Navratri Satvik Chilla Recipe: कुट्टू-सिंघाड़े के आटे से हुए बोर? इस नवरात्रि ट्राई करें लौकी-पनीर वाला टेस्टी सात्विक चीला
Navratri Satvik Chilla Recipe: इस समय पूरे देश में धूमधाम से नवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है. इस पर्व में नौ दिन तक उपवास रखे जाते हैं और सात्विक भोजन खाया जाता है. बाकी व्रतों की तुलना में नवरात्रि के व्रतों में खान-पान के नियम बिल्कुल अलग होते हैं. लेकिन अगर आप इस बार कुछ अलग और टेस्टी खाना ट्राई करना चाहते हैं तो लौकी और पनीर से बना राजगिरा चीला खा सते हैं. दरअसल, लोग इस दौरान समक के चावल, कुट्टू या सिंघाडे़ का आटा और साबुदाना खाते हैं. ये सभी सात्विक चीजे पौष्टिक तो होती है लेकिन स्वाद में थोड़ी बोरिंग रहती है. इसलिए, हम आपके लिए बिल्कुल अलग रेसिपी लेकर आए हैं, जिसे आपको एकबार ट्राई जरूर करना चाहिए.
पनीर-लौकी चीला बनाने के लिए जरूरी सामग्रियां
- 1 कप राजगिरा का आटा
- 100 ग्राम कद्दूकमस किया हुआ लौकी
- 100 ग्राम कद्दूकस किया लो फैट पनीर
- 2 बारीक कटी हरी मिर्च
- एक मुट्ठी हरा धनिया
- सेंधा नमक स्वादानुसार
- आधा चम्मच देसी घी
- पानी
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हरी मूंगफली चटनी के लिए सामग्री
- धनिया- 50 ग्राम
- 2 हरी मिर्चे
- 1/4 कप भुनी मूंगफली
- 1/2 कप नींबू का रस
- 1/4 कप पानी
कैसे बनाएं लौकी-पनीर वाला राजगीरा चीला?
लौकी-पनीर का राजगिरा चीला बनाने की स्टेप-बाय-स्टेप विधि
- 1.सबसे पहले एक बड़े बर्तन में कद्दूकस की हुई लौकी और क्रम्बल किया हुआ पनीर लें. इसमें बारीक कटी हरी मिर्च, हरा धनिया, काली मिर्च पाउडर, सेंधा नमक और राजगिरा का आटा डालें. सभी सामग्रियों को अच्छी तरह मिलाकर एक गाढ़ा घोल तैयार कर लें. अगर मिश्रण बहुत सूखा लगे, तो इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाएं. ध्यान रखें कि घोल न ज्यादा पतला हो और न ही बहुत सख्त.
- 2.अब एक नॉन-स्टिक तवा गर्म करें और उस पर हल्का सा घी या तेल लगाकर चिकना कर लें. तवा गर्म होने पर तैयार मिश्रण की एक कलछी उस पर डालें और धीरे-धीरे फैलाकर चीले का आकार दें.
- 3.चीले को धीमी से मध्यम आंच पर पकने दें. जब इसका निचला हिस्सा सुनहरा और किनारे हल्के कुरकुरे हो जाएं, तो सावधानी से पलट दें. दूसरी तरफ भी घी या तेल लगाकर अच्छी तरह सेंक लें, ताकि चीला अंदर तक पक जाए. इसी प्रक्रिया को दोहराते हुए बाकी मिश्रण से भी चीले बना लें.
ऐसे बनाएं मूंगफली की हरी चटनी
- स्वादिष्ट हरी चटनी बनाने के लिए मिक्सर जार में ताजा हरा धनिया, हरी मिर्च, भुनी हुई मूंगफली, नींबू का रस और थोड़ा पानी डालें. सभी सामग्रियों को अच्छी तरह पीस लें, जब तक चटनी का टेक्सचर चिकना न हो जाए.
- अगर चटनी ज्यादा गाढ़ी लगे, तो जरूरत के अनुसार थोड़ा और पानी मिलाकर इसकी कंसिस्टेंसी ठीक कर लें. आप चाहें तो स्वाद के अनुसार सेंधा नमक भी मिला सकते हैं.
- अब तैयार गरमा-गरम लौकी-पनीर राजगिरा चीले को मूंगफली की हरी चटनी के साथ परोसें. लौकी, पनीर और राजगिरा के आटे से बना यह स्वादिष्ट चीला व्रत के दौरान खाने के लिए एक अच्छा विकल्प है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी खान-पान के विषय पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
खनिज परिवहन ट्रकों में जीपीएस लगाने के मामले में कोयंबटूर तमिलनाडु में अग्रणी
कोयंबटूर तमिलनाडु में खनिज परिवहन ट्रकों में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) उपकरण लगाने वाला अग्रणी जिला बनकर उभरा है। यहां राज्य सरकार द्वारा अनिवार्य स्थापना के लिए निर्धारित 31 अक्टूबर की समय सीमा से पहले ही अब तक 4,200 वाहनों को इन उपकरणों से लैस किया जा चुका है।
कोयंबटूर जिले में लगभग 7,000 ट्रक खनिज पदार्थों के परिवहन में लगे हुए हैं। इनमें से 60 प्रतिशत वाहनों में उपकरण लगाए जा चुके हैं और अधिकारी शेष ट्रकों को भी समय सीमा से पहले नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रयास तेज कर रहे हैं। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कोयंबटूर की सीमा केरल से लगती है और यह पड़ोसी राज्य में खनिज संसाधनों के परिवहन का मार्ग है। कोयंबटूर-केरल सीमा पर 13 चेक पोस्ट हैं, जहां अधिकारी खनिजों की अवैध आवाजाही को रोकने के लिए काम कर रहे हैं।
जीपीएस लगाना अनिवार्य
खनिज संसाधन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस संयुक्त रूप से अनधिकृत परिवहन के खिलाफ प्रवर्तन कार्रवाई कर रहे हैं। जीपीएस लगाना अनिवार्य करना राज्य सरकार के उन प्रयासों का हिस्सा है, जिनका उद्देश्य खनिज संसाधनों का परिवहन करने वाले वाहनों की निगरानी को मजबूत करना है।
सरकार के निर्देशानुसार, तमिलनाडु में खनिज परिवहन करने वाले ट्रकों में 31 अक्टूबर तक जीपीएस उपकरण लगाना अनिवार्य है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर इस आवश्यकता को पूरा न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कोयंबटूर में 2000 में ही जीपीएस उपकरण स्थापित
कोयंबटूर की प्रगति ने इसे ट्रैकिंग उपकरणों से लैस खनिज परिवहन वाहनों की संख्या में अन्य जिलों से आगे कर दिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ जिलों में खनिज परिवहन में लगे हुए 12,000 तक ट्रक हैं, लेकिन उनमें से केवल लगभग 2,000 में ही जीपीएस उपकरण स्थापित किए गए हैं।
एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि बजरी, लाल मिट्टी और अन्य खनिजों को ले जाने वाले ट्रक मालिकों के साथ स्थापना में तेजी लाने और सरकार के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए चर्चा की गई थी।
क्या बोले अधिकारी?
अधिकारी ने बताया, "ट्रक मालिकों को इंस्टॉलेशन प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। अब तक 4,200 वाहनों में जीपीएस डिवाइस लगाए जा चुके हैं।" शेष वाहनों में महीने के अंत तक इंस्टॉलेशन पूरा करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
खनिज परिवहन के लिए बड़ी संख्या में वाहनों के बेड़े और कई सीमा चौकियों के साथ, कोयंबटूर प्रवर्तन अभियान में एक महत्वपूर्ण जिला बना हुआ है। अधिकारी सीमा पार अवैध खनिज परिवहन की जांच के लिए जिम्मेदार विभागों के साथ समन्वित कार्रवाई के साथ-साथ वाहनों की स्थापना पर काम कर रहे हैं।
(DISCLAIMER: खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)
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