Fact Check: प्रदर्शन के दौरान प्रियंका गांधी गाने पर नहीं, पीएम मोदी के खिलाफ नारे पर बजा रही थीं तालियां
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और ‘इंडी’ गठबंधन के अन्य विपक्षी दल देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व […]
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Indira Ekadashi 2026: 5 या 6 अक्टूबर, कब रखा जाएगा इंदिरा एकादशी व्रत? नोट करें सही तिथि और Muhurat
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को इंदिरा एकादशी के नाम से जाना जाता है। असल में यह एकादशी पितृ पक्ष में आती है इसलिए इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
अगर आप एकादशी की तिथि को लेकर कन्फ्यूज हैं, तो यह लेख आपके लिए है। मन में यही सावल आ रहा है कि व्रत 5 अक्टूबर को रखा जाएगा या 6 अक्टूबर को, तो आपको बताते हैं सही एकादशी की तिथि क्या है।
इंदिरा एकादशी 2026 की सही तारीख क्या है?
इस बार इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर, मंगलवार के दिन रखा जाएगा। अक्सर देखा जाता है कि तिथियों के घटने-बढ़ने के कारण लोग सही तारीख को लेकर कन्फ्यूज हो जाते हैं। इस बार एकादशी की तिथि 6 अक्तूबर को सूर्योदय के समय मौजूद रहने वाली है। इसलिए इस दिन व्रत रखा जाएगा।
इंदिरा एकादशी 2026- मुख्य तिथियां और मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारंभ- 6 अक्टूबर 2026 को सुबह 02:07 बजे
एकादशी तिथि समाप्त- 7 अक्टूबर 2026 को सुबह 12:34 बजे
व्रत पारण का समय- 7 अक्टूबर 2026 (बुधवार) को सुबह 06:16 बजे से सुबह 08:39 बजे के बीच
व्रत का पारण और शुभ समय
व्रत रखने के बाद इसका पारण भी किया जाता है। इंदिरा एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी के 7 अक्तूबर 2026 को किया जाएगा। पारण के समय सुबह सूर्योदय के बाद ही होगा। इस दिन सुबह सात्विक भोजन या प्रसाद ग्रहण करके व्रत का समापन किया जाएगा।
इंदिरा एकादशी का महत्व और पितृ मुक्ति
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति पितृ पक्ष में इंदिरा एकादशी का व्रत रखता है, उसे भगवान विष्णु की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि इस व्रत के पुण्य से भटक रहे पितरों को शांति मिलती है और उन्हें यमराज की यातनाओं से मुक्ति मिल जाती है। इसलिए अपने परिवार के पूर्वजों के उद्धार और सुख-शांति के लिए यह व्रत अत्यंत कल्याणकारी माना जाएगा।
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