Delhi में Jantar Mantar की तरफ मार्च कर रहे 200 से अधिक प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए
(फोटो सहित) नयी दिल्ली, 11 अक्टूबर दिल्ली में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के आह्वान पर रविवार को विरोध प्रदर्शन के दूसरे दिन नारेबाजी करते हुए जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे 200 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस वाहनों में घसीटकर ले जाते हुए देखा गया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग कर रहे कई पत्रकारों को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
इन पत्रकारों ने अपने प्रेस पहचान पत्र भी दिखाए थे। वीडियो में उन्हें हिरासत में लिये जाने के दौरान अधिकारियों को अपने प्रेस कार्ड दिखाते हुए देखा जा सकता है। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) सहित कई छात्र संगठनों के सदस्यों और कॉजपा समर्थकों को राजधानी के अलग-अलग हिस्सों, मुख्यत: कनॉट प्लेस से, जंतर-मंतर की तरफ जाने के प्रयास के दौरान हिरासत में ले लिया गया।
शाम तक हिरासत में लेने की कार्रवाई जारी रही। शाम साढ़े छह बजे के बाद भी विभिन्न स्थानों से प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। एसएफआई ने शाम करीब साढ़े छह बजे महिला मार्च निकाला।
इसके बाद संगठन ने आरोप लगाया कि कनॉट प्लेस से कई महिला प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। संगठन का दावा है कि महिला प्रदर्शनकारियों को पुरुष पुलिसकर्मियों ने हिरासत में लिया और शाम छह बजे के बाद की गई यह कार्रवाई गैरकानूनी थी। एसएफआई ने सोशल मीडिया पर लगातार कई पोस्ट कर आरोप लगाया कि हिरासत में ली गई महिलाओं को ले जा रही कई पुलिस वैन और बसों में एक भी महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी, बल्कि उनमें पुरुष पुलिसकर्मी तैनात थे।
संगठन ने यह भी दावा किया कि हिरासत में ली गई कुछ महिलाओं को बिना रोशनी वाली बसों में रखा गया था और उनके आसपास पुरुष पुलिसकर्मी मौजूद थे। एसएफआई ने कहा कि उसके संगठन की महिला कार्यकर्ताओं को फिर से हिरासत में लिया गया है। संगठन ने उनकी सुरक्षा और पुलिस बसों के भीतर की स्थिति को लेकर चिंता जताई।
वीडियो फुटेज में प्रदर्शनकारी कनॉट प्लेस के इनर सर्कल और राजीव चौक के पास मार्च करते तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगाते दिखाई दिए। प्रदर्शनकारियों को ‘‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो, इस्तीफा दो’’ के नारे लगाते सुना गया। सुरक्षाकर्मियों को प्रदर्शनकारियों की ओर बढ़ते तथा उन्हें तितर-बितर करने की कोशिश करते देखा गया।
पुलिसकर्मियों ने कुछ प्रदर्शनकारियों की बांह पकड़कर उन्हें वहां खड़ी बसों की ओर खींचा, जबकि कई प्रदर्शनकारियों ने इसका विरोध किया। कुछ प्रदर्शनकारियों को सड़क पर घसीटते हुए ले जाते देखा गया, वहीं हिरासत में लिये जाने के दौरान भी कुछ लोग नारे लगाते रहे। दिनभर विभिन्न समूहों ने अलग-अलग समय पर विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए।
इन समूहों ने जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश की। कनॉट प्लेस और आरके आश्रम मार्ग उन प्रमुख स्थानों में शामिल थे, जहां प्रदर्शन हुए और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। आरके आश्रम मार्ग मेट्रो स्टेशन से जंतर मंतर की तरफ जा रहे आइसा के प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया।
आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी विजय चौक के पास अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने पहले अपराह्न ढाई बजे आरके आश्रम मार्ग पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। वीडियो फुटेज में बोरा को संगठन के अन्य सदस्यों के साथ नारेबाजी करते देखा गया, तभी सुरक्षाकर्मी उनकी ओर बढ़ने लगे।
पुलिसकर्मियों द्वारा उन्हें रोकने की कोशिश के दौरान बोरा और अन्य प्रदर्शनकारी भागते हुए दिखाई दिए। बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। एसएफआई ने आरोप लगाया कि उसके सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर नांगलोई स्थित सूरजमल स्टेडियम ले जाया गया।
संगठन ने एक बयान में कहा कि उसके अखिल भारतीय अध्यक्ष आदर्श एम साजी, दिल्ली प्रदेश सचिव सूरज एलामोन, केंद्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य अभिजीत मणिलाल और कई अन्य सदस्यों को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि हिरासत में लिये गए लोगों में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास भी शामिल थे। एसएफआई ने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस के कर्मियों ने ब्रिटास पर हमला किया और बाद में उन्हें घायल अवस्था में सड़क किनारे छोड़ दिया।
संगठन ने आरोप लगाया कि दिल्ली के सेक्रेड हार्ट चर्च के पादरी फादर बीजू जेवियर को पुलिस की कथित हिंसा का अपने मोबाइल फोन से वीडियो बनाने के दौरान ‘‘गिरफ्तार’’ कर लिया गया। कॉजपा ने कहा कि उसके कई प्रदर्शनकारियों को कनॉट प्लेस मेट्रो स्टेशन और गुरुद्वारा बंगला साहिब के पास हिरासत में लिया गया। संगठन की ओर से साझा किए गए वीडियो में प्रदर्शनकारी मानव शृंखला बनाने की कोशिश करते दिखे, तभी पुलिसकर्मी उन्हें हिरासत में लेने के लिए आगे बढ़े।
