Responsive Scrollable Menu

कंगना रनौत को बड़ी राहत, AI से बनी अश्लील वीडियो पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, 72 घंटे में हटाने का आदेश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने भाजपा सांसद कंगना रनौत की एआई निर्मित फर्जी और अश्लील सामग्री को डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाने का आदेश दिया है. अदालत ने मेटा और अन्य को उनकी अनुमति के बिना उनके व्यक्तित्व अधिकार

Continue reading on the app

कैंसर रोधी दवाओं पर 30% ट्रेड मार्जिन की सीमा:सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- दूसरी दवाओं की कीमत पर रोक क्यों नहीं, 27 अक्टूबर तक जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर की दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30% तक सीमित करने के केंद्र के फैसले पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि सरकार के जवाब में खुश होने जैसा कुछ नहीं है। कोर्ट ने पूछा कि जब कैंसर की दवाओं पर मार्जिन तय किया जा सकता है, तो दूसरी दवाओं पर ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता? केंद्र ने बताया कि इस फैसले से मरीजों को सालाना करीब 2,500 करोड़ रुपए की बचत होने की उम्मीद है। कोर्ट ने दवाओं की कीमत तय करने के तरीके पर जानकारी देने के लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को 27 अक्टूबर तक का समय दिया। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुए। बेंच ने कहा, हम मानते हैं कि परिवहन, कच्चे माल, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और दूसरी लागत होती हैं। लेकिन ये सभी MRP में शामिल होती हैं। उन्हें असली लागत से 400 गुना ज्यादा कीमत पर बेचने की अनुमति देने का क्या तर्क है? आप ऐसा कैसे होने दे सकते हैं? भाटी ने कहा कि भारत में दवाओं की कीमत दुनिया में सबसे कम है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से इलाज के लिए बड़ी संख्या में लोग भारत आते हैं। तुषार मेहता ने कहा कि दवाओं की कीमत एक सीमा से ज्यादा नियंत्रित नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि ज्यादा मार्जिन मिलने से दवाएं दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचती हैं। जस्टिस मेहता ने कहा, “अगर DPCO से मंजूर दवाएं ग्राहकों तक नहीं पहुंचतीं, तो मरीजों तक उन्हें पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है। असल विवाद यह है कि DPCO की नियंत्रित सूची में कौन-सी दवाएं होनी चाहिए और कौन-सी नहीं।” केंद्र ने हलफनामे में बताया कीमत कैसे तय होती है केंद्र ने 551 पन्नों के विस्तृत हलफनामे में कहा कि नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स (NLEM) स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय तैयार और प्रकाशित करता है। हलफनामे के मुताबिक, NLEM को 2011, 2015 और हाल में 2022 में प्रकाशित किया गया था। केंद्र ने कहा कि NLEM स्टैंडिंग नेशनल कमेटी ऑन मेडिसिन्स तैयार करती है। इसमें सभी संबंधित पक्ष और विशेषज्ञ शामिल होते हैं। कमेटी विश्व स्वास्थ्य संगठन की एसेंशियल मेडिसिन्स लिस्ट, नेशनल हेल्थ प्रोग्राम में इस्तेमाल होने वाली दवाओं, इंडियन फार्माकोपिया और नेशनल फॉर्म्युलरी पर विचार करती है। केंद्र के अनुसार, NLEM 2022 में 388 दवाएं और 900 से ज्यादा फॉर्म्युलेशन शामिल हैं। DPCO वाली दवाओं की कीमत कैसे तय होती है केंद्र ने बताया कि DPCO, 2013 की शेड्यूल-I में शामिल दवाओं की सीलिंग कीमत बाजार के आंकड़ों के आधार पर तय होती है। इसके लिए उन सभी ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं की कीमत का साधारण औसत लिया जाता है, जिनकी बाजार हिस्सेदारी कुल बाजार कारोबार में 1% या उससे ज्यादा होती है। यह बाजार हिस्सेदारी उस दवा के मूविंग एनुअल टर्नओवर के आधार पर तय की जाती है। साधारण औसत में 16% मार्जिन जोड़ा जाता है। केंद्र ने कहा कि इस तरह तय सीलिंग कीमत ही MRP बन जाती है। बाजार में दवा इससे ज्यादा कीमत पर नहीं बेची जा सकती। हालांकि, निर्माता इस सीलिंग कीमत के भीतर थोक विक्रेता और खुदरा विक्रेता को उचित मार्जिन दे सकता है। केंद्र ने बताया कि अब तक 935 फॉर्म्युलेशन की सीलिंग कीमत तय की जा चुकी है। नॉन-शेड्यूल्ड दवाओं पर केंद्र का जवाब केंद्र ने कहा कि नॉन-शेड्यूल्ड दवाओं की शुरुआती कीमत तय करने की आजादी निर्माता के पास होती है। निर्माता शुरुआती कीमत तय करते समय बाजार में मौजूद प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखता है। केंद्र ने कहा कि इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा के कारण आमतौर पर निर्माता मनमाने तरीके से कीमत तय नहीं कर सकता। केंद्र ने कहा कि NPPA सभी नॉन-शेड्यूल्ड फॉर्म्युलेशन की MRP पर नजर रखता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई निर्माता किसी नॉन-शेड्यूल्ड दवा की MRP पिछले 12 महीनों में लागू MRP से 10% से ज्यादा न बढ़ाए। 29 सितंबर को भी कोर्ट ने जताई थी चिंता 29 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों की ओर से कैंसर दवाओं पर दस गुना तक बढ़ाए गए मार्जिन पर चिंता जताई थी। कोर्ट ने इसे ‘कत्लेआम’ बताया था। कोर्ट ने सभी दवाओं पर एक समान 16% मार्जिन तय करने की बात कही थी। उसने अस्पतालों की ओर से मरीजों को अपने केमिस्ट से दवा खरीदने के लिए मजबूर करने के मामले पर भी केंद्र से ध्यान देने को कहा था। कोर्ट ने कहा था कि इस व्यवस्था का नुकसान आम आदमी को उठाना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट दवाओं की कीमत, जेनेरिक दवाओं की पर्ची और मेडिकल डिवाइस पर DPCO, 2013 के तहत नियंत्रण से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।

Continue reading on the app

  Sports

SA vs AUS, Day-4: रन चेज में बिखरी दक्षिण अफ्रीका की टीम, ऑस्ट्रेलिया जीत से सिर्फ 6 विकेट दूर

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में मेजबान दक्षिण अफ्रीका की हालत खराब हो गई है. खेल के चौथे दिन 421 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए दक्षिण अफ्रीका ने 102 रन के स्कोर पर अपने 4 विकेट गंवा दिए हैं. ऐसे में अब मेहमान टीम को अंतिम दिन जीत के लिए 6 विकेट की जरूरत है, जबकि दक्षिण अफ्रीका को अगर मैच बचाना है तो उसे 319 रन और बनाने होंगे. Mon, 12 Oct 2026 22:58:19 +0530

  Videos
See all

Does President Trump's 'energy ceasefire' actually exist? | BBC Newscast #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-12T19:15:19+00:00

Houthi Attack Saudi Arabia: हूती-पाकिस्तान टकराव की खबर! |Middle East Crisis | Houthis | Pakistan #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-12T19:30:07+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers