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LTCG Tax: क्या है एलटीसीजी टैक्स जिसको लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बयान के बाद उछला शेयर बाजार, निवेशकों को कैसे होगा फायदा?

LTCG Tax: भारतीय शेयर बाजार में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के एक बयान के बाद निवेशकों के बीच यह उम्मीद बढ़ी है कि सरकार आने वाले बजट में इस टैक्स को लेकर कोई राहत दे सकती है. वित्त मंत्री ने नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा कि सरकार आगामी बजट से पहले होने वाली चर्चाओं में LTCG टैक्स हटाने से जुड़े सुझावों को सुनने के लिए तैयार है.

इस बयान के बाद शेयर बाजार में जोरदार खरीदारी देखने को मिली. सेंसेक्स 1,109 अंक उछलकर 73,033.78 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 358.60 अंक की तेजी के साथ 22,721.95 पर पहुंच गया. हालांकि, बाजार में आई तेजी का पूरा श्रेय केवल इसी बयान को देना सही नहीं होगा. निवेशकों की उम्मीदों और अन्य बाजार कारकों का भी असर हो सकता है.

अब सवाल है कि LTCG टैक्स क्या है, सरकार इसे क्यों वसूलती है और अगर इसे हटा दिया जाता है, तो शेयर बाजार में निवेश करने वालों को कितना फायदा होगा?

LTCG टैक्स क्या होता है?

LTCG का पूरा नाम लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स यानी दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ है. जब कोई निवेशक शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड की यूनिट खरीदता है और निर्धारित अवधि तक रखने के बाद उसे मुनाफे पर बेचता है, तो उससे होने वाली कमाई को कैपिटल गेन कहा जाता है.

लिस्टेड इक्विटी शेयरों और पात्र इक्विटी म्यूचुअल फंड की यूनिट के मामले में 12 महीने से अधिक समय तक रखने पर होने वाला लाभ आमतौर पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की श्रेणी में आता है.

मौजूदा नियमों के अनुसार, पात्र सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों और इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड से एक वित्त वर्ष में होने वाले कुल लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन में से 1.25 लाख रुपये तक की राशि पर टैक्स नहीं लगता. इस सीमा से अधिक लाभ पर सामान्यतः 12.5% LTCG टैक्स लागू होता है. लागू सरचार्ज और सेस के कारण वास्तविक कर देनदारी अलग हो सकती है.

उदाहरण के लिए, यदि किसी निवेशक को एक वित्त वर्ष में पात्र शेयरों की बिक्री से 2 लाख रुपये का लॉन्ग टर्म मुनाफा होता है, तो 1.25 लाख रुपये की छूट सीमा घटाने के बाद 75,000 रुपये पर टैक्स की गणना होगी. 12.5% की दर से मूल टैक्स 9,375 रुपये बनेगा. लागू सेस और अन्य प्रावधानों के कारण अंतिम राशि कुछ अधिक हो सकती है.

LTCG टैक्स हटने पर निवेशकों को क्या फायदा होगा?

अगर सरकार शेयर बाजार के पात्र लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स पूरी तरह खत्म कर देती है, तो निवेशकों को अपने मुनाफे का बड़ा हिस्सा बचाने में मदद मिल सकती है.

इसे एक उदाहरण से समझिए. मान लीजिए किसी निवेशक ने शेयरों में पैसा लगाकर एक वित्त वर्ष में 5 लाख रुपये का पात्र लॉन्ग टर्म मुनाफा कमाया. मौजूदा व्यवस्था में 1.25 लाख रुपये की छूट घटाने के बाद 3.75 लाख रुपये पर 12.5% की दर से 46,875 रुपये मूल टैक्स बनता है. यदि टैक्स पूरी तरह हटा दिया जाता है, तो पात्र लाभ पर यह टैक्स नहीं देना पड़ेगा.

इससे निवेशकों का वास्तविक रिटर्न बढ़ सकता है. इसके अलावा, लंबी अवधि के निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है और शेयर बाजार में निवेश करने के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ सकता है.

