'बस बेइज्जती मत करा दियो...' प्रिंस यादव ने गिफ्ट में मिले बल्ले से ठोके 3 तमतमाते चौके, जानिए मैच के बाद खोला कौन सा बड़ा राज
IND vs WI : भारत और वेस्टइंडीज के बीच तीसरा टी20 मुकाबला बीते रविवार को इंदौर में खेला गया. इस मैच में भारत ने वेस्टइंडीज को 14 रनों से हराकर सीरीज अपने नाम कर ली है. इस जीत के साथ भारतीय टीम इस पांच मैचों की टी20 सीरीज में 2-1 से आगे है. अब बाकी दोनों मुकाबले जीतकर उसके पास क्लीन स्वीप करने का मौका होगा. लेकिन इस मैच में कुछ ऐसा हुआ, जिसे देखकर भारतीय क्रिकेट फैंस काफी खुश हो गए. दरअसल, मुकाबले में वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने टॉस जीता और पहले बॉलिंग करने का फैसला किया. इस पारी में इंडियन क्रिकेट टीम पहले बल्लेबाजी करने के लिए आई. टीम इंडिया की पारी के अंतिम ओवर में कुछ ऐसा हुआ, जिसने भारतीय क्रिकेट फैंस को झूमने पर मजबूर कर दिया.
बॉल से नहीं प्रिंस ने बल्ले से किया कमाल
दरअसल, भारत की पारी के अंतिम ओवर में क्रीज पर प्रिंस यादव अपने पार्टनर मयंक यादव के साथ बल्लेबाजी कर रहे थे. प्रिंस को तेज गेंदबाज के तौर पर जाना जाता है. उनसे बल्लेबाजी की उम्मीद बहुत कम की जाती है. उनसे उनकी टीम और साथी खिलाड़ियों को बॉल के साथ विकेट निकालने की उम्मीद होती है. लेकिन जब टीम इंडिया की पारी का अंतिम ओवर चल रहा और टीम का एक विकेट बाकी था, तब उन्होंने धमाकेदार पारी खेली और एक ही ओवर मे लगातार 3 चौके लगाए. इसमें से उन्होंने 2 चौके बैक टू बैक लगाए थे.
Cheeky! Prince Yadav's crucial late flourish ????
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प्रिंस यादव ने 19वें ओवर में लगाए 3 छक्के
प्रिंस यादव ने 19वें ओवर की पहली गेंद पर शमार जोसेफ पर चौका लगाया. इसके बाद दूसरी बॉल खाली गई और तीसरी और चौथी बॉल पर प्रिंस ने लगातार बैक टू बैट 2 चौके लगाए थे. उन्होंने 6 बॉल में 3 चौकों के साथ 13 रनों की पारी खेली. इस पारी की बदौलत इंडियन क्रिकेट टीम ने पहली पारी में 20 ओवर में 10 विकेट खोकर 223 रन बनाए. इसके बाद वेस्टइंडीज 20 ओवर में 7 विकेट पर 209 रन बना पाई और 14 रनों से मुकाबला हार गई. इस मैच के बाद खुलासा हुआ कि, प्रिंस ने जिस बल्ले से धमाल मचाया वो बल्ला उनका नहीं बल्कि उनको गिफ्ट में मिला था.
The batting talent you know ????
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The reason you don't ????
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किसने किया प्रिंस यादव को बैट गिफ्ट
प्रिंस यादव को अभिषेक शर्मा ने अपना बल्ला गिफ्ट किया था. प्रिंस ने खुद के नहीं बल्कि अभिषेक शर्मा के बल्ले के साथ एक ओवर में 3 चौके लगाकर अंतिम समय में टीम इंडिया के लिए बहुमुल्य रन बनाए थे. इसका वीडियो अब बीसीसीआई ने शेयर किया है, जिसमें अभिषेक शर्मा प्रिंस यादव के साथ इस बारे में खुलकर बात कर रहे हैं. उन्होंने क्या कहा है, आइए इस बारे में भी जानते हैं.
