मस्क का डेढ़ साल पहले अपमान, अब सम्मान:ट्रम्प ने नेशनल साइंस मेडल से नवाजा, कहा- इलॉन हमारे दौर के एडिसन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में आयोजित ‘साइंस: ए न्यू गोल्डन एज समिट’ में इलॉन मस्क को नेशनल मेडल ऑफ साइंस से सम्मानित किया। करीब डेढ़ साल पहले तक दोनों के बीच ट्रम्प सरकार की नीतियों को लेकर विवाद चल रहा था। जुलाई 2025 में ट्रम्प ने मस्क को अमेरिका से निकालने तक की धमकी दी थी। अब ट्रम्प ने मस्क की तारीफ करते हुए उन्हें ‘राष्ट्रीय धरोहर’ और ‘हमारे दौर का थॉमस एडिसन’ बताया। अवार्ड देने से पहले ट्रम्प ने मस्क को उद्योग जगत का दिग्गज, शानदार इंजीनियर और अब तक के सबसे महान टेक्नोलॉजी फाउंडर्स में से एक बताया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष खोज, तकनीक और इनोवेशन में मस्क के योगदान और उनके दृढ़ संकल्प ने विज्ञान-कथा को हकीकत में बदल दिया है। ट्रम्प ने टेस्ला में मस्क की भूमिका की तारीफ की ट्रम्प ने टेस्ला की स्थापना में मस्क की भूमिका की भी तारीफ की। उन्होंने टेस्ला को 75 साल से ज्यादा समय में सफल होने वाली पहली नई कार निर्माता कंपनी बताया और कहा कि कंपनी ने इलेक्ट्रिक कारों और सेल्फ-ड्राइविंग तकनीक को व्यावसायिक रूप से सफल बनाया। ट्रम्प ने अपने चाचा डॉ. जॉन ट्रम्प का भी जिक्र किया, जिन्हें अमेरिकी सरकार ने आविष्कारक निकोला टेस्ला के काम का आकलन करने के लिए नियुक्त किया था। उन्होंने मस्क के न्यूरालिंक और सुपरइंटेलिजेंस से जुड़े काम की भी तारीफ की। ट्रम्प ने कहा कि मस्क ऐसे लोगों की नजर, बोलने और चलने की क्षमता बहाल करने पर काम कर रहे हैं, जो इन्हें खो चुके हैं। मस्क ने 2024 राष्ट्रपति चुनाव में ट्रम्प पर $25 करोड़ खर्च किए थे 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में मस्क ट्रम्प के बड़े समर्थक बन गए। मस्क ने उनके चुनाव प्रचार पर 25 करोड़ डॉलर खर्च किए थे। चुनाव जीतने के बाद ट्रम्प ने मस्क को सरकार में बड़ी जिम्मेदारी दी। ट्रम्प ने मस्क को सरकार में खर्च और कामकाज की समीक्षा करने वाले डिपार्टमेंट का चीफ बनाया। टैरिफ को लेकर विवाद के चलते मई 2025 में मस्क ने यह पद छोड़ दिया। हालांकि बाद में ट्रम्प ने दावा किया था कि उन्होंने मस्क को निकाल दिया था। जून 2025 में सरकारी खर्च को लेकर नए बिल को भी इलॉन ने घिनौना बताया। इसके बाद ट्रम्प ने नाराजगी जताते हुए मस्क की कंपनियों को मिलने वाली सब्सिडी खत्म करने की धमकी दी। बाद में मस्क ने ट्रम्प के खिलाफ किए गए कुछ सोशल मीडिया पोस्ट पर अफसोस जताया। सितंबर 2025 को कंजर्वेटिव नेता चार्ली किर्क की याद में आयोजित कार्यक्रम में दोनों मिले, हाथ मिलाया और बातचीत की। इसके बाद दोनों के बीच रिश्ते सामान्य होने लगे। एडिसन कौन थे, जिनकी तुलना ट्रम्प ने मस्क से की… मेरिकी वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिसन का नाम बिजली के बल्ब से सबसे ज्यादा जुड़ा है। हालांकि, उन्होंने आवाज रिकॉर्ड करने वाली मशीन और फिल्मों की शुरुआती तकनीक पर भी काम किया। उनके नाम 1,093 पेटेंट दर्ज हैं। एडिसन से पहले भी कई वैज्ञानिक बिजली से रोशनी पैदा करने की कोशिश कर चुके थे। उनका बड़ा योगदान ऐसा बल्ब बनाना था, जो ज्यादा समय तक जल सके और रोजमर्रा के इस्तेमाल के लायक हो। इसके लिए उन्होंने कई तरह के फिलामेंट पर प्रयोग किए। आखिरकार कार्बन फिलामेंट से उन्हें सफलता मिली, जो 40 घंटे से ज्यादा चल सकता था। 10 साल की उम्र में घर में बनाई प्रयोगशाला एडिसन का जन्म 11 फरवरी 1847 को अमेरिका के मिलान में हुआ था। पढ़ाई में वे औसत छात्र थे, लेकिन नई चीजें सीखने और प्रयोग करने में उनकी खास दिलचस्पी थी। करीब 10 साल की उम्र में उन्होंने घर में ही एक छोटी प्रयोगशाला बना ली थी। उनकी मां ने उन्हें रसायन शास्त्र की किताब दी थी, जिससे उनकी रुचि और बढ़ी। आवाज रिकॉर्ड करने से लेकर फिल्मों तक काम एडिसन ने फोनोग्राफ बनाया, जो आवाज रिकॉर्ड करके उसे दोबारा सुना सकता था। उनकी प्रयोगशाला ने चलती तस्वीरों यानी फिल्मों की शुरुआती तकनीक के विकास में भी योगदान दिया। 18 अक्टूबर 1931 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनके आविष्कार आज भी उन्हें दुनिया के चर्चित वैज्ञानिकों में शामिल करते हैं। 