हसन महमूद ने अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट हैट्रिक ली:बांग्लादेश के पहले तेज गेंदबाज बने; अफगान टीम पहली पारी में 240 पर ऑलआउट
बांग्लादेश के तेज गेंदबाज हसन महमूद ने टेस्ट क्रिकेट में इतिहास रच दिया। वे देश के पहले तेज गेंदबाज बने, जिसने टेस्ट में हैट्रिक ली है। 26 साल के महमूद ने अबू धाबी में अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट के तीसरे दिन लगातार गेंदों पर इस्मत आलम, कैस अहमद और जिया-उर-रहमान को आउट किया। महमूद ने 21 ओवर में 55 रन देकर 5 विकेट लिए। अफगानिस्तान की टीम पहली पारी में 240 रन पर ऑलआउट हो गई। बांग्लादेश ने पहली पारी में 346 रन बनाए थे और उसे 106 रन की बढ़त मिली। 83वें ओवर में पूरी हुई हैट्रिक महमूद ने 83वें ओवर में इस्मत आलम को बोल्ड किया। उनकी गेंद इस्मत के डिफेंस को चकमा देकर स्टंप्स से जा टकराई। अगली गेंद पर उन्होंने कैस अहमद को आउट किया। विकेटकीपर लिटन दास ने स्टंप्स के पीछे नीचे कैच पकड़ा। इसके बाद जिया-उर-रहमान महमूद की हैट्रिक गेंद पर आउट हुए। गेंद जिया के पैड पर लगी और महमूद ने LBW की अपील की। मैदानी अंपायर ने अपील खारिज कर दी। बांग्लादेश के कप्तान नजमुल हुसैन शांतो ने रिव्यू लिया। बॉल-ट्रैकिंग में दिखा कि गेंद ऑफ स्टंप से टकराती। इसके बाद फैसला बदल दिया गया और महमूद की हैट्रिक पूरी हुई। बांग्लादेश के तीसरे गेंदबाज महमूद टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक लेने वाले बांग्लादेश के तीसरे गेंदबाज हैं। अलोक कपाली ने 2003 में पेशावर में पाकिस्तान के खिलाफ पहली हैट्रिक ली थी। इसके बाद सोहाग गाजी ने 2013 में चटगांव में न्यूजीलैंड के खिलाफ हैट्रिक ली। दोनों स्पिन गेंदबाज थे। इसलिए महमूद बांग्लादेश के पहले तेज गेंदबाज हैं, जिसने टेस्ट क्रिकेट में यह उपलब्धि हासिल की है। अफगानिस्तान की पारी 240 रन पर सिमटी अफगानिस्तान ने तीसरे दिन की शुरुआत 4 विकेट पर 211 रन से की थी। टीम अपने स्कोर को और बढ़ाना चाहती थी। 83वें ओवर में महमूद के लगातार तीन विकेटों ने निचले क्रम में अफगानिस्तान को मुश्किल में डाल दिया। टीम इसके बाद संभल नहीं सकी और 240 रन पर ऑलआउट हो गई। बांग्लादेश टीम ने पहली पारी में 346 रन बनाए थे।
विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर में भारतीय-बाजार से ₹44,166 करोड़ निकाले:2026 में निकासी ₹3 लाख करोड़ पार; वजह- US बॉन्ड यील्ड और क्रूड के दाम बढ़े
विदेशी निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालने का सिलसिला जारी है। अक्टूबर महीने में विदेशी निवेशकों ने अब तक इक्विटी मार्केट से ₹44,166 करोड़ की निकासी की है। इसके साथ ही साल 2026 में अब तक FPIs का कुल नेट आउटफ्लो बढ़कर ₹3.04 लाख करोड़ से ज्यादा हो चुका है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, मजबूत होता अमेरिकी डॉलर और 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी विदेशी निवेशकों की इस निकासी के मुख्य कारण हैं। इसके अलावा नॉर्थ एशियाई बाजारों में आर्टिफिशियली इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों में आई तेजी भी विदेशी निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। सितंबर के बाद अक्टूबर में भी बिकवाली जारी रही NSDL के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में हुई निकासी से पहले सितंबर महीने में भी विदेशी निवेशकों ने ₹35,861 करोड़ के शेयर बेचे थे। इससे पहले जुलाई में FPIs ने भारतीय शेयरों में ₹20,200 करोड़ और अगस्त में ₹29,631 करोड़ का निवेश किया था। साल 2026 में अब तक हुई ₹3.04 लाख करोड़ की निकासी, 2025 में दर्ज की गई कुल ₹1.66 लाख करोड़ की निकासी की तुलना में लगभग दोगुनी है। यह भारत के खिलाफ नहीं, ग्लोबल रीपोजिशनिंग: वेदांत गुप्ते इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म Trackk के को-फाउंडर और सीईओ वेदांत गुप्ते का कहना है कि विदेशी निवेशकों की इस बिकवाली को भारत में निवेश के खराब माहौल के रूप में नहीं, बल्कि दुनिया भर के बाजारों में अपना पैसा नए सिरे से लगाने की प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। वेदांत गुप्ते ने कहा कि गल्फ सप्लाई रिस्क के कारण क्रूड की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, मजबूत डॉलर और US यील्ड्स पैसे को सुरक्षित विकल्पों की ओर खींच रहे हैं। इसके साथ ही FPIs उत्तर एशियाई बाजारों में AI रैली का पीछा कर रहे हैं, जहां वैल्यूएशन फिलहाल सस्ते लग रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) और रिटेल इनवेस्टर्स ने इस बिकवाली के दबाव को काफी हद तक संभाला है। इससे पता चलता है कि भारतीय बाजार की नींव बिकवाली के आंकड़ों की तुलना में काफी मजबूत है। निफ्टी में इस साल 13.87% की गिरावट: वीके विजयकुमार जिओजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने बताया कि FPI बिकवाली ही इस साल भारतीय बाजार के कमजोर प्रदर्शन की मुख्य वजह है। 2026 में अब तक निफ्टी ने -13.87% का रिटर्न दिया है। विजयकुमार ने कहा कि 10-वर्षीय अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर जोखिम-मुक्त रिटर्न 5.2% से ऊपर बना हुआ है, ऐसे में विदेशी निवेशकों के लिए भारत से पैसा निकालना कोई बड़ी बात नहीं है। जब तक अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंचे रहेंगे, FPIs की बिकवाली जारी रह सकती है। यह स्थिति तब बदलेगी जब भारतीय शेयरों के वैल्यूएशन आकर्षक हो जाएंगे। विदेशी निवेशकों ने डेट मार्केट से भी पैसा निकाला इक्विटी के साथ-साथ विदेशी निवेशकों ने डेट (कर्ज) बाजार में भी बिकवाली की है। सितंबर में FPIs ने फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के जरिए ₹1,921 करोड़ और वॉलंटरी रिटेंशन रूट (VRR) के जरिए ₹233 करोड़ निकाले, जबकि जनरल रूट के जरिए ₹4,729 करोड़ का निवेश किया। क्या होता है FPI और FAR?
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