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लंच तक साउथ अफ्रीका के 4 विकेट पर 115 रन:बेडिंघम ने 49 और मार्करम ने 37 रन बनाए, स्टार्क-हेजलवुड-कमिंस-लायन को 1-1 विकेट

साउथ अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहली पारी में लंच तक 38 ओवर में 4 विकेट पर 115 रन बना लिए हैं। ट्रिस्टन स्टब्स 14 और वियान मुल्डर 7 रन बनाकर नाबाद हैं। टीम की ओर से डेविड बेडिंघम ने सबसे ज्यादा 49 रन बनाए, जबकि एडेन मार्करम ने 37 रन की पारी खेली। साउथ अफ्रीका की शुरुआत खराब रही। रयान रिकेल्टन 3 गेंद खेलने के बाद बिना खाता खोले आउट हो गए। उन्हें जोश हेजलवुड ने विकेटकीपर एलेक्स कैरी के हाथों कैच कराया। इसके बाद मार्करम और बेडिंघम ने पारी को संभाला। दोनों के बीच दूसरे विकेट के लिए 84 रन की साझेदारी हुई। मार्करम को मिचेल स्टार्क ने नाथन मैकस्वीनी के हाथों कैच कराया। टेंबा बावुमा 3 रन बनाकर नाथन लायन का शिकार बने। वहीं, बेडिंघम 49 रन बनाकर पैट कमिंस की गेंद पर स्टीव स्मिथ को कैच दे बैठे। उन्होंने अपनी पारी में 9 चौके लगाए। ऑस्ट्रेलिया की ओर से जोश हेजलवुड, मिचेल स्टार्क, पैट कमिंस और नाथन लायन ने 1-1 विकेट लिया।

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लहर-लहर:परिवार संस्कारों की विरासत देता है, लेकिन पहचान तो खुद बनाई जाती है

