जरूरत की खबर- दशहरे के मेले में लाउडस्पीकर से सावधान:तेज आवाज से हार्ट-ब्रेन को नुकसान, हियरिंग लॉस का रिस्क, 7 सावधानियां जरूरी
देश में नवरात्रि का पर्व उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। जगह-जगह पंडाल सजे हैं, गरबा हो रहे हैं और माता के भजनों से माहौल भक्तिमय है। कई जगह मेलों की भी रौनक है। इन आयोजनों में एक चीज कॉमन है, वह है लाउडस्पीकर, जिनकी आवाज उत्सव के माहौल को और जीवंत बना देती है। हालांकि, लाउडस्पीकर की आवाज जरूरत से ज्यादा तेज हो या लंबे समय तक उसके संपर्क में रहें तो सेहत पर बुरा असर पड़ता है। इससे सुनने की क्षमता प्रभावित होने के साथ ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन में भी बदलाव होते हैं। तेज शोर से हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ता है। कई मामलों में मौत भी हो जाती है। साल 2025 में ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक मेटा-एनालिसिस के मुताबिक, लाउडस्पीकर की तेज आवाज से हाई BP, हार्ट डिजीज और स्ट्रोक का रिस्क बढ़ जाता है। ऐसे में लाउडस्पीकर से जुड़ी सावधानियों को समझना जरूरी है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में लाउडस्पीकर की तेज आवाज के संभावित हेल्थ रिस्क को समझेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट– डॉ. अरविंद अग्रवाल, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली स्टोरी में आगे बढ़ें, उससे पहले पिछले कुछ सालों में लाउडस्पीकर की तेज आवाज से हुई मौतों के मामलों पर एक नजर डाल लेते हैं… सवाल- लाउडस्पीकर की तेज आवाज हमारे ब्रेन और बॉडी पर क्या असर डालती है? जवाब- इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि आवाज कितनी तेज है और हम कितनी देर तक उसके संपर्क में रहते हैं। सामान्य बातचीत की आवाज करीब 60 डेसिबल (dB) होती है, जबकि तेज लाउडस्पीकर की आवाज 85 से 110 डेसिबल या इससे ज्यादा होती है। डेसिबल आवाज की तीव्रता मापने की इकाई है। लंबे समय तक तेज शोर के संपर्क में रहने से कानों के साथ हमारे कई अंग प्रभावित होते हैं। इसे पॉइंटर्स से समझिए- सभी रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- तेज आवाज का हमारे हार्ट पर क्या असर होता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- तेज आवाज का कानों पर क्या असर होता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स समझिए- सवाल- लाउडस्पीकर की तेज आवाज किन लोगों के लिए ज्यादा रिस्की है? जवाब- कुछ लोगों में तेज शोर का असर ज्यादा गंभीर हो सकता है। किन्हें रिस्क ज्यादा है, ग्राफिक में देखिए- सवाल- कितने डेसीबल (dB) की आवाज को तेज या खतरनाक माना जाता है? जवाब- इसका खतरा सिर्फ डेसीबल पर नहीं, बल्कि कितनी देर और कितनी बार उसके संपर्क में रहते हैं, इस पर निर्भर करता है। आमतौर पर 85 dB या उससे ज्यादा आवाज में लंबे समय तक रहने से सुनने की क्षमता प्रभावित होती है। 100–120 dB की तेज आवाज में थोड़ी देर रहने से भी सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचता है। इसे ग्राफिक से समझिए- सवाल- लाउडस्पीकर से होने वाले शोर से कैसे बचें? जवाब- तेज आवाज से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि साउंड से दूरी और एक्सपोजर टाइम दोनों कम रखें। सभी सावधानियां ग्राफिक में देखिए- सवाल- भारत में लाउडस्पीकर साउंड को लेकर क्या नियम हैं? जवाब- भारत में लाउडस्पीकर और पब्लिक एड्रेस सिस्टम के इस्तेमाल के लिए नॉइज पॉल्यूशन (रेगुलेशन एंड कंट्रोल) रूल्स, 2000 लागू हैं। इनके तहत- सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने अलग-अलग क्षेत्रों के लिए शोर की अधिकतम सीमा तय की है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- तय सीमा से ज्यादा शोर होने पर कहां और कैसे शिकायत करें? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- नियम तोड़ने पर क्या कार्रवाई हो सकती है? जवाब- तय सीमा से ज्यादा शोर करने या बिना अनुमति लाउडस्पीकर चलाने पर पुलिस/प्रशासन कार्रवाई कर सकता है। स्थिति के अनुसार- ****************** ग्राफिक्स- महेंद्र वर्मा ………………….. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- व्रत का ‘पसंदीदा फलाहार’ साबूदाना कितना हेल्दी: डॉक्टर से जानें न्यूट्रिशन, फायदे-नुकसान और खाने का हेल्दी तरीका आज से नवरात्रि शुरू हो रही है। कई लोग 9 दिनों का व्रत रखते हैं। इस दौरान रसोई में एक चीज की एंट्री लगभग तय होती है, वह है साबूदाना। व्रत रखने वाले लोग कभी खिचड़ी, कभी वड़ा तो कभी खीर के रूप में इसे बड़े चाव से खाते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
रिलेशनशिप एडवाइज- पति पर लाखों का कर्ज है:ये बात उन्होंने मुझसे छिपाकर रखी, मेरा भरोसा टूटा है, क्या ये धोखा है, अब मैं क्या करूं?
