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रियाद एयरपोर्ट पर हमले से भड़के ट्रंप, बोले- जल्द पता चलेगा अमेरिका क्या करेगा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए जानलेवा हमले की न‍िंदा करते हुए इसे 'बेहद भयानक' बताया. इस हमले में 12 लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक अमेरिकी नागरिक भी शामिल है. जॉइंट बेस एंड्रयूज में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि यह बहुत भयानक है." अमेरिका की संभावित प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "आपको जल्द ही पता चल जाएगा, लेकिन मैं इतना कह सकता हूं कि यह बहुत भयानक घटना है."

ट्रंप ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बात करने की बात कही. सऊदी अरब में जो हुआ है, वह स्वीकार नहीं किया जा सकता. सऊदी अरब की रक्षा क्षमता पर ट्रंप ने कहा, "वे अपनी रक्षा करने में सक्षम हैं. सऊदी अच्छे लड़ाके हैं, लेकिन यह हमला बेहद गंभीर और दुखद है." हूती समूहों के साथ अमेरिका के संपर्क को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने कहा, "हमारी हूती समूहों के साथ बातचीत हो रही है और देखते हैं आगे क्या होता है." सऊदी अरब के जनरल अथॉरिटी ऑफ सिविल एविएशन के अनुसार, हमले में 12 लोगों की मौत हुई और 309 लोग घायल हुए हैं. मारे गए लोगों में चार सऊदी नागरिक, दो बांग्लादेशी नागरिक और अमेरिका, मिस्र, जॉर्डन, सीरिया, फिलिस्तीन तथा सूडान का एक-एक नागरिक शामिल है. मृतकों में किसी भारतीय नागरिक का नाम नहीं है.

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ट्रंप ने शनिवार को कहा कि वह इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या अमेरिका को हूती समूहों के खिलाफ सऊदी अरब की सैन्य कार्रवाई में शामिल होना चाहिए. उन्होंने कहा, "संभव है. हम इस पर विचार करेंगे." ईरान से जुड़े एक सवाल पर ट्रंप ने कहा, "हम अभी पीछे हट सकते हैं लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में उनके पास परमाणु हथियार न हो." उन्होंने ईरान को लेकर कहा, "स्थिति कुछ शांत होती दिख रही है. चुनाव से पहले वे शायद कुछ अतिरिक्त कदम उठाएं, यह सोचकर कि इससे हमें नुकसान होगा लेकिन हम इसे बहुत जल्दी खत्म कर सकते हैं."

हालांकि, सऊदी नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने हमले के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। वहीं, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के अधिकारियों और एक राजनयिक सूत्र ने ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों पर हमले का आरोप लगाया है. हूती समूह ने इस सप्ताह एयरपोर्ट पर पहले हुए हमलों की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन शनिवार के हमले को लेकर तुरंत कोई दावा नहीं किया. 
 

Input: IANS

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Explainer: क्या होता है मुचलका, जमानत से कितना अलग? अभिजीत दिपके और उनके साथियों को क्यों देना पड़ा, जानिए पूरा कानूनी नियम

Explainer: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए गए अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई के बाद मुचलके को लेकर चर्चा तेज हो गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीनों नेताओं को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां उन्हें एक साल तक शांति भंग नहीं करने की शर्त पर रिहा किया गया. रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्येक नेता को 50 हजार रुपये का जमानती मुचलका भी देना पड़ा. 

इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठता है कि आखिर मुचलका क्या होता है? क्या इसे भरने के लिए पूरी रकम जमा करनी पड़ती है? पुलिस या मजिस्ट्रेट किन परिस्थितियों में किसी व्यक्ति से मुचलका भरवा सकते हैं? और क्या मुचलका देने का मतलब यह है कि व्यक्ति ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है? आइए, इन सभी सवालों को आसान भाषा में समझते हैं.

क्या होता है मुचलका?

