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नाना पाटेकर का पुणे में राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार:4 दिन पहले कहा था- नहीं जानता, कल रहूं या नहीं; ड्रम बजाया, डांस किया, आखिरी VIDEO

नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 साल की उम्र में निधन हो गया। गोवा स्थित घर में कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें करीब 45 मिनट तक CPR दी गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। नाना पाटेकर का पार्थिव शरीर पुणे लाया गया, जहां डोंजे गांव में रात को राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। अभिनेता जैकी श्रॉफ और निर्देशक अनिल शर्मा भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए और नाना को अंतिम विदाई दी। अंतिम संस्कार से जुड़ी तस्वीरें देखें- मणिपाल हॉस्पिटल के डॉ. शेखर सालकर के मुताबिक नाना पाटेकर का सुबह 5:20 बजे निधन हुआ। घटना के वक्त नाना के साथ घर पर परिवार का कोई सदस्य नहीं था। उनके दोस्त और केयरटेकर मौजूद थे। नाना पाटेकर का 4 दिन पुराना आखिरी वीडियो सामने आया है। इसमें नाना पाटेकर ड्रम बजाते, डांस करते और मस्ती करते नजर आ रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कहा था, “हम सभी को एक दिन जाना है। पता नहीं मैं कल यहां रहूंगा या नहीं।” 4 दिन पहले कार्यक्रम में शामिल हुए थे, VIDEO ‘परिंदा’ में विलेन बने, 3 नेशनल अवॉर्ड नाना पाटेकर ने 100 से ज्यादा फिल्में कीं। 1989 की फिल्म ‘परिंदा’ में नाना ने अन्ना का किरदार निभाया, जिसके लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। 1994 की ‘क्रांतिवीर’ के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला। 1996 की ‘अग्निसाक्षी’ के लिए भी उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला। इस तरह उन्हें करियर में 3 नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिले। भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए नाना पाटेकर को 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। अपने लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने हिंदी के साथ मराठी फिल्मों में भी काम किया। रात 2:30 बजे नाना ने दोस्त को मैसेज किया था डॉ. शेखर ने बताया कि रात करीब 2:30 बजे नाना ने एक दोस्त को मैसेज कर तबीयत ठीक नहीं लगने की बात कही थी। दोस्त ने उस समय मैसेज नहीं देखा। बाद में फोन करने पर वह करीब 4 बजे नाना के घर पहुंचा। उस वक्त नाना को काफी पसीना आ रहा था। उनकी हालत बिगड़ रही थी। कुछ देर बाद वह बेहोश होने लगे। इसके बाद केयरटेकर को अस्पताल भेजा गया और एंबुलेंस बुलाई गई। इमरजेंसी टीम घर पहुंची तो नाना पूरी तरह नॉन-रिएक्टिव थे। टीम ने तुरंत कार्डियक मसाज शुरू की। उन्हें सुबह करीब 4:20 से 4:30 बजे के बीच मणिपाल अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था। ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी बनकर कॉमेडी में भी छाए 2007 में आई फिल्म ‘वेलकम’ में नाना पाटेकर ने गैंगस्टर उदय शेट्टी का किरदार निभाया था। इस कॉमेडी रोल को काफी पसंद किया गया। वे इसके सीक्वल ‘वेलकम बैक’ में भी उदय शेट्टी के किरदार में नजर आए। फिल्म प्रहार के लिए मिलिट्री ट्रेनिंग ली थी नाना पाटेकर ने फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ में आर्मी मेजर की भूमिका निभाने के लिए भारतीय सेना की मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ सैन्य प्रशिक्षण लिया था। इस दौरान उन्होंने करीब तीन साल तक ट्रेनिंग की थी। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद नाना पाटेकर टेरिटोरियल आर्मी से जुड़े। उन्हें मानद कैप्टन के रूप में कमीशन मिला। बाद में उन्होंने लेफ्टिनेंट कर्नल के मानद पद तक सेवाएं दीं और 2013 में रिटायर हुए। कारगिल युद्ध के दौरान भी सेना के साथ रहे नाना पाटेकर का सेना से जुड़ाव 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भी सामने आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से विशेष अनुमति लेकर करीब 2 महीने सेना के साथ अग्रिम इलाकों में बिताए। इस दौरान वह द्रास, लेह, कुपवाड़ा और सोपोर जैसे क्षेत्रों में गए। किसानों की मदद के लिए शुरू किया था ‘नाम फाउंडेशन’ नाना पाटेकर सिर्फ अपनी फिल्मों के लिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक कामों के लिए भी जाने जाते थे। किसानों और उनके परिवारों की मदद के लिए उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ 2015 में ‘नाम फाउंडेशन’ शुरू किया था। संस्था ने खास तौर पर महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों में किसानों की मदद के लिए काम किया। नाना ने किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों को आर्थिक मदद दी। उनके बच्चों की पढ़ाई में भी मदद की। कई परिवारों की स्कूल और कॉलेज फीस का खर्च उठाया गया। नाम फाउंडेशन ने गांवों में पानी की समस्या दूर करने के लिए भी काम किया। इसके तहत तालाब, कुएं और चेक डैम बनाने के साथ नदियों और नहरों को फिर से उपयोगी बनाने की कोशिश की गई। बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्थापना के बाद से NAAM फाउंडेशन ने 77.17 लाख किसानों की मदद की है। संस्था ने 50,908 परिवारों को आपदा राहत दी है। इसके अलावा 102 सैन्य शहीदों के परिवारों को आर्थिक सहायता पहुंचाई गई। फाउंडेशन ने 4,957 विधवाओं की भी मदद की है। शुरुआत में संस्था ने किसानों की विधवाओं और प्रभावित परिवारों को 15,000 से 25,000 रुपए तक के चेक दिए। ‘शक्ति शालिनी’ हो सकती है आखिरी फिल्म नाना पाटेकर की आखिरी फिल्म 'शक्ति शालिनी' हो सकती है। यह मैडॉक फिल्म्स के हॉरर-कॉमेडी यूनिवर्स का हिस्सा है। फिल्म का निर्देशन आदित्य सरपोतदार ने किया है। इसमें नाना के साथ अनीत पड्डा और विशाल जेठवा मुख्य भूमिकाओं में हैं। नाना अपने हिस्से की शूटिंग पहले ही पूरी कर चुके थे। पिंकविला की रिपोर्ट के मुताबिक, यह फिल्म जनवरी 2027 में सिनेमाघरों में आ सकती है। हालांकि, मेकर्स ने अभी रिलीज डेट घोषित नहीं की है। ...........