भोपाल-ग्वालियर रीजन के 10.11 लाख स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को राहत, सितंबर माह में ‘ToD’ टैरिफ के तहत मिली 10 करोड़ की छूट
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यक्षेत्र के भोपाल और ग्वालियर रीजन के अंतर्गत आने वाले 16 जिलों के स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए सितंबर का महीना राहत लेकर आया। इन उपभोक्ताओं को कंपनी की टाइम ऑफ डे (ToD) टैरिफ व्यवस्था के तहत सोलर आवर्स में बिजली की खपत पर विशेष छूट दी गई। इस व्यवस्था में 10 लाख 11 हजार से अधिक स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को करीब 10 करोड़ की छूट दी गई।
सितंबर 2026 में कंपनी के कार्यक्षेत्र के कुल 10 लाख 11 हजार 291 स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को बिजली बिलों में कुल 10 करोड़ रुपये से अधिक की ToD छूट का लाभ मिला। इनमें भोपाल रीजन के 8 लाख 17 हजार 227 उपभोक्ताओं को 7 करोड़ 33 लाख 47 हजार रुपये तथा ग्वालियर रीजन के 1 लाख 94 हजार 64 उपभोक्ताओं को 2 करोड़ 66 लाख 76 हजार रुपये की छूट प्रदान की गई।
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक ऋषि गर्ग ने बताया कि ToD टैरिफ के तहत स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को सोलर आवर्स (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) बिजली उपयोग करने पर ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर में 10 किलोवाट तक स्वीकृत लोड/अनुबंध मांग वाले उपभोक्ताओं को 20% तक की छूट दी जा रही है। स्मार्ट मीटर से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए उपभोक्ता 1912 पर संपर्क कर सकते हैं या फिर कैलाश कुमार चौधरी, प्रबंधक (स्मार्ट मीटरिंग सेल) से संपर्क कर सकते हैं। साथ ही Smartmeteringcellbhopal@gmail.com पर ई-मेल के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
स्मार्ट मीटर से मिलने वाले फायदे
- ऊर्जा की खपत को ट्रैक करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद करता है।
- बिजली की खपत को सटीक रूप से मापता है।
- बिल में कोई गलती नहीं होती।
- ऐप के जरिए मोबाइल पर रियल-टाइम डेटा देखकर ऊर्जा की खपत को नियंत्रित कर सकते हैं।
- ऊर्जा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलती है।
- ऊर्जा की खपत को ऑनलाइन ट्रैक करने और नियंत्रित करने की सुविधा मिलती है।
सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली का उपयोग करें और पाएं 20% तक की विशेष छूट!
समय के अनुसार बिजली का उपयोग करें,
बिजली बिल में बचत करें।#ToD #TimeOfDay #बिजली_बचत #MPMKVVCL https://t.co/nbQJeTvYDm
— MPMKVVCL (@mpczDiscom) October 12, 2026
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सितंबर माह में ‘टाइम ऑफ डे’ टैरिफ के तहत
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मोटर पार्ट्स का कारोबार करने वाले व्यक्ति से 55 लाख रुपए की ठगी, ISI और ATS के नाम पर डराया, रतलाम पुलिस ने 3 आरोपी पकड़े
रतलाम में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ऑटो पार्ट्स कारोबारी आशिक हुसैन से 55 लाख रुपए की ठगी के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दरअसल आरोपियों में दो हैदराबाद और एक कर्नाटक के धारवाड़ से पकड़ा गया है। ठगों ने कारोबारी को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से संपर्क और टेरर फंडिंग के मामले में फंसाने का डर दिखाया था। पुलिस ने ठगी की रकम में से 20 लाख रुपए पहले ही होल्ड करवा दिए थे।
दरअसल रतलाम के माणकचौक थाना क्षेत्र में रहने वाले ऑटो पार्ट्स कारोबारी आशिक हुसैन को ठगों ने सितंबर में तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर घर में कैद रखा। आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर कारोबारी पर गंभीर आरोप लगाए और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया। इस दौरान उनसे अलग-अलग बैंक खातों में RTGS के जरिए करीब 55 लाख रुपए जमा करवा लिए गए। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस और साइबर सेल ने बैंक खातों और ट्रांजेक्शन की जांच शुरू की। इसी जांच के आधार पर तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
