Explainer: 4 राज्यों में इसी महीने से शुरू हो जाएगी जनगणना, क्या जाति प्रमाण पत्र दिखाना भी होगा अनिवार्य? जानें सबकुछ
जनगणना 2027 के दूसरे चरण की आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दी गई है. हालांकि, ये नोटिफिकेशन केंद्र सरकार ने लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ़बारी वाले उन इलाकों के लिए जारी किया है, जहां सामान्य मौसम में काम करने में दिक्कत होती है. हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बर्फबारी वाले इलाकों में जनगणना का दूसरा चरण 1 से 30 सितंबर के बीच होगा. सोमवार को केंद्र सरकार ने इसका नोटिफिकेशन जारी किया था.
नोटिफिकेशन में क्या कहा?
नोटिफिकेशन में भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजर कुमार नारायण ने बताया था कि इन इलाकों में इस वर्ष 1 सितंबर से 30 सितंबर के बीच जनगणना का काम किया जाएगा. इसके बाद 1 से लेकर 5 अक्टूबर तक जानकारी को दोबारा जांचने का काम किया जाएगा. नोटिफिकेशन के अनसार, अधिकारी घर-घर जाकर गिनती शुरू करें, उससे पहले आपको 17 से 31 अगस्त तक खुद जानकारी भरने का मौका मिलेगा.
Notification for the conduct of Phase II of Census 2027 i.e. Population Enumeration (PE), has been issued for the Union Territory of Ladakh, the snow-bound non-synchronous areas of the Union Territory of Jammu & Kashmir, and the snow-bound non-synchronous areas of the States of… pic.twitter.com/v56bHb7Myr
— Census India 2027 (@CensusIndia2027) August 3, 2026
बता दें, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 1 अक्टूबर, 2026 को रात 12 बजे से जनगणना शुरू हो जाएगी. वहीं, देश के बाकी हिस्सों में जनगणना का दूसरा चरण अगले साल शुरू होने की संभावना है.
दो चरणों में की जा रही जनगणना
आजादी के बाद से अब तक ये आठवीं जनगणना होगी. इसे 2 चरणों में आयोजित किया जा रहा है. पहले चरण में हाउस लिस्टिंग या फिर हाउसिंग सेसस और दूसरे चरण में जनसंख्या की गणना की जाएगी. इसी दौरान, जाति के संबंध में जानकारी ली जाएगी. पिछले साल 30 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स ने जनगणना में जाति की गिनती को शामिल करने का फैसला किया था.
दूसरे चरण में 33 सवाल
पहले चरण में घरों की सूची बनाना और आवास जनगणना का काम हो रहा है, जो 30 सितंबर तक चलेगा. कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तो 16 अप्रैल से ही घरों की लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस के लिए फील्ड विजिट शुरू कर दिया गया था. जनगणना करने वाले कर्मचारी देश भर की सभी इमारतों, घरों और परिवारों की सूची बनाएंगे, जिससे जनसख्या की गिनती के लिए आधार तय किया जा सके. दूसरे चरण में जनगणना अधिकारी एक-एक घरों में जाएंगे और 33 सवाल पूछेंगे. इन सवालों में घरों में बुनियादी सुविधाएं, परिवार के मुखिया की जानकारी और घर के मालिकाना हक की स्थिति सहित दूसरी जानकारियां शामिल होंगी.
