UP Board Time Table 2027
Uttar Pradesh Madhyamic Shiksha Parishad UPMSP High School 10th and Intermediate 12th Exam Time Table / Date Sheet 2027 Post Date: 13-10-2026 Short Description : Uttar Pradesh Madhyamic Shiksha Parishad UPMSP has issued Class 10 High School Examination 2022 and Class 12 Inter Exam Time Table 2027 , any candidate who is registered in this ...
कर्नाटक HC ने SC और ST Reservation बढ़ाने वाले 2022 के कानून के प्रावधान रद्द किए
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अनुसूचित जातियों (एससी) के लिए आरक्षण 15 से बढ़ाकर 17 प्रतिशत और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लिए तीन से बढ़ाकर सात प्रतिशत करने संबंधी 2022 के राज्य के कानून के प्रावधानों को सोमवार को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि बढ़ा हुआ आरक्षण 50 प्रतिशत की अधिकतम सीमा का उल्लंघन करता है। मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू और न्यायमूर्ति के. एस. हेमलेखा की पीठ ने कहा कि ‘कर्नाटक अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (शैक्षणिक संस्थानों में सीट और राज्य के अधीन सेवाओं में नियुक्तियों या पदों का आरक्षण) अधिनियम, 2022’ की धारा-3, कुल आरक्षण को 50 प्रतिशत से अधिक ले जाकर संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन करती है। अदालत ने अपने फैसले में कहा, “अधिनियम की धारा-3 को उस सीमा तक निरस्त किया जाता है, जहां तक इसके तहत कुल आरक्षण 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक हो जाता है क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन करता है।” अदालत ने अधिनियम की धारा-4 को भी निरस्त कर दिया जिसके तहत राज्य सरकार की सेवाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण बढ़ाने का प्रावधान था।
अदालत ने इसे ‘‘असंवैधानिक’’ करार देते हुए कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करती है। आरक्षण की 50 प्रतिशत की अधिकतम सीमा उच्चतम न्यायालय ने 1992 के ऐतिहासिक ‘इंदिरा साहनी बनाम भारत सरकार’ मामले में निर्धारित की थी। बाद के कई फैसलों में भी इस सीमा को बरकरार रखा गया है।
उच्च न्यायालय का यह फैसला कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं पर आया। इस कानून के तहत अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 56 प्रतिशत कर दिया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई नीत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के कार्यकाल में पारित इस विधेयक को 11 जनवरी 2023 को राज्यपाल की मंजूरी मिली थी।
इसके अगले दिन, 12 जनवरी 2023 को इसे कर्नाटक राजपत्र में प्रकाशित किया गया था। इस बीच, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण में वृद्धि को रद्द करने का उच्च न्यायालय का फैसला एक गंभीर घटनाक्रम है। इसका राज्य में सामाजिक न्याय, शैक्षणिक अवसरों और सरकारी नौकरियों पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा, “हम न्यायपालिका और उस संवैधानिक ढांचे का सम्मान करते हैं, जिसके तहत वह काम करती है। इसके साथ ही, यह फैसला पूर्ववर्ती भाजपा सरकार की राजनीतिक जवाबदेही और केंद्र की भाजपा नीत सरकार की निरंतर निष्क्रियता पर बुनियादी सवाल खड़े करता है।
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