संगठन ने आरोप लगाया कि गुरुद्वारा बंगला साहिब के पास शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे चिकित्सकों और अन्य प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में ले लिया गया। अन्य घटनाक्रम में, सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में केवाईएस के सदस्य निगमबोध घाट के पास नावों पर प्रदर्शन करते दिखाई दिए। हाथों में पोस्टर लेकर वे मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगा रहे थे।
संगठन के सदस्य कनॉट प्लेस के पास भी प्रदर्शन करते नजर आए। रिवोल्यूशनरी वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया (आरडब्ल्यूपीआई) भी दिनभर हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल संगठनों में से एक थी। राजधानी में अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन किए गए।
शाम तक हिरासत में लेने की कार्रवाई जारी रही। प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की ये घटनाएं राजधानी में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुईं। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोकने के लिए कई स्थानों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
शनिवार को पुलिस द्वारा समर्थकों को प्रदर्शन स्थल पर एकत्र होने से रोकने के बाद कॉजपा ने रविवार को दिन में 10 बजे वहां एक और प्रदर्शन करने की घोषणा की थी। सुरक्षा व्यवस्था के तहत दिल्ली भर में 30,000 से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है। शनिवार को सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त के बीच कॉजपा के नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका सहित कई लोगों को हिरासत में लिया गया था।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोकने के लिए कई स्थानों पर कार्रवाई की, जिसमें 7,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। पूर्व मुख्यमंत्रियों अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, पिनराई विजयन और माणिक सरकार सहित विपक्ष के कई नेताओं को भी प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश करते समय हिरासत में ले लिया गया।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार एजेंसी OHCHR के बयान को भारत ने बताया अस्वीकार्य हस्तक्षेप
भारत ने दिल्ली में हजारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताने वाली संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार एजेंसी की टिप्पणियों को रविवार को खारिज करते हुए उन्हें ‘‘अनुचित’’ और देश के आंतरिक मामलों में ‘‘अस्वीकार्य हस्तक्षेप’’ करार दिया। जिनेवा स्थित मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (ओएचसीएचआर) ने शनिवार को अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार का पूरी तरह सम्मान किया जाए और इसे सुनिश्चित किया जाए। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘ओएचसीएचआर की चिंताएं अनुचित हैं और भारत के आंतरिक मामलों में अस्वीकार्य हस्तक्षेप हैं।’’ जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने भी शनिवार रात इसी तरह का बयान जारी किया था।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए व्यापक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बीच शनिवार को नयी दिल्ली में 7,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘हम यह भी देखते हैं कि सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी राय रखने के मामले में ओएचसीएचआर बेहद चुनिंदा रुख अपनाता है। हमारे पड़ोसी देशों में विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ हुई हिंसक कार्रवाई पर उसने कोई टिप्पणी नहीं की।
इसी तरह, अपने आसपास के क्षेत्र में कानून लागू कराने वाली एजेंसियों की कार्रवाई पर भी उसने चुप्पी साध रखी है।’’ मंत्रालय ने कहा, ‘‘इस तरह के दोहरे मापदंडों से उसकी साख कम होती है और बहुपक्षवाद में भरोसा भी घटता है।’’ विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ‘‘दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां हमारे संविधान में शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने के अधिकार की गारंटी दी गई है और मजबूत संस्थाओं, स्वतंत्र न्यायपालिका तथा स्वतंत्र मीडिया के माध्यम से इसकी रक्षा की जाती है।’’ विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘हर लोकतंत्र की तरह भारत में भी नागरिक सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने की शर्तों के अधीन इस अधिकार का इस्तेमाल करते हैं।’’ मंत्रालय ने कहा, ‘‘हमारी कानून लागू करने वाली एजेंसियां कानून के मुताबिक सख्ती से काम करती हैं और किसी भी शिकायत के निवारण के लिए हमारी अदालतों का दरवाजा सभी के लिए खुला है।
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