Steel industry को Nirmala Sitharaman की सलाह, कार्बन घटाने और विशेष इस्पात पर बढ़ाएं ध्यान
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को आयात पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू इस्पात उत्पादकों से कार्बन उत्सर्जन कम करने और विशेष इस्पात का घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देने का आग्रह किया। सीतारमण ने यहां वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन की आम सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने विशेष इस्पात के लिए 6,300 करोड़ रुपये के व्यय वाली उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना शुरू की है। यह योजना घरेलू विनिर्माण और आधुनिक प्रौद्योगिकी में निवेश को प्रोत्साहित करती है।
इससे देश अपनी अर्थव्यवस्था की जरूरत के मुताबिक अधिक विशेष इस्पात का उत्पादन कर सकेगा। उन्होंने कहा, ‘‘वैश्विक उद्योग का बड़ा हिस्सा अतिरिक्त उत्पादन क्षमता और कमजोर मांग से जूझ रहा है, वहीं भारत में घरेलू खपत और लगातार निवेश के कारण अलग तरह की स्थिति देखने को मिल रही है। वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘खपत लगातार दो साल से उत्पादन से अधिक रही है।
यह घरेलू बाजार की मजबूती को दर्शाता है और आगे वृद्धि की काफी संभावनाएं बनी हुई हैं।’’ उन्होंने कहा कि भारत में प्रति व्यक्ति इस्पात की खपत करीब 109 किलोग्राम है, जबकि वैश्विक औसत 209 किलोग्राम है। ऐसे में देश में इस्पात की खपत बढ़ने की काफी गुंजाइश है। सरकार के लगातार सार्वजनिक पूंजी निवेश कार्यक्रम से इस्पात की मांग बढ़ रही है।
केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय 2026-27 में बढ़कर 12.2 लाख करोड़ रुपये हो गया है जो 2014-15 में करीब दो लाख करोड़ रुपये था। उन्होंने कहा कि निर्माण और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में देश के कुल इस्पात उपयोग का करीब दो-तिहाई हिस्सा जाता है। इसलिए यह निवेश सीधे इस्पात की मांग में तब्दील होता है।
सार्वजनिक निवेश से उद्योग को घरेलू बाजार में लगातार मांग मिलती है और क्षमता विस्तार तथा आधुनिकीकरण में निवेश का भरोसा बढ़ता है। सीतारमण ने इस्पात उद्योग के लिए पांच प्राथमिकताएं गिनाईं। इनमें भारत की विकास संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ ऊर्जा खपत और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना शामिल है।
उन्होंने कहा कि विशेष और उच्च श्रेणी के इस्पात का घरेलू उत्पादन बढ़ने से रणनीतिक उद्योगों को मदद मिलेगी और विशेष प्रकार के इस्पात के आयात पर निर्भरता घटेगी। वित्त मंत्री ने भारत की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने पर भी जोर दिया। इसके लिए उत्सर्जन का भरोसेमंद आकलन, प्रौद्योगिकी विकास और बदलाव की लागत का न्यायसंगत बंटवारा जरूरी है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर अतिरिक्त उत्पादन क्षमता की समस्या का स्थायी समाधान उन सब्सिडी पर बहुपक्षीय नियम बनाने से ही संभव है, जो आर्थिक रूप से अव्यावहारिक उत्पादन को बढ़ावा देती हैं। इसके लिए पारदर्शी आंकड़ों का सहारा लेना होगा। सीतारमण ने कहा कि भारत के सामने अपनी विकास जरूरतों को पूरा करने के लिए कम कार्बन उत्सर्जन वाली उत्पादन क्षमता विकसित करने और प्राचीन काल में विशेष धातु विज्ञान के क्षेत्र में हासिल नेतृत्व को फिर से प्राप्त करने की चुनौती है।