कुवैत में मोटर पार्ट्स का व्यवसाय
बता दें कि कारोबारी का कुवैत में मोटर पार्ट्स का व्यवसाय है और वह पिछले छह महीने से रतलाम में रह रहे थे। पुलिस के मुताबिक ठगों ने उन्हें बताया कि उनके मोबाइल नंबर का इस्तेमाल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े लोगों से संपर्क और आतंकवादी फंडिंग के लिए किया गया है। इसके बाद अलग-अलग नंबरों से कॉल कर उन्हें जांच के नाम पर डराया गया। अब पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी की रकम कहां-कहां भेजी गई और इस मामले में और कौन लोग शामिल हैं।
रकम अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराई गई
वहीं पुलिस की जांच में सामने आया कि कारोबारी से ठगी गई रकम अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराई गई थी। इनमें से एक एक्सिस बैंक खाते में 35 लाख रुपए जमा होने की जानकारी मिली। बैंक से पता चला कि यह खाता SRI VENKATESHWARA PRI LIMITED नाम की कंपनी से जुड़ा था। खाते और कंपनी से संबंधित जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम हैदराबाद पहुंची और कोडारी वेंकटेश को गिरफ्तार किया।
पुलिस ने हैदराबाद से आरोपी को गिरफ्तार किया
इसके बाद बैंक ट्रांजेक्शन की आगे जांच की गई। पुलिस टीम ने कर्नाटक के धारवाड़ से अशोक अन्यया को गिरफ्तार किया। जांच में एक अन्य खाते में 5 लाख 84 रुपए ट्रांसफर होने की जानकारी भी सामने आई। इस खाते से जुड़े मीर यूसुफ को भी पुलिस ने हैदराबाद से गिरफ्तार कर लिया। तीनों आरोपियों को अब कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी है ताकि ठगी की रकम के लेन-देन और दूसरे लोगों की भूमिका के बारे में पूछताछ की जा सके।
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कोडारी वेंकटेश पिता राजन्ना कोडारी, तेलंगाना, अशोक अन्यया, निवासी मराठा कॉलोनी, धारवाड़, कर्नाटक; और मीर यूसुफ पिता मीर आजम, निवासी चारमीनार, मदीना नगर, हैदराबाद के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि बैंक खातों की जांच से ठगी के नेटवर्क की अलग-अलग कड़ियों का पता चला है। अब यह जांच की जा रही है कि इन खातों का इस्तेमाल किस तरह किया गया और रकम आगे किन लोगों तक पहुंचाई गई। रतलाम के एसपी अमित कुमार के मुताबिक, मामले में हैदराबाद से दो और धारवाड़ से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस पूछताछ और बैंक खातों की जांच के जरिए अन्य लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।
जानिए क्या है पूरा मामला?
दरअसल इस ठगी की शुरुआत 15 सितंबर 2026 को हुई थी। एक अज्ञात व्यक्ति ने कारोबारी को कॉल कर खुद को मुंबई के कोलाबा इलाके का पुलिस अधिकारी बताया। उसने कारोबारी के मोबाइल नंबर, व्यवसाय और भारत में रहने से जुड़ी जानकारी पूछी। इसके बाद एक दूसरे मोबाइल नंबर का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उसका इस्तेमाल पाकिस्तान की ISI से जुड़े एजेंट से बातचीत के लिए किया गया है। इसके बाद अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल आए। कॉल करने वालों ने खुद को पुलिस अधिकारी और वरिष्ठ निरीक्षक बताते हुए कहा कि कारोबारी के खिलाफ FIR दर्ज है। आरोपियों ने उनसे आधार कार्ड और पैन कार्ड से जुड़ी जानकारी भी ली। फिर उन्हें बताया गया कि जरूरी NOC नहीं होने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
ऐसे जाल में फंसाया
16 सितंबर को ठगों ने कॉल को कथित तौर पर ATS विभाग में ट्रांसफर करने का नाटक किया। इसके बाद वॉट्सऐप वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी पहने लोगों से बात कराई गई। आरोपियों ने हथियारों से जुड़ी तस्वीरें भेजकर उनमें दिख रहे लोगों की पहचान करने को कहा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के लेटरहेड पर तैयार कथित दस्तावेज भेजकर कारोबारी को विश्वास दिलाने की कोशिश की कि उनके खिलाफ मामला दर्ज है। कानूनी कार्रवाई से बचाने और बैंक खातों के सत्यापन का बहाना बनाकर आरोपियों ने कारोबारी से 55 लाख रुपए अलग-अलग खातों में RTGS के जरिए जमा करवा लिए। उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि जांच पूरी होने के बाद पूरी रकम वापस कर दी जाएगी।
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