Tula Sankranti 2026: कब है तुला संक्रांति 2026? इस दिन गंगा स्नान क्यों किया जाता है? जानें महत्व
Tula Sankranti 2026: द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में तुला संक्रांति का पर्व 17 अक्टूबर को मनाया जाने वाला है. हिंदू धर्म में संक्रांति के दिन का बेहद खास महत्व होता है. इस दिन दान करने से और सूर्य देव की पूजा करने का विशेष महत्व होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संक्रांति तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए. साल में 12 संक्रांतियां आती हैं. इनमें मकर संक्रांति को सर्वोत्तम माना जाता है. उसके बाद तुला संक्रांति की विशेष मान्यता है. जब सूर्य का तुला राशि में प्रवेश होता है तो उस दिन तुला संक्रांति मनाई जाती है. इस दिन कई लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं, सूर्य देव को जल अर्पित करते हैं और दान-पुण्य करते हैं. लेकिन तुला संक्रांति पर गंगा स्नान को लेकर और भी कई धार्मिक मान्यताएं हैं. चलिए जानते हैं इस बारे में.
कब है तुला संक्रांति 2026? (Tula Sankranti 2026 Date)
द्रिक पंचांग के अनुसार, सूर्य का तुला राशि में प्रवेश 17 अक्टूबर को लगभग शाम 7 बजकर 50 मिनट पर होगा. इसके बाद 16 नवंबर तक इसी राशि में रहेंगे.
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तुला संक्रांति 2026 का पंचांग (Tula Sankranti 2026 Panchang)
- सूर्योदय- 17 अक्टूबर को सुबह 6:28 मिनट पर
- सूर्यास्त- 17 अक्टूबर को शाम 5:56 मिनट पर
- संक्रांति क्षण- 17 अक्टूबर को शाम 7 बजकर 48 मिनट पर
- पुण्य काल मुहूर्त- 17 अक्टूबर को दोपहर 12:12 से लेकर शाम 5:56 मिनट तक
- महा पुण्य काल मुहूर्त- 17 अक्टूबर को अपराह्न काल में 4:02 से लेकर अपराह्न 5:56 मिनट तक
इस दिन होने वाले प्रमुख अनुष्ठान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ओडिशा और कर्नाटक में इस दिन देवी लक्ष्मी और देवी पार्वती की पूजा की जाती है. देवी लक्ष्मी को ताजे चावल के दाने, गेहूं के दाने और करेला के पौधे की शाखाएं चढ़ाई जाती है. वहीं, इस दिन पार्वती माता को पान के पत्ते, ताड़ के बीज, चंदन का पेस्ट, सिंदूर का पेस्ट और चूड़ियां अर्पित की जाती हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दिन का उत्सव मनाने से अकाल की समस्या और सूखे की समस्या से राहत मिलती है. किसानों की आय में वृद्धि होती है.
तुला संक्रांति पर गंगा स्नान का महत्व क्या है? (Tula Sankranti Significance)
सनातन धर्म में गंगा नदी को अत्यंत पवित्र माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा नदी में इस दिन पर डुबकी लगाने से मन की शुद्धि होती है और व्यक्ति को कई पुण्य प्राप्त होते हैं. संक्रांति के दिन पर पवित्र नदियों में स्नान करना शुभ माना जाता है. इसलिए, इस दिन पर वर्षों से गंगा स्नान करने की परंपरा निभाई जा रही है. इस खास दिन पर श्रद्धालु पवित्र नदी में स्नान करके सूर्य देव को जल अर्पित करते हैं और परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं.
गंगा स्नान न कर पाएं, तो क्या करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कई बार लोग गंगा स्नान नहीं कर पाते हैं जैसे की दूरी, समय और दूसरे कारणों से लोगों के लिए गंगा नदी तक पहुंचना संभव नहीं हो पाता है. ऐसे में धार्मिक परंपराओं में घर पर स्नान करने की मान्यता है. आप तुला संक्रांति के दिन सुबह उठकर पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं. इसके पश्चात सूर्यदेव को जल अर्पित करें. साथ ही इस दिन जरूरतमंदों को भोजन तथा अन्य चीजों का दान कर सकते हैं.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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