अजीत डोभाल पर राहुल गांधी के बयान से भड़के सीएम धामी, बोले- देवभूमि अपने सपूत का अपमान नहीं सहेगी
Uttarakhand News: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से की गई हालिया टिप्पणियों पर उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है. प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन बयानों पर बेहद कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे बेहद संवेदनशील और अहम मामलों पर किसी भी तरह की हल्की या गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी ठीक नहीं है. मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के लोग अपने सपूतों का अनादर किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे.
राष्ट्रीय सुरक्षा और गरिमा पर धामी का कड़ा रुख
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अजीत डोभाल ने दशकों तक देश की सुरक्षा, संप्रभुता और सामरिक हितों को मजबूत करने के लिए अद्वितीय योगदान दिया है. पूरा राष्ट्र उनके साहस, समर्पण और रणनीतिक कौशल का सम्मान करता है. धामी ने कहा कि जब बात देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा की आती है, तो नेताओं को दलगत राजनीति से ऊपर उठना चाहिए. राजनीति में बयान देते समय तथ्यों की सच्चाई और भाषा की मर्यादा का ध्यान रखना हर एक नेता का बुनियादी कर्तव्य बनता है.
उत्तराखंड कांग्रेस पर दागे सीधे सवाल
मुख्यमंत्री ने केवल राहुल गांधी पर ही निशाना नहीं साधा, बल्कि उन्होंने उत्तराखंड में कांग्रेस के स्थानीय नेताओं को भी कटघरे में खड़ा कर दिया. धामी ने सवाल उठाया कि जब राहुल गांधी बार-बार उत्तराखंड के सपूत अजीत डोभाल को अपने राजनीतिक भाषणों में निशाना बनाते हैं, तब यहां के कांग्रेस नेता बिल्कुल खामोश क्यों बैठ जाते हैं. उन्होंने पूछा कि क्या स्थानीय कांग्रेसी नेता अपने आलाकमान से यह पूछने का साहस जुटाएंगे कि वे डोभाल पर इस तरह के हमले क्यों कर रहे हैं. धामी ने यह भी कहा कि प्रदेश कांग्रेस के नेताओं को सार्वजनिक रूप से यह बताना चाहिए कि वे अजीत डोभाल के सम्मान के साथ खड़े हैं या केवल अपनी पार्टी की राजनीति साधने में लगे हैं.
लोकतंत्र में मतभेद सामान्य, पर राष्ट्रहित सर्वोपरि
अपने बयान को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है और यहां अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के बीच मतभेद होना बहुत स्वाभाविक बात है. चुनावों में या सामान्य दिनों में एक-दूसरे की नीतियों का विरोध करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन इस विरोध की सीमा तब खत्म हो जाती है जब निशाना राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र पर साधा जाने लगे. उन्होंने कहा कि सुरक्षा से जुड़े संस्थानों और रणनीतिक हस्तियों पर बोलते समय बहुत अधिक जिम्मेदारी और गंभीरता दिखानी चाहिए. अनर्गल बयानों से देश की सामरिक छवि पर असर पड़ता है, जिसे किसी भी रूप में सही नहीं ठहराया जा सकता.
देवभूमि की सैन्य परंपरा और सपूतों का योगदान
मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड की समृद्ध सैन्य परंपरा का भी खास तौर पर उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इस पहाड़ी प्रदेश ने देश को अनगिनत वीर सैनिक, पराक्रमी सेनापति और कुशल रणनीतिकार दिए हैं. यहां का हर दूसरा परिवार राष्ट्र रक्षा से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है. देश की सरहदों की हिफाजत से लेकर बड़े कूटनीतिक फैसलों तक, उत्तराखंड के वीर सपूतों ने हमेशा अपनी जान और बुद्धिमत्ता की बाजी लगाई है. पूरे राज्य को अपने इन सपूतों की उपलब्धियों, उनके त्याग और उनके शौर्य पर गहरा गर्व है.
सार्वजनिक संवाद में मर्यादा बनाए रखने की सीख
मुख्यमंत्री ने अंत में स्पष्ट शब्दों में कहा कि उत्तराखंड की जनता अपने नायकों के स्वाभिमान को लेकर पूरी तरह सजग है. उन्होंने कहा कि अपने मान-सम्मान के साथ यह वीर भूमि कभी कोई समझौता नहीं करेगी. धामी ने दोहराया कि राजनीतिक दलों को अपनी बात रखने का पूरा हक है, लेकिन सार्वजनिक संवाद में शिष्टाचार और जिम्मेदारी बनाए रखना अनिवार्य है. उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी पर रोक लगेगी और देश की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सभी राजनीतिक दल परिपक्वता का परिचय देंगे.
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