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दिल्ली में आवाजाही और सार्वजनिक सेवाओं पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान लगाई गई पाबंदियों का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. सुनवाई के दौरान मेट्रो स्टेशन बंद करने, इंटरनेट सेवाओं पर रोक, सड़कों पर बैरिकेड लगाने और वकीलों को अदालत पहुंचने से रोकने जैसे मुद्दे उठाए गए. अदालत में इस बात पर चर्चा हुई कि सुरक्षा के इंतजाम करते समय आम लोगों की आवाजाही और जरूरी सेवाओं का ध्यान रखना भी जरूरी है. रविवार को जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की. इस दौरान सार्वजनिक परिवहन और लोगों की आवाजाही सामान्य रखने का मुद्दा प्रमुखता से उठा.

मेट्रो और इंटरनेट को लेकर सरकार ने क्या बताया? 

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि दिल्ली मेट्रो के स्टेशन पिछली रात ही खोल दिए गए थे. इंटरनेट सेवाएं भी बहाल कर दी गई थीं. उन्होंने बताया कि 10 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो की सभी 4,157 निर्धारित ट्रेन यात्राएं चलाई गईं. हालांकि, 303 मेट्रो स्टेशनों में से 45 पर प्रवेश और निकास बंद रखा गया था. मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का असर आम यात्रियों पर भी पड़ सकता था. इसी वजह से सुनवाई में सार्वजनिक परिवहन को सामान्य रखने का मुद्दा अहम रहा.

सड़कों पर बैरिकेडिंग और आवाजाही का सवाल 

दिल्ली में प्रदर्शन को देखते हुए कई जगह बैरिकेड लगाए गए थे. सुनवाई के दौरान इन बैरिकेड के कारण लोगों को होने वाली परेशानी का मुद्दा उठाया गया. अदालत के सामने यह बात रखी गई कि सुरक्षा के इंतजाम ऐसे होने चाहिए, जिनसे आम लोगों का आना-जाना मुश्किल न हो.

बैरिकेड लगाने की जरूरत हो सकती है, लेकिन जहां उनकी जरूरत नहीं है, वहां लोगों की आवाजाही में रुकावट नहीं होनी चाहिए. इसी के साथ मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रखने का मुद्दा भी उठा.

वकीलों को अदालत पहुंचने से रोकने का मामला 

सुनवाई के दौरान वकीलों को हिरासत में लेने और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने से रोकने की शिकायतें भी सामने आईं. वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन और संजय हेगड़े ने यह मुद्दा अदालत के सामने रखा.

वकीलों का कहना था कि अदालत तक पहुंचने में रुकावट आने से उनके काम पर असर पड़ता है. इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भरोसा दिया कि वकीलों, और दूसरे पेशेवर लोगों को अपना काम करने से नहीं रोका जाएगा.

हिरासत और कानूनी प्रक्रिया पर भी चर्चा 

सुनवाई में लोगों को हिरासत में लेने की कार्रवाई का मुद्दा भी उठा. अदालत के सामने शिकायत रखी गई कि कुछ लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया था. ऐसे मामलों में यह देखना जरूरी है कि कार्रवाई के दौरान कानून में तय प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं. सुप्रीम कोर्ट के आसपास भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू किए जाने का मुद्दा भी सुनवाई में उठाया गया. अदालतों तक लोगों की पहुंच और न्यायिक कामकाज में किसी तरह की रुकावट न आने का सवाल भी चर्चा में रहा.

मंगलवार को होगी अगली सुनवाई 

इस मामले में अगली सुनवाई मंगलवार को होगी. संबंधित पक्षों को अदालत के सामने अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा. सुनवाई के दौरान उठाए गए मुद्दों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर भी नजर रहेगी. कुल मिलाकर, सुनवाई में सुरक्षा व्यवस्था के साथ आम लोगों की आवाजाही, मेट्रो और इंटरनेट सेवाओं तथा वकीलों के अदालत तक पहुंचने का मुद्दा प्रमुख रहा. सरकार ने बताया कि मेट्रो स्टेशन और इंटरनेट सेवाएं पिछली रात ही बहाल कर दी गई थीं. अब मंगलवार को होने वाली अगली सुनवाई में मामले से जुड़े दूसरे पहलुओं पर चर्चा होने की उम्मीद है.

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