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नेहा बोरा की टी-शर्ट पर बनी खोपड़ी क्यों बनी विरोध का प्रतीक? जानिए ‘वन पीस’ का Gen Z आंदोलनों से कनेक्शन

जापानी एनीमे की दुनिया से निकला एक छोटा-सा प्रतीक आज दुनिया के कई देशों में युवाओं के विरोध प्रदर्शनों की पहचान बन रहा है. काली पृष्ठभूमि पर स्ट्रॉ हैट पहने मुस्कुराती हुई खोपड़ी और उसके पीछे बनी दो हड्डियां यह निशान लोकप्रिय जापानी मंगा और एनीमे सीरीज ‘वन पीस’ के पाइरेट फ्लैग यानी समुद्री लुटेरों के झंडे का हिस्सा है. कभी कॉमिक्स और एनीमे के प्रशंसकों के बीच पहचाना जाने वाला यह प्रतीक अब भ्रष्टाचार, सरकारी नीतियों और सत्ता के खिलाफ असंतोष जताने का माध्यम बन गया है.

भारत में 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में हुए युवा प्रदर्शन के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी ‘वन पीस’ के प्रतीक वाली लाल टी-शर्ट पहने नजर आईं. इसके बाद एक बार फिर सवाल उठा कि आखिर मनोरंजन की दुनिया का यह निशान राजनीतिक आंदोलनों में इतना लोकप्रिय क्यों हो रहा है? 

इसका जवाब केवल एक एनीमे सीरीज की लोकप्रियता में नहीं, बल्कि Gen Z की सोच, डिजिटल संस्कृति और अपनी बात रखने के बदलते तरीकों में छिपा है.

क्या है ‘वन पीस’ और इसका पाइरेट फ्लैग?

‘वन पीस’ जापानी मंगा कलाकार एइचिरो ओडा की बनाई लोकप्रिय सीरीज है, जिसकी शुरुआत 1997 में हुई थी. इसकी कहानी मंकी डी. लफी और उसके साथियों के इर्द-गिर्द घूमती है. लफी का सपना समुद्री यात्राओं के जरिए दुनिया का सबसे बड़ा खजाना हासिल करना और पाइरेट किंग बनना है.

हालांकि, इस कहानी का आकर्षण केवल रोमांच और खजाने की खोज नहीं है. इसके किरदार आजादी, दोस्ती, अपने सपनों के लिए संघर्ष और अन्याय के खिलाफ खड़े होने जैसे विचारों से भी जुड़े हैं.

सीरीज में स्ट्रॉ हैट पाइरेट्स का झंडा एक खोपड़ी और उसके ऊपर बनी पुआल की टोपी से पहचाना जाता है. यही डिजाइन वास्तविक दुनिया में युवाओं के लिए एक ऐसे प्रतीक में बदल गया है, जिसके जरिए वे व्यवस्था से असहमति और बदलाव की इच्छा जाहिर करते हैं.

2. समुद्री लुटेरों का झंडा विरोध का प्रतीक कैसे बना?

इतिहास में समुद्री लुटेरों से जुड़े खोपड़ी और हड्डियों वाले झंडे को अक्सर ‘जॉली रोजर’ कहा जाता है. इसका इस्तेमाल जहाजों पर डर पैदा करने और विरोधियों को चेतावनी देने के लिए किया जाता था. समय के साथ यह प्रतीक समुद्री लुटेरों की पहचान बन गया.

लेकिन ‘वन पीस’ ने इसी पारंपरिक छवि को एक नया अर्थ दिया. यहां पाइरेट्स केवल लुटेरे नहीं, बल्कि ऐसे किरदार भी हैं जो अपनी आजादी के लिए लड़ते हैं, कमजोरों की मदद करते हैं और ताकतवर विरोधियों को चुनौती देते हैं.

यही अंतर इस झंडे को Gen Z के लिए खास बनाता है. वास्तविक जीवन में इसका इस्तेमाल करने वाले प्रदर्शनकारी खुद को समुद्री लुटेरा नहीं बताते, बल्कि वे इस प्रतीक के जरिए यह संदेश देते हैं कि वे अन्याय या मनमानी के सामने चुप रहने को तैयार नहीं हैं.

इस तरह मनोरंजन की दुनिया का एक काल्पनिक निशान वास्तविक सामाजिक और राजनीतिक असंतोष व्यक्त करने का माध्यम बन गया है. 

3. इंडोनेशिया से नेपाल तक कैसे पहुंचा यह झंडा?

‘वन पीस’ का झंडा साल 2025 में एशिया के युवा आंदोलनों के दौरान विशेष रूप से चर्चा में आया. इंडोनेशिया में युवाओं ने इसे सरकारी नीतियों और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ असंतोष जताने के लिए इस्तेमाल किया. वहां यह झंडा घरों, मोटरसाइकिलों और वाहनों पर भी दिखाई दिया.