… यह खबर भी पढ़ें… रेपिस्ट के रोल पर नाना ने डायरेक्टर को गालियां दीं:'परिंदा' के क्लाईमैक्स में आग से झुलसे, आर्मी जॉइन करने के लिए रक्षामंत्री को फोन किया नाना पाटेकर ने अपने करीब पांच दशक के करियर में कई यादगार किरदार निभाए थे। नाना अपने बेबाक और गुस्सैल अंदाज के लिए भी जाने जाते थे। एक बार डायरेक्टर रवि चोपड़ा ने उन्हें फिल्म में रेपिस्ट का रोल ऑफर किया तो नाना भड़क गए और उन्हें गालियां तक दे दीं। बाद में स्मिता पाटिल के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ और नाना को फिल्म में अहम विलेन का किरदार मिला। (परिंदा) की शूटिंग के दौरान भी उनका डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा से विवाद हुआ था। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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शाहरुख खान को जेल से बाहर निकलवाया:प्रोड्यूसर से बर्तन धुलवाए; परिंदा की शूटिंग में आग से झुलसे, नाना पाटेकर के अनसुने किस्से

नाना पाटेकर का गुरुवार को 75 साल की उम्र में निधन हो गया। गोवा के डोना पाउला स्थित घर में कार्डियक अरेस्ट आने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया। फिर उन्हें करीब 45 मिनट तक CPR दी गई, लेकिन बचाया नहीं जा सका। नाना पाटेकर का करीब पांच दशक लंबा फिल्मी करियर रहा। उन्होंने थिएटर से शुरुआत की और बाद में फिल्मों का रुख किया। गमन, अंकुश, परिंदा, क्रांतिवीर, तिरंगा, अब तक छप्पन, अपहरण और वेलकम जैसी फिल्मों में उन्होंने यादगार भूमिकाएं निभाई थीं। 1 जनवरी, 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के गांव मुरुद-जंजीरा में जन्मे विश्वनाथ गजानन पाटेकर, जिन्हें दुनिया ने नाना पाटेकर के नाम से जाना। बगावती तेवर वाले नाना बचपन से ही बाकी बच्चों से अलग रहे। समाज की कुरीतियों को कला के माध्यम से दिखाना चाहते थे। इसलिए पहले थिएटर में आए, फिर फिल्मों का रुख किया। नाना अपने गुस्सैल स्वभाव के लिए भी चर्चा में रहते थे। जब रवि चोपड़ा ने उन्हें रेपिस्ट का रोल ऑफर किया तो उन्होंने गाली दे दी थी। फिल्म परिंदा की शूटिंग के वक्त नाना और फिल्म के डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा भिड़ गए थे। जानिए नाना पाटेकर से जुड़े कुछ खास किस्से.. 13 साल की उम्र, दिन में 16 किमी पैदल चलते थे नाना के पिता टेक्सटाइल पेंटिंग का छोटा सा बिजनेस चलाते थे। नाना जब 13 साल के थे, तभी किसी ने पिता के साथ फ्रॉड कर दिया। रातों-रात बिजनेस चौपट हो गया। सारी प्रॉपर्टी बिक गई। पैसे कमाने के लिए नाना को भी सड़क पर आना पड़ा। वे सुबह स्कूल जाते, शाम में फिल्म के पोस्टर पेंट करते थे। जहां पोस्टर पेंट करते थे, वहां से घर की दूरी 8 किलोमीटर थी। इस तरह दिन में 16 किलोमीटर की दूरी पैदल ही तय करते थे। इस काम के लिए हर महीने 35 रुपए मिलते थे। यह बात 1963 के आस-पास की है। पैसों की इतनी किल्लत थी कि कभी-कभार खाना भी नसीब नहीं होता था। लंच या डिनर टाइम में नाना यूं ही अपने दोस्तों से मिलने चले जाते थे। इस उम्मीद में कि सामने से