कर्नाटक में MSP और गन्ने के दाम पर बवाल, National Highway पर किसानों का चक्का जाम
कर्नाटक में गन्ना किसानों ने अपनी उपज की अधिक कीमत और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर मंगलवार को कई स्थानों पर राष्ट्रीय राजमार्गों पर जाम लगाया जिससे यातायात बाधित हुआ। बेलगावी, बागलकोट, विजयपुरा और धारवाड़ जिलों में विरोध प्रदर्शन हुए। इस दौरान पुणे-बेंगलुरु मार्ग और निदागुंडी के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-50 सहित कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ। बेलगावी जिले के हुक्केरी तालुक में हट्टार्गी टोल प्लाजा के पास किसानों ने पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर जाम लगाया।
जिले में कुगनोली जांच चौकी और हिरेबागेवाड़ी टोल प्लाजा के पास भी प्रदर्शन हुए। किसानों ने कहा कि मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। सोमवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई उनकी बैठक में गन्ने की कीमतों पर तत्काल कोई निर्णय नहीं हो सका। किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने, उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) निर्धारित करने और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की, लेकिन किसानों ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक नाकेबंदी जारी रहेगी।
धारवाड़ में किसान संगठनों ने पल्लीकोप्पा के पास राजमार्ग पर जाम लगाने का आह्वान किया। इसके मद्देनजर पुलिस ने एहतियात के तौर पर कर्नाटक राज्य रिजर्व पुलिस सहित अतिरिक्त बल तैनात किया। केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने सोमवार को किसानों से आंदोलन वापस लेने की अपील करते हुए आश्वासन दिया था कि केंद्र सरकार उनकी चिंताओं का समाधान करेगी।
किसान नेताओं के साथ बैठक के बाद जोशी ने कहा, भारत सरकार, मोदी सरकार आपके साथ है। यह काम केवल एक या दो मंत्रालयों के स्तर पर नहीं हो सकता, इसमें कई मंत्रालय शामिल हैं। राज्य सरकारों की भी भूमिका है और सभी राज्य सरकारों को इसमें शामिल होना होगा। जोशी ने कहा कि उन्होंने और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की शिकायतें सुनी हैं और इन मुद्दों की जांच के लिए एक समिति गठित की जाएगी।।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने भी सोमवार रात जोशी के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस मामले में दूसरे राज्यों के साथ विचार-विमर्श करना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा, यह केवल हमारे राज्य तक सीमित मुद्दा नहीं है। उन्हें दूसरे राज्यों से भी चर्चा करनी होगी। उन्होंने कहा है कि वे सभी से बात करेंगे और फिर कोई निर्णय लेंगे। वर्ष 2004 में गठित स्वामीनाथन आयोग ने भारतीय कृषि में संरचनात्मक सुधारों के लिए व्यापक रूपरेखा तैयार की थी, जिसे स्वामीनाथन रिपोर्ट के नाम से जाना जाता है।
Rahul Gandhi ने INDIA गठबंधन के नेताओं को चाय पर बुलाया, आंदोलन जारी रखने का ऐलान
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक दल ‘‘लोकतंत्र की रक्षा के जनांदोलन’’ में एकजुट हैं और यह आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मंगलवार शाम ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं, विपक्षी सांसदों, छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों के कई प्रतिनिधियों को अपने आवास ‘5 सुनहरी बाग रोड’ पर चाय पर आमंत्रित किया है। चाय के बाद ‘इंडिया’ गठबंधन के नेता मीडिया से बातचीत करेंगे। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘आज मैंने इंडिया गठबंधन के नेताओं, विपक्षी सांसदों, छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों के साथियों को अपने घर चाय पर बुलाया है।
लोकतंत्र की रक्षा के इस जनांदोलन में हम सब एक साथ हैं और यह आंदोलन लगातार जारी रहेगा। चाय के बाद हम सभी मिलकर मीडिया के सामने अपनी बात रखेंगे।’’ गांधी द्वारा सोमवार को भेजे गए निमंत्रण में कहा गया है, ‘‘आज लोकतंत्र के लिए मार्च और उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल किए जाने के बाद... ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं का मंगलवार दोपहर संयुक्त संवाददाता सम्मेलन होगा, चाय का कार्यक्रम भी होगा।
मैं आपको मंगलवार, 13 अक्टूबर को शाम चार बजे 5, सुनहरी बाग रोड, नयी दिल्ली स्थित अपने आवास पर आमंत्रित करता हूं।’’ सूत्रों ने बताया कि गांधी के आवास पर होने वाली बैठक के दौरान कथित ‘‘वोट चोरी’’ के खिलाफ संयुक्त विरोध-प्रदर्शनों की रणनीति पर विचार-विमर्श होने की संभावना है। विपक्षी दलों ने सोमवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उच्चतम न्यायालय की ओर मार्च निकाला था।
विपक्षी नेताओं ने इस मामले में उच्चतम न्यायालय में एक याचिका भी दायर की है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल पिछले कुछ समय से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर सरकार तथा निर्वाचन आयोग को घेर रहे हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची की शुचिता और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है। वे ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं।
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