भारत-अमेरिका ट्रेड डील एमएसएमई सेक्टर के लिए वरदान: सीएआईटी
नई दिल्ली, 8 फरवरी (आईएएनएस)। अखिल भारतीय व्यापारियों के परिसंघ यानी कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) ने रविवार को कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के पहले चरण को अंतिम रूप दिए जाने से भारत के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) सेक्टर को अमेरिकी बाजार में व्यापार के नए और बड़े अवसर मिलेंगे।
सीएआईटी ने अपने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी और मजबूत नेतृत्व में हुआ यह ट्रेड डील भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह समझौता भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ाता है और एमएसएमई सेक्टर के लिए बड़ा फायदेमंद साबित होगा। इससे दुनिया में भारत की पहचान एक मजबूत, भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी व्यापारिक साझेदार के रूप में बनी है।
सीएआईटी के सेक्रेटरी जनरल प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि इस ट्रेड डील से भारत के कई प्रमुख सेक्टरों को लाभ मिलेगा। इनमें कपड़ा और रेडीमेड कपड़े, चमड़ा और जूते, रत्न और आभूषण, सस्ती दवाइयां, ऑटोमोबाइल और विमान के पुर्जे, केमिकल, प्लास्टिक और रबर उत्पाद, होम डेकोर, हस्तशिल्प और कुछ इंजीनियरिंग सामान शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुंच और टैरिफ (शुल्क) में सुधार से भारत के उत्पाद दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि यह समझौता एमएसएमई सेक्टर के लिए बहुत जरूरी और समय पर मिला समर्थन है, क्योंकि यही सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
उन्होंने कहा कि ज्यादा निर्यात के मौके मिलने से एमएसएमई कंपनियां उत्पादन बढ़ा सकेंगी, विदेशों तक अपना कारोबार फैला सकेंगी और इससे युवाओं व महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
इस ट्रेड डील से मेक इन इंडिया अभियान को भी मजबूती मिलेगी, क्योंकि इससे भारतीय कंपनियां वैश्विक सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनेंगी।
खंडेलवाल ने कहा कि यह समझौता भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा भी करता है, खासकर कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में। इससे साफ होता है कि सरकार की व्यापार नीति संतुलित और किसान-हितैषी है।
उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर यह भारत-अमेरिका व्यापार समझौता एक दूरदर्शी पहल है, जो निर्यात को गति देगा, उद्यमिता को बढ़ावा देगा और भारत को आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य के करीब ले जाएगा।
सीएआईटी भारत का एक प्रमुख राष्ट्रीय संगठन है, जो देश के 9 करोड़ से ज्यादा व्यापारियों और 40,000 से अधिक व्यापार संघों का प्रतिनिधित्व करता है।
1998 में स्थापित यह संगठन छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के हितों के लिए काम करता है। यह सरकार और व्यापारियों के बीच एक सेतु के रूप में काम करता है, ताकि छोटे और मध्यम उद्योगों का विकास हो सके।
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
जापान: स्नैप इलेक्शन का दांव चला, एग्जिट पोल में ताकाइची काफी आगे
टोक्यो, 8 फरवरी (आईएएनएस)। एग्जिट पोल के मुताबिक, जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची का गठबंधन रविवार के चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने वाला है, जिससे उनके टैक्स में कटौती का रास्ता साफ हो जाएगा। मार्केट इससे थोड़ा घबराया भी है और तय माना जा रहा है कि चीन का मुकाबला करने के लिए मिलिट्री खर्चे में भी वो इजाफा करेंगी।
सरकारी प्रसारक एनएचके के अनुसार, ताकाइची की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी और गठबंधन सहयोगी, जापान इनोवेशन पार्टी, जिसे इशिन के नाम से जाना जाता है निचले सदन की 465 सीटों में से 366 सीटें हासिल कर सकती है। ये एक सुपरमेजॉरिटी होगी और उनके एजेंडा को आसान बनाएगी। अनुमान है कि उनकी पार्टी 328 सीटें जीतेगी, जो अब उनकी बंपर जीत का इशारा करता है।
द जापान टाइम्स के मुताबिक एलडीपी, जिसके पास चुनाव से पहले 198 सीटें थीं, अगर कुल 310 या उससे ज्यादा सीटें जीत जाती है, तो वह अकेले ही निचले सदन के दो-तिहाई हिस्से पर नियंत्रण हासिल कर लेगी। इससे एलडीपी के नेतृत्व वाले गठबंधन को, जिसमें जापान इनोवेशन पार्टी (जेआईपी) भी शामिल है, ऊपरी सदन में बहुमत की कमी के कारण आने वाली चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। अगर ऊपरी सदन में अहम बिल और बजट पास नहीं होते हैं, तो उन्हें निचले सदन में दो-तिहाई बहुमत से पास किया जा सकता है।
64 साल की जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री ताकाइची ने पिछले साल के आखिर में सत्ताधारी एलडीपी का नेतृत्व संभालने के बाद से अपनी बढ़ती पर्सनल अप्रूवल रेटिंग का फायदा उठाने के लिए यह जमा देने वाले मौसम यानी सर्दियों का चुनाव किया। ये दांव उनके अपने लिए जीत का सबब बन गया है।
वोटर उनके सीधे-सादे, मेहनती इमेज से आकर्षित हुए हैं, लेकिन उनकी राष्ट्रवादी सोच और सुरक्षा पर जोर देने से शक्तिशाली पड़ोसी चीन के साथ संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं, जबकि टैक्स कटौती के उनके वादों ने बाजार को हिला कर रख दिया है।
--आईएएनएस
केआर/
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