सवाल- मेरी शादी को तीन साल हो चुके हैं। मैं और मेरे पति दोनों नौकरी करते हैं। हमारी कमाई अच्छी है और मैं अब तक यही समझती थी कि हम दोनों मिलकर भविष्य के लिए अच्छी बचत कर रहे हैं। पिछले दिनों घर के कुछ जरूरी कामों के लिए पैसे निकालने की बात हुई, तो पता चला कि मेरे पति पर लाखों रुपए का लोन है। उन्होंने यह बात मुझे कभी नहीं बताई। पूछने पर बोले कि वे मुझे परेशान नहीं करना चाहते थे और धीरे-धीरे कर्ज चुका देते। लेकिन मुझे इस बात से ज्यादा तकलीफ है कि उन्होंने इतना बड़ा आर्थिक फैसला मुझसे छिपाया। अब मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं उन पर भरोसा कैसे करूं? क्या ये धोखा है? मैं क्या महसूस करूं? क्या करूं? एक्सपर्ट- डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा पति के लाखों रुपए के कर्ज की जानकारी मिलने पर आपका भरोसा हिलना स्वाभाविक है। ऐसे में दुख, गुस्सा और धोखा महसूस हो सकता है। मन में यह सवाल भी उठना लाजिमी है कि जब पति ने इतनी बड़ी बात छिपाई, तो क्या वे आगे भी कुछ छिपा सकते हैं? अपनी भावनाओं को गलत न समझें। आपको दुखी होने, नाराजगी जताने और पति से इस फैसले की वजह पूछने का पूरा हक है। क्या इसे धोखा माना जाए? रिश्ते में बातें छिपाना पार्टनर का भरोसा तोड़ सकता है। अगर पति ने लाखों रुपए का कर्ज लिया और ये बात आपसे जानबूझकर छिपाकर रखी तो जाहिर तौर पर यह आपका भरोसा तोड़ना ही है। हालांकि, इसे किस हद तक धोखा कहा जाए, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कर्ज लेने की वजह क्या थी और उसे छिपाने की मंशा क्या थी। रिश्ते में दोनों को अपनी निजता और स्वतंत्रता बनाए रखने का हक है। लेकिन कर्ज जैसी बात छिपाना निजता और स्वतंत्रता के दायरे में नहीं आता क्योंकि इसका असर दोनों के भविष्य पर पड़ता है। मसलन, इससे इन योजनाओं में बदलाव करना पड़ सकता है- आगे बढ़ने से पहले निजता और बात छिपाने में फर्क समझ लेते हैं- कमजोर होता भरोसा पार्टनर से कर्ज, खर्च या दूसरे जरूरी आर्थिक फैसले छिपाने को ‘फाइनेंशियल इनफिडेलिटी’ कहते हैं। थेरेपिस्ट टेरी गैस्पर्ड ने अपनी किताब ‘लेट्स टॉक अबाउट मनी: लो- कॉन्फ्लिक्ट कन्वर्सेशंस फॉर कपल्स’ में पैसों को लेकर बातचीत और रिश्तों में पैदा होने वाले तनाव पर चर्चा की है। टेरी गैस्पर्ड कहती हैं कि आर्थिक मामलों में जरूरी बातें छिपाने से पार्टनर के बीच भरोसा कमजोर होता है और रिश्ते में दूरी बढ़ सकती है। पति ने कर्ज की बात क्यों छिपाई होगी? संभव है कि पति को अपनी आर्थिक स्थिति पर शर्मिंदगी हो या वे आपके नाराज होने से डरते हों। कुछ लोग तनावपूर्ण स्थितियों का सामना करने की बजाय उनसे बचने की कोशिश करते हैं। मनोविज्ञान में इसे ‘अवॉइडेंस’ यानी समस्या से बचने वाला व्यवहार कहते हैं। इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं- रिश्ते