झारखंड के इस जिले में होगी चाय की खेती, पहले चरण में लगेंगे 80 हजार पौधे, किसानों की बढ़ेगी कमाई
Jharkhand News: झारखंड के गुमला जिले में अब चाय की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी की जा रही है. इसका उद्देश्य किसानों को खेती के नए विकल्प देना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना है. उद्यान विभाग की ओर से बिशुनपुर प्रखंड के नर्मा स्थित कृषि प्रक्षेत्र में चाय की खेती विकसित की जा रही है. इस योजना के सफल होने से जिले में कृषि के नए रास्ते खुलने और किसानों की आमदनी बढ़ने की उम्मीद है.
नर्मा में लगाए जाएंगे 80 हजार चाय के पौधे
योजना के पहले चरण में नर्मा कृषि प्रक्षेत्र में कुल 80 हजार चाय के पौधे लगाए जाएंगे. फिलहाल यहां पौधे लगाने का काम चल रहा है. शनिवार (10 अक्टूबर) को उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन ने कृषि प्रक्षेत्र का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने पौधरोपण के काम और वहां मौजूद सुविधाओं का जायजा लिया. डीडीसी ने अधिकारियों से योजना की प्रगति की जानकारी ली. उन्होंने कहा कि गुमला में चाय की खेती शुरू होने से कृषि के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं. इससे खेती के पारंपरिक तरीकों के साथ नए विकल्पों को भी बढ़ावा मिलेगा.
पौधों की देखभाल के लिए की गई व्यवस्था
नर्मा कृषि प्रक्षेत्र में चाय की खेती को सही तरीके से विकसित करने के लिए जरूरी सुविधाएं तैयार की गई हैं. यहां पैक हाउस, माली शेड, पानी की टंकी, घेराबंदी और सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर लगाए गए हैं. इन सुविधाओं की मदद से चाय के पौधों की देखभाल करना और समय पर सिंचाई करना आसान होगा. योजना के तहत पौधों को बेहतर तरीके से विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है, ताकि आगे चलकर चाय उत्पादन को बढ़ावा मिल सके.
किसानों की आमदनी और रोजगार बढ़ने की उम्मीद
उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन ने कहा कि गुमला में चाय की खेती कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है. इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं. साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. जिला उद्यान पदाधिकारी डॉ. तमन्ना ने बताया कि नर्मा में चाय की खेती सफल रहती है, तो इससे कृषि आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. किसानों के लिए कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं और वे खेती के दूसरे विकल्पों की ओर भी आगे बढ़ सकेंगे.
स्थानीय संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर जोर
जिला प्रशासन और उद्यान विभाग का लक्ष्य स्थानीय संसाधनों का सही इस्तेमाल करके कृषि आधारित विकास को गति देना है. चाय की खेती की इस पहल से गुमला जिले में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. निरीक्षण के दौरान जिला उद्यान पदाधिकारी डॉ. तमन्ना, तकनीकी विशेषज्ञ विश्व दीपक सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे. अब इस योजना की सफलता पर नजर रहेगी, ताकि आने वाले समय में जिले के किसानों को इसका लाभ मिल सके.
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अमेरिकी सरकार द्वारा पीईआरएम निलंबन से कारोबार पर नहीं पड़ेगा बड़ा असर: इंफोसिस
नई दिल्ली, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इंफोसिस ने कहा है कि अमेरिकी सरकार द्वारा परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (पीईआरएम) कार्यक्रम के तहत कुछ नई और लंबित आवेदन प्रक्रियाओं पर लगाए गए निलंबन का उसके कारोबार पर कोई महत्वपूर्ण असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।
कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई सूचना में कहा कि वह अमेरिकी श्रम विभाग के फैसले से अवगत है और एजेंसियों के किसी भी प्रश्न का जवाब देने के लिए सहयोग करने को तैयार है।
इंफोसिस ने कहा, हम नहीं मानते कि इस निलंबन का कंपनी के संचालन पर कोई भौतिक प्रभाव पड़ेगा। आवश्यकता होने पर हम नियामकीय मानकों के अनुरूप आगे भी जानकारी साझा करेंगे।
कंपनी ने यह भी रेखांकित किया कि उसने अमेरिका में मजबूत स्थानीय कार्यबल, प्रौद्योगिकी केंद्रों और नवाचार हब के निर्माण में लगातार निवेश किया है। इसके चलते उसकी मानव संसाधन रणनीति किसी एक आव्रजन कार्यक्रम पर निर्भर नहीं है।
इंफोसिस ने कहा कि वह अपने कर्मचारियों, ग्राहकों और अमेरिकी समुदायों के प्रति प्रतिबद्ध है तथा सभी लागू कानूनों और नियमों का पालन करती रहेगी।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने घोषणा की थी कि अमेरिकी प्रशासन ने कुछ प्रमुख वैश्विक आईटी और प्रौद्योगिकी कंपनियों के पीईआरएम आवेदन अस्थायी रूप से निलंबित किए हैं। यह कदम कथित वीजा धोखाधड़ी और अमेरिकी कर्मचारियों के हितों से जुड़े रोजगार संबंधी मुद्दों की जांच के संदर्भ में उठाया गया है।
पीईआरएम (परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम) अमेरिकी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके माध्यम से कंपनियां कुशल विदेशी कर्मचारियों को स्थायी निवास दिलाने में सहायता करती हैं।
इस मुद्दे पर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है। कंपनी ने कहा कि वह अमेरिकी सरकार की घोषणा से अवगत है और श्रम विभाग द्वारा जारी किसी भी निर्देश का पालन करेगी।
टीसीएस ने अपने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि उसकी अमेरिकी कार्यबल रणनीति मुख्य रूप से स्थानीय प्रतिभाओं की भर्ती पर आधारित है। कंपनी ने बताया कि उसके अमेरिका में 31 कार्यालय और डिलीवरी सेंटर हैं तथा वह अगले पांच वर्षों में 15,000 अतिरिक्त स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती का इरादा रखती है।
कंपनी ने कहा, पिछले दो वर्षों में हमारे पीईआरएम आवेदनों की संख्या एकल अंकों में थी, इसलिए इस कार्यक्रम के निलंबन से हमारी कार्यबल रणनीति और ग्राहक सेवाओं पर प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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