Explainer: बिग बॉस में क्यों कराई जाती है वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट की एंट्री? क्या इससे TRP को मिलता है फायदा? जानें
Bigg Boss Wild Card Entry: टीवी के सबसे पॉपुलर रियलिटी शोज में से एक ‘बिग बॉस’ में हर सीजन लड़ाई-झगड़े, दोस्ती, प्यार, नॉमिनेशन और एविक्शन के साथ कई बड़े ट्विस्ट देखने को मिलते हैं. इन्हीं ट्विस्ट में एक है ‘वाइल्ड कार्ड एंट्री’. शो शुरू होने के कुछ हफ्तों बाद अचानक किसी नए कंटेस्टेंट को बिग बॉस के घर में भेज दिया जाता है. कई बार कोई बड़ा टीवी चेहरा वाइल्ड कार्ड बनकर आता है, तो कभी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर या पहले से विवादों में रहा कोई सेलिब्रिटी घर में एंट्री लेता है.
अब ‘बिग बॉस 20’ में भी वाइल्ड कार्ड का खेल शुरू हो चुका है. टीवी एक्टर मनीष गोयल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नकुल ढुल ने वाइल्ड कार्ड के जरिए घर में एंट्री की है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब शो की शुरुआत में ही इतने सारे कंटेस्टेंट चुने जाते हैं, तो बीच में नए सदस्यों को लाने की जरूरत क्यों पड़ती है? क्या वाइल्ड कार्ड सिर्फ गेम में ट्विस्ट लाने के लिए होते हैं या इसके पीछे TRP का भी खेल होता है? चलिए इसे डिटेल में समझते हैं.
सबसे पहले जानें क्या होती है वाइल्ड कार्ड एंट्री?
आसान शब्दों में समझें तो जो कंटेस्टेंट शो की शुरुआत में बाकी सदस्यों के साथ घर में एंट्री नहीं करता, बल्कि सीजन शुरू होने के कुछ हफ्तों बाद घर में भेजा जाता है उसे वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट कहा जाता है. वाइल्ड कार्ड की एंट्री के लिए कोई एक तय समय नहीं होता. मेकर्स शो की जरूरत और घर के मौजूदा माहौल को देखते हुए नए सदस्य को भेज सकते हैं. कई बार एक कंटेस्टेंट आता है तो कभी एक साथ कई लोगों को भी घर में भेज दिया जाता है.
बिग बॉस को क्यों पड़ती है वाइल्ड कार्ड की जरूरत?
बिग बॉस जैसा रियलिटी शो कई हफ्तों या महीनों तक चलता है. शुरुआत में सभी कंटेस्टेंट एक-दूसरे के लिए नए होते हैं. कौन किसका दोस्त बनेगा, कौन किससे भिड़ेगा और कौन मजबूत खिलाड़ी बनकर सामने आएगा इसे लेकर दर्शकों में काफी एक्साइटमेंट रहती है. लेकिन कुछ हफ्तों के बाद घर के अंदर ग्रुप बनने लगते हैं. दोस्ती और दुश्मनी काफी हद तक साफ हो जाती है. दर्शक भी समझने लगते हैं कि कौन किसे नॉमिनेट करेगा या किस टास्क में कौन किसका साथ देगा. ऐसी स्थिति में नया कंटेस्टेंट पुराने एक्वेशन बिगाड़ सकता है. यही वजह है कि वाइल्ड कार्ड को कई बार गेम में नई जान डालने वाले ट्विस्ट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है.
पुराने ग्रुप्स को तोड़ सकता है नया कंटेस्टेंट
मान लीजिए घर में दो मजबूत ग्रुप बन चुके हैं. दोनों के बीच मुकाबला चल रहा है और कई हफ्तों से लगभग वही सदस्य आपस में लड़ रहे हैं. ऐसे में अचानक एक नया सदस्य आता है. अब दोनों ग्रुप उसे अपने साथ मिलाने की कोशिश कर सकते हैं. वहीं नया कंटेस्टेंट किसी तीसरे सदस्य के साथ अलग गेम शुरू कर सकता है. इससे पुरानी दोस्ती में दरार पड़ सकती है और नए रिश्ते बन सकते हैं. ‘बिग बॉस 13’ के दौरान भी कई वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट घर में आए थे. उस समय पूर्व कंटेस्टेंट हिमांशी खुराना ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा था कि घर में ग्रुप और समीकरण बन जाते हैं और नए लोगों के आने से वो बदल जाते हैं, जिससे गेम ज्यादा दिलचस्प हो जाता है.
बाहर की जानकारी भी बनती है वाइल्ड कार्ड की ताकत
वाइल्ड कार्ड और पहले दिन से घर में मौजूद कंटेस्टेंट के बीच एक बड़ा अंतर होता है. ओरिजिनल कंटेस्टेंट लंबे समय से बाहरी दुनिया से कटे रहते हैं, जबकि वाइल्ड कार्ड बाहर रहकर शो देख चुका होता है. उसे अंदाजा हो सकता है कि किस सदस्य की कौन-सी बात चर्चा में है, कौन मजबूत दिखाई दे रहा है और घर के कौन से रिश्ते लोगों का ध्यान खींच रहे हैं. हालांकि घर में जाने के बाद वो क्या बता सकता है ये शो के नियमों और मेकर्स के निर्देशों पर निर्भर करता है. इसके बावजूद गेम को बाहर से देखकर आने का अनुभव उसकी रणनीति पर असर डाल सकता है. इसी कारण पुराने सदस्यों को नए कंटेस्टेंट से खतरा भी महसूस हो सकता है.
