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तुला राशि में Shukra Vakri: 14 नवंबर तक 4 राशियों को करियर और कारोबार में बड़ा लाभ

इस समय शुक्र वक्री अवस्था में गोचर कर रहे हैं। शनिवार, 3 अक्तूबर 2026 को शुक्र देव अपनी स्वराशि तुला में वक्री हो चुके हैं। धन, वैभव, सुख-सुविधा, प्रेम और सौंदर्य आदि का कारक ग्रह माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुक्र की वक्री अवस्था करीब 42 दिनों तक रहेगी, फिर 14 नवंबर 2026 को मार्गी यानी सीधी चाल चलेंगे।

जब शुक्र के वक्री होते हैं, तो उस समय आर्थिक फैसलों और करियर से संबंधित मामलों में आपको ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत है। शुक्र के वक्री होने पर इसका प्रभाव सभी 12 राशियों के जातकों के ऊपर देखने को मिलेगा लेकिन हर कुछ राशि वालों को करियर-कारोबार और आर्थिक मामलों में अच्छे संकेत हैं।

कन्या राशि पर प्रभाव

शुक्र की वक्री चाल कन्या राशि वालों के लिए शुभ और आर्थिक मामलों के लिहाज से काफी खास रहने वाला है। अचानक से धन प्राप्ति के योग हैं। नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में मेहनत का लाभ और नई तरह की जिम्मेदारी मिल सकती है। कार्यक्षेत्र में आपके काम की सरहाना होगी। कारोबार में आपको पुराने संपर्कों का लाभ मिलेगा। आय के नए-नए मार्ग खुलेंगे और आपको सफलता प्राप्त होगी।

कुंभ राशि पर शुक्र के वक्री होने का प्रभाव

कुंभ राशि के जातकों पर भी वक्री शुक्र करियर और धन के मामलों में नए तरह के अवसर लेकर आ सकता है। नौकरी में प्रमोशन के साथ ही नई भूमिका मिलने की अच्छी संभावना है। व्यापार से संबंधित लोगों को नए प्रोजेक्ट मिलेंगे। आने वाले समय में आपको बढ़िया रिजल्ट देखने को मिलेंगे। इतना ही नहीं, आय में इजाफा जरुर होगा।

मकर राशि

मकर राशि के जातकों के लिए शुक्र वक्री चाल अच्छा और शुभ साबित होगा। कार्यक्षेत्र में कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती हैं। कारोबार में आय के नए-नए स्त्रोत बनेंगे। रुका हुआ धन मिलने के चांस हैं। आपको निवेश से संबंधित मामलों में कोई जल्दबाजी नहीं करनी है।

सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों को करियर-बिजनेस में शानदार अवसर प्रदान होंगे। नौकरी में अधिकारियों संग अच्छा सहयोग प्राप्त होगा। नए-नए प्रोजेक्ट पर काम करने का अवसर प्राप्त होगा। आर्थिक स्थिति में बेहतर सुधार नजर आएगा और आप सुख-सुविधाओं में अच्छा खासा धन खर्च करने में कामयाब रहेगा। बिजनेस में आपके पुराने संपर्कों की मदद से लाभ प्राप्त होगा।

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भगवान जीमूतवाहन की पूजा और दान के बाद ही खोलें Jitiya Vrat, ये है पारण की सही विधि

हिंदू धर्म में जितिया व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया व्रत को रखा जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस शुभ दिन पर महिलाएं अपनी संतान की तरक्की, लंबी आयु, अच्छी सेहत के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।

इस व्रत को 36 घंटे तक रखा जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 4 अक्तूबर को जितिया व्रत का पारण किया जा रहा है। आइए आपको इस लेख में बताते हैं कब और कैसे करें जितिया व्रत का पारण।

जितिया व्रत 2026 पारण का शुभ मुहूर्त

जितिया व्रत का पारण नवमी तिथि के दिन किया जाता है। 4 अक्तूबर को व्रत का पारण सुबह 7 बजकर 28 मिनट के बाद किया जा सकता है।

जितिया व्रत की पारण विधि

- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।

- फिर घर के मंदिर की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें और इसे शुद्ध करें।

- अब सूर्य देव को अर्घ्य दें और उनका आशीर्वाद लें।

- इसके बाद दीपक जलाकर भगवान जीमूतवाहन की विधिवत रुप से पूजा-अर्चना करें।

- अब भगवान जीमूतवाहन से संतान की लंबी आयु, सुखी जीवन और श्रेष्ठ स्वास्थ्य की कामना करें।

- पारण करने से पहले ब्राह्मण या गरीब लोगों को अन्न-धन आदि का दान करें।

- फिर नोनी के साग और रागी की रोटी का भोग लगाएं। अब सात्विक भोजन को ग्रहण करें और व्रत का पारण करें।

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