OpenAI ऑफिस में जासूसी की कोशिश करने वाला गिरफ्तार:TV के पीछे रिकॉर्डर लगाया था, AI की मदद से सऊदी नागरिक की पहचान
अमेरिकी कंपनी OpenAI के सैन फ्रांसिस्को ऑफिस में जासूसी की कोशिश करने वाले कर्मचारी को FBI ने गिरफ्तार कर लिया है। कर्मचारी ने कॉन्फ्रेंस रूम में टीवी के पीछे रिकॉर्डिंग डिवाइस छिपा दिया था। डिवाइस मिलने के बाद OpenAI ने AI मॉडल के जरिए आरोपी को पकड़ा। इसके बाद उसे 9 अक्टूबर को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी की पहचान सऊदी नागरिक अब्दुलरहमान अलफोजान के रूप में हुई है। टॉयलेट पेपर में छिपाकर लगाया था रिकॉर्डर कंपनी के मुताबिक अलफोजान ने 28 सितंबर को USB पोर्ट में रिकॉर्डर लगाया था। इसे छिपाने के लिए टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल किया गया था। 2 दिन बाद कर्मचारियों को सुरक्षा जांच के दौरान यह डिवाइस मिला था। डिवाइस में माइक्रोफोन, कैमरा सेंसर और डेटा स्टोर करने के लिए माइक्रो SD कार्ड था। डिवाइस में रिकॉर्डिंग इन्क्रिप्टेड थी, इसलिए उसे सुना नहीं जा सका है। AI चैटबॉट से डिवाइस बनाने में मदद ली FBI अधिकारियों का आरोप है कि अलफोजान ने डिवाइस लगाने की तैयारी पहले से कर रखी थी। उसने कंपनी के मीटिंग रूम, अधिकारियों के आने-जाने के समय और दूसरी कंपनियों के साथ होने वाली बैठकों की जानकारी जुटाई थी। उसने अपनी पत्नी के AI चैटबॉट अकाउंट पर कई सवाल पूछे थे। इनमें डिवाइस कैसे बनाना है, उसे कहां और कैसे लगाना है, उससे आवाज रिकॉर्ड हो रही है या नहीं, उसे कैसे छिपाना है और दूर से उसका इस्तेमाल कैसे करना है, जैसे सवाल शामिल थे। जिस मीटिंग रूम में यह डिवाइस लगाया गया था, वहां OpenAI के अधिकारी कंपनी से जुड़े अहम मामलों पर चर्चा करते थे। CCTV फुटेज में अलफोजान को कई दिनों तक कॉन्फ्रेंस रूम के आसपास देखा गया। जबकि उसे वहां जाने या उन बैठकों में शामिल होने की इजाजत नहीं थी। दोष साबित होने पर 5 साल तक की जेल 35 साल के अलफोजान अमेरिका में स्थायी रूप से रहने की अनुमति रखता है। वह जुलाई 2025 में OpenAI से जुड़ा था। 9 अक्टूबर को गिरफ्तारी के बाद मंगलवार को अलफोजान को पहली बार फेडरव कोर्ट में पेश किया गया। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, दोष साबित होने पर उन्हें 5 साल तक की जेल, 2.5 लाख डॉलर (करीब 2.3 करोड़ रुपए) तक का जुर्माना और तीन साल तक निगरानी में रहने की सजा हो सकती है। OpenAI ने नौकरी से निकाला, डेटा चोरी के सबूत नहीं OpenAI ने कहा कि फिलहाल उसे ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे पता चले कि अलफोजान ने कंपनी के AI मॉडल के मूल डेटा, सोर्स कोड या ग्राहकों की जानकारी तक गलत तरीके से पहुंच बनाई या उसे बाहर भेजा। कंपनी ने घटना के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया। अलफोजान वेंचर कैपिटल फर्म राएद वेंचर्स में भी वेंचर पार्टनर हैं। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, OpenAI में वे इंजीनियरिंग लीड था और AI एजेंट्स और डेटा प्लेटफॉर्म पर काम करता था। इससे पहले अलफोजान मेटा, माईक्रोसॉफ्ट और जर्मनी की एक सॉफ्टवेयर कंपनी SAP में भी काम कर चुका है। उसने MIT से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… पूर्व बांग्लादेशी एडवाइजर यूनुस को लोगों ने आतंकवादी कहा: न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर घेरा बांग्लादेश के पूर्व चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस को अमेरिका के न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर विरोध का सामना करना पड़ा। एयरपोर्ट पर मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और ‘आतंकवादी’ कहा। पूरी खबर यहां पढ़ें…