मुचलका एक तरह का कानूनी बंधपत्र होता है, जिसमें कोई व्यक्ति निर्धारित शर्तों का पालन करने का लिखित आश्वासन देता है. परिस्थितियों के अनुसार, इसमें अदालत या संबंधित अधिकारी के सामने पेश होने, शांति बनाए रखने या कानून के मुताबिक तय अन्य शर्तों का पालन करने की जिम्मेदारी शामिल हो सकती है.

मुचलके के अलग-अलग प्रकार होते हैं. उदाहरण के लिए, किसी मामले में व्यक्ति को निजी मुचलके पर छोड़ा जा सकता है, जबकि दूसरे मामले में उससे जमानतदार यानी श्योरिटी भी मांगी जा सकती है.

निजी मुचलका और जमानती मुचलका एक ही चीज नहीं हैं. निजी मुचलके में व्यक्ति खुद शर्तों का पालन करने का वचन देता है. जमानती मुचलके में कोई दूसरा व्यक्ति भी जमानतदार के रूप में जिम्मेदारी लेता है.

इसलिए मुचलके का वास्तविक अर्थ समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि संबंधित आदेश में किस तरह का बंधपत्र मांगा गया है.

मुचलका भरने का मतलब क्या पूरी रकम जमा करना है?

यह सबसे आम सवालों में से एक है. अगर किसी व्यक्ति से 50 हजार रुपये का जमानती मुचलका भरवाया जाता है, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि उसे हर स्थिति में तत्काल 50 हजार रुपये नकद जमा करने होंगे.

आमतौर पर जमानती मुचलके में व्यक्ति और जमानतदार निर्धारित शर्तों का पालन करने का आश्वासन देते हैं. यदि बंधपत्र की शर्तों का उल्लंघन होता है, तो कानून के अनुसार बंधपत्र की रकम वसूलने या जब्त करने की कार्यवाही हो सकती है.

हालांकि, प्रक्रिया संबंधित आदेश और बंधपत्र की शर्तों पर निर्भर करती है. इसलिए किसी भी मामले में यह मान लेना सही नहीं होगा कि मुचलके की पूरी रकम अनिवार्य रूप से जमा कराई गई है या उल्लंघन होने पर अपने आप वसूल हो जाएगी.

CJP नेताओं के मामले में उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, प्रत्येक नेता के लिए 50 हजार रुपये का जमानती मुचलका निर्धारित किया गया था. लेकिन इस रकम को वास्तव में किस रूप में जमा या निष्पादित किया गया, इसकी पुष्टि संबंधित दस्तावेजों से ही की जा सकती है.

किन परिस्थितियों में भरवाया जाता है मुचलका?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 में शांति बनाए रखने और अच्छे व्यवहार से जुड़े बंधपत्रों के लिए अलग-अलग प्रावधान हैं.

BNSS की धारा 126 के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट को ऐसी स्थिति में कार्रवाई करने का अधिकार है, जब उसके पास यह मानने का पर्याप्त आधार हो कि कोई व्यक्ति शांति भंग कर सकता है या सार्वजनिक शांति व्यवस्था को प्रभावित करने वाला गलत काम कर सकता है. ऐसी स्थिति में संबंधित व्यक्ति से कारण बताने को कहा जा सकता है कि उससे शांति बनाए रखने के लिए बंधपत्र क्यों न लिया जाए. इस धारा के तहत निर्धारित अवधि अधिकतम एक साल हो सकती है. 

उदाहरण के लिए, दो समूहों के बीच तनाव बढ़ने और हिंसक टकराव की आशंका होने पर मजिस्ट्रेट संबंधित परिस्थितियों के आधार पर शांति बनाए रखने के लिए बंधपत्र की कार्यवाही शुरू कर सकता है.

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि पुलिस किसी भी व्यक्ति को केवल आशंका के आधार पर मनमाने ढंग से मुचलका भरने के लिए बाध्य कर सकती है. इसके लिए कानून के तहत पर्याप्त आधार और निर्धारित प्रक्रिया जरूरी है.

