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Gen Z युवा तनाव छिपाने के लिए ले रहे AI Chatbots का सहारा, Health Experts ने दी चेतावनी

वैश्विक स्तर मेंटल हेल्थ की समस्याएं तेजी से बढ़ती जा रही हैं। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के हिसाब से दुनियाभर में करीब हर 7 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या से परेशान हैं। जिनमें डिप्रेशन और एंग्जायटी के मामले सबसे आम हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि यह समस्याएं सिर्फ वयस्कों और कामकाजी वर्ग के लोगों तक सीमित नहीं है, लेकिन यहां कम उम्र वाले छात्रों में भी यह समस्या बढ़ती जा रही है।

वहीं भारतीय लोगों के लिए भी मानसिक विकार चिंता का कारण बने हैं। डब्ल्यूएचओ और राष्ट्रीय सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक भारत में करीब 15 करोड़ लोगों को एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्या से निदान की जरूरत है। करीब 10.6% वयस्क किसी न किसी ऐसी मेंटल हेल्थ की समस्याओं से जूझ रहे हैं। वहीं ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरी इलाकों में मेंटल हेल्थ संबंधी समस्याओं में इलाफा अधिक है। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो मेंटल हेल्थ की बढ़ती समस्या चिंता का विषय है, लेकिन ज्यादा चिंता की बात यह है कि लोगों को समय पर इसके बारे में पता न चल पाना या फिर इलाज न मिल पाना।

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युवा पीढ़ी में मेंटल हेल्थ का खतरा

हाल ही में एक सर्वे में बड़ा खुलासा हुआ है कि मेंटल हेल्थ के प्रति बढ़ती जागरुकता के बाद बड़ी संख्या में देश के जेन-जी अब भी भावनात्मक चुनौतियों से परेशान हैं।

सर्वे के मुताबिक 13 से 29 साल की उम्र वाले देश के करीब 50% युवा अपनी मुश्किल भावनाओं को खुद संभालने का प्रयास करते हैं। सिर्फ 9-10% युवा ही मदद के लिए जाते हैं।

वहीं करीब 40.9% युवाओं ने इस बात को माना कि अंदर से परेशान होने की बजाय वह ऐसा दिखाने पर मजबूर हैं कि सब ठीक है। भावनाओं पर बात करने की जगह युवा खुद को बिजी रखते हैं। जिससे कि परेशान करने वाले ख्यालों के बारे में सोचने का समय न मिले।

सिर्फ 13.6% युवाओं ने बताया कि किसी ने बिना जज किए उनकी बातों को सुना और उनका साथ दिया।

सर्वे में क्या निकला

मेंटल हेल्थ को सिर्फ डिप्रेशन या एंग्जायटी जैसी बीमारियों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि व्यक्ति अपने रिश्तों, विचारों और मुश्किल भावनाओं को कैसे संभालता है।

जब युवाओं को बार-बार काम पर ध्यान दो, मजबूत बनो जैसी बातें सुनने को मिलती हैं। तो उनके भावनात्मक दर्द और वास्तविक परेशानी को समझने की जगह पर उसको दबा दिया जाता है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक बाहर से सब ठीक दिखने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वह व्यक्ति अंदर से भी ठीक हो। मेंटल हेल्थ जैसी समस्याओं के निदान के दौरान कई बार देखने को मिलता है कि मरीज काम कर रहा है, पढ़ाई कर रहा, दोस्तों से बात हो रही लेकिन इसके बाद भी उनके दिल और दिमाग में किसी चीज की उथल-पुथल चल रही है, जो किसी से कहने का मन नहीं करता है।

युवाओं में मानसिक परेशानी और भावनात्मक तनाव को लेकर चुप्पी गंभीर चिंता का विषय है। आमतौर पर इसके लिए सामाजिक कलंक के भाव को सबसे बड़ी वजह के तौर पर देखा जाता है। मरीजों को डर रहता है कि अगर वह मदद लेने के लिए डॉक्टर के पास गए, तो लोग क्या सोचेंगे कि क्या ये पागल हो गया है।

जबकि असलियत यह है कि बीमारी को छिपाना समस्या को हर दिन के साथ ज्यादा बढ़ाता जाता है। जिसको स्ट्रेस-एंग्जायटी को समय रहते ध्यान देकर सही किया जा सकता है। लेकिन इसको लंबे समय तक छिपाए रखना, कई बार डिप्रेशन जैसी गंभीर समस्या के रूप में सामने आता है।

युवा AI से लेते हैं मदद

एक रिपोर्ट के मुताबिक मेंटल हेल्थ की समस्या होने पर युवा चोरी-छिपे एआई का सहारा लेते हैं। एआई चैटबॉट मानसिक तनाव, भावनात्मक परेशानियों और अकेलेपन में लोगों को फौरन बातचीत का ऑप्शन दे रहे हैं। क्योंकि एआई परेशान लोगों की बात सुनता है, जवाब देता है तो युवा थोड़ा अच्छा महसूस करते हैं।

हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक किसी भी सेहत संबंधी समस्या के निदान के लिए मरीज ही लाइफस्टाइल, हिस्ट्री और खानपान की आदत जैसी चीजों को समझना जरूरी है। जोकि एआई चैटबॉट नहीं करते हैं। वहीं एआई की सहायता लेना डिप्रेशन जैसे गंभीर मामलों में आत्महत्या के विचारों को बढ़ाने वाला हो सकता है।

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5 दिन बैठे-बैठे काम और वीकेंड पर भारी कसरत? कंधों को हो सकता है बड़ा नुकसान

अगर आप हफ्ते के पांच दिन सुबह 9 से शाम 5 बजे तक कुर्सी पर बैठकर लैपटॉप पर काम करते हैं और शनिवार-रविवार को फिट रहने के लिए अचानक भारी कसरत शुरू कर देते हैं, तो सावधान हो जाइए। पूरे हफ्ते शरीर की ज्यादा हलचल नहीं होती और फिर वीकेंड पर अचानक ज्यादा कसरत करने से कंधों पर दबाव बढ़ सकता है।

शुरुआत में सब सामान्य लग सकता है, लेकिन धीरे-धीरे कंधे में जकड़न, दर्द या हाथ उठाने में परेशानी होने लगती है। कई लोग इसे कसरत के बाद होने वाला सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन डॉ. नमन वहाल, वरिष्ठ सलाहकार और यूनिट प्रमुख, हड्डी रोग विभाग, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, नई दिल्ली के मुताबिक, परेशानी उस दिन शुरू नहीं होती, जिस दिन दर्द महसूस होता है। अचानक किया गया भारी वर्कआउट कंधे के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।

पूरे हफ्ते बैठना और वीकेंड पर भारी कसरत क्यों पड़ सकती है भारी?

अगर आप पूरे हफ्ते कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं और कंधों का ज्यादा इस्तेमाल नहीं होता, तो अचानक एक घंटे तक बैडमिंटन खेलना या कसरत के दौरान भारी वजन उठाना शरीर के लिए बड़ा बदलाव हो सकता है।

खासकर ऐसे खेलों में, जिनमें हाथ को बार-बार सिर के ऊपर ले जाना पड़ता है, कंधे पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है। एक्सपर्ट के मुताबिक, बैडमिंटन और टेनिस खेलते समय हाथ को बार-बार ऊपर करने वाली गतिविधि होती है। कसरत के दौरान भी ऐसी गतिविधियां की जाती हैं।

ऐसे में अगर शरीर पूरे हफ्ते इस तरह की गतिविधियों के लिए तैयार नहीं हुआ है और वीकेंड पर अचानक पूरा जोर लगा दिया जाए, तो कंधे पर दबाव बढ़ सकता है।

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पुरानी फिटनेस के भरोसे ज्यादा कसरत न करें

कई लोग पहले काफी सक्रिय रहे होते हैं और लंबे समय के ब्रेक के बाद फिर से उसी स्तर पर कसरत शुरू कर देते हैं। लेकिन कुछ साल पहले जिस स्तर की कसरत आसानी से हो जाती थी, जरूरी नहीं कि आज भी शरीर उतना ही तैयार हो।

थकान होने के बाद भी कसरत जारी रखना कंधे की परेशानी को बढ़ा सकता है। इसलिए लंबे ब्रेक के बाद धीरे-धीरे कसरत शुरू करना बेहतर है।

कसरत से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप वीकेंड पर कसरत या खेलकूद करने की तैयारी कर रहे हैं, तो कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान जरूर रखें।
- सीधे भारी वजन न उठाएं। पहले हल्की कसरत और शरीर को तैयार करने वाली गतिविधियों से शुरुआत करें।
- अगर वीकेंड पर बैडमिंटन या टेनिस खेल रहे हैं, तो केवल दौड़ने के बजाय कंधों और हाथों को भी अच्छी तरह तैयार करें।
- लंबे ब्रेक के बाद धीरे-धीरे कसरत का समय और उसकी कठिनाई बढ़ाएं।
- हफ्ते के बाकी दिनों में भी थोड़ा सक्रिय रहें, ताकि पूरा दबाव सिर्फ वीकेंड पर न पड़े।
- एक दिन पहले किए गए पुश-अप, प्लैंक या भारी छाती की कसरत को पूरा आराम न समझें। इनमें भी कंधों पर काम होता है।

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कंधे के दर्द को सामान्य थकान समझकर न टालें

डॉक्टर के मुताबिक, कसरत के बाद थोड़ी-बहुत जकड़न होना सामान्य हो सकता है, खासकर तब जब आप लंबे समय के बाद दोबारा कसरत शुरू कर रहे हों। लेकिन अगर हर बार हाथ ऊपर उठाने, बैडमिंटन या टेनिस में सर्विस करने या कोई चीज फेंकने पर दर्द हो रहा है, कंधे में कमजोरी महसूस होती है या हाथ घुमाने में परेशानी हो रही है, तो इसे बार-बार नजरअंदाज न करें।

ऐसे लक्षण दिखाई देने पर कसरत रोक दें और डॉक्टर से सलाह लें। शुरुआत में ही ध्यान देने से परेशानी बढ़ने से बच सकती है और आप ठीक होकर दोबारा अपने पसंदीदा खेल या कसरत पर लौट सकते हैं।

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