प्रिंस यादव ने कहा कि, 'टीम के लिए योगदान देना अच्छी बात है. फिर चाहें वो बॉलिंग हो, बैटिंग हो या फील्डिंग हो. इसलिए मैं भी अच्छा फील कर रहा हूं. अभिषेक भईया ने मुझे बैट दिया था. तो उन्होंने कहा था कि, बस बेइज्जती मत करा दियो बैट से, तो मैंने उसकी इज्जत रख ली. इसके बाद बाद अभिषेक शर्मा ने कहा कि, मैंने इसकी बैटिंग देखी है. दिल्ली में नाम चलता है इसका. इसमें वो टैलेंड है'.
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Shardiya Navratri 2026: आज शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन होगी मां ब्रह्मचारिणी माता की पूजा, पढ़ें उनकी कथा और मंत्र
Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि के दूसरे दिन आज मां ब्रह्मचारिणी माता की पूजा की जा रही है. मां ब्रह्मचारिणी को दुर्गा मां का दूसरा स्वरूप माना जाता है. उनका जन्म पर्वतराज हिमालय का घर पर हुआ था और इस वजह से उनका नाम पार्वती पड़ा था. मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के साथ-साथ उनकी कथा का पाठ भी करना चाहिए. दरअसल, उनकी कथा का पाठ करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. ब्रह्मचारिणी माता को कठोर साधना और ब्रह्म में ली रहने वाली देवी माना जाता है. देवी की पूजा करने से विद्यार्थियों को शक्ति प्राप्त होती है और उनका आत्मबल बढ़ता है. जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर होता है, उन्हें भी ब्रह्मचारिणी माता की उपासना करनी चाहिए.
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि और मंत्र
नवरात्रि के दूसरे दिन स्नान आदि करने के बाद पीले वस्त्र पहनकर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करनी चाहिए. सबसे पहले देवी के समक्ष देसी घी का दीया जलाएं. इसके बाद माता को कुमकुम, चंदन, रोली, अक्षत, हल्दी और इत्र अर्पित करें. देवी को सफेद फूल चढ़ाएं. इसके बाद मां ब्रह्मचारिणी के मंत्रों का जाप करें. मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र है- ऊं ऐं नम:. चंद्रमा को मजबूत करने के लिए सफेद पुष्प के साथ सफेद वस्तुएं अर्पित करें. साथ ही ऊं श्रां श्रीं श्रौं स:चंद्रमसे नम: मंत्र का कम से कम तीन माला का जाप करें.
आइए पढ़ते हैं मां दुर्गा के दूसरे स्वरपू मां ब्रह्मचारिणी माता की पौराणिक कथा. (Read Here Brahmcharini mata katha in hindi)
मां ब्रह्मचारिणी व्रत की कथा (Brahmcharini Mata ki Divya Katha)
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता ब्रह्मचारिणी का संबंध माता पार्वती के उस तपस्विनी स्वरूप से है, जिसमें उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए अत्यंत कठोर तपस्या की थी. मां ब्रह्मचारिणी को नवदुर्गा का दूसरा स्वरूप माना जाता है और उनके नाम में 'ब्रह्म' का संबंध तप, साधना और परम सत्य से तथा 'चारिणी' का अर्थ उस मार्ग पर चलने वाली से जोड़ा जाता है. इसी कारण उनका स्वरूप संयम, तपस्या, धैर्य और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है. नवरात्रि के दूसरे दिन इसी तपस्विनी स्वरूप की आराधना की जाती है.
