंसिल इस पर ध्यान नहीं देते तो आम लोगों की दिक्कतें और बढ़ जाती हैं. ऐसे ही एक महिला को जब सड़क पर बने गड्ढों से परेशानी हुई तो उसने स्थानीय काउंसिल को सबक सिखाने के लिए ऐसा तरीका अपनाया जिसकी लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं. मामला ब्रिटेन का है, यहां एक महिला सड़क के गड्ढों से परेशान हो गई उसने कई बार स्थानीय काउंसिल को इसकी जानकारी दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.
महिला ने बनाया मजेदार वीडियो
महिला ने स्थानीय काउंसिल को सबक सिखाने के लिए मजेदार स्पूफ वीडियो बनाए.इन वीडियो में उन्होंने ‘Baywatch’ का मशहूर स्लो-मो रन दोहराया. लेकिन समुद्र किनारे नहीं, बल्कि गड्ढों से भरी सड़क पर. वीडियो में वह लाल स्विमसूट जैसी ड्रेस में सड़क पर दौड़ती दिखती हैं. चारों ओर पानी से भरे गड्ढे नजर आते हैं. कहीं कच्ची मरम्मत की गई है, तो कहीं बजरी बिखरी पड़ी है.
गड्ढों में मछली पकड़ते दिखीं महिला
सिर्फ एक वीडियो ही नहीं, उन्होंने कई और क्लिप्स भी शेयर किए. एक वीडियो में वह गड्ढे में जमा पानी के पास बैठकर मछली पकड़ने का अभिनय करती दिखीं.उन्होंने मजाक में कहा कि यह जगह अब “स्थानीय फिशिंग स्पॉट” बन चुकी है. दूसरे वीडियो में सड़क पर भरे पानी को स्विमिंग पूल जैसा दिखाया गया. वह सीढ़ी लगाकर ऐसे खड़ी होती है जैसे किसी पूल की लाइफगार्ड हो. मानो कोई तैराक मुसीबत में हो और उन्हें बचाना हो. उनका अंदाज भले ही हास्य से भरा हो, लेकिन संदेश गंभीर है.
सड़क सुरक्षा पर उठाए सवाल
महिला का कहना है कि खराब सड़कें सिर्फ असुविधा नहीं हैं. यह सुरक्षा का बड़ा मुद्दा है. कार चालकों के लिए यह नुकसानदेह है. मोटरसाइकिल सवारों के लिए और भी खतरनाक. बारिश के बाद हालात और खराब हो जाते हैं. गहरे गड्ढे पानी में छिप जाते हैं. इससे हादसे का खतरा बढ़ जाता है. उनका दावा है कि कई बार मरम्मत कामचलाऊ होती है. कुछ हफ्तों बाद वही जगह फिर टूट जाती है.
सोशल मीडिया पर लोगों ने किया महिला का किया सपोर्ट
महिला के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. लाखों लोग उन्हें देख चुके हैं. कई लोगों ने कमेंट कर उनका सपोर्ट किया. लोगों का कहना है कि उन्होंने सही मुद्दा उठाया है. कुछ ने अपने शहरों की खराब सड़कों की तस्वीरें भी साझा कीं. यह अभियान अब सिर्फ एक इलाके तक सीमित नहीं रहा. यह सड़क सुरक्षा पर बड़ी बहस बन चुका है.
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'न्यू इंडिया में दुख पर भी कीमत का टैग है', टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी का तंज
नई दिल्ली, 12 फरवरी (आईएएनएस)। लोकसभा में जीएसटी को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बीच तीखी बहस देखने को मिली। बहस के बाद अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा पोस्ट करके वित्त मंत्री के आरोपों का जवाब दिया और कहा कि उन्होंने तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत सामने रखी है।
सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपने पोस्ट में लिखा कि वह वित्त मंत्री का धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने उनका भाषण ध्यान से सुना, लेकिन काश वह बंगाल के लोगों की भी उतनी ही गंभीरता से सुनतीं, जब वे मनरेगा, पीएम आवास योजना, पीएम ग्राम सड़क योजना और जल जीवन मिशन के बकाया फंड की मांग करते हैं।
उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने उन पर तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने का आरोप लगाया है, इसलिए वह अब तथ्यों को सीधा कर रहे हैं।
उन्होंने पोस्ट में कहा कि यह सही है कि ताजे दूध पर कोई जीएसटी नहीं है, लेकिन जो मां ताजा दूध खरीदने में सक्षम नहीं है और अपने बच्चे के लिए पाउडर वाला दूध लेती है, उस पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगता है। यानी जिस चीज को गरीब नहीं खरीद सकता, उस पर टैक्स शून्य है, लेकिन जो उसे मजबूरी में खरीदनी पड़ती है, उस पर टैक्स लगता है।
शिक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भले ही पाठ्यपुस्तकों पर जीएसटी नहीं है, लेकिन गणित की कॉपी, ग्राफ बुक, लैब नोटबुक और ड्रॉइंग के लिए इस्तेमाल होने वाले क्रेयॉन पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगता है।
उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इलाज और परामर्श भले ही जीएसटी मुक्त हों, लेकिन ऑक्सीजन सिलेंडर पर 12 प्रतिशत, इंसुलिन पर 5 प्रतिशत और एनेस्थीसिया पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगता है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम संस्कार सेवाएं भले ही टैक्स फ्री हों, लेकिन अगरबत्ती और धूपबत्ती पर 5 प्रतिशत जीएसटी है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए लिखा, न्यू इंडिया में दुख पर भी कीमत का टैग है।
अभिषेक बनर्जी ने अपने पोस्ट में कुछ वस्तुओं और उन पर लगने वाले जीएसटी की दरों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, बेबी फूड पर 5 प्रतिशत, बेबी नैपकिन पर 18 प्रतिशत, पेंसिल-क्रेयॉन पर 12 प्रतिशत, कॉपी-ग्राफ बुक पर 12 प्रतिशत, ब्रॉडबैंड सेवा पर 18 प्रतिशत और दवाओं व डायग्नोस्टिक किट पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगता है। उन्होंने पेट्रोल और डीजल पर क्रमशः 19.9 रुपए और 15.8 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी का भी उल्लेख किया।
इससे पहले लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अभिषेक बनर्जी पर तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से दूध पर कोई जीएसटी नहीं है। शिक्षा सेवाएं, प्री-स्कूल से लेकर हायर सेकेंडरी तक, जीएसटी से मुक्त हैं। मान्यता प्राप्त डिग्री देने वाली शिक्षा पर भी जीएसटी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि किताबों, कॉपियों, पेंसिल, शार्पनर और मैप आदि पर शून्य जीएसटी है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि इलाज, जांच और देखभाल जैसी सेवाएं 1 जुलाई 2017 से ही जीएसटी मुक्त हैं। उन्होंने बताया कि सितंबर 2025 में किए गए नेक्स्ट जेन जीएसटी रिफॉर्म के तहत व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा योजनाओं पर जीएसटी को शून्य कर दिया गया है। अंतिम संस्कार सेवाओं पर भी कभी जीएसटी नहीं लगाया गया।
निर्मला सीतारमण ने तंज कसते हुए कहा कि शायद पश्चिम बंगाल में चल रहे सिंडिकेट राज में मृत्यु पर भी कट मनी वसूली जाती होगी।
--आईएएनएस
डीबीपी/एबीएम
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