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Rahul Gandhi के आरोपों पर Shivraj का पलटवार, अराजकता से सत्ता पाना चाहती है Congress

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कांग्रेस पर सत्ता पाने के लिए 'अराजकता फैलाने' और संवैधानिक संस्थाओं की साख गिराने का आरोप लगाया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस गुंडों का एक समूह है जो सड़कों पर अराजकता फैलाने और सिस्टम का विरोध करने की कोशिश कर रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब यह विदेशी ताकतों के हाथों की कठपुतली बन गई है। सत्ता के लिए वे कभी बम बनाने वालों, कभी कॉकरोच, कभी जॉर्ज सोरोस जैसी देश-विरोधी ताकतों और कभी NGO का सहारा लेते हैं।

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कांग्रेस की हार के लिए नेतृत्व जिम्मेदार


सिंह ने कहा कि कई सालों से कांग्रेस पार्टी लगातार संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रही है। यह उस स्थिति में पहुंच गई है जहां चुनावी हार के लिए संवैधानिक संस्थाओं को दोष देना एक पैटर्न बन गया है। लगातार चुनाव हारना और उसके बाद विरोध प्रदर्शन करना और मुद्दों को सड़कों पर ले जाना कांग्रेस की नियति बन गई है। इसका कारण चुनाव आयोग नहीं, बल्कि कांग्रेस का दिशाहीन नेतृत्व है। उत्तर प्रदेश में लगातार आपसी कलह चल रही है; पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष को बदलना पड़ा; कई जगहों पर नेतृत्व के बीच अंदरूनी झगड़े चल रहे हैं। यह कांग्रेस का नेतृत्व है। ऐसा नेतृत्व जो देश और उसके लोगों को नहीं जानता। चौहान ने कहा कि कांग्रेस ओडिशा में 26 साल, नागालैंड में 23 साल, गोवा में 15 साल और दिल्ली में 13 साल से सत्ता से बाहर है, और तीन-चार राज्यों को छोड़कर बाकी राज्यों में यह एक जूनियर पार्टनर बनकर रह गई है। उन्होंने आगे कहा तमिलनाडु में यह AIADMK पर निर्भर है; बिहार में RJD पर; उत्तर प्रदेश में कभी SP तो कभी BSP पर; झारखंड में JMM पर; और जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस पर। कांग्रेस एक जूनियर पार्टनर और एक छोटी खिलाड़ी बनकर रह गई है।

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राहुल गांधी का आरोप- BJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचा रही है

इससे पहले, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने BJP पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने का आरोप लगाया। उन्होंने विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली में लगाई गई सुरक्षा पाबंदियों पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों को युवा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार के भीतर मौजूद अधिकारी विपक्ष के साथ जानकारी साझा कर रहे हैं।

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हमारे मुंह में शब्द न डालें...फॉर्म-6 पर सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति की साफ, न तो मंजूरी दी और न ही अस्वीकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को साफ़ किया कि उसने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के नए फॉर्म 6 की वैधता पर कभी कोई फ़ैसला नहीं दिया है। कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जब उसने इस साल की शुरुआत में बिहार में वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) की समीक्षा की थी, तब इसका बदला हुआ वर्शन मौजूद ही नहीं था। यह स्पष्टीकरण उस विवाद के बीच अहम हो जाता है जिसमें ECI का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया के लिए 'फॉर्म 6' के साथ जोड़े गए घोषणा-पत्र को सही ठहराया था। कोर्ट ने कहा कि उसकी पिछली टिप्पणियों को किसी बदले हुए फॉर्म की न्यायिक मंज़ूरी या उसे खारिज करने के तौर पर नहीं देखा जा सकता, और मामला संज्ञान में आने के बाद उसने इस मुद्दे की जांच करने पर सहमति जताई।

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हमारी बात को गलत तरीके से न पेश करें


सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने एक नई रिट याचिका के वकील से कहा कि इस कोर्ट की टिप्पणियों को संवैधानिक फैसला नहीं माना जा सकता। नए फॉर्म 6 पर कोई फैसला नहीं हुआ है और हमने बस यही कहा है। बेंच ने आगे कहा कि मंजूरी मिली या नहीं। यह बात वहां नहीं थी। हमारे मुंह में अपनी बात न डालें। जस्टिस बागची ने आगे साफ़ किया कि CJI की 5 अक्टूबर की टिप्पणी का मतलब सिर्फ़ यह था कि जब कोर्ट ने बिहार SIR पर अपना फ़ैसला सुनाया था, तब बदला हुआ फ़ॉर्म मौजूद नहीं था। उन्होंने कहा, इससे यह पता नहीं चलता कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे मंज़ूरी दी थी या नहीं। बेंच ने कहा कि अब जब यह मामला उसके ध्यान में लाया गया है, तो वह इसकी जांच करेगी। साथ ही, बेंच ने निर्देश दिया कि इस मामले को SIR से जुड़ी उन याचिकाओं के साथ लिस्ट किया जाए जिनकी सुनवाई 27 अक्टूबर को होनी है। उस दिन बेंच ECI के कामकाज और वोटर लिस्ट में बदलाव की प्रक्रिया से जुड़े फ़ैसले लेने के तरीक़े को चुनौती देने वाली व्यापक याचिकाओं पर भी सुनवाई करेगी।

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पिछली सुनवाई में कोर्ट ने क्या कहा


5 अक्टूबर को बेंच ने कहा कि उसने 'फॉर्म 6' में किसी भी बदलाव को मंज़ूरी नहीं दी है। बेंच ने यह पता लगाने के लिए रिकॉर्ड माँगे कि ये बदलाव किसने मंज़ूर किए थे और इनमें क्या-क्या शामिल था। कोर्ट ने ECI के ECINet/ERONet पोर्टल पर मौजूद ऑनलाइन फ़ॉर्म में कथित बदलावों को चुनौती देने वाली एक याचिका पर नोटिस जारी किया था। विवाद एक अतिरिक्त घोषणा (डिक्लेरेशन) को लेकर है, जिसमें आवेदकों को यह बताना होता है कि क्या उनका अपना नाम, या उनके माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी का नाम पिछली SIR (मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण) के दौरान तैयार की गई मतदाता सूची में शामिल था। यह घोषणा मौजूदा पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रोसेस में जोड़ी गई थी, जिससे इसके कानूनी आधार और पहली बार वोट देने वालों तथा मतदाता सूची में दोबारा नाम जुड़वाने वालों पर इसके असर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

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PAK vs SL: 13 चौके-छक्के… कुसल मेंडिस के तूफान में उड़ा पाकिस्तान, क्लीन स्वीप का सपना टूटा

PAK vs SL 3rd T20I: श्रीलंका ने पाकिस्तान के खिलाफ 3 मैचों की टी20 सीरीज का अंत जीत के साथ किया. तीसरे और आखिरी मुकाबले में श्रीलंकाई कप्तान कुसल मेंडिस ने एक मैच विनिंग पारी खेली. Tue, 13 Oct 2026 23:00:44 +0530

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