उन्होंने कहा कि वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन के सदस्यों के लिए भारत सबसे तेजी से बढ़ता प्रमुख इस्पात बाजार है। देश में सार्वजनिक निवेश कार्यक्रम और हरित इस्पात की रूपरेखा पहले से मौजूद है। सीतारमण ने संगठन से भारत में अपना कार्यालय खोलने पर विचार करने का भी आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक इस्पात मांग में वृद्धि का सबसे बड़ा एकल स्रोत बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि संगठन ने 2006 में बीजिंग में अपना कार्यालय उस समय खोला था, जब चीन इस्पात की मांग में अधिकांश वृद्धि का प्रमुख कारण था। भारत में संगठन की मजबूत मौजूदगी से उसे अतिरिक्त मांग, प्रौद्योगिकी विकास और औद्योगिक विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण बाजार के और करीब आने में मदद मिलेगी।
IGX लाएगा IPO, बाजार नियामक SEBI ने दी सार्वजनिक निर्गम को मंजूरी
देश के पहले ऑनलाइन डिलिवरी आधारित प्राकृतिक गैस कारोबार मंच इंडियन गैस एक्सचेंज लिमिटेड (आईजीएक्स) को सोमवार को आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की मंजूरी मिल गई है। नियामक के एक अद्यतन विवरण से यह जानकारी दी गई है। कंपनी के दस्तावेजों के मसौदे के अनुसार, प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह बिक्री पेशकश (ओएफएस) पर आधारित होगा।
इसके तहत प्रवर्तक इंडियन एनर्जी एक्सचेंज लिमिटेड (आईईएक्स) आईजीएक्स के 1.67 करोड़ तक इक्विटी शेयर बेचेगी। चूंकि यह निर्गम पूरी तरह ओएफएस है, इसलिए आईजीएक्स को आईपीओ से कोई राशि नहीं मिलेगी। निर्गम से प्राप्त पूरी राशि शेयर बेचने वाली कंपनी आईईएक्स को जाएगी।
आईजीएक्स ने जुलाई में आईपीओ के लिए शुरुआती दस्तावेज जमा किए थे। दस्तावेजों की समीक्षा के बाद सेबी ने 12 अक्टूबर को अपनी अंतिम टिप्पणी जारी की। सेबी की मंजूरी से कंपनी को नियामकीय आवश्यकताओं के अधीन सार्वजनिक निर्गम की तैयारियां आगे बढ़ाने का रास्ता मिल गया है।
यह मंजूरी ऐसे समय मिली है जब आईपीओ के जरिये धन जुटाने की गतिविधियां तेज हैं। कंपनियों ने वर्ष 2026 में अब तक 96 सार्वजनिक निर्गम के जरिये 1.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक जुटाए हैं। इस महीने कई और आईपीओ आने वाले हैं, जो प्राथमिक बाजार में लगातार जारी गतिविधियों का संकेत है।
आईजीएक्स ने दस्तावेजों में कहा है कि आईपीओ का मुख्य उद्देश्य शेयर बाजार में अपने इक्विटी शेयर सूचीबद्ध कराने का लाभ उठाना है। कंपनी को उम्मीद है कि इससे उसकी दृश्यता बढ़ेगी, ब्रांड छवि मजबूत होगी और उसके शेयरों के लिए सार्वजनिक बाजार उपलब्ध होगा। आईईएक्स की आईजीएक्स में 47 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है।
नियमों के तहत उसे यह हिस्सेदारी घटाकर 25 प्रतिशत करनी होगी। आईजीएक्स की स्थापना नवंबर, 2019 में आईईएक्स की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी के रूप में हुई थी। उसके इलेक्ट्रॉनिक गैस कारोबार मंच का उद्घाटन जून, 2020 में किया गया था।
कंपनी को दिसंबर 2020 में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) से गैस एक्सचेंज के रूप में काम करने की अनुमति मिली थी। आईजीएक्स के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) राजेश कुमार मेदिरत्ता ने जनवरी में कहा था कि देश का पहला ऑनलाइन डिलिवरी आधारित प्राकृतिक गैस कारोबार मंच दिसंबर, 2026 तक आईपीओ लाने का लक्ष्य रख रहा है।
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