राठी नहीं, स्मित मच्छर मेरे आदर्श है, Shiv Sena UBT प्रवक्ता Anand Dubey ने छोड़ी पार्टी
यूबीटी शिवसेना के प्रवक्ता आनंद दुबे ने चुनाव आयोग को लेकर पार्टी के रुख के कारण पार्टी छोड़ दी है। इस्तीफ़े की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि उनके आदर्श स्मिता मच्छर, शिवाजी महाराज और वीर सावरकर हैं, न कि शरजील इमाम, उमर खालिद और ध्रुव राठी। दुबे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के आंदोलन का समर्थन करने के पार्टी के रुख पर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मेरा देश पहले आता है, पार्टी और आनंद दुबे बाद में। इससे पहले रविवार को, शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) नेता अमित ठाकरे ने मुंबई के शिवाजी पार्क इलाके में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। मुंबई पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
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आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि पुलिस ने महिलाओं समेत शिवसेना (UBT) कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी की। आदित्य ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पार्टी की एक महिला कार्यकर्ता की साड़ी फाड़ दी गई। उन्होंने कहा कि मैं पूरे मुंबई के लोगों से शिवाजी पार्क आने की अपील कर रहा हूं। यह विरोध प्रदर्शन अब नहीं रुकेगा। अगर आप प्रदर्शनकारियों को छूते हैं, तो यह आंदोलन तब तक और तेज़ होगा जब तक गद्दार (मुख्य चुनाव आयुक्त) ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं दे देते।
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वोट चोरी के मामले में INDIA गठबंधन के नेता सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे
INDIA गठबंधन के नेता 'वोट चोरी' के आरोपों और वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) को रोकने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को ज्ञापन सौंपने के लिए मार्च कर रहे हैं। इस मार्च की अगुवाई लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि वे कभी भी भारत की आवाज़ को दबा नहीं पाएंगे। गांधी ने दिल्ली पुलिस द्वारा CJP प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई को लेकर भी केंद्र सरकार पर तंज कसा और कहा कि विपक्षी नेता प्यार, भाईचारे और देशभक्ति" के साथ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे।
सरकार ने जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर डी-नोटिफाई किया
इस बीच, सरकार ने जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर डी-नोटिफाई कर दिया है और तीन अन्य जगहों की घोषणा की है जहां अब विरोध-प्रदर्शन किए जा सकेंगे। 11 अक्टूबर, 2026 के इस आदेश पर दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने हस्ताक्षर किए। आदेश में कहा गया है कि पूर्वी दिल्ली में रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD मैदान को अब विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने के लिए नई जगहों के तौर पर तय किया गया है। आदेश में कहा गया भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने मौजूदा 'तय जगह' के बजाय नागरिकों के विरोध-प्रदर्शन के अधिकार के लिए वैकल्पिक और उपयुक्त जगहों की जांच करने के लिए एक समिति बनाई थी। इसमें आगे कहा गया इन तीन जगहों पर विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने के लिए विस्तृत और संशोधित SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) अलग से जारी की जाएगी। यह पहले के स्टैंडिंग ऑर्डर नंबर L&O/48/22 (दिनांक 28.04.2022) में आंशिक बदलाव है।
असम के सभी जिला मुख्यालयों में BJP निकालेगी शांतिपूर्ण रैलियां, Himanta Biswa Sarma का एलान
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने सोमवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य में 13 से 31 अक्टूबर तक सभी जिला मुख्यालयों में शांतिपूर्ण रैलियां करेगी। उन्होंने कहा कि इसका मसकद कांग्रेस द्वारा संवैधानिक संस्थाओं को ब्लैकमेल करने, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध कर घुसपैठियों को बचाने और जनता के लोकतांत्रिक जनादेश को कमजोर करने की कोशिश को उजागर करना है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में शर्मा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा विपक्षी नेताओं से मिलने से इनकार करने के बावजूद वह न्यायालय तक मार्च करके उच्चतम न्यायालय पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और कांग्रेस भारत के लोकतंत्र की नींव पर हमला कर रहे हैं। शर्मा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, उनका दोहरा मापदंड साफ दिखाई देता है। जब नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री चुने जाते हैं, तो राहुल गांधी इसे हेरफेर बताते हैं, लेकिन खुद का संसद के लिए चुना जाना और उसके बाद नेता प्रतिपक्ष बनना उनके लिए सवालों से परे है।
उन्होंने कहा, जब असम में मतदान होता है, तो नतीजे स्वीकार्य नहीं होते, लेकिन जब केरल में मतदान होता है, तो नतीजों का स्वागत किया जाता है। कांग्रेस के लिए लोकतंत्र तभी सही है, जब उसमें कांग्रेस को जीत मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा, अब भारत के प्रधान न्यायाधीश के मुलाकात से इनकार करने के बावजूद उच्चतम न्यायालय तक मार्च निकालकर राहुल गांधी देश की सर्वोच्च अदालत पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
संवैधानिक संस्थाओं को किसी पार्टी की चुनावी निराशा के आगे जवाबदेह नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा, असम के लोग चुप नहीं रहेंगे। कल से 31 अक्टूबर तक भाजपा की असम इकाई राज्य के प्रत्येक जिला मुख्यालय पर शांतिपूर्ण जनसभाएं करेगी।
शर्मा ने कहा कि इन रैलियों के माध्यम से लोगों को कांग्रेस की ओर से संवैधानिक संस्थाओं को ब्लैकमेल करने, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध कर घुसपैठियों को बचाने और जनता के लोकतांत्रिक जनादेश को कमजोर करने की कोशिशों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
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