जबलपुर के अस्पताल में एक्सपायरी दवाओं से इलाज का मामला, 23 तरह की दवाएं मिलीं
मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के बेलखाड़ू इलाके से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिला प्रशासन द्वारा एक युवक की संदिग्ध मौत के बाद सील किए गए ‘अश्वनी अस्पताल’ की जब ड्रग इंस्पेक्टर पुलिस और बीएमओ की मौजूदगी में दोबारा जांच की गई, तो वहां भारी मात्रा में एक्सपायरी दवाएं और गंभीर बीमारियों में काम आने वाली सामग्रियां बरामद हुईं।
जांच के दौरान यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि बिना किसी डॉक्टर की डिग्री के लंबे समय से बेलखाड़ू में यह अस्पताल अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था। मंगलवार शाम को जब प्रशासनिक टीम ने अस्पताल की तलाशी ली, तो वहां से लगभग 12 हजार रुपये की अवैध और एक्सपायरी दवाएं जब्त की गईं।
बंगाली डॉक्टरों का डिप्लोमा लेकर एलोपैथिक इलाज कर रही थी संचालिका
शुरुआती जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री के अस्पताल चला रही सरिता साहू मरीजों का इलाज एलोपैथिक अंग्रेजी दवाओं से करती थी। पूछताछ और दस्तावेजों की पड़ताल में पता चला कि उसने केवल तथाकथित बंगाली डॉक्टरों वाला एक छोटा डिप्लोमा लिया था। बिना पक्के ज्ञान और डिग्री के वह सीधे तौर पर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही थी, जिसके गंभीर परिणाम एक युवक की मौत के रूप में सामने आए।
पेट दर्द के बाद अस्पताल पहुंचे युवक की ड्रिप चढ़ाने से हुई थी मौत
यह पूरा मामला तब खुला जब बेलखाड़ू के भट्टा मोहल्ला निवासी 19 वर्षीय शेखर चौधरी को 2 अक्टूबर को अचानक पेट में तेज दर्द उठा। परिजन उसे फौरन इलाज के लिए खैरी गांव स्थित इसी अश्वनी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। वहां सुबह तक उसका इलाज किया गया और फिर उसे घर भेज दिया गया, लेकिन कुछ ही देर बाद उसकी हालत फिर बिगड़ गई और उसके हाथ-पैरों में तेज जलन होने लगी।
एक्सपायरी ग्लूकोज और इंजेक्शन मिलने से गहराया लापरवाही का शक
परिजनों का आरोप है कि जब शेखर को दोबारा अस्पताल लाया गया, तो सरिता साहू के कहने पर मददगार सतीश साहू ने उसके हाथ और कमर में इंजेक्शन लगाए। अगले दिन फिर से उसे इंजेक्शन देने के साथ ग्लूकोज की ड्रिप चढ़ाई गई, जिसके महज आधे घंटे के भीतर उसकी मौत हो गई। मौके से मिली ग्लूकोज की बोतल पर नवंबर 2025 की एक्सपायरी डेट दर्ज पाई गई है।
ड्रग इंस्पेक्टर और पुलिस की टीम ने की एक घंटे तक सघन जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए ड्रग इंस्पेक्टर प्रवीण पटेल, बीएमओ डॉक्टर श्रीपति मिश्रा और बेलखाड़ू चौकी प्रभारी अमित मिश्रा ने दल-बल के साथ अस्पताल पहुंचकर करीब एक घंटे तक ताबड़तोड़ जांच की। ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि अस्पताल के अंदर से 23 प्रकार की अंग्रेजी दवाएं मिली हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई दवाएं और ग्लूकोज की बोतलें सीधे तौर पर छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को दी जाती थीं।
जांच के दायरे में अस्पताल संचालिका, पुलिस तलाश में जुटी
प्रशासन की इस संयुक्त कार्रवाई के दौरान बार-बार बुलाए जाने के बावजूद अस्पताल की अवैध संचालिका सरिता साहू मौके पर नहीं पहुंची। पुलिस ने अस्पताल के अंदर से आधी भरी ग्लूकोज की बोतल, सिरिंज, निडिल, इंजेक्शन की खाली शीशियां और दवाइयों के तमाम रैपर जब्त कर लिए हैं। फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले की परतें टटोलने में जुटा है और फरार संचालिका की तलाश तेज कर दी गई है।
वंदना झा की रिपोर्ट
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