पाकिस्तान को 'मौसी' बोलना सनी देओल को पड़ा भारी, लोग बुला रहे गद्दार, कहा- 'कितना शर्मनाक है'
Sunny Deol Called Pakistan Mausi:सनी देओल एक बार फिर बड़े पर्दे पर दमदार अंदाज में वापसी करने जा रहे हैं. एक्टर आमिर खान के प्रो़क्शन हाउस में बनी फिल्म 'बंटवारा 1947' में नजर आएंगे. फिल्म के ट्रेलर को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है और फैंस इसकी रिलीज का इंतजार कर रहे हैं. वहीं, दूसरी ओर फिल्म की कास्ट इसके प्रमोशन में लगी हुई है. हाल ही में एक प्रमोशनल इवेंट के दौरान सनी देओल ने पाकिस्तान को मौसी बता दिया. जिसके बाद अब उन्हें ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है.
सनी देओल ने क्या कहा?
हाल ही में 'बंटवारा 1947' एक इवेंट में सनी देओल से एक रिपोर्टर ने पूछा कि वो पड़ोसी देश को किस नजरिए से देखते हैं, तो एक्टप ने जवाब दिया- 'पहले दोनों देश एक ही थे. जैसा कि मेरे पिता कहा करते थे, भारत मां है और पाकिस्तान भारत से ही निकला है, इसलिए वह मौसी बन गया. हम सब एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं.' वहीं, सनी देओल का ये बयान तेजी से वायरल हो गया है. इतना ही नहीं, एक्टर को लोग काफी ट्रोल कर रहे हैं.
If Bharat is my Mother
— Asif Iqbal (@AsifInsights) August 3, 2026
Pakistan is my Aunt
- Sunny Deol
Why, paji, why?
What was the need for that statement? The movie would've flopped anyway. Feels like the production house asked you to say it.#Batwara1947Trailer #Batwara1947 #SunnyDeol pic.twitter.com/eIqYZwPBkP
सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रहे सनी
सनी देओल का पाकिस्तान को मौसी बताने वाला वीडियो कई लोगों को रास नहीं आया. ऐसे में लोग एक्टर को जमकर ट्रोल कर रहे हैं. एक यूजर ने वीडियो शेयर कर लिखा- 'सनी देओल दोहरे व्यक्तित्व वाले इंसान है, पहले उन्होंने पाकिस्तान को नेगेटिव रूप में दिखाने वाली फिल्मों से भारतीय दर्शकों को बेवकूफ बनाकर पैसे कमाए, लेकिन अब वो पाकिस्तान को पॉजिटिव नजरिए से देखने लगे हैं क्योंकि अपनी आने वाली फिल्म #Batwara1947 में वे एक मुस्लिम किरदार निभा रहे हैं.'
#SunnyDeol is a very two-faced man; he previously made money by fooling the Indian audience with films that portrayed Pakistan negatively, but now he has started to view Pakistan favorably because he is playing a Muslim character in his upcoming film, #Batwara1947.
— Akkian(Viratian) by heart (@DevoteeAkki) August 3, 2026
According to… pic.twitter.com/3ND5rcY1RE
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सनी देओल को गद्दार बुला रहे लोग
इतना ही नहीं सनी की बातों से कुछ लोग तो इतना ज्यादा भड़क गए कि एक्टर को गद्दार तक बुलाने लगे. एक यूजर ने एक्स पर लिखा- 'गदर से गद्दार की ओर क्यूं? सनी पाजी तो तारा सिंह अब शखिना के साथ पाकिस्तान में रहेंगे...जब तक इस देश में सिनेमा है.' वहीं, दूसरे ने लिखा- 'सनी देओल, क्या शर्मनाक बयान है यार? जब पुलवामा और पहलगाम जैसी घटनाएं हुई, या भारत दशकों से जिन आतंकी हमलों का सामना कर रहा है, तब इस व्यक्ति के पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं थे.'
Gadar से ग़द्दार की ओर क्यूँ सानी पाजी
— Vandana Gupta ???????? (@im_vandy) August 3, 2026
तो तारा सिंह अब सकीना के साथ पाकिस्तान मेँ रहेगे........ जब तक इस देश में सिनेमा है ????
