कौन हैं आकृति अग्रवाल? जिन्होंने 26 दिन पहले पृथ्वी शॉ से तोड़ी थी सगाई, अब फिर थामा हाथ
Who is Akriti Agarwal: भारतीय क्रिकेटर पृथ्वी शॉ (Prithvi Shaw) और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आकृति अग्रवाल एक बार फिर चर्चा में हैं. दोनों ने कुछ समय पहले सगाई तोड़ने का फैसला किया था, लेकिन अब उनके रिश्ते में सुलह की खबर सामने आई है. आकृति ने खुद सोशल मीडिया पर बताया कि वो दूसरों की बातों में आ गई थी और जल्दबाजी में फैसला ले लिया था. अब दोनों ने आपस में बातचीत करके अपने मतभेद दूर कर लिए हैं. ऐसे में लोग जानना चाह रहे हैं कि आखिर आकृति अग्रवाल कौन हैं और क्या करती हैं.
कौन हैं आकृति अग्रवाल?
आकृति अग्रवाल (Akriti Agarwal) सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, कंटेंट क्रिएटर और एक्ट्रेस हैं. उनका जन्म 2 मई 2003 को लखनऊ में हुआ था. बाद में वो अपने परिवार के साथ मुंबई आ गई थी. आकृति सोशल मीडिया पर फैशन, डांस, लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट से जुड़े वीडियो शेयर करती रहती हैं. कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने वीडियो बनाना शुरू किया था और धीरे-धीरे उनके वीडियो लोगों के बीच पॉपुलर हो गए थे, जिसके बाद उनकी फैन फॉलोइंग बढ़ गई थी. इसके बाद उन्होंने एक्टिंग की दुनिया में भी कदम रखा. उन्होंने तेलुगु फिल्म ‘त्रिमुख’ और टीवी शो ‘छोटी सरदारनी’ में भी काम किया है.
पृथ्वी शॉ के साथ चर्चा में रिश्ता
आकृति अग्रवाल और पृथ्वी शॉ काफी समय से एक दूसरे को डेट कर रहे हैं. दोनों के रिश्ते की चर्चा तब तेज हुई, जब दोनों की साथ में तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आने लगी थी. इसके बाद इस साल मार्च 2026 में दोनों ने सगाई कर ली थी और फोटोज शेयर कर फैंस संग अपना रिस्ता एक्सेप्ट किया था. हालांकि, कुछ महीनों बाद उनके रिश्ते में अनबन की खबरें सामने आने लगीं थी. कहा जाने लगा था कि पृथ्वी ने आकृति को धोखा दिया है.
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आकृति ने पिछले महीने तोड़ दी थी सगाई
रिश्ते में चल रही अनबन की खबरों के बीच पिछले महीने 17 सितंबर 2026 को आकृति ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर पृथ्वी शॉ से अलग होने की बात कही थी. उन्होंने बताया था कि दोनों के फ्यूचर को लेकर सोच और परिस्थितियां अलग थीं. इसी वजह से उन्होंने आपसी सहमति से सगाई खत्म करने का फैसला किया. उस समय आकृति ने लोगों से उनकी पर्सनल लाइफ का सम्मान करने और अलग होने की वजहों पर अटकलें नहीं लगाने की अपील भी की थी.
अब फिर साथ आए पृथ्वी शॉ और आकृति
सगाई टूटने के 26 दिन बाद अब आकृति ने फिर से पृथ्वी का हाथ थाम लिया है. उन्होंने अपने फैसले को लेकर खुलकर बात की और बताया कि उस समय वो अपने आसपास के लोगों की बातों से प्रभावित हो गई थीं. उन्हें लगा कि दूसरे लोग उनके रिश्ते को उनसे बेहतर समझते हैं. आकृति ने पोस्ट में लिखा- 'मैंने उन लोगों की सलाह पर रिश्ता तोड़ लिया था, जो हमारे रिश्ते को बेहतर समझते थे. मैं उस समय गुमराह हो गई थी. मैं उस फैसले की जिम्मेदार हूं. अब हम दोनों ने सुलह करने का फैसला किया है और अब हम अपने रिश्ते में किसी भी बाहरी लोगों की दखल नहीं चाहती हैं.' सोशल मीडिया पर आकृति का पोस्ट काफी वायरल हो रहा है.
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सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए लंबी अवधि का नजरिया जरूरी, भविष्य में चिप बनेंगी आधार : एन.चंद्रशेखरन
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। टाटा संस के चेयरमैन एन.चंद्रशेखरन ने मंगलवार को कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र जैसे रणनीतिक क्षेत्र के लिए धैर्यवान पूंजी की आवश्यकता है और इसके लिए छोटी अवधि के लक्ष्यों से अधिक लंबी अवधि के नजरिए की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय राजधानी में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026 में बोलते हुए, चंद्रशेखरन ने कहा कि लक्ष्य दो साल में पूरे होते हैं या तीन साल में, यह अहम बात नहीं है क्योंकि चिप्स ही भविष्य का आधार बनने वाली हैं।
उन्होंने कहा कि दुनिया ने पहले भी मुश्किल दौर देखे हैं, लेकिन इस बार की स्थिति इसलिए अलग है क्योंकि भू-राजनीतिक उथल-पुथल, धातुओं की कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला जैसे संकट एक ही समय पर हो रहे हैं।
उन्होंने कहा, अगर आप इस सोच के साथ इसे डिजाइन करते हैं कि इसकी जरूरत भारत, इंसानियत और कंपनियों को है, तो आप सही दिशा में आगे बढ़ेंगे। इसका मतलब यह नहीं है कि सब कुछ आसानी से हो जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात पांच साल पहले के लगभग 12 अरब डॉलर से बढ़कर इस साल 48 अरब डॉलर हो गया है।
चंद्रशेखरन ने कहा कि महत्वाकांक्षा के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन भी जरूरी है।
उन्होंने कहा, आपको बैलेंस शीट पर नजर रखनी होगी। इसलिए आप लापरवाही नहीं बरत सकते।
उन्होंने कहा कि सिर्फ 2-नैनोमीटर चिप की घोषणा करने से काम नहीं चलेगा; टाटा को बाजार की मांग के हिसाब से चलना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को ग्लोबल पार्टनर्स की जरूरत है क्योंकि अभी हमारे पास सभी तरह की टेक्नोलॉजी मौजूद नहीं हैं।
इसके अलावा, चंद्रशेखरन ने इस बात से असहमति जताई कि मजबूती हासिल करने के लिए कार्यक्षमता से समझौता करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि उतार-चढ़ाव वाले माहौल में मजबूती के हिसाब से सिस्टम तैयार करना ही असल में कार्यक्षमता को बेहतर बनाने का एक तरीका है।
उन्होंने जैगुआर लैंड रोवर पर हुए साइबर हमले का उदाहरण दिया, जिसकी वजह से लगभग छह हफ्तों तक प्रोडक्शन रुका रहा। साथ ही, उन्होंने मैग्नेट की कमी जैसी आपूर्ति से जुड़ी दिक्कतों का भी जिक्र किया, जिनसे गाड़ियों का प्रोडक्शन रुक सकता है।
उन्होंने कहा कि इन झटकों के बावजूद, ग्रुप दोहरे अंकों की ग्रोथ हासिल करने और मार्जिन बनाए रखने की राह पर है।
--आईएएनएस
एबीएस
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