नेपाल के Gorkha में Budhi Gandaki नदी की बाढ़ से तबाही, 10 लोग लापता
(शिरीष बी प्रधान) (फोटो के साथ) काठमांडू, 11 अक्टूबर नेपाल के गोरखा जिले में रविवार सुबह बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई बाढ़ से कई मकान और पुल बह गए तथा दो जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक बाढ़ प्रभावित इलाकों से करीब 50 लोगों को बचाया गया है, जबकि कम से कम 10 लोग लापता हैं।
फिलहाल किसी के हताहत होने की तत्काल सूचना नहीं है। गोरखा जिला प्रशासन कार्यालय के सहायक मुख्य जिला अधिकारी नेत्र प्रसाद शर्मा ने कहा कि नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। ‘काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, गंडकी प्रांत में आई बाढ़ से सल्लेरी, पैयुका और जगत के नदी तटीय इलाकों में मकान बह गए।
चुमनुबरी ग्रामीण नगरपालिका-तीन के वार्ड अध्यक्ष राम कुमार गुरुंग ने बताया कि बाढ़ से वार्ड को जोड़ने वाला एक झूला पुल भी बह गया। नेपाल में 26 अगस्त, 2026 को भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में विनाशकारी बाढ़ आने के करीब डेढ़ महीने बाद बूढ़ी गंडकी नदी में यह बाढ़ आई है। नेपाल अब भी अगस्त में नेपाल-चीन की पहाड़ी सीमा के पास आई भीषण बाढ़ से उबर रहा है, जिसमें 1,400 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग लापता हो गए थे।
बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। स्थानीय लोगों को संदेह है कि चुमनुबरी-छह में लोकपा और चुमलिंग के बीच बूढ़ी गंडकी की सहायक नदी स्यार का प्रवाह अवरुद्ध होने के कारण बाढ़ आई हो सकती है। अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में तलाशी और बचाव अभियान के लिए नेपाली सेना सहित सुरक्षा एजेंसियों को तैनात किया गया है।
नेपाली सेना ने रविवार को बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे 48 लोगों को बचाया। उन्हें हेलीकॉप्टरों की मदद से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। बचाव अभियान में चार हेलीकॉप्टर और सुरक्षाबलों को लगाया गया है।
गोरखा जिला प्रशासन कार्यालय के प्रशासनिक अधिकारी चुड़ा निधि तिवारी ने बताया कि चुमनुबरी में करीब एक किलोमीटर लंबा भूस्खलन हुआ, जिसकी चपेट में आकर मवेशियों के पांच बाड़े बह गए। इनमें काम करने वाले कम से कम 10 किसान लापता हैं। समाचार पोर्टल ‘ऑनलाइन खबर’ के अनुसार, चुमनुबरी ग्रामीण नगरपालिका की उपाध्यक्ष लक्ष्मी गुरुंग ने कहा कि रविवार सुबह बूढ़ी गंडकी में आई बाढ़ ने रसुवा में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ की याद दिला दी।
उन्होंने कहा कि बाढ़ दर्जनों मकान बहा ले गई है और फिलहाल नुकसान का सटीक आकलन करना संभव नहीं है। बाढ़ सुबह करीब चार बजे आई, जिसके बाद स्थानीय लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। लक्ष्मी ने बताया कि बाढ़ के पानी से चुमनुबरी ग्रामीण नगरपालिका-तीन के बाजार को काफी नुकसान पहुंचा है।
राम कुमार नामक एक व्यक्ति ने कहा, “बाढ़ सुबह-सुबह आई और हम अपना सामान भी नहीं निकाल पाए। बाढ़ आने की खबर सुनते ही सभी लोग भाग गए।” उन्होंने कहा कि नुकसान की पूरी जानकारी अभी नहीं मिल पाई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, चुमलिंग और लोकपा सहित नदी किनारे की बस्तियों के निवासी सुबह करीब चार बजे नालों से पानी के तेज बहाव की गर्जना सुनकर घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों पर चले गए।
स्थानीय होटलों में ठहरे पर्यटक भी वहां से भाग गए। लोकपा के निवासी शेराप गुरुंग ने कहा कि पानी की आवाज से ऐसा लग रहा था कि उसका बहाव बार-बार रुक रहा है और फिर शुरू हो रहा है। उन्होंने कहा, “अंधेरा होने के कारण हम यह नहीं देख सके कि नाले का प्रवाह अवरुद्ध हुआ था या भूस्खलन हुआ था।