"If India is my mother, then Pakistan is my mother's sister-my aunt. We are all connected to each other"- Sunny Deol during promotion of his new film… pic.twitter.com/vEQColyG1Y
Sunny Deol, What a shameful statement, man ? ????????
— Courageous (@CourageousRo) August 3, 2026
On the Batwara 1947 promo He was asked that : "This movie has been made on india and Pakistan, what do you think about Pakistan as a nation?
Sunny deol : I don't have anything like that in my mind regarding Pakistan, Agar Bharat… pic.twitter.com/E8kbvMiuZt
क्या है 'बंटवारा 1947' की कहानी?
'बंटवारा 1947' की कहानी की बात करे तो ये भारत और पाकिस्तान के विभाजन के समय के बैकग्राउंड पर बेस्ड है. साल 1947 में जब ब्रिटिश शासन खत्म हुआ और भारत आजाद हुआ, उसी समय देश का विभाजन भी हुआ था. इस फैसले ने करोड़ों लोगों की जिंदगी बदल दी. फिल्म में दिखाया गया है कि उस समय एक मुस्लिम शख्स सिकंदर मिर्जा अपने परिवार के साथ पाकिस्तान में हिंदू महिला के साथ रहता है, उसे अपनी मां का दर्जा देता है. लेकिन उनके लिए ऐसा करना आसान नहीं होता. बता दें, सिकंदर मिर्जा का रोल सनी ने प्ले किया है.
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Hariyali Amavasya 2026: 11 या 12 अगस्त, कब मनाई जाएगी हरियाली अमावस्या? जानें वृक्षारोपण, तर्पण और दान का महत्व
Hariyali Amavasya 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, अमावस्या के दिन गंगा स्नान-दान, पितरों को तर्पण और शिव जी की पूजा-अर्चना की जाती है. यह दिन अत्यंत खास माना जाता है. अमावस्या की तिथि का धार्मिक और आध्यात्मिक, दोनों ही महत्व खास माना जाता है. सावन के महीने में पड़ने वाली अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता है. यह अमावस्या साल की प्रमुख अमावस्या तिथियों में से एक मानी जाती है. इस अमावस्या को खास और बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है. वृक्षारोपण का कार्य भी इस अमावस्या पर विशेष रूप से किया जाता है. हालांकि, इस साल हरियाली अमावस्या की तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. 11 और 12 अगस्त में से कौन से दिन पर हरियाली अमावस्या मनाई जाएगी.
कब है हरियाली अमावस्या?। Hariyalai Amavasya Kab Hai
आखिर इस साल क्यों हरियाली अमावस्या की सही तारीख को लेकर इतना कंफ्यूजन बना हुआ है? दरअसल, सावन माह की अमावस्या तिथि का प्रारंभ 11 और 12 अगस्त की मध्यरात्रि में हो रहा है. हरियाली अमावस्या मध्यरात्रि को 1 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी. वहीं, इस तिथि का समापन 12 अगस्त की रात को 11 बजकर 6 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि के मुताबिक, इस साल हरियाली अमावस्या का त्योहार 12 अगस्त 2026, बुधवार को मनाया जाएगा. जो लोग अमावस्या का व्रत रखते हैं, वे इस दिन उपवास कर सकते हैं.
हरियाली अमावस्या शुभ मुहूर्त 2026। Hariyali Amavasya Shubh Muhurat 2026
- ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:23 से सुबह 05:06 तक
- प्रात: सन्धया- सुबह 04:44 से लेकर सुबह 05:49 तक
- विजय मुहूर्त- दोपहर 02:38 से दोपहर 03:31 तक
- गोधूलि मुहूर्त- शाम 07:03 से शाम 07:25 तक
- सायाह्म संध्या- शाम 07:03 से रात 08:08 तक
- अमृत काल- 13 अगस्त को सुबह 04:38 से सुबह 06:06 तक
- निशिता मुहूर्त- 13 अगस्त को रात 12:05 से 12:48 तक
आखिर क्यों इस अमावस्या को 'हरियाली अमावस्या' कहते हैं?