इसके बाद नेपाल में हुए Gen Z आंदोलन के दौरान संसद परिसर के आसपास इस प्रतीक की तस्वीरें सामने आईं. नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और शासन व्यवस्था को लेकर युवाओं का असंतोष बड़े विरोध प्रदर्शनों में बदल गया. इन प्रदर्शनों के बीच ‘वन पीस’ का झंडा युवाओं की एकजुटता और बदलाव की आकांक्षा का प्रतीक बना.

फिलीपींस में भी भ्रष्टाचार के आरोपों और सरकारी परियोजनाओं से जुड़े विवादों के खिलाफ प्रदर्शनों में इस झंडे का इस्तेमाल हुआ. अलग-अलग देशों में राजनीतिक परिस्थितियां भले ही अलग थीं, लेकिन युवाओं ने एक जैसे प्रतीक के जरिए अपने असंतोष को व्यक्त किया. 

इसका सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इस झंडे को किसी एक राजनीतिक दल या संगठन से जोड़ना मुश्किल है. यही वजह है कि अलग-अलग विचारों और मांगों वाले युवा भी इसे अपने आंदोलनों में अपना सकते हैं.

4. भारत में नेहा बोरा की टी-शर्ट क्यों बनी चर्चा का विषय?

10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में चुनाव आयोग के प्रमुख ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुआ. इस प्रदर्शन में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी शामिल थीं. उनकी लाल टी-शर्ट पर ‘वन पीस’ का प्रतीक दिखाई दिया. पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान नेहा बोरा सहित कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था.

नेहा बोरा की टी-शर्ट को केवल फैशन या एनीमे के प्रति पसंद के रूप में देखना इस प्रतीक के व्यापक संदर्भ को नजरअंदाज करना होगा. हालांकि, किसी व्यक्ति ने कोई खास प्रतीक पहनकर वास्तव में क्या संदेश देने की मंशा रखी, यह बिना उसके स्पष्ट बयान के निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता.

फिर भी, जिस समय और संदर्भ में यह प्रतीक दिखाई दिया, उसने एक बड़े सवाल को जन्म दिया क्या आज के युवा राजनीति और विरोध की भाषा को बदल रहे हैं?

भारत में युवाओं के आंदोलन केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं हैं. रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, शिक्षा व्यवस्था और सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दे भी युवाओं की चिंता का हिस्सा रहे हैं. ऐसे में पॉप कल्चर से जुड़े प्रतीक उनकी नाराजगी और एकजुटता को व्यक्त करने का नया तरीका बन सकते हैं.

5. Gen Z को पॉप कल्चर के प्रतीक क्यों पसंद आते हैं?

Gen Z ऐसी पीढ़ी है जिसने इंटरनेट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग, मीम्स और एनीमे के बीच अपनी सांस्कृतिक पहचान विकसित की है. इस पीढ़ी के लिए किसी विचार को व्यक्त करने का तरीका हमेशा भाषण, पोस्टर या राजनीतिक नारे तक सीमित नहीं रहता.

किसी लोकप्रिय किरदार की तस्वीर, एक मीम या टी-शर्ट पर बना निशान भी बड़ी बात कह सकता है. इसके पीछे तीन प्रमुख कारण हैं.

पहला, साझा पहचान: लोकप्रिय सीरीज का प्रतीक दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले युवाओं को जोड़ सकता है. इसके लिए एक जैसी भाषा बोलना जरूरी नहीं होता.

दूसरा, सोशल मीडिया की ताकत: किसी प्रदर्शन की तस्वीर वायरल होने पर उसका संदेश कुछ ही समय में दूसरे देशों तक पहुंच सकता है. इस तरह एक स्थानीय प्रतीक अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल कर लेता है.

तीसरा, राजनीतिक संदेश देने का अलग तरीका: किसी पार्टी के झंडे या पारंपरिक राजनीतिक नारे के बजाय पॉप कल्चर का प्रतीक अपनाने से युवा अपनी अलग पहचान बना सकते हैं. यह उन लोगों को भी आकर्षित कर सकता है जो पारंपरिक राजनीतिक संगठनों से खुद को जुड़ा हुआ नहीं मानते.
हालांकि, किसी प्रतीक की लोकप्रियता अपने आप में यह साबित नहीं करती कि सभी प्रदर्शनकारियों की मांगें या विचार एक जैसे हैं.

6. क्या एक झंडा व्यवस्था बदल सकता है?

किसी झंडे या प्रतीक की ताकत लोगों का ध्यान आकर्षित करने, उन्हें एकजुट करने और किसी मुद्दे को व्यापक चर्चा में लाने में हो सकती है. लेकिन केवल एक लोकप्रिय प्रतीक से राजनीतिक या सामाजिक समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता.

इसके लिए स्पष्ट मांगें, संगठित भागीदारी, लोकतांत्रिक संवाद और जवाबदेही जैसे पहलू भी जरूरी हैं. इसके अलावा, किसी प्रतीक को लेकर सरकारों या राजनीतिक समूहों की प्रतिक्रिया भी उसके महत्व को बढ़ा सकती है. इंडोनेशिया में ‘वन पीस’ के झंडे को लेकर कुछ नेताओं की आलोचना और इसे प्रदर्शित करने वालों पर कार्रवाई की खबरों ने इस बहस को और तेज किया था. 

इसलिए इस झंडे को किसी एक आंदोलन की जीत या हार के पैमाने के रूप में देखना सही नहीं होगा. इसका महत्व इस बात में भी है कि यह युवाओं की राजनीतिक भागीदारी और अभिव्यक्ति के बदलते तरीकों को सामने लाता है.

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एचसीएलटेक का मुनाफा दूसरी तिमाही में 21 प्रतिशत बढ़कर 5,132 करोड़ रुपए रहा

मुंबई, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। एचसीएल टेक्नोलॉजीज ने सोमवार को ऐलान किया कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर अवधि) में उसका समेकित शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 21.2 प्रतिशत बढ़कर 5,132 करोड़ रुपए हो गया। यह वृद्धि सेवाओं की स्थिर मांग, बड़े सौदे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित समाधानों की बढ़ती मांग के कारण हुई।

कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि तिमाही आधार पर उसका शुद्ध मुनाफा पिछली तिमाही के 4,626 करोड़ रुपए से 11 प्रतिशत बढ़ा है।

आईटी क्षेत्र की इस प्रमुख कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने राजस्व वृद्धि अनुमान की निचली सीमा भी बढ़ा दी है और प्रति शेयर 12 रुपए के अंतरिम लाभांश की घोषणा की है।

नोएडा मुख्यालय वाली आईटी सेवा कंपनी ने सितंबर तिमाही में परिचालन से 35,620 करोड़ रुपए का राजस्व दर्ज किया, जो जून तिमाही के 34,579 करोड़ रुपए से 3 प्रतिशत अधिक है। सालाना आधार पर कंपनी के राजस्व में 11.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

तिमाही के दौरान कंपनी के परिचालन प्रदर्शन में भी सुधार हुआ और ईबीआईटी का मार्जिन बढ़कर 18.2 प्रतिशत हो गया। परिचालन दक्षता और विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों में वृद्धि के दम पर मार्जिन में तिमाही आधार पर 131 आधार अंक और सालाना आधार पर 71 आधार अंक का सुधार हुआ।

तिमाही की एक प्रमुख उपलब्धि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कारोबार में लगातार बनी तेजी रही। एचसीएलटेक का एडवांस्ड एआई राजस्व 219 मिलियन डॉलर रहा। इसमें पिछली तिमाही की तुलना में 28.4 प्रतिशत और पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 78 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

कारोबारी मांग को लेकर भरोसा जताते हुए कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 के लिए राजस्व वृद्धि का अनुमान संशोधित कर 2.5-4 प्रतिशत कर दिया है। पहले यह अनुमान 1-4 प्रतिशत था। हालांकि, कंपनी ने पूरे वित्त वर्ष के लिए अपने परिचालन मार्जिन के 17.5-18.5 प्रतिशत रहने के अनुमान को बरकरार रखा है।

कंपनी ने तिमाही के दौरान नए सौदों के मामले में भी मजबूत प्रदर्शन किया। नए सौदों से प्राप्त शुद्ध ऑर्डर बुकिंग 3.24 अरब डॉलर रही, जिसमें मर्सिडीज-बेंज से मिला 1.14 अरब डॉलर का बड़ा एआई कॉन्ट्रैक्ट भी शामिल है। कुल नई ऑर्डर बुकिंग सालाना आधार पर 27 प्रतिशत बढ़कर लगभग 3.3 अरब डॉलर हो गई, जिससे वित्त वर्ष की पहली छमाही में ऑर्डर बुकिंग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।

कंपनी के प्रदर्शन पर एचसीएलटेक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक सी. विजयकुमार ने कहा कि कंपनी ने एक मजबूत तिमाही प्रदर्शन किया है। विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों और उद्योगों में वृद्धि दर्ज की गई, जबकि एडवांस्ड एआई समाधानों को ग्राहकों से लगातार अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।

उन्होंने कहा, हमारे एआई समाधान ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप साबित हो रहे हैं। इसे कंपनी का विकास की संभावनाओं को लेकर भरोसा बढ़ा है

एचसीएलटेक की चेयरपर्सन रोशनी नादर मल्होत्रा ने कहा कि एडवांस्ड एआई राजस्व में तेजी से हो रही वृद्धि कंपनी की रणनीति और एआई प्रौद्योगिकी के विभिन्न स्तरों पर किए गए निवेश की पुष्टि करती है।

नादर ने कहा, एडवांस्ड एआई राजस्व में तेजी से हो रही वृद्धि हमारी कारोबारी रणनीति की पुष्टि करती है। रणनीतिक साझेदारियों और एआई प्रौद्योगिकी के पूरे क्षेत्र में लगातार निवेश के जरिए एचसीएलटेक वैश्विक स्तर पर उद्यमों और सरकारों के लिए एक भरोसेमंद प्रौद्योगिकी साझेदार बनने की मजबूत स्थिति में है।

--आईएएनएस

एबीएस

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