आखिर वे 33 सवाल कौन से होंगे, जिन्हें पूछा जाएगा, आइये जानते हैं…
- भवन नंबर (नगर या स्थानीय प्राधिकारी अथवा जनगणना नंबर)/Building Number (Municipal or local authority or census number)
- मकान नंबर/House Number
- मकान के फर्श में प्रमुख सामग्री/Predominant material of the floor
- मकान के दीवार में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री/Predominant material used in the wall
- मकान के छत में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री/Predominant material used in the roof
- मकान के उपयोग/Use of the house
- मकान की हालत/Condition of the house
- परिवार क्रमांक/Household Number
- परिवार के सदस्यों की संख्या/Number of family members
- परिवार के मुखिया का नाम/Name of the head of the household
- परिवार के मुखिया का लिंग/Gender of the head of the household
- अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य/SC / ST / Others
- मकान के स्वामित्व की स्थिति/Ownership status of the house
- मकान में कमरों की संख्या/Number of rooms in the house
- परिवार में विवाहित दंपतियों की संख्या/Number of married couples in the family
- पेयजल का मुख्य स्रोत/Main source of drinking water
- पेयजल स्रोत की उपलब्धता/Availability of drinking water source
- लाइट का मुख्य स्रोत/Main source of lighting
- शौचालय की उपलब्धता/Availability of a latrine
- शौचालय का प्रकार/Type of latrine
- गंदे पानी की निकासी/Waste water outlet/drainage
- स्नानघर की उपलब्धता/Availability of a bathroom
- रसोईघर, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन/Kitchen, LPG/PNG connection
- खाना पकाने के लिए मुख्य ईंधन/Main fuel used for cooking
- रेडियो/ट्रांजिस्टर/Radio/Transistor
- टेलीविजन/Television
- इंटरनेट सुविधा/Internet facility
- लैपटॉप/कम्प्यूटर/Laptop/Computer
- टेलीफोन/मोबाइल फोन/स्मार्ट फोन/Telephone/Mobile phone/Smartphone
- साइकिल/स्कूटर/मोटरसाइकिल/मोपेड/Bicycle/Scooter/Motorcycle/Moped
- कार/जीप/वैन/Car/Jeep/Van
- मुख्य अनाज/Main cereal consumed
- मोबाइल नंबर/Mobile Number
जाति प्रमाण पत्र भी दिखाना होगा?
दूसरे चरण के दौरान, लोगों से उनकी जाति के बारे में सवाल किया जाएगा. ऐसे में लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या लोगों को जाति प्रमाण पत्र भी दिखाना पड़ेगा? तो इसका जवाब है- नहीं. जाति जनगणना में अपनी जाति बनाने के लिए कोई भी जाति प्रमाण पत्र या फिर अन्य दस्तावेज दिखाना अनिवार्य नहीं हैं. नागरिक जो भी जाति बताएंगे, स्वघोषणा के आधार पर उसे दर्ज कर लिया जाएगा. अधिकारियों द्वारा आपके द्वारा बताई गई जाति और उसकी स्पेलिंग को वैसे का वैसा ही रिकॉर्ड कर लिया जाएगा. गणना के वक्त अधिकारियों द्वारा कोई भी प्रमाण पत्र या फिर कागजात नहीं मांगे जाएंगे. ध्यान दें कि जनगणना के आंकड़े सिर्फ गिनती के लिए ही है, आरक्षण या फिर अन्य सरकारी लाभों के लिए आधिकारिक जाति प्रमाण पत्र ही मान्य रहेगा.
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2026 में क्यों हो रही जनगणना?
बता दें, जनगणना हर 10 साल में एक बार होती है. 2026-27 में हो रही जनगणना 2021 में होने वाली थी लेकिन कोविड-19 महामारी की वजह से उसे टाल दिया गया था. केंद्रीय मंत्रीमंडल ने जनगणना करवाने के लिए 11,718 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है.
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आखिरी जनगणना 2011 में हुई
देश में आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी. उस वक्त देश की आबादी 121 करोड़ के आसपास थी. 2011 में हिंदुओं की आबादी 79.80 प्रतिशत थी. वहीं, उस वक्त देश में मुस्लिमों की आबादी 14.23 प्रतिशत थी. 2011 में ईसाई 2.73 प्रतिशत, सिख 1.72 प्रतिशत, बौद्ध 0.70 प्रतिशत और जैन 0.37 प्रतिशत थे. वहीं अन्य धर्मों की आबादी 0.19 प्रतिशत थी.
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Mangala Gauri Vrat 2026: आज है श्रावण मास का पहला मंगला गौरी व्रत, जरूर पढ़ें माता पार्वती की यह कथा
Mangala Gauri Vrat 2026: आज यानी 4 अगस्त 2026 को सावन मास का पहला मंगला गौरी व्रत कथा जा रहा है. इस दिन माता पार्वती की पूजा करने का विधान होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी विवाहित स्त्रियां इस व्रत को करती है उन्हें दांपत्य जीवन में सफलता मिलती है. जो कन्याएं सुयोग्य वर की कामना करती है, उन्हें भी मंगला गौरी व्रत रखना चाहिए. मंगला गौरी व्रत की पूजा के दौरा माता पार्वती की पूजा की जाती है. उन्हें सोलह श्रृंगार अर्पित किया जाता है. मां गौरी के मंत्रों का जाप किया जाता है. मंगला गौरी व्रत का पूरा लाभ प्राप्त करने के लिए व्रत कथा का पाठ करना चाहिए. इस कथा के बिना व्रत अधूरा हो जाता है. साथ ही पूजन का अंत पार्वती मां की आरती से करना चाहिए.