हालांकि, टैक्स हटने का मतलब यह नहीं है कि हर निवेशक को समान फायदा होगा. लाभ निवेश की रकम, वास्तविक मुनाफे, छूट सीमा के इस्तेमाल और निवेशक की कर स्थिति पर निर्भर करेगा.

सरकार LTCG टैक्स क्यों नहीं हटाना चाहती?

LTCG टैक्स सरकार के लिए राजस्व जुटाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है. शेयर बाजार में निवेश और उससे होने वाले लाभ में बढ़ोतरी के साथ इस टैक्स से मिलने वाली रकम भी बढ़ सकती है.

दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, आकलन वर्ष 2024-25 में सरकार को LTCG टैक्स से 72,249 करोड़ रुपये मिले थे. आकलन वर्ष 2025-26 में यह रकम बढ़कर 1,29,158 करोड़ रुपये बताई गई है. इन दोनों आंकड़ों का कुल योग 2,01,407 करोड़ रुपये है.

इतनी बड़ी राशि के संभावित राजस्व को छोड़ना सरकार के लिए आसान नहीं होगा. यदि LTCG टैक्स खत्म किया जाता है, तो सरकार को राजस्व के दूसरे स्रोतों या खर्च और आय के बीच संतुलन पर विचार करना पड़ सकता है.

इसके अलावा, सरकार को यह भी देखना होगा कि टैक्स में राहत से निवेश, बचत और बाजार में भागीदारी कितनी बढ़ेगी. इसलिए किसी भी बदलाव का फैसला केवल निवेशकों की मांग के आधार पर होना तय नहीं है.

LTCG के साथ STT पर भी क्यों हो रही चर्चा?

निवेशक LTCG टैक्स के साथ सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को लेकर भी सवाल उठाते रहे हैं. STT शेयर बाजार में कुछ निर्धारित प्रतिभूतियों के लेनदेन पर लगाया जाता है, जबकि LTCG टैक्स पात्र निवेश की बिक्री से हुए दीर्घकालिक मुनाफे पर लगता है.

निवेशकों की प्रमुख दलील है कि शेयर खरीदने-बेचने पर पहले ही STT देना पड़ता है, ऐसे में मुनाफे पर अलग से LTCG टैक्स लगाने से उनके कुल रिटर्न पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है.

हालांकि, दोनों करों का आधार अलग है. STT लेनदेन पर लगता है, जबकि LTCG टैक्स लाभ पर लागू होता है. इसलिए कानूनी और कर व्यवस्था के लिहाज से इन्हें एक ही तरह का टैक्स नहीं माना जा सकता.

वित्त मंत्री के बयान में दोनों करों को लेकर निवेशकों के सुझावों का जिक्र किए जाने से यह चर्चा महत्वपूर्ण हो गई है. लेकिन सुझाव सुनने की तैयारी को टैक्स खत्म करने की घोषणा नहीं समझना चाहिए.

क्या सभी निवेशकों को LTCG टैक्स से छूट मिल सकती है?

फिलहाल पात्र सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों और इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड से होने वाले दीर्घकालिक लाभ पर निर्धारित नियम लागू होते हैं. घरेलू खुदरा निवेशकों और संबंधित श्रेणियों के अन्य निवेशकों की कर देनदारी उनकी लागू कर व्यवस्था और निवेश के प्रकार पर निर्भर करती है.

सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के कुछ निवेशों के लिए विशेष कर प्रावधान हो सकते हैं. लेकिन ऐसी सीमित छूट को सामान्य शेयर बाजार के सभी निवेशकों के लिए LTCG टैक्स से छूट नहीं माना जा सकता.

यदि सरकार भविष्य में नियम बदलती है, तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राहत सभी निवेशकों को मिलेगी या केवल कुछ निवेश श्रेणियों को.

