इंदौर में 9 अगस्त को पौधारोपण कार्यक्रम, एक ही दिन में रोपे जाएंगे 1 लाख पौधे
9 अगस्त को मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में 1 लाख पौधे रोपे जाने वाले हैं। भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष की उपस्थिति में ये आयोजन किया जाने वाला है। हाल ही में इस कार्यक्रम को लेकर भाजपा इंदौर नगर और ग्रामीण की संयुक्त बैठक का आयोजन किया गया था। जहां पौधारोपण कार्यक्रम को रूपरेखा तय की गई।
इस बैठक में इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक मालिनी गौड़, जिला अध्यक्ष श्रवण सिंह चावड़ा, नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता और मधु वर्मा शामिल हुए। बैठक में इस साल 21 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। 8 फीट की ऊंचाई के पौधे लगाए जाएंगे ताकि यह जल्दी बड़े हो सकें।
रोपे जाएंगे 1 लाख पौधे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से संचालित किए जा रहे एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत इंदौर में एक लाख पौधारोपण का कार्यक्रम रखा गया है। इंदौर के रेवती रेंज में रखे जा रहे हैं इस कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री की प्रेरणा से इस अभियान के अंतर्गत 2 साल पहले हमने जो पौधे लगाए थे वह लहलहाते पेड़ बन चुके हैं। यह हमारे संकल्प की कहानी बोल रहे हैं। अब 9 अगस्त को एक बार फिर यही धरती हरियाली के इतिहास की साक्षी बनने वाली है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष उपस्थित रहेंगे।
9 तारीख को आप रेवती रेंज आ रहे हैं न… !!!
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी की प्रेरणा से संचालित एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत इंदौर की रेवती रेंज पर दो वर्ष पहले हमने इंदौर के स्वजनों के साथ मिलकर जो पौधे लगाए थे, वे आज लहलहाते पेड़ों के रूप में हमारे संकल्प… pic.twitter.com/9N51U9YdQN
— Kailash Vijayvargiya (@KailashOnline) August 3, 2026
तिरंगा यात्रा का भी होगा आयोजन
पौधे लगाने के इस कार्यक्रम के अलावा 9 अगस्त से 15 अगस्त तक जिले के सभी मंडलों में तिरंगा अभियान भी चलाया जाएगा। इसके तहत सभी मंडलों में तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी। 14 अगस्त को जिला स्तरीय बड़ी यात्रा का आयोजन होगा। इसके लिए कार्यकर्ताओं को अपने बूथों पर प्रवास कर घर-घर संपर्क का तिरंगा लगाने का आग्रह करने को कहा गया है।
पंजाब: कर्मचारियों-पेंशनभोगियों को 15 दिन में देना होगा बकाया DA/DR, भुगतान में देरी पर लगेगा 6% ब्याज, हाईकोर्ट का फैसला
पंजाब के 6 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए राहत भरी खबर है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 15 दिनों के अंदर सरकारी कर्मचारियों को बकाया डीए देने का आदेश दिया है। तय अवधि में भुगतान नहीं होने पर सरकार को 6 फीसदी वार्षिक ब्याज भी देना होगा। इसके अलावा कोर्ट ने सरकार के विज्ञापन और अन्य गैर जरूरी खर्चों पर रोक लगा दी है।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की अपील (LPA) खारिज करते हुए राज्य के लगभग 6 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाया डीए/डीआर (DA/DR Arrears) का भुगतान करने का फैसला सुनाया है। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार को बड़े निर्देश जारी किए हैं।
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों का सारा बकाया डीए/डीआर 15 दिनों (दो हफ्तों) के भीतर जारी करने का आदेश दिया है। पंजाब के मुख्य सचिव (Chief Secretary) को भी आदेश दिया गया है कि भुगतान पूरा होने के बाद वे अदालत के समक्ष अनुपालन हलफनामा दाखिल करें। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर इस बकाया राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो राज्य सरकार को बकाये पर 6% प्रतिवर्ष की दर से साधारण ब्याज देना होगा। अनुमान है कि DA की पूरी अदायगी के लिए सरकार को तकरीबन 15000 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे।
इसके अलावा हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि वित्तीय तंगी का हवाला देकर कर्मचारियों के जायज हक को नहीं रोका जा सकता। जब तक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का बकाया चुकता नहीं हो जाता, तब तक पंजाब सरकार प्रिंट या सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियानों जैसे गैर-उत्पादक खर्चों पर तुरंत रोक लगाए।
बता दें कि 8 अप्रैल को हाईकोर्ट ने 30 जून तक डीए देने का आदेश दिया था लेकिन पंजाब सरकार ने सिंगल बेंच द्वारा 30 जून तक दिए गए भुगतान के आदेश को चुनौती दी थी और अपील दायर की थी। सरकार का तर्क था कि राज्य पर 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया देनदारी है और वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए वह बाध्य नहीं है। वहीं याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि 1 जनवरी 2016 से 30 जून 2021 तक संशोधित पेंशन का बकाया दिया जाए। इसके अलावा 1 जुलाई 2015 से केंद्रीय पैटर्न के अनुसार संशोधित डीए और देरी से भुगतान पर ब्याज भी देने की मांग की गई थी। सोमवार, 3 अगस्त को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार के अपील खारिज करते हुए कर्मचारियों-पेंशनभोगियों के हित में फैसला सुनाया है।
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