कोई दो रोटी खाने को पूछ ले। टीचर बगल में बिठाते, ताकि मारने के लिए बार-बार उठना न पड़े नाना बचपन में बहुत शरारती थे। इतने शरारती कि टीचर इन्हें बगल में बिठाकर रखते थे, ताकि मारने के लिए बार-बार उठना न पड़े। शरारत इतनी बढ़ गई कि नाना की मां ने उन्हें छठी कक्षा के बाद अपनी बहन के गांव भेज दिया। मां को लगा कि दूसरी जगह जाएगा तो सुधर जाएगा। नाना अपनी मौसी के घर एक-दो साल रहे, फिर वापस आ आए। मौसी ने ही उन्हें वापस भेज दिया। उन्हें डर था कि नाना की संगत में कहीं उनके बच्चे ही न बिगड़ जाएं। पत्नी नीलकांति से मुलाकात एक नाटक में हुई थी नाना पाटेकर के परिवार में अब उनकी पत्नी नीलकांति और बेटे मल्हार हैं। नाना और नीलकांति ने अपनी शादीशुदा जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव देखे। दोनों ज्यादातर समय अलग-अलग रहे, लेकिन उन्होंने कभी तलाक नहीं लिया। नाना ने लल्लनटॉप’ को दिए इंटरव्यू में बताया था कि उनकी मुलाकात नीलकांति से नाटक ‘जात न पूछो साधु की’ के दौरान हुई थी। नीलकांति भी इस नाटक में बतौर एक्टर काम कर रही थीं। उस समय नीलकांति बैंक में अधिकारी के तौर पर नौकरी भी करती थीं। नाना ने कहा था, “वह बैंक में अधिकारी के तौर पर काम कर रही थीं। मुझे एक शो के 50 रुपए मिलते थे, जबकि उनकी सैलरी 2500 रुपए थी। 15-20 शो करने के बाद मैं सिर्फ 750 रुपए कमा पाता था।” नाना के मुताबिक, नीलकांति ने उनसे कहा था कि अगर वह एक्टिंग को करियर बनाना चाहते हैं तो वह पहले से कमाई कर रही हैं, इसलिए परिवार के पास पैसे आते रहेंगे। नाना ने कहा था कि वह नीलकांति की वजह से ही इस पेशे को आगे बढ़ा सके, क्योंकि उस समय उन्हें नहीं पता था कि वह इसमें सफल होंगे या नहीं। कुछ साल बाद नीलकांति ने एक्टिंग छोड़ दी और परिवार की देखभाल करने लगीं। इस समय तक नाना और नीलकांति अलग-अलग रहने लगे थे। नीलकांति, नाना की मां और बेटे मल्हार के साथ रहती थीं, जबकि नाना अलग रहते थे। ढाई साल की उम्र में हुई थी बेटे दुर्वासा की मौत नाना के बड़े बेटे दुर्वासा का निधन महज ढाई साल की उम्र में हुआ था। उन्होंने बताया कि बेटे का नाम ‘सबसे गुस्सैल ऋषि’ के नाम पर रखा गया था और जन्म के समय उसे कुछ शारीरिक परेशानियां थीं। नाना ने बताया था कि उनके बड़े बेटे का जन्म कटे हुए तालू के साथ हुआ था और उसे एक आंख से देखने में भी परेशानी थी। उन्होंने स्वीकार किया कि बेटे को देखकर उनके मन में सबसे पहले यह विचार आया था कि लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे। उन्होंने कहा था कि उस समय उनकी पहली चिंता बेटे की परेशानी नहीं, बल्कि लोगों की प्रतिक्रिया थी। दुर्वासा की मौत को याद करते हुए नाना ने कहा था कि वह ढाई साल की उम्र में चला गया, लेकिन उसने उन्हें बहुत कुछ सिखाया। उन्होंने बताया कि वह लंबे समय तक दुख में नहीं डूबे और हमेशा मुश्किल परिस्थितियों में भी खुद को संभालकर रखने की कोशिश की। बेटे की मौत के बाद नाना ने बहुत ज्यादा सिगरेट पीना शुरू कर दिया था। उन्होंने बताया कि वह नहाते समय भी सिगरेट पीते थे। उस दौरान वह