क्या आगामी बजट में LTCG टैक्स खत्म हो जाएगा?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बयान निवेशकों के लिए चर्चा का विषय जरूर है, लेकिन उन्होंने LTCG टैक्स खत्म करने का कोई अंतिम ऐलान नहीं किया है. सरकार बजट से पहले सुझावों पर विचार कर सकती है, पर किसी बदलाव के लिए औपचारिक घोषणा और संबंधित कानूनी प्रावधान जरूरी होंगे.

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ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हम सबका मिशन, संघर्ष में हम सभी साथ हैं: राहुल गांधी

लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आह्वान पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष एकजुट हो रहा है. इसके लिए उन्होंने अपने आवास पर ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं के लिए एक चाय-पार्टी का आयोजन किया.  इस दौरान इंडिया ब्लॉक के कई दिग्गज यहां पर पहुंचे. माना जा रहा है कि इस बैठक के माध्यम से राहुल विपक्ष  को एकजुट करने का प्रयास कर रहे हैं. CEC के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को लेकर एक बार फिर सड़कों पर उतरना चाहते हैं.

पूरे चुनाव सिस्टम को बर्बाद किया है

राहुल की चाय-पार्टी में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू, शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत, AISA अध्यक्ष नेहा बोरा और नागरिक समाज के अन्य सदस्य पहुंच गए हैं. इस दौरान राहुल गांधी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस संघर्ष में पूरा विपक्ष एकजुट है. ज्ञानेश कुमार ने पूरे चुनाव सिस्टम को बर्बाद किया है. एक तरह से यह लोकतंत्र की हत्या है. आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा ने कहा कि आम आदमी के अधिकार को कुचला गया है. प्रदर्शन के अधिकार को छीनना पूरी तरह से गलत है. भाजपा ने लोकतंत्र पर हमला किया है.

ज्ञानेश कुमार वोट चोरी में शामिल हैं

इस दौरान सपा और कांग्रेस के कई सांसद इस पार्टी में पहुंचे. ऐसी चर्चा हो रही है कि इस बैठक में चुनाव  आयोग के खिलाफ एक याचिका, ‘वोट चोरी’ के मामले और SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) प्रक्रिया से जुड़ी  भविष्य की संयुक्त रणनीति पर चर्चा हुई. शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत ने कहा कि ज्ञानेश कुमार माफिया है. उसे जल्द हटा देना चाहिए था. मगर सरकार ने अपने को बचाने के लिए ऐसा नहीं कर रही है. टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने कहा कि ज्ञानेश कुमार वोट चोरी में शामिल हैं. उन्हें हटाने तक हमारी लड़ाई जारी रहने वाली है. उन्होंने एसआईआर वोट चोरी के लिए तैयार किया. ऐसे में ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करना चाहिए. हम सभी एकजुट है.

सरकार लोकतंत्र को कुचलने की भूल कर रही

इस दौरान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि प्रदर्शन करना हमारा अधिकार है. अब इस आंदोलन में सिविल सोसायटी और किसान संगठन के साथ आएंगे. समाजवादी पार्टी के सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि हम विपक्षी गठबंधन संग खड़े हैं. एनसीपी नेता सुप्रिया सुले के अनुसार, इंडिया गठबंधन का आंदोलन जारी रहने वाला है. सरकार लोकतंत्र को कुचलने की भूल कर रही है.

वामपंथी नेता डी राजा ने बताया कि सरकार विपक्ष आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है. ज्ञानेश कुमार को जाना ही होगा. वहीं आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को हाइजैक करने का प्रयास है. ऐसे में  प्रदर्शन की जगह बदली गई. एक तरह से ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए लोकतंत्र को कुचला जा रहा है. 