मंगला गौरी व्रत कथा
मंगला गौरी व्रत से एक प्रचलित कथा जुड़ी हुई है. इस कथा के अनुसार, प्राचीन काल में धर्मपाल नाम का सेठ रहता था जिसके पास धन की कोई कमी नहीं थी. वह सेठ सर्वगुण संपन्न था और भगवान शिव का परम भक्त हुआ करता था. सेठ धर्मपाल की शादी एक गुणवान और रूपवान लड़की से हुई थी. मगर उनकी कोई संतान नहीं थी. संतान प्राप्ति की कोशिश में दोनों पति-पत्नी लंबे समय से जुटे हुए थे. इसके बाद सेठ ने एक पंडित से पूछा तो उन्होंने महादेव और पार्वती माता की पूजा करने की सलाह दी. इसके बाद दोनों पति-पत्नी महाकाल और देवी गौरी की पूजा-उपासना करने लगे.
धर्मपाल और उसकी पत्नी को मिला वरदान
इस उपासना से प्रसन्न होकर महादेव और माता पार्वती ने धर्मपाल की पत्नी के समक्ष प्रकट हुए और उन्होंने उससे वरदान मांगने के लिए कहा. इस पर धर्मपाल की पत्नी ने संतान प्राप्ति की इच्छा जाहिर की. भगवान शिव और मां पार्वती ने धर्मपाल और उसकी पत्नी को संतान वरदान का आशीर्वाद दे दिया लेकिन साथ में यह भी बताया कि संतान अल्पायु होगी.
धर्मपाल के घर पुत्र ने जन्म लिया. ज्योतिष से सलाह लेने के बाद धर्मपाल ने अपने पुत्र की शादी ऐसी कन्या से करवाई जो मंगला गौरी व्रत करती थी. समय बीतने पर पता चला कि धर्मपाल के पुत्र की मृत्यु नहीं हुई और वह दीर्घायु तक जी पाया.
इसलिए, विवाहित महिलाएं रखती है व्रत
इस कारण से सभी नवविवाहित महिलाएं इस पूजा को करती हैं तथा गौरी व्रत का पालन करती हैं और अपने लिए एक लंबी, सुखी तथा स्थायी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं. जो महिला इस मंगला गौरी व्रत का पालन नहीं कर सकती हैं, उस महिला को श्री मंगला गौरी पूजा को तो कम से कम करना ही चाहिए.
कथा सुनने के बाद जरूर करें ये काम
- इस कथा को सुनने या पढ़ने के पश्चात सभी विवाहित स्त्रियां अपनी सास एवं नन्द को 16 लड्डू देती है. इसके उपरांत वे यही प्रसाद ब्राह्मण को भी ग्रहण करवाती है. इस विधि को पूरा करने के बाद व्रती 16 बाती वाले दीपक से देवी की आरती करते हैं.
- व्रत के दूसरे दिन यानी बुधवार को देवी मंगला गौरी की प्रतिमा को नदी या पोखर में विसर्जित किया जाता है. अंत में मां गौरी के सामने हाथ जोड़कर अपने समस्त अपराधों के लिए एवं पूजा में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगनी होती है. इस व्रत एवं पूजा के अनुष्ठान को परिवार की खुशी के लिए लगातार 5 सालों तक किया जाता है.
- अत: इस मंगला गौरी व्रत को नियमानुसार करने से प्रत्येक व्रती के वैवाहिक जीवन में सुख की प्राप्ति होती है तथा पुत्र-पौत्रादि की प्राप्ति एवं उनका जीवन भी सुखपूर्वक व्यतीत होता है, ऐसी इस मंगला गौरी व्रत की महिमा वर्णित की जाती है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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