रोज करीब 60 सिगरेट पीते थे। उन्होंने कहा था कि यह बहुत बुरी आदत थी और सिगरेट की बदबू के कारण कोई उनकी कार में बैठना पसंद नहीं करता था। उन्होंने यह भी बताया कि वह शराब ज्यादा नहीं पीते थे, लेकिन बहुत ज्यादा धूम्रपान करते थे। रेपिस्ट का रोल ऑफर किया तो गालियां दीं एक्ट्रेस स्मिता पाटिल ने नाना को बीआर. चोपड़ा के बेटे रवि चोपड़ा के पास भेजा था। रवि चोपड़ा उस वक्त फिल्म ‘आज की आवाज’ बना रहे थे। उन्होंने नाना को रेपिस्ट का रोल ऑफर किया। ऑफर सुनते ही नाना भड़क उठे। उन्होंने सबके सामने रवि को गालियां बक दीं। नाना ने कहा कि तुम मुझे ऐरा-गैरा आदमी समझते हो, क्या मैं ऐसा रोल करूंगा? यह कहकर नाना वहां से लौटने लगे। तभी स्मिता पाटिल वहां पहुंच गईं। उन्होंने नाना और रवि दोनों को समझाया। तब रवि चोपड़ा ने उन्हें मेन विलेन का रोल ऑफर किया। नाना इस बार भी सीधी तरह नहीं माने। उन्होंने कहा कि मैं कर तो लूंगा, लेकिन अपना किरदार खुद लिखूंगा। आखिरकार उन्होंने फिल्म में काम कर लिया था। विधु विनोद चोपड़ा के साथ हाथापाई फिल्म परिंदा की शूटिंग के दौरान डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा और नाना पाटेकर में लड़ाई हो गई थी। यह बात खुद विधु ने एक टीवी रियलिटी शो के दौरान स्वीकारी थी। उन्होंने कहा था, ‘नाना हर सीन में गाली देता था। मुझे यह बात बड़ी अजीब लगती थी। मुझे उस वक्त गालियां नहीं आती थीं। नाना बार-बार गालियां दिए जा रहा था। ऊपर से बिना शूटिंग किए घर जाने लगा। मैंने कहा कि पहले पैसे दो, फिर वापस जाओ। कम से कम मेरा नुकसान तो मत कराओ। यही बात कहते हुए मैंने उसका कुर्ता फाड़ दिया।' उन्होंने आगे कहा था, 'अभी यह सब चल ही रहा था कि कैमरामैन ने शॉट रेडी कर दिया। आप फिल्म देखिए, एक सीन में नाना बनियान में बैठकर रोता दिखाई देगा। वह शॉट झगड़े के तुरंत बाद लिया गया था। खैर, शॉट परफेक्ट हो गया। बाद में नाना ने मुझे गले लगा लिया।’ सेफ्टी गार्ड पहनने से मना किया, आग में झुलसे फिल्म परिंदा के क्लाइमैक्स सीन में नाना पाटेकर को आग में जलते दिखाया गया था। दुर्भाग्यवश, नाना सच में आग में झुलस गए थे। इस वजह से उनकी पूरी स्किन उतर गई थी। दरअसल, उस वक्त की फिल्मों में आर्टिफिशियल फायर जैसी कोई चीज नहीं थी। सेट पर असली आग लगाई जाती थी। फिल्म के डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा ने नाना को सेफ्टी गार्ड पहनने को कहा था। नाना ने कहा था कि अगर वे सेफ्टी गार्ड पहन लेंगे तो एक्टिंग नेचुरल नहीं लगेगी। फिर भी विधु के कहने पर उन्होंने थोड़ा बहुत खुद को ढंक लिया। हालांकि, जब सीन शुरू हुआ तो आग की लपटें उनके शरीर को छूने लगीं। हाथ-पैर की स्किन झुलस गई। मामला सीरियस हो गया। उन्हें मुंबई के नानावटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। इस घटना के बाद नाना एक साल तक फिल्मों से दूर रहे। अधिकारी ने रिस्पॉन्स नहीं दिया तो रक्षा मंत्री को लगा दिया फोन नाना पाटेकर बचपन से आर्मी जॉइन करना चाहते थे। 