रवीना टंडन की कन्नड़ सिनेमा में वापसी, 'ए फॉर आनंद' के लिए शुरू की शूटिंग, शिव राजकुमार के साथ शेयर करेंगी स्क्रीन
बॉलीवुड एक्ट्रेस रवीना टंडन ने कन्नड़ सिनेमा की नई फिल्म 'ए फॉर आनंद' की शूटिंग बेंगलुरु में शुरू कर दी है. एमजी श्रीनिवास के निर्देशन में बन रही इस फिल्म से दोनों बड़े सितारे पहली बार एक साथ स्क्रीन शेयर करने जा रहे हैं. बेंगलुरु की प्रेसिडेंसी यूनिवर्सिटी में एक खास समारोह के साथ फिल्म की शूटिंग का आगाज हुआ. 'केजीएफ: चैप्टर 2' और 'उपेन्द्र' जैसी फिल्मों के बाद रवीना को एक बार फिर कन्नड़ फिल्म में देखना फैंस के लिए बेहद रोमांचक होने वाला है.
‘भारत ने UN को सुनाई खरी-खोटी’, दिल्ली प्रोटेस्ट पर चिंता जताने पर कहा- यह हमारा आंतरिक मामला है
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया. हिरासत में लेने की कार्रवाई देश-विदेश में चर्चाओं में बनी हुई है. इस बीच, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने पोस्ट करके चिंता जाहिर की है. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संयुक्त राष्ट्र की चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है. मानवाधिकार कार्यालय का पोस्ट अनुचित हस्तक्षेप है.
जायसवाल ने कहा कि शांतिपूर्ण सभा का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी आवश्यक है. उन्होंने विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी घटनाओं पर OHCHR के कथित चयनात्मक रुख पर भी सवाल उठाए.
#WATCH | MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली की घटनाओं पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) की टिप्पणियों को खारिज करते हुए इसे भारत के आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप बताया।
— डीडी न्यूज़ (@DDNewsHindi) October 11, 2026
जायसवाल ने कहा कि शांतिपूर्ण सभा का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित है, लेकिन सार्वजनिक… pic.twitter.com/IC8FO2x91G
भारत ने संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं का दिया हवाला
जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने एक्स पर एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं. हमारे यहां शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने का अधिकार संविधान द्वारा सुनिश्चित किया गया है. देश की मजबूत संस्थाएं, स्वतंत्र मीडिया और स्वतंत्र न्यायपालिका नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करते हैं.
The OHCHR’s concerns are therefore unwarranted and constitute an unacceptable interference in the internal affairs of India. We also note that the OHCHR has an approach of extreme selectivity when it comes to public positions. Violent responses to protests in our neighbourhood…
— ANI (@ANI) October 11, 2026
मिशन ने एक्स पर आगे कहा कि लोकतंत्र में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिकारों पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. अधिकारियों को कानून के दायरे में काम करना होता है, जिससे नागरिक अपनी शिकायतों के समाधान के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटा सकते हैं.
UN ने हिरासत और प्रदर्शन के अधिकार पर जताई चिंता
दरअसल, OHCHR ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन से पहले उसके दौरान, प्रदर्शनकारियों, नेताओं, वकीलों, सामाजिक संगठनों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की खबरों पर चिंता जाहिर की है. संयुक्त राष्ट्र ने अधिकारियों से शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का सम्मान करने और प्रदर्शनकारियों से निपटते वक्त संयम बरतने की अपील की थी. मानवाधिकार कार्यालय ने यह भी कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों आवश्यकता और आनुपातिकता के मानकों पर खरे उतरने चाहिए. उसने कहा कि मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों को तत्काल रिहा करें और संबंधित पक्ष के साथ सार्ख संवाद स्थापित करें.
#India: We are concerned by reports of mass detentions of demonstrators, protest leaders, members of civil society organisations, lawyers and journalists, before and during today’s large-scale demonstrations in Delhi.
— UN Human Rights (@UNHumanRights) October 10, 2026
We call on the authorities to ensure that the right to… pic.twitter.com/ycV2CYB8k7
निष्पक्षता पर भी उठाए सवाल
भारत ने OHCHR से दुनिया के अन्य हिस्सों में होने वाले बड़े प्रदर्शनों पर भी समान ध्यान देने की अपील की. भारत के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय को निष्पक्षता और बिना भेदभाव के अपने दायित्वों का पालन करना चाहिए. यह विवाद शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और हिरासत की कानूनी प्रक्रिया को लेकर सामने आया है.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News18
News Nation









