पीयूष गोयल बोले- कांग्रेस चुनाव आयुक्तों को राज्यपाल-मंत्री बनाती थी:CEC रहते एमएस गिल को पद्म विभूषण देना क्या रिश्वत नहीं; राहुल से 10 सवाल किए
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस पर अपने शासन के दौरान चुनाव आयुक्तों को राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) रहते एमएस गिल को पद्म विभूषण देना क्या रिश्वत नहीं थी। गोयल ने कांग्रेस के पुराने फैसलों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों और चुनाव अधिकारियों को बाद में राजनीतिक पद दिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनाव हारने पर चुनाव आयोग पर सवाल उठाती है, लेकिन जीतने पर चुनाव प्रक्रिया को सही बताती है। गोयल ने राहुल गांधी से 10 सवाल करते हुए उन्हें वोट चोरी के आरोपों के सबूत देने और चुनाव आयोग के सामने हलफनामा दाखिल करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा- पिछले कुछ दिनों से हम राहुल गांधी का व्यवहार, उनके दोहरे मापदंड और बचकानी हरकतें देख रहे हैं। कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, लेकिन अपना पुराना रिकॉर्ड भूल जाती है। राहुल गांधी से पीयूष गोयल के 10 सवाल 1. वोट चोरी के आरोपों पर हलफनामा क्यों नहीं दिया? गोयल ने कहा कि राहुल गांधी रोज वोट चोरी की बात करते हैं और चुनाव आयोग की आलोचना करते हैं, लेकिन बार-बार मांग के बावजूद उन्होंने आयोग के सामने कोई हलफनामा दाखिल नहीं किया। उन्होंने राहुल से आरोपों के सबूत देने और शपथ लेकर उनकी पुष्टि करने को कहा। 2. बिहार में SIR के दौरान चुप क्यों रहे? गोयल ने पूछा कि अगर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) इतनी बड़ी समस्या थी, तो बिहार में इसकी प्रक्रिया के दौरान राहुल गांधी ने आवाज क्यों नहीं उठाई। उन्होंने तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान कांग्रेस की ओर से मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के लिए दावे दाखिल नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाया। 3. चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल क्यों? गोयल ने कहा कि पहले सरकार चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करती थी। 2023 में मोदी सरकार के कानून के तहत चयन समिति में नेता प्रतिपक्ष को भी शामिल किया गया। अब प्रधानमंत्री और नेता प्रतिपक्ष चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में शामिल होते हैं। 4. कांग्रेस नेताओं के SIR पर अलग-अलग बयान क्यों? गोयल ने शशि थरूर, रमेश चेन्निथला और केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के बयानों का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि इन नेताओं ने केरल में कांग्रेस की जीत का श्रेय SIR को दिया या इसकी तारीफ की। गोयल ने अधीर रंजन चौधरी के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनाव ठीक और निष्पक्ष तरीके से कराए जाने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनाव जीतने पर चुनाव आयोग को सही बताती है और हारने पर उसी पर सवाल उठाती है। गोयल ने राहुल गांधी को कांग्रेस के लिए “सबसे बड़ा रेड फ्लैग” भी कहा। 5. टीकाराम मीणा को कांग्रेस की समिति में शामिल क्यों किया गया? गोयल ने केरल के पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी टीकाराम मीणा का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि उन्हें बाद में राजस्थान में कांग्रेस की घोषणापत्र समिति में शामिल किया गया और पार्टी का सदस्य बनाया गया। 6. रतन यू. केलकर को मुख्यमंत्री का सचिव क्यों बनाया गया? गोयल के मुताबिक, केरल के पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू. केलकर को मई 2026 के विधानसभा चुनाव के एक महीने के भीतर मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन का सचिव नियुक्त किया गया। गोयल ने सवाल किया कि क्या यह चुनाव में मदद के बदले पद देने जैसा मामला नहीं है। 7. एमएस गिल को पद्म विभूषण देना क्या रिश्वत थी? गोयल ने कहा कि एमएस गिल 1996 से 2001 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे। वर्ष 2000 में पद पर रहते हुए उन्हें पद्म विभूषण दिया गया। गोयल ने सवाल किया कि क्या यह उन्हें प्रलोभन देना या रिश्वत देना नहीं था। उन्होंने कहा कि गिल बाद में संसद पहुंचे और केंद्रीय मंत्री भी बने। गोयल ने इसे चुनाव अधिकारियों को बाद में राजनीतिक पद दिए जाने के आरोप से जोड़कर देखा। 8. ममता बनर्जी को लेकर कांग्रेस का रुख क्या है? गोयल ने कहा कि राहुल गांधी और उनके साथी ममता बनर्जी की आलोचना करते हैं और उनके खिलाफ चुनाव लड़ते हैं। वे आरोप लगाते हैं कि ममता बनर्जी की कथित गड़बड़ियों ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत का रास्ता खोला। 9. आरके त्रिवेदी और टीएन शेषन को बाद में राजनीतिक पद क्यों मिले? गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त आरके त्रिवेदी का जिक्र करते हुए कहा कि उनका कार्यकाल 31 दिसंबर 1985 को समाप्त हुआ और 26 फरवरी 1986 को राजीव गांधी सरकार ने उन्हें गुजरात का राज्यपाल नियुक्त कर दिया। उन्होंने टीएन शेषन का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने 1999 में उन्हें लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया था। गोयल ने इसे भी राजनीतिक पुरस्कार देने जैसा बताया। 10. नवीन चावला की नियुक्ति और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल क्यों? गोयल ने नवीन चावला की नियुक्ति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2005 की खबरों और टीवी फुटेज में सोनिया गांधी द्वारा उन्हें चुनाव आयुक्त नियुक्त किए जाने की बात कही गई थी। गोयल ने पूछा कि सोनिया गांधी के पास कोई सरकारी पद नहीं था, तो वह नियुक्ति कैसे तय कर सकती थीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक मुख्य चुनाव आयुक्त ने शिकायत की थी कि उनके अधीन काम करने वाला चुनाव आयुक्त कांग्रेस के एजेंट की तरह काम कर रहा है, लेकिन कांग्रेस सरकार ने उसे नहीं हटाया। SIR पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला गोयल ने कहा कि मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में SIR की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी थी। उन्होंने कहा कि फॉर्म-6 से जुड़े मामले पर सुनवाई जारी है और किसी सुधार की जरूरत होने पर अदालत निर्देश दे सकती है। गोयल ने विपक्ष के प्रदर्शनों पर सवाल उठाते हुए डॉ. बीआर आंबेडकर के कथन का हवाला दिया, “जब संवैधानिक रास्ते उपलब्ध हों, तब उन्हें छोड़ देना अराजकता का व्याकरण है।” उन्होंने कहा कि जब संवैधानिक रास्ते उपलब्ध हैं, तो सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने और लोगों को भड़काने की जरूरत क्यों है। महिला पत्रकार के साथ व्यवहार पर भी सवाल गोयल ने राहुल गांधी और उनके साथियों पर प्रदर्शन के दौरान एक गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पत्रकार बार-बार सावधान रहने के लिए कह रही थीं, लेकिन उन्हें धक्का लगा और बाद में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। गोयल के मुताबिक, पत्रकार प्रदर्शन की कवरेज कर रही थीं और सवाल पूछ रही थीं। उन्होंने इस व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा कि पत्रकार इसे माफ नहीं करेंगे।
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