में ओपन कम्युनिकेशन जरूरी कुछ लोग सोचते हैं कि बात छिपाने से फिलहाल परेशानी टल जाएगी और वो टल भी जाती है। लेकिन यह राहत सिर्फ थोड़े समय ही होती है। जैसे ही पार्टनर को सच का पता चलता है, उसे लगता है कि उसे धोखा दिया गया है। फिर यह अविश्वास ज्यादा बड़ी परेशानी खड़ी करता है। इसलिए बात छिपाने से समस्या खत्म नहीं होती। सबसे अच्छा और सही तरीका है, सच बोलना। चाहे वह सुनने में कितना भी कड़वा और तकलीफदेह क्यों न हो। थोड़ी देर परेशानी होती है, लेकिन लॉन्ग टर्म में भरोसा मजबूत होता है। कहीं आपको कोई गिल्ट तो नहीं? कई बार ऐसे खुलासे के बाद व्यक्ति अपने ही फैसलों पर संदेह करने लगता है। उसे लगता है कि वह अपने साथी को ठीक से समझ ही नहीं पाया। लेकिन पति कोई बात क्यों छिपा रहा है, इसमें आपका कोई रोल नहीं है। इसलिए आपको खुद को दोष नहीं देना चाहिए। आगे का फैसला क्या होगा? अभी तुरंत यह फैसला करने का दबाव न लें कि आपको उन्हें माफ करना है या रिश्ता खत्म करना है। पहले पूरी जानकारी जुटाएं। खुद को थोड़ा समय दें। भावनाओं को दबाने की बजाय उन्हें समझने की कोशिश करें। इसके लिए पहचानें कि इस स्थिति में आप क्या महसूस कर रही हैं। इसे ऐसे समझिए- पति से खुलकर करें बात जब मन थोड़ा शांत हो, तब पति से खुलकर बात करें। इस दौरान आरोप न लगाएं। आपका मकसद सच जानना और आगे का रास्ता तय करना होना चाहिए। आप उनसे कुछ सीधे सवाल पूछ सकती हैं- बातचीत में यह भी साफ करें कि आपको कर्ज होने से ज्यादा उसे छिपाए जाने से चोट पहुंची है। कैसे करें फिर से भरोसा? सिर्फ माफी मांग लेने से भरोसा वापस नहीं आता। इसके लिए पति के व्यवहार में लगातार ईमानदारी और जिम्मेदारी दिखनी चाहिए। ध्यान दें कि पति आपकी परेशानी को समझते हैं या उसे छोटा बताकर टाल देते हैं, जैसेकि– अगर पति इन बातों पर अमल करते हैं, तो भरोसा धीरे-धीरे लौट सकता है। लेकिन अगर वे बार-बार झूठ बोलते हैं, कर्ज की जानकारी देने से इनकार करते हैं या आपको ही दोषी ठहराते हैं, तो इसे गंभीरता से लें। अंतिम बात आप भी अपनी भावनाओं को समझने और उनके व्यवहार में बदलाव देखने के लिए समय लें। जरूरत पड़े तो कपल काउंसलिंग की मदद लें। भरोसा दोबारा बन सकता है, लेकिन इसके लिए सिर्फ आपकी नहीं, बल्कि दोनों की साझी इच्छा और कोशिश जरूरी है। …………………. ग्राफिक- अजीत सिंह …………………… ये खबर भी पढ़ें…. रिलेशनशिप एडवाइज- सास-ससुर बिना बताए आ जाते हैं:हफ्तों रुकते हैं, हसबैंड कुछ नहीं कहते, हमारी प्राइवेसी नहीं बची, कैसे डील करूं सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आपकी परेशानी का मतलब यह नहीं है कि आप सास-ससुर का सम्मान नहीं करतीं। आप सिर्फ इतना चाहती हैं कि आपके समय, सुविधा और निजी जिंदगी का भी ख्याल रखा जाए। पूरी खबर पढ़ें…
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