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  Sports

Ravichandran Ashwin बोले New Zealand सीरीज में Bhuvneshwar Kumar को मिला मेहनत का फल

अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार को लगातार अच्छे प्रदर्शन का इनाम मिला है और अब वह करीब 4 साल बाद भारत की टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में वापसी करने जा रहे हैं। पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन का मानना है कि भुवनेश्वर ने टीम में लौटने के लिए अलग से कोशिश करने के बजाय अपनी गेंदबाजी और जिम्मेदारी पर ध्यान दिया, जिसका नतीजा उन्हें चयन के रूप में मिला है।

भारत और न्यूजीलैंड के बीच अगले सप्ताह से शुरू होने वाली 5 मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज के लिए भुवनेश्वर कुमार को भारतीय टीम में जगह दी गई है। उनका चयन टीम की घोषणा के बाद चर्चा का बड़ा विषय बना। भुवनेश्वर ने इंडियन प्रीमियर लीग में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए अच्छा प्रदर्शन किया था। नई गेंद से विकेट लेने और गेंदबाजी में निरंतरता बनाए रखने की उनकी क्षमता ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा।

अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर भुवनेश्वर की वापसी पर बात करते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि तेज गेंदबाज लगातार भारतीय टीम में लौटने के बारे में सोच रहे थे। अश्विन के मुताबिक, भुवनेश्वर ने अपने खेल को बेहतर बनाने और अपनी टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन करने पर ध्यान बनाए रखा। वह नई गेंद से प्रभावी गेंदबाजी करने और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की ओर से अपनी जिम्मेदारी निभाने में जुटे रहे।

अश्विन ने कहा कि भुवनेश्वर ने अपने सफर पर ध्यान दिया और जो कुछ उनके हाथ में था, उसे बेहतर तरीके से करने की कोशिश की। भारतीय टीम में वापसी उनके सफल प्रदर्शन का इनाम है। उन्होंने इस मौके को पाने के लिए उसके पीछे भागने के बजाय अपना काम किया और सफलता खुद उनके पास आई। अश्विन ने यह भी संकेत दिया कि खिलाड़ी के लिए अपने प्रदर्शन पर ध्यान देना और नतीजे की चिंता से दूर रहना सफलता का अहम तरीका हो सकता है।

गौरतलब है कि भुवनेश्वर कुमार लंबे समय से भारतीय टीम से बाहर थे, लेकिन घरेलू और आईपीएल क्रिकेट में प्रदर्शन के दम पर उन्होंने दोबारा चयन की दौड़ में जगह बनाई। नई गेंद को स्विंग कराने और शुरुआती ओवरों में बल्लेबाजों को परेशान करने की उनकी क्षमता टी20 क्रिकेट में अब भी उपयोगी मानी जाती है।

इसी बातचीत में अश्विन ने 2027 में होने वाले एकदिवसीय विश्व कप को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने भारत को खिताब का मजबूत दावेदार बताया, लेकिन मेजबान दक्षिण अफ्रीका को बड़ी चुनौती माना। अश्विन के अनुसार, भारतीय टीम के पास जसप्रीत बुमराह जैसे तेज गेंदबाज, अच्छे स्पिन विकल्प और अनुभवी बल्लेबाज हैं। अगर बुमराह अपनी पूरी क्षमता से गेंदबाजी करते हैं, तो भारत की संभावनाएं और मजबूत हो सकती हैं।

हालांकि, अश्विन ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका को उसकी घरेलू परिस्थितियों में हराना आसान नहीं होगा। वहां के मैदानों और पिचों की जानकारी, घरेलू दर्शकों का समर्थन और एसए20 लीग में खेलने से मिले अनुभव से दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ियों को फायदा मिल सकता है। उनके मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका की टीम एकजुट नजर आती है और उसके खिलाड़ी अपनी परिस्थितियों को अच्छी तरह समझते हैं।

अश्विन की राय में भारत के पास विश्व कप जीतने की क्षमता है, लेकिन खिताब की राह में दक्षिण अफ्रीका सबसे मजबूत प्रतिद्वंद्वियों में से एक हो सकता है। ऐसे में भारतीय टीम को अपनी गेंदबाजी और बल्लेबाजी के साथ-साथ मेजबान टीम की चुनौती से निपटने की भी तैयारी करनी होगी।

Tue, 13 Oct 2026 19:35:00 +0530

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