बारिश भी नहीं हुई थी।” अधिकारी नदी किनारे रहने वाले लोगों को लाउडस्पीकर के जरिए चेतावनी दे रहे हैं और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कह रहे हैं। गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने कहा कि बाढ़ से चुमनुबरी-तीन में न्याकचेत और फिलिम बाजार को जोड़ने वाला पुल भी बह गया है। उन्होंने बताया कि नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण बचाव अभियान, राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर निकालने के लिए हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं।
इस बीच, मनास्लु क्षेत्र में ट्रेकिंग के लिए जा रहे पर्यटक भी फंस गए हैं। मनास्लु संरक्षण क्षेत्र परियोजना (एमसीएपी) ने बताया कि बाढ़ में पैदल रास्ता और पुल बह जाने के कारण पर्यटक शनिवार रात अपने ठहरने के स्थान पर ही फंस गए थे। एमसीएपी के सूचना अधिकारी भुवन ओझा ने कहा कि शनिवार को पर्यटक अपने ठहरने के स्थान पर सुरक्षित थे।
Sanjay Raut ने दिल्ली को बताया हिरासत वाला राज्य, 7000 प्रदर्शनकारियों को रोकने पर उठाए सवाल
शिवसेना (उबाठा) सांसद संजय राउत ने रविवार को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हुए दिल्ली को ‘‘हिरासत वाला राज्य’’ करार दिया। राउत ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शन सिर्फ कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन सभी लोगों से जुड़े हैं, जिन्हें लोकतंत्र में विश्वास है। उन्होंने शनिवार को मुंबई में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर महाराष्ट्र सरकार की भी आलोचना की और कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए।
पुलिस ने शनिवार को दिल्ली में कई स्थानों पर 7,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था और उन्हें जंतर-मंतर पहुंचने से रोक दिया था। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले दिल्ली हवाई अड्डे पर हिरासत में लिए जाने के बाद एहतियातन गिरफ्तार किए गए कॉजपा नेताओं अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को रविवार सुबह कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के बाद रिहा कर दिया गया। कॉजपा की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने बताया कि उन्हें एक साल तक ‘‘शांति भंग नहीं करने’’ की शर्त पर रिहा किया गया।
राउत ने कहा कि कॉजपा के लोगों को हिरासत में लिये जाने के बावजूद प्रदर्शन नहीं रुके। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘दिल्ली हिरासत वाला राज्य बन गई है। जब हिरासत वाला राज्य और पुलिस राज होता है, तो आपको यह स्वीकार करना होगा कि देश में आपातकाल है।’’ राज्यसभा सदस्य ने कहा कि 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के दौरान हेमवती नंदन बहुगुणा और जगजीवन राम जैसे कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने पार्टी छोड़ दी थी।
उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में भी ऐसी ही बेचैनी है। राउत ने कहा कि किसी बड़े नेता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मजबूती से बचाव नहीं किया है और अगले साल मार्च-अप्रैल तक राजनीतिक नेतृत्व में बदलाव होगा। राउत ने किसी का नाम लिये बिना कहा, ‘‘देश में पैदा हो रही स्थिति के कारण केवल अन्य दलों में ही नहीं, बल्कि भाजपा में भी बेचैनी है।
भाजपा के चार बड़े नेता देश हित में फैसला करेंगे। ये नेता असली भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा वाले हैं। ये चारों नेता (मोदी) मंत्रिमंडल में हैं और भाजपा के प्रमुख स्तंभ हैं।’’ उन्होंने दावा किया, ‘‘ये लोग आपस में विचार-विमर्श और चर्चा कर रहे हैं कि हमें फैसला लेना होगा... ठीक वैसे ही, जैसे जगजीवन राम और हेमवती नंदन बहुगुणा ने लिया था।’’ राउत ने जर्मनी के नेता एडोल्फ हिटलर और इटली के बेनितो मुसोलिनी से तुलना करते हुए कहा कि उन्होंने सत्ता के अंतिम दिनों में इसी तरह के तरीके अपनाए थे।
इनमें प्रदर्शनों पर रोक लगाना, विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार करना और लोगों को नजरबंद करना शामिल था। उन्होंने कहा कि भारत में भी ऐसी ही स्थिति है।
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