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माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करने का संकल्प लिया और इसके लिए उन्होंने लंबे समय तक कठोर तपस्या की. कथा में उनके तप का वर्णन अत्यंत कठिन साधना के रूप में मिलता है. मान्यता है कि उन्होंने प्रारंभ में फल और फूल का सेवन करते हुए तप किया, फिर पत्तियों पर जीवन व्यतीत किया और आगे चलकर उन्होंने भोजन का भी त्याग कर दिया. यहां तक कि बिल्व पत्र का सेवन छोड़ देने के कारण उन्हें 'अपर्णा' नाम से भी जाना गया. इस कथा का मूल भाव यह है कि माता पार्वती अपने संकल्प से विचलित नहीं हुईं और कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी उनकी साधना जारी रही.
कथा के अनुसार, माता पार्वती की इस कठोर तपस्या का उद्देश्य केवल किसी सांसारिक इच्छा की पूर्ति नहीं था, बल्कि भगवान शिव के प्रति उनकी अटूट निष्ठा और अपने संकल्प की दृढ़ता को दर्शाना था. उन्होंने ऋतु की कठिन परिस्थितियों, अल्प आहार और निरंतर साधना के बीच अपना तप जारी रखा. इसी तपस्विनी और अविवाहित स्वरूप को मां ब्रह्मचारिणी के रूप में पूजा जाता है. धार्मिक परंपरा में यह कथा भक्तों को यह संदेश देती है कि सच्चे संकल्प के मार्ग में कठिनाइयां आएं तो भी धैर्य, संयम और निरंतर प्रयास नहीं छोड़ना चाहिए.
मां ब्रह्मचारिणी के प्रतीक
मां ब्रह्मचारिणी की कथा में जपमाला और कमंडल भी उनके तपस्विनी जीवन के प्रतीक माने जाते हैं. उनका शांत स्वरूप और नंगे पैरों से चलने का चित्रण भोग-विलास से दूर साधना और आत्मसंयम की भावना को दर्शाता है. इसलिए नवरात्रि के दूसरे दिन उनकी पूजा करते समय भक्त केवल देवी से कृपा की प्रार्थना ही नहीं करते, बल्कि उनके जीवन से जुड़े तप, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के आदर्श को अपने जीवन में अपनाने का भाव भी रखते हैं.
इस प्रकार माता ब्रह्मचारिणी की पौराणिक कथा तपस्या, प्रेम, निष्ठा, धैर्य और अडिग संकल्प की कथा है. नवरात्रि के दूसरे दिन उनका स्मरण यह प्रेरणा देता है कि किसी भी बड़े उद्देश्य की प्राप्ति के लिए केवल इच्छा करना पर्याप्त नहीं है; उसके लिए अपने लक्ष्य के प्रति निरंतरता, आत्मसंयम और कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखना आवश्यक है. यही मां ब्रह्मचारिणी के तपस्विनी स्वरूप का सबसे महत्वपूर्ण संदेश माना जाता है.
मां ब्रह्मचारिणी और शिव जी का संबंध
मां ब्रह्मचारिणी का भगवान शिव से संबंध उनकी कठोर तपस्या, अटूट भक्ति और विवाह के संकल्प से जुड़ा हुआ है. धार्मिक मान्यता के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी माता पार्वती का वही तपस्विनी स्वरूप हैं, जिसमें उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन साधना की थी. माता पार्वती के मन में भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने का दृढ़ संकल्प था और इसी उद्देश्य से उन्होंने लंबे समय तक तपस्या की. इसी तपस्विनी रूप में नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. इसलिए उनका स्वरूप केवल तपस्या का प्रतीक नहीं माना जाता, बल्कि भगवान शिव के प्रति अटूट निष्ठा और समर्पण से भी जोड़ा जाता है.
माता ब्रह्मचारिणी के शक्तिशाली मंत्र
1.मूल मंत्र- ऊं देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः
2.ध्यान मंत्र- दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
3.बीज मंत्र- ऊं ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम: अथवा ॐ ह्रीं श्री ब्रह्मचारिणी देव्यै नमः
आज के शुभ मुहूर्त क्या हैं?
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:50 मिनट से सुबह 05:38 मिनट तक
अमृत काल- दोपहर 02:33 बजे से शाम 04:14 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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