श्रावण के महीने में प्रकृति अपने सबसे खूबसूरत अवतार में होती है. इस मौसम में चारों तरफ हरियाली रहती है और पेड़-पौधे खिल उठते हैं. बरसात पड़ने से धरती पर हरी घासें लहलहा उठती है और खेतों में भी फसलें खिली-खिली दिखाई देती है. ऐसे में पूरा वातावरण हरा-भरा हो जाता है. हरियाली अमावस्या को हरियाली नाम से इसलिए भी जाना जाता है क्योंकि इस दिन पर्यावरण की रक्षा के लिए पेड़ भी लगाएं जाते हैं. पीपल, बरगद और नीम जैसे पेड़ों को लगाने की विशेष परंपरा रही है. हालांकि, इस अमावस्या पर शिव-पार्वती की पूजा करने का भी खास महत्व होता है लेकिन यह पर्व सिर्फ धार्मिक नहीं होता है.
हरियाली अमावस्या का महत्व
हरियाली अमावस्या सावन के महीने में पड़ने वाली अमावस्या तिथि है. ऐसे में भगवान शिव और पार्वती माता का इससे खास संबंध माना जाता है. सावन महीने में बारिश होती है, जिस वजह से चारों ओर हरियाली रहती है. मानसून की वजह से चारों ओर नए पौधे-नई घास और नई फसलों से वातावरण पूरा हरा-भरा हो जाता है. इस कारण से इसे हरियाली अमावस्या कहा जाता है. हरियाली अमावस्या का दिन पितरों के तर्पण, गंगा नदी में स्नान करने और दान करने के लिए खास माना जाता है.
हरियाली अमावस्या पर वृक्षारोपण की परंपरा क्यों है?
हरियाली अमावस्या पर पेड़ लगाने की यानी वृक्षारोपण करने की परंपरा बहुत वर्षों पुरानी है. वर्षा ऋतु में अनुकूलता, धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा पर्व भारतवर्ष के लिए बेहद खास माना जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि भारतीय संस्कृति में पेड़-पौधों को देवतुल्य माना जाता है. सनातन धर्म में पीपल, बरगद, बेल, नीम और आंवले जैसे वृक्षों का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है. इन्हें सिर्फ वृक्षों की दृष्टि से नहीं देखा जाता है. बारिश का मौसम पौधे लगाने के लिए उपयुक्त माना जाता है. इसलिए, इस दिन देश में कई जगहों पर वृक्षारोपण कार्य किए जाते हैं. पर्यावरण को संरक्षण करना आज के समय के लिए भी बहुत जरूरी हो गया है.
हरियाली अमावस्या पर पितृ तर्पण क्यों किया जाता है?
हरियाली अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण करने की खास मान्यता होती है. अमावस्या की तिथि पर पितरों को जल और भोजन अर्पित किया जाता है. इससे वे प्रसन्न होते हैं. सावन का महीना सनातन धर्म के सबसे पवित्र महीनों में से एक है. इस महीने में साधक आत्मिक शांति महसूस करते हैं और जीवन में सुख-शांति और वंश वृद्धि की कामना करते हैं. हरियाली अमावस्या पर भी पितरों को तर्पण दिया जाता है. इससे आत्मा की तृप्ति होती है. सावन मास में पितृ कर्म करने से कई गुना पुण्य मिलता है. तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है.
हरियाली अमावस्या पर दान का महत्व क्या है?
हरियाली अमावस्या पर दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पुण्य प्राप्त होता है. इस अमावस्या का व्रत रखने से सुख-शाति आती है और समृद्धि बढ़ती है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन अन्न. वस्त्र, काले तिल और पौधों का भी दान करना चाहिए. इस दिन दान करने से साधक को कई लाभ मिलते हैं. जरूरतमंदों को दान करने से पितरों को शांति मिलती है. इस दिन काले तिलों और अन्न का दान करने से कुंडली में बुरे ग्रहों और दोषों का प्रभाव कम होता है. सावन मास की इस अमावस्या पर शिव जी की पूजा करने का भी खास महत्व होता है. इसलिए, दान करने से उनका भी आशीर्वाद मिलता है.