100 साल पहले इलेक्ट्रिक कार और सौर ऊर्जा की बात की एक पुराने इंटरव्यू में एडिसन ने इलेक्ट्रिक कारों, उड़ने वाली मशीनों और ऊर्जा के नए स्रोतों की संभावनाओं पर बात की थी। उनका मानना था कि हल्की और बेहतर बैटरी बनने से इलेक्ट्रिक कारों का इस्तेमाल बढ़ सकता है। उन्होंने उड़ने वाली मशीनों के विकास में सेना की भूमिका की भी संभावना जताई थी। एडिसन ने सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और समुद्र के ज्वार से बिजली बनाने की बात भी की थी। उनका मानना था कि कोयला खत्म होने के बाद दुनिया को ऊर्जा के दूसरे स्रोतों पर निर्भर होना पड़ेगा। ------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने टाटा-विप्रो को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड किया:8 आईटी कंपनियों के खिलाफ एक्शन, अमेरिका में काम कर रहे भारतीयों पर सीधा असर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने गुरुवार को 8 बड़ी आईटी कंपनियों को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है। इनमें भारत की चार कंपनियां टाटा, इंफोसिस, विप्रो और HCL हैं। इनके अलावा माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी पर भी यह रोक लगाई गई है। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिका में 2 लाख भारतवंशी वोटर्स के नाम कटे:मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प को हार का डर; 2024 में 65% ने डेमोक्रेट्स को वोट दिया था
अमेरिका की वोटर लिस्ट से 2 लाख भारतीय मूल के वोटर्स का नाम कट गया है। इन लोगों के नाम उन 26 राज्यों में काटे गए हैं, जहां ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी की सरकार है। अमेरिका में करीब 21 लाख भारतवंशी वोटर्स हैं। 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं। इन चुनावों में ट्रम्प की पार्टी को हार का डर सता रहा है। इसकी एक वजह भारतीय मूल के वोटरों का रुझान है, जो हमेशा से उनकी विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर रहा है। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में करीब 65% भारतीय मूल के लोगों ने डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार कमला हैरिस को वोट दिया था। वोटर लिस्ट की जांच क्यों हो रही अमेरिका में ट्रम्प प्रशासन वोटर लिस्ट की जांच कर रहा है, ताकि अयोग्य वोटर्स के नाम हटाए जा सकें। सरकार का कहना है कि इससे चुनाव में गड़बड़ी रोकने और वोटिंग प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी। इसी मकसद से ट्रम्प ‘सेव अमेरिका एक्ट’ का समर्थन कर रहे हैं। फरवरी में अमेरिकी संसद के निचले सदन ने इस बिल को मंजूरी दी थी। इसके तहत वोटर के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराने वालों को अमेरिकी नागरिकता साबित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र या पासपोर्ट जैसे दस्तावेज देने होंगे। वोट डालने के लिए पहचान पत्र दिखाने के नियम भी सख्त किए जाएंगे। ये नियम मतदान केंद्र पर और डाक से वोट डालने, दोनों पर लागू होंगे। ट्रम्प चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली होने के दावा करते रहे हैं। हालांकि, इन दावों के समर्थन में ठोस सबूत नहीं मिले हैं। ब्रेनन सेंटर फॉर जस्टिस की एक रिसर्च में भी जांच किए गए चुनावों में धांधली के मामले बेहद कम पाए गए। बिल के विरोधियों का कहना है कि सख्त दस्तावेजी नियमों के कारण उन योग्य नागरिकों को भी वोट देने में परेशानी हो सकती है, जिनके पास जन्म प्रमाण पत्र या पासपोर्ट नहीं है। मोक्रेटिक पार्टी के नेताओं का आरोप है कि ट्रम्प प्रशासन इन कदमों से मिडटर्म चुनावों को प्रभावित करना चाहता है। ट्रम्प के कामकाज से 70% अमेरिकी संतुष्ट नहीं ट्रम्प के खिलाफ उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी में बगावत के संकेत दिखने लगे हैं। ट्रम्प की लोकप्रियता घट रही है। पार्टी नेताओं को डर है कि मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प का साथ उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। नवंबर में होने वाले चुनाव से पहले कई रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रम्प से दूरी बना रहे हैं। कुछ ने अपनी चुनावी वेबसाइट से ट्रम्प और उनके 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे का जिक्र हटा दिया है। कुछ नेता उनके साथ मंच साझा करने से भी बच रहे हैं। AP-NORC सर्वे के मुताबिक, सिर्फ 30% अमेरिकी ट्रम्प के कामकाज से खुश हैं। अर्थव्यवस्था पर उनकी अप्रूवल रेटिंग 26% है। महंगाई से निपटने के मामले में यह सिर्फ 17% है। 65% से ज्यादा अमेरिकी बढ़ती कीमतों के लिए ट्रम्प की नीतियों को जिम्मेदार मानते हैं। संसद में ट्रम्प के लिए बहुमत बचाना जरूरी है -------------------- यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने टाटा-विप्रो को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड किया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने गुरुवार को 8 बड़ी आईटी कंपनियों को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है। इनमें भारत की चार कंपनियां टाटा, इंफोसिस, विप्रो और HCL हैं। इनके अलावा माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी पर भी यह रोक लगाई गई है। पूरी खबर पढ़ें…
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