बरेली में आज से एयर शो: आसमान में गरजेंगे 5 ध्रुव हेलिकॉप्टर, 8 साल बाद दिखेगा सारंग टीम का रोमांचक प्रदर्शन
UP News: बरेली में 8 साल बाद वायुसेना की सारंग टीम का शानदार एयर शो होने वाला है. 5 स्वदेशी ध्रुव हेलीकॉप्टर हैरतअंगेज करतब दिखाएंगे, जो खासकर विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक होगा.
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Steel Policy 2047: आयात निगरानी के लिए AI और डेटा विश्लेषण का प्रस्ताव
प्रस्तावित इस्पात नीति में कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित व्यवस्था और उन्नत डेटा विश्लेषण का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है, ताकि आयात के असामान्य रुझानों का जल्द पता लगाया जा सके और घरेलू इस्पात उद्योग में प्रतिस्पर्धा बढ़ाई जा सके। नेशनल स्टील पॉलिसी विजन 2047 (राष्ट्रीय इस्पात नीति परिकल्पना-2047) के मसौदे के अनुसार, अनावश्यक आयात निर्भरता कम करने, भारत के इस्पात क्षेत्र को मजबूत बनाने और इस्पात उद्योग के साथ-साथ इससे जुड़े विनिर्माण क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धा, मजबूती तथा दीर्घकालिक वृद्धि बढ़ाने के लिए गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निष्पक्ष व्यापार और घरेलू क्षमता पर आधारित तीन-स्तरीय रणनीति अपनाई जानी चाहिए। प्रस्तावित नीति का उद्देश्य 2047 तक भारतीय इस्पात उद्योग के विकास के लिए एक रूपरेखा तैयार करना है।
सरकार ने नई नीति का प्रस्ताव इसलिए किया है क्योंकि मौजूदा चुनौतियों और इस्पात क्षेत्र की जरूरतों को देखते हुए राष्ट्रीय इस्पात नीति, 2017 की समीक्षा जरूरी हो गई थी। कृत्रिम मेधा (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल) और तकनीकी उन्नयन जैसी उभरती प्राथमिकताओं पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। देश की इस्पात उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 60.4 करोड़ टन करने, कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने और प्रौद्योगिकी को उन्नत बनाने के अलावा नई नीति में घरेलू उद्योग को समर्थन देने के लिए घटिया इस्पात के आयात पर रोक लगाने पर विशेष जोर दिया गया है।
मसौदे के अनुसार, घटिया या निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होने वाले इस्पात का आयात, आयात में अचानक बढ़ोतरी और व्यापार संबंधी उपायों से बचने की संभावित कोशिशें घरेलू उत्पादकों के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। नीति के मसौदे में कहा गया कि इन चिंताओं को दूर करने के लिए जांच, प्रमाणन, उत्पाद की आपूर्ति एवं आवाजाही का पता लगाने तथा आयात की वास्तविक समय में निगरानी पर आधारित मजबूत व्यवस्था की जरूरत है। इसके साथ ही, आयात के असामान्य रुझानों का जल्द पता लगाने के लिए उन्नत डेटा विश्लेषण का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
नीति का यह मसौदा संबंधित पक्षों से सुझाव लेने के लिए जारी किया गया है। इसमें कहा गया है, ‘‘घटिया और कम गुणवत्ता वाले इस्पात के आयात को हतोत्साहित करने के उपाय जारी रहेंगे। इनमें एआई आधारित आयात निगरानी और व्यापार संबंधी अन्य सुधारात्मक उपाय शामिल हैं।
अच्छी गुणवत्ता वाले इस्पात के निर्यात को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।’’ दस्तावेज के अनुसार, भारत के इस्पात आयात में 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी उन देशों की है, जिनके साथ भारत ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं। वैश्विक इस्पात क्षेत्र में संरक्षणवाद बढ़ रहा है। कई देश कम लागत वाले आयात, अनुचित व्यापार गतिविधियों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से पैदा होने वाली आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं से अपने घरेलू उद्योगों को बचाने के लिए उपाय अपना रहे हैं।
मसौदे में कहा गया कि जहां अनुचित व्यापार गतिविधियां साबित हों, वहां वाणिज्य विभाग के व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) और अन्य संबंधित पक्षों के साथ समन्वय कर समय पर और साक्ष्यों पर आधारित डंपिंग-रोधी, प्रतिकारी तथा सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए। ऐसे हस्तक्षेप लक्षित और जरूरत के अनुपात में होने चाहिए, ताकि इससे जुड़े अन्य उद्योगों को जरूरी कच्चा माल किफायती कीमतों पर मिलता रहे। घरेलू उद्योग को अनुचित आयात से बचाने के साथ ही आयात नीति के तहत विशेष और मूल्यवर्धित इस्पात की उन किस्मों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए, जिनका देश में पर्याप्त उत्पादन नहीं होता।
ऐसे आयात पर निर्भरता कम करने के लिए उन्नत धातुकर्म प्रौद्योगिकियों, स्वचालन, अनुसंधान एवं विकास, गुणवत्ता प्रणालियों, उत्पादकता बढ़ाने, ऊर्जा दक्षता, कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश की जरूरत है। मसौदा नीति के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत तैयार इस्पात का शुद्ध निर्यातक था। वित्त वर्ष 2025-26 में तैयार इस्पात का आयात 32 प्रतिशत घटकर 65 लाख टन रह गया, जबकि निर्यात 36 प्रतिशत बढ़कर 66 लाख टन हो गया।
चालू वित्त वर्ष में हालांकि यह रुझान उलट गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े इस्पात उत्पादक देश भारत ने चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-अगस्त के दौरान 36,193.9 करोड़ रुपये के तैयार इस्पात का आयात किया और इस अवधि में वह इस जिंस का शुद्ध आयातक बना रहा। चीन, दक्षिण कोरिया, जापान, इंडोनेशिया और वियतनाम तैयार इस्पात के आयात में सबसे बड़ा योगदान देने वाले शीर्ष पांच देश रहे।
अप्रैल-अगस्त में तैयार इस्पात का कुल आयात 34.873 लाख टन रहा, जो वित्त वर्ष 2025-26 की इसी अवधि के 26.928 लाख टन के मुकाबले 29.5 प्रतिशत अधिक है।
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