इस दुनिया में परिवार की सामाजिक आवश्यकता क्या है? परिवार बनते हैं, फैलते हैं और बिखर जाते हैं, मिट जाते हैं। परिवार हमेशा के लिए नहीं होते हैं। बच्चे को मां-बाप दोनों की जरूरत होती है। उनके बिना वो ठीक से पल नहीं सकता। इसलिए परिवार बना। भाई-बहन भी परिवार है। परिवारों को कॉमन बिजनेस भी जोड़ता है। लोग साथ जुड़कर काम करते हैं। लेकिन समय के साथ कुछ स्वाभाविक परिवर्तन होते हैं। जैसे- दो भाई एक ही घर में पले और दोनों का एक-दूसरे से लगाव है। फिर दोनों की शादी और बच्चे हो जाते हैं। बच्चे अलग-अलग शहरों में चले जाते हैं। बच्चे बड़े होते हैं। उनकी भी शादियां होती हैं और बच्चे होते हैं। तो ये बच्चे आपस में दूर के रिश्तेदार हो जाते हैं। वो जो परिवार कभी बहुत करीब था, वो ज्यादा से ज्यादा चार पीढ़ियों में खत्म हो जाता है, बिखर जाता है। किसी को किसी की खबर ही नहीं होती। और ऐसा नहीं है कि वो अकेले रह जाते हैं। वहां उनके भी फिर छोटे-छोटे परिवार बन रहे होते हैं। वो फिर वैसी ही इकाई से शुरू करते हैं। परिवार का किस्सा तीन-चार जेनरेशन से ज्यादा का नहीं है। फिर नए परिवार बनते हैं और वो तीन-चार जेनरेशन चलते हैं। फिर एक नया परिवार बनता है और नए बच्चे आते हैं। परिवार एक जरूरत है जो बहुत जल्दी खत्म हो जाती है। यह जरूरत वक्त के साथ खत्म जाती है। इसलिए कि धीरे-धीरे वो बच्चे एक-दूसरे से अजनबी हो जाते हैं। बदलते समय के साथ पारंपरिक संयुक्त परिवारों का दौर पीछे छूट गया है। आज के समय में अगर बच्चे माता-पिता से अलग और स्वतंत्र रहते हैं, तो यह पारिवारिक रिश्तों का टूटना नहीं, बल्कि आधुनिक जीवन का एक स्वाभाविक यथार्थ है। आज की व्यस्त ज़िंदगी में परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे से मिलने के लिए पहले से समय तय करना पड़ता है। जैसे मुझे फरहान से मिलने के लिए 3 से 5 दिन पहले समय तय करना पड़ता है। पहले अमेरिका या इंग्लैंड में रिश्तेदारों से मिलने से पहले फोन करने की प्रथा अजीब मानी जाती थी, लेकिन जो बात पहले लोगों को हैरान करती थी, वह अब ज़िंदगी का एक आम हिस्सा बन गई है। परिवार सिर्फ़ उन लोगों का नाम नहीं है, जिनसे हमारा खून का रिश्ता है। परिवार वह जगह है जहां इंसान को सिर्फ इसलिए नहीं पसंद किया जाना चाहिए कि वह अपना है, बल्कि इसलिए भी सम्मान दिया जाना चाहिए कि वह एक अलग इंसान है- अपनी सोच, इच्छा और आजादी के साथ। इसलिए परिवार में मोहब्बत के साथ संवाद होना चाहिए, असहमति की गुंजाइश होनी चाहिए और एक-दूसरे को सुनने का धैर्य होना चाहिए। एक अच्छे परिवार में बच्चों को ईमानदारी, आत्मनिर्भरता और तर्कशीलता सिखानी चाहिए। बच्चों का अपने फैसले लेना और आजाद होकर जीना स्वाभाविक है; अस्वाभाविक तो यह है कि उनकी हर सोच, हर कदम और हर फैसले पर बेवजह नियंत्रण रखा जाए। बच्चे हमारे हैं, लेकिन हमारी मिल्कियत नहीं हैं। एक उम्र के बाद उन्हें फैसले लेने, गलतियां करने और दुनिया बनाने का अधिकार है। माता-पिता का काम हर कदम पर उनके रास्ते को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि इतनी समझ देना है कि वे रास्ते पर सही और गलत में फर्क कर सकें। खानदान आपको एक विरासत दे सकता है- नाम, भाषा, संस्कार, कहानियां और कुछ वैल्यू, लेकिन वह आपकी पहचान तय नहीं कर सकता। अगर बेटा सिर्फ पिता की आवाज दोहराता रहे, तो वह विरासत नहीं, प्रतिध्वनि होती है। आखिरकार किसी परिवार की सबसे बड़ी कामयाबी यह है कि उस परिवार के बच्चे कितने अच्छे इंसान बनते हैं। परिवार का मकसद सिर्फ अपने लोगों को अपना बनाए रखना नहीं है; परिवार का मकसद ऐसे इंसान बनाना है जो इंसानियत का भी सम्मान कर सकें। (संपादन और समन्वय- अरविंद मण्डलोई)

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पिता GST कमिश्नर, मां गृहिणी...कौन हैं बड़े-बड़े छक्के लगाने में माहिर कुमार कुशाग्र, जिन्हें ऋषभ पंत की जगह मिली इंडिया ए में जगह

Kumar Kushagra India A: ऋषभ पंत के इंजर्ड होने के चलते अब विकेटकीपर बल्लेबाज कुमार कुशाग्र को न्यूजीलैंड दौरे के शुरुआती दो मुकाबलों के लिए सोमवार को इंडिया ए टीम में शामिल किया गया है. बीसीसीआई ने यह जानकारी दी. इंडिया ए की कप्तानी ध्रुव जुरेल करेंगे. विकेटकीपर भी वही होंगे, ऐसे में कुमार कुशाग्र को शायद ही प्लेइंग इलेवन में जगह मिल पाए, लेकिन झारखंड से आईपीएल और आईपीएल से इंडिया ए तक का सफर किसी सपने से कम नहीं है. Tue, 13 Oct 2026 10:07:17 +0530

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