हरियाली अमावस्या पर इन चीजों का दान करें
हरियाली अमावस्या पर आपको अन्न और भोजन का दान करना चाहिए. गरीबों को भोजन और अनाज देना सर्वोत्तम माना जाता है. जरूरतमंदों को वस्त्र या मौसम के अनुकूल उपयोगी वस्तुओं का दान करें जैसे छाता आदि. हरियाली अमावस्या पर पीपल या फिर छायादर वृक्ष लगाने और दान करने का भी खास महत्व होता है. इस अमावस्या पर लोग जगह-जगह जलदान करते हैं और छबील बांटते हैं. आप इस अमावस्या के दिन मंदिर में प्याऊ लगवा सकते हैं. हरियाली अमावस्या पर गौ सेवा की जाती है और गौ दान करने का भी खास महत्व होता है.
हरियाली अमावस्या पर शिवजी की पूजा क्यों की जाती है?
सावन मास में पड़ने की वजह से इस अमावस्या पर भगवान शिव का पूजन किया जाता है. सावन मास का महत्व प्रकृति से जुड़ा हुआ है और शिव जी को अर्पित की जाने वाली चीजें जैसे बेलपत्र, भांग, धतुरा इत्यादि जैसी सभी चीजें भी प्रकृति से प्राप्त की गई है. सावन का पूरा महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होता है. इस महीने में शिव जी प्रसन्न रहते हैं. उनकी आराधना करने से वे विशेष फल प्रदान करते हैं. हरियाली अमावस्या पर शिव जी की पूजा के साथ माता पार्वती की पूजा करने से भी घर में धन, धान्य और सुख-समृद्धि आती है. भगवान शिव को प्रकृति का देवता माना जाता है. उनका संबंध वन-उपवन और पर्वतों से बताया जाता है.
हरियाली अमावस्या पर कौन-से पेड़ लगाना शुभ माना जाता है?
- हरियाली अमावस्या पर कुछ खास वृक्षों को लगाना शुभ माना जाता है.
- पीपल का वृक्ष- इस पेड़ में त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है. इसे लगाने से दुर्भाग्य कटता है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है.
- बरगद- बरगद का पेड़ लगाने से दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और वंश की वृद्धि होती है.
- शमी- यह पेड़ भगवान शिव को समर्पित होता है और शनिदेव को भी प्रिय होता है. इसे लगाने से घर में सुख-समृद्धि आती है.
- बेल पत्र- यह पेड़ शिव जी को अति प्रिय होता है. बेल का पौधा लगाने से आरोग्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है.
- इसके अलावा, आंवला, अशोक, नीम और तुलसी के पौधे भी इस दिन पर लगाना कल्याणकारी माना जाता है.
राशियों के अनुसार कौन सा पौधा लगाएं?
- मेष और वृश्चिक राशि- आंवला, लाल चंदन या गुलाब का पौधा
- वृषभ और तुला राशि- इन लोगों को गूलर, अशोक या सफेद फूलों का पौधा लगाना चाहिए.
- मिथुन और कन्या- इन्हें तुलसी, चंपा या जूही का पौधा लगाना चाहिए.
- कर्क राशि के लोगों को पीपल, बरगद या बांस का पौधा लगाना चाहिए.
- सिंह राशि के जातकों को बरगद, अशोक, या सूरजमुखी का पौधा रोपण करना चाहिए.
- धनु और मीन राशि के लोगों को पीपल, गेंदे, आम या पीले फूलों को पौधा लगाना चाहिए.
- मकर और कुंभ राशि के लोगों को नीम, शमी या जामुन का पेड़ लगाना चाहिए.
हरियाली अमावस्या पर क्या करें और क्या नहीं?
हरियाली अमावस्या के दिन पेड़ लगाने चाहिए, शिव पूजा करनी चाहिए, पितरों का तर्पण, दान और जरूरतमंदों को भोजन करवाना चाहिए. वहीं, इस दिन इस अमावस्या पर पेड़ नहीं काटने चाहिए. प्रकृति को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए और अपशब्दों के प्रयोग से बचना चाहिए. इस दिन नशे और तामसिक भोजन के सेवन से परहेज करना चाहिए.
क्या हरियाली अमावस्या पूरे भारत में एक जैसी मनाई जाती है?
हालांकि, अमावस्या एक है और इसकी पूजन विधि सामान्य होती है. मगर अलग-अलग राज्यों में इसे अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है. जैसे राजस्थान में हरियाली अमावस्या पर मेले लगते हैं और वृक्षारोपण के भव्य आयोजन होते हैं. मध्य प्रदेश में भी कई धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में शिव मंदिरों में विशेष पूजा की जाती है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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