क्या कमजोर TRP के कारण आती है वाइल्ड कार्ड एंट्री?
ये जरूरी नहीं है कि हर वाइल्ड कार्ड एंट्री का मतलब शो की TRP खराब होना ही हो. वाइल्ड कार्ड रियलिटी शो के फॉर्मेट में एक क्रिएटिव ट्विस्ट भी है. मेकर्स पहले से भी इसकी योजना बना सकते हैं. हालांकि इसका एक मकसद दर्शकों की दिलचस्पी को बनाए रखना जरूर हो सकता है. किसी पॉपुलर चेहरे की अचानक एंट्री होती है तो उसका प्रोमो बनाया जाता है, सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू होती है और दर्शकों में यह जानने की एक्साइटमेंट पैदा होती है कि नया सदस्य घर में जाकर क्या करेगा. यानी वाइल्ड कार्ड एंट्री को सीधे तौर पर ‘कम TRP बचाने का फॉर्मूला’ कहना सही नहीं होगा, लेकिन ये दर्शकों का ध्यान दोबारा खींचने की रणनीति जरूर बन सकती है.
FAQs
1. बिग बॉस में वाइल्ड कार्ड एंट्री क्या होती है?
शो शुरू होने के कुछ हफ्तों बाद घर में आने वाले नए कंटेस्टेंट को वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट कहा जाता है.
2. बिग बॉस में वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट क्यों लाए जाते हैं?
गेम में नया ट्विस्ट लाने, पुराने समीकरण बदलने और दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखने के लिए वाइल्ड कार्ड एंट्री कराई जाती है.
3. क्या वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट को बाहर की जानकारी होती है?
वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट घर में जाने से पहले शो देख सकता है, इसलिए उसे कंटेस्टेंट्स और उनके गेम का कुछ अंदाजा हो सकता है.
4. क्या कम TRP की वजह से वाइल्ड कार्ड एंट्री होती है?
जरूरी नहीं... वाइल्ड कार्ड शो के फॉर्मेट का हिस्सा भी हो सकता है, हालांकि पॉपुलर चेहरे की एंट्री दर्शकों का ध्यान दोबारा खींचने में मदद कर सकती है.
ये भी पढ़ें: Explainer: पहले पार्ट से कितनी अलग होगी 'The Dirty Picture 2',क्या फिर दिखेगा ग्लैमर और विवादों का तड़का?
भारतीय नौसेना को मिला स्वदेशी युद्धपोत INS मंगरोल, समुद्र में बढ़ेगी सुरक्षा; जानें इसकी खूबियां
भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत में एक और इजाफा हुआ है. सोमवार को मुंबई में स्वदेशी एंटी-सबमरीन युद्धपोत INS मंगरोल को नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया. यह युद्धपोत खास तौर पर उथले समुद्र और तटीय इलाकों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है. इसके शामिल होने से देश के तटीय क्षेत्रों और बंदरगाहों की सुरक्षा को मजबूती मिलने की उम्मीद है. कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) में निर्मित INS मंगरोल में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है. यह भारतीय नौसेना के उन प्रयासों का हिस्सा है, जिनके तहत देश में ही आधुनिक युद्धपोत तैयार करने और समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.
मुंबई में आयोजित हुआ कमिशनिंग समारोह
INS मंगरोल को नौसेना में शामिल करने के लिए मुंबई में समारोह आयोजित किया गया. इसकी अध्यक्षता पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वत्सायन ने की. समुद्र के भीतर बढ़ते खतरों और बदलती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए यह युद्धपोत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसकी मदद से नौसेना तटीय क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के साथ बड़े नौसैनिक अभियानों को भी बेहतर तरीके से सहयोग दे सकेगी.
गुजरात के तटीय शहर के नाम पर रखा गया नाम
इस युद्धपोत का नाम गुजरात के जूनागढ़ जिले के तटीय शहर मंगरोल के नाम पर रखा गया है. यह नाम भारतीय नौसेना के पुराने INS मंगरोल की विरासत को भी आगे बढ़ाता है।पुराना INS मंगरोल एक माइनस्वीपर पोत था, जिसने अप्रैल 2004 तक नौसेना में अपनी सेवाएं दी थीं. नए युद्धपोत का नाम उसी ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए रखा गया है. भारतीय नौसेना में पुराने पोतों के नाम और उनकी विरासत को नए जहाजों के जरिए आगे बढ़ाने की परंपरा रही है.
आधुनिक तकनीक और हथियारों से लैस है INS मंगरोल
INS मंगरोल को खास तौर पर उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों का पता लगाने और पानी के नीचे मौजूद खतरों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है. इसमें अभय हल-माउंटेड सोनार, हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर और मारीच एडवांस्ड टॉरपीडो डिकॉय सिस्टम जैसे उपकरण दिए गए हैं. ये तकनीकें समुद्र के भीतर दुश्मन की गतिविधियों का पता लगाने और पनडुब्बियों से होने वाले संभावित खतरों का मुकाबला करने में मदद करती हैं. तीन डीजल इंजनों से चलने वाला यह युद्धपोत उथले पानी में तेज गति और आसानी से दिशा बदलने की क्षमता रखता है.
तटीय सुरक्षा के साथ निगरानी अभियानों में भी आएगा काम
INS मंगरोल की भूमिका केवल दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने तक सीमित नहीं है. यह समुद्र के भीतर लगातार निगरानी रखने, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों और माइन वॉरफेयर से जुड़े कार्यों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इस युद्धपोत के नौसेना में शामिल होने से तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी. स्वदेशी तकनीक से तैयार यह पोत भारत की समुद्री रक्षा क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation








