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Shardiya Navratri 2026: आज चौथे नवरात्रि पर करें माता कूष्मांडा का पूजन, नोट करें शुभ मुहूर्त
Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि 2026 का आज चौथा दिन है. आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थि तिथि पर दुर्गा मां के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाती है. कूष्मांडा माता को अपनी दिव्य ऊर्जा से सृष्टि को प्रकाश देने वाली देवी माना जाता हैं. भक्त उनकी आराधना करके सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना करते हैं. आइए जानते हैं कूष्मांडा माता की पूजन विधि, मंत्र और प्रिय भोग के बारे में विस्तार से.
कूष्मांडा माता का स्वरूप और महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता है. उनकी आठ भुजाओं में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत, कलश, चक्र, गदा और जप माला विराजमान हैं.
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कूष्मांडा माता की पूजा विधि
इस दिन भक्तों को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके मां कूष्मांडा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. इसके पश्चात कलश पूजन करें और मां का ध्यान करें. देवी मां को जल,अक्षत, रोली, पुष्प और माला चढ़ाएं. माता को लाल फूल, लाल वस्त्र और लाल चूड़ियां परंपरा अनुसार अर्पित करें. इसके बाद माता को धूप-दीप दिखाएं और माता के मंत्रों का जाप करें. देवी मां को फल, मिठाई और मालपूए का भोग लगाएं. पूजा के दौरान अपने और परिवार के अच्छे स्वास्थ्य, सुख-शांति और समृद्धि की कामना करें. अंत में कूष्मांडा माता की आरती करें और प्रसाद बांटें.
मां कूष्मांडा की पूजा से मिलने वाले लाभ
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा करने से भक्तों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. मां कूष्मांडा को सुख, समृद्धि और आरोग्य प्रदान करने वाली देवी माना जाता है. मान्यता है कि सच्चे मन से उनकी आराधना करने से जीवन की परेशानियों का सामना करने की शक्ति मिलती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.
- मां कूष्मांडा की पूजा विशेष रूप से अच्छे स्वास्थ्य, धन-धान्य और खुशहाल जीवन की कामना के लिए की जाती है. भक्त इस दिन देवी के मंत्रों का जाप करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं. धार्मिक विश्वास है कि माता की कृपा से नकारात्मक विचार दूर होते हैं और मन में आत्मविश्वास तथा सकारात्मकता बढ़ती है. नवरात्रि के इस पावन अवसर पर भक्तों को सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए और जरूरतमंद लोगों की सहायता करनी चाहिए. इससे पूजा के साथ सेवा और सद्भाव की भावना को भी बढ़ावा मिलता है.
मां कूष्मांडा के मंत्र
कूष्मांडा माता की आराधना के दौरान सरल मंत्र का जाप किया जाता है. इस मंत्र का जाप करें- ऊं कूष्माण्डाये नम:. उपासना मंत्र- ऐं ह्री देव्यै नम:.
माता कूष्मांडा की स्तुति के लिए पढ़ें यह श्लोक-
सुरासंपूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥.
कूष्मांडा माता को किन चीजों का भोग लगाएं?
द्रिक पंचांग के अनुसार, मां कूष्मांडा को कुम्हड़ा यानी पेठा अर्पित करना शुभ माना जाता है. इसके अलावा, केसरिया हलवा, पीले रंग की मिठाइयों, मालपुआ, बताशे, फल और नारियल का भोग लगाएं. कुछ परंपराओं के अनुसार, दही और विभिन्न प्रकार के हलवे का भी प्रसाद चढ़ाया जाता है. व्रत रखने वाले भक्त सिंघाड़े के आटे का हलवा बनाकर भी भोग लगा सकते हैं और उसे खा सकते हैं.
कूष्मांडा माता की पूजा करने के लिए शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:51 मिनट से सुबह 05:39 मिनट तक
- अमृत काल- शाम 04:37 बजे से शाम 06:23 मिनट तक
- आज के दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं है.
आज का चौघड़िया मुहूर्त
दिन का चौघड़िया
- सुबह 06:09 मिनट से लेकर सुबह 07:36 मिनट तक.
- सुबह 07:36 मिनट से लेकर सुबह 09:04 मिनट तक.
- सुबह 10 बजकर 32 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजे तक.
- शाम 04:23 मिनट से लेकर शाम 05:50 मिनट तक.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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