1991 की फिल्म प्रहार के जरिए उनका यह सपना भी पूरा हो गया। आर्मी बैकग्राउंड पर बनी इस फिल्म की तैयारी के लिए नाना ने तीन साल तक आर्मी ट्रेनिंग प्रोग्राम किया था, जहां उन्हें कैप्टन की मानद रैंक दी गई थी। 1999 में पाकिस्तान के साथ कारगिल वॉर में नाना ने भारतीय सेना को अपनी सेवाएं दी थीं। हालांकि इसके पीछे दिलचस्प कहानी है। नाना ने सेना के एक बड़े अधिकारी को फोन किया और आर्मी जॉइन करने की इच्छा जताई। अधिकारी ने कहा कि आप आम नागरिक हैं, हम आपको आर्मी में नहीं ले सकते। नाना ने तब देश के तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस को फोन कर दिया। जॉर्ज फर्नांडिस पहले से नाना को जानते थे। पहले तो उन्होंने मना किया, लेकिन जब नाना ने उन्हें अपना आर्मी वाला बैकग्राउंड बताया, तब मान गए। उन्हें हरी झंडी दे दी। नाना कारगिल में दो महीने सेना के साथ जुड़े रहे। वहां वे क्विक रिएक्शन टीम का हिस्सा थे। क्विक रिएक्शन टीम में सिर्फ वहीं लोग काम करते हैं, जो औरों से निपुण हों और हर परिस्थिति में लड़ने को तैयार रहें। प्रोड्यूसर से नाना बोले थे- बर्तन साफ करो अभिनेता परेश रावल ने 'लल्लनटॉप' को दिए इंटरव्यू में नाना पाटेकर से जुड़ा यह बेहद मजेदार किस्सा सुनाया था। परेश रावल ने कहा था कि नाना पाटेकर ने एक बार एक फिल्म प्रोड्यूसर को अपने घर बुलाया। उन्होंने प्रोड्यूसर से पूछा कि क्या वह मटन खाते हैं? जब प्रोड्यूसर ने मटन खा लिया, तो नाना ने उनसे सीधे शब्दों में कहा, "आपने खा लिया, है न? अब जाकर बर्तन साफ करो।" परेश रावल ने हंसते हुए कहा कि नाना पाटेकर सच में 'बाप' (लेजेंड) हैं और वह एक अलग ही मिट्टी के बने हैं। इसी इंटरव्यू में परेश रावल ने यह भी बताया कि नाना पाटेकर हिंदी सिनेमा के पहले ऐसे कैरेक्टर आर्टिस्ट (सहायक अभिनेता) थे, जिन्होंने एक रोल के लिए 1 करोड़ रुपए की फीस मांगी थी और प्रोड्यूसर ने उन्हें वह रकम दी भी थी। उस दौर में बड़े-बड़े लीड हीरोज भी इतनी फीस मांगने से हिचकिचाते थे। ‘अंकुश’ के लिए नाना ने घर गिरवी रख दिया था साल 1986 में रिलीज हुई फिल्म 'अंकुश' नाना पाटेकर के करियर की अहम फिल्मों में से एक थी। इस फिल्म को पूरा करने के लिए नाना ने अपने घर तक को गिरवी रख दिया था। फिल्म के डायरेक्टर एन. चंद्रा ने नाना को 10 हजार रुपए फीस पर साइन किया था। उन्हें 3 हजार रुपए एडवांस मिले थे, जबकि बाकी 7 हजार रुपए फिल्म बिकने के बाद मिलने थे। नाना उस रकम से स्कूटर खरीदना चाहते थे। शूटिंग के दौरान फिल्म के प्रोड्यूसर के पैसे खत्म हो गए और काम रुक गया। नाना को फिल्म की कहानी और अपने दोस्त एन. चंद्रा पर इतना भरोसा था कि उन्होंने अपना घर गिरवी रखकर करीब 2 लाख रुपए का इंतजाम किया। इस पैसे से फिल्म का काम आगे बढ़ा और 'अंकुश' पूरी हो सकी। फिल्म रिलीज होने के बाद बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और नाना पाटेकर को भी पहचान मिली। फिल्म की सफलता के बाद एन. चंद्रा ने नाना का घर छुड़ाने में मदद की। इतना ही नहीं, उन्होंने नाना को एक नया स्कूटर भी गिफ्ट किया, जिसे खरीदने का सपना नाना ने फिल्म साइन करते वक्त देखा था। परफॉर्मेंस के