अभिजीत दिपके और उनके साथियों को मुचलका क्यों देना पड़ा?

अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका 10 अक्टूबर को दिल्ली में CJP के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंचे थे. पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही थी और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठा रही थी.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने तीनों नेताओं को एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया था. इसके बाद उन्हें कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया. रिपोर्ट के अनुसार, उनकी रिहाई के समय एक साल तक शांति भंग नहीं करने की शर्त लगाई गई और प्रत्येक को 50 हजार रुपये का जमानती मुचलका देने को कहा गया. 

इस मामले में कानूनी संदर्भ BNSS की धारा 126 से जुड़ा है, जो शांति बनाए रखने के लिए बंधपत्र की कार्यवाही का प्रावधान करती है. वहीं, धारा 170 संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए गिरफ्तारी से संबंधित है. दोनों धाराओं का उद्देश्य और प्रक्रिया अलग-अलग है.

यह ध्यान रखना जरूरी है कि प्रदर्शन में शामिल होना अपने आप में शांति भंग करने का प्रमाण नहीं है. किसी व्यक्ति के खिलाफ ऐसी कार्रवाई उचित थी या नहीं, इसका आकलन संबंधित आदेश, उपलब्ध तथ्यों और लागू कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है.

क्या मुचलका भरने का मतलब अपराध स्वीकार करना है?

नहीं. मुचलका भरना अपने आप में अपराध स्वीकार करना नहीं है. शांति बनाए रखने के लिए बंधपत्र की कार्यवाही का उद्देश्य संभावित विवाद या अशांति को रोकना होता है. यह किसी आपराधिक मुकदमे में दोष सिद्ध होने के समान नहीं है.

इसी तरह, मुचलका देने से व्यक्ति पर भविष्य में किसी भी तरह के प्रदर्शन में शामिल होने की पूर्ण रोक अपने आप नहीं लग जाती. उसे वही शर्तें माननी होती हैं जो संबंधित आदेश में कानूनी रूप से निर्धारित की गई हों.

यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसके खिलाफ बंधपत्र की कार्यवाही अनुचित है या निर्धारित शर्तें कानून के अनुरूप नहीं हैं, तो वह वकील की मदद लेकर उपलब्ध कानूनी उपाय अपना सकता है.

मुचलका न भरने पर क्या हो सकता है?

अगर कोई व्यक्ति मजिस्ट्रेट द्वारा कानूनी प्रक्रिया के तहत दिए गए आदेश के अनुसार आवश्यक बंधपत्र नहीं देता, तो उसके परिणाम हो सकते हैं. संबंधित कार्यवाही और लागू प्रावधानों के आधार पर उसे हिरासत में रखा जा सकता है, जब तक वह बंधपत्र निष्पादित नहीं करता या कानून के तहत अन्य व्यवस्था लागू नहीं होती.

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर मामले में मुचलका न देने पर व्यक्ति को अनिश्चित समय तक जेल में रखा जा सकता है. हिरासत की अवधि, प्रक्रिया और संबंधित व्यक्ति के अधिकार लागू कानून और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं.

मुचलके और जमानत में क्या अंतर है?

मुचलका और जमानत दोनों कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य अलग हो सकता है. मुचलका एक लिखित कानूनी आश्वासन है, जिसमें व्यक्ति तय शर्तों का पालन करने का वचन देता है, जैसे शांति बनाए रखना या अदालत में पेश होना.

इसके लिए हर बार नकद राशि जमा करना जरूरी नहीं होता. वहीं, जमानत का उद्देश्य आरोपी को मुकदमे की सुनवाई के दौरान हिरासत से रिहा करने की अनुमति देना है. जमानत में निजी मुचलका और जमानतदार की जरूरत पड़ सकती है. दोनों की शर्तें मामले और संबंधित कानून पर निर्भर करती हैं.

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