बीच में जूते बरसाए जाते थे नाना ने एक नाटक पुरुष (1981) में 16 साल अभिनय किया और लगभग 1800 शो किए। इस नाटक में वे विलेन बनते थे। उनका रोल इस कदर घिनौना था कि परफॉर्मेंस के बीच में ही महिलाएं जूते बरसाने लगती थीं। जब वे जूते मांगने जातीं तो नाना मना कर देते। वे उन जूतों को सम्मान के तौर पर संभाल कर रखते थे। राज कुमार के लिए घर की सब्जी ले गए थे लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में नाना ने बताया कि फिल्म 'तिरंगा' की शूटिंग के दौरान वह घर से केले के फूल की सब्जी बनवाकर लाए थे। राज कुमार ने सब्जी खाई और नाना से कहा कि कीमा बहुत अच्छा बना है। नाना ने उन्हें बताया कि यह कीमा नहीं, बल्कि केले के फूल की सब्जी है। राज कुमार ने उसे मजाकिया अंदाज में फिर भी कीमा ही कहा था। संयोग की बात यह है कि नाना पाटेकर का आज निधन हुआ। वहीं, आज ही राज कुमार की जयंती भी है। शाहरुख खान को जेल से बाहर निकलवाया था 1990 के दशक में एक मैगजीन में शाहरुख और उनकी एक सह-अभिनेत्री को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक और झूठी खबर छपी थी। इससे शाहरुख काफी नाराज हो गए और गुस्से में मैगजीन के दफ्तर पहुंच गए। वहां पत्रकार को धमकाने के आरोप में मामला पुलिस तक पहुंच गया। इसके बाद पुलिस शाहरुख को फिल्म की शूटिंग के सेट से गिरफ्तार कर थाने ले गई। शाहरुख ने बाद में एक इंटरव्यू में इस घटना का जिक्र करते हुए बताया था कि उन्हें रात जेल में बितानी पड़ी थी। उन्होंने यह भी बताया कि लॉकअप से फोन करने का मौका मिलने पर उन्होंने संबंधित पत्रकार को ही फोन कर गुस्से में धमकी दे दी थी। मुश्किल वक्त में नाना पाटेकर आगे आए थे। नाना ने शाहरुख की जमानत की व्यवस्था कराने में मदद की और उन्हें जेल से बाहर निकलवाया था। 1993 मुंबई ब्लास्ट में भाई को खोया, हाथ के कड़े से बॉडी पहचानी 1993 बम ब्लास्ट में नाना ने अपना भाई खो दिया था। उनके भाई जिस बस में बैठे, उसी में ब्लास्ट हो गया था। बॉडी पहचान में नहीं आ रही थी। नाना के भाई हाथ में कड़ा पहनते थे। उसी से शव की पहचान हुई थी। जिसमें ब्लास्ट हुआ, उसके आगे वाली बस में नाना की पत्नी नीलकांति बैठी हुई थीं। दरअसल, नाना की पत्नी और भाई साथ ही निकले थे। दोनों एक ही बस में बैठने वाले थे, लेकिन सीट सिर्फ एक ही मिली। नाना के भाई मजबूरन पीछे वाली बस में बैठ गए। अगर उन्हें पहली बस में सीट मिल जाती तो शायद जान बच जाती।

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उसे बर्बाद मत करो... वैभव सूर्यवंशी को मौका नहीं मिलने पर भड़के कृष्णमाचारी श्रीकांत, टीम मैनेजमेंट को दे डाली नसीहत

15 साल के वैभव सूर्यवंशी को लगातार नजरअंदाज किए जाने पर पूर्व कप्तान कृष्णमाचारी श्रीकांत ने अपनी निराशा जाहिर की है. श्रीकांत का मानना है कि वैभव को लगातार प्लेइंग इलेवन से बाहर रखने के कारण उनके आत्मविश्वास में कमी आएगी. श्रीकांत का मानना है कि वैभव को लगातार मौका मिलना चाहिए. Thu, 15 Oct 2026 07:28:02 +0530

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