नाना पाटेकर की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से सामने आई:हार्ट की नस में खून का थक्का जमने से आया था गंभीर हार्ट अटैक
नाना पाटेकर की मौत की वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आई है। डॉक्टरों ने उनकी मौत को प्राकृतिक बताया है। टीवी 9 भारतवर्ष के अनुसार, पाटेकर कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) से पीड़ित थे। उनके दिल की मुख्य धमनी में खून का थक्का (ब्लड क्लॉट) जमने के कारण दिल के एक बड़े हिस्से में रक्त संचार रुक गया, जिससे उन्हें मैसिव हार्ट अटैक आया। मैसिव यानी गंभीर हार्ट अटैक के प्रभाव के कारण अंततः उनका दिल धड़कना बंद हो गया, जिसे मेडिकल भाषा में कार्डिएक अरेस्ट कहा जाता है। नाना ने निधन से कुछ घंटे पहले दोस्त को मैसेज किया पुलिस जांच में पता चला है कि नाना पाटेकर ने निधन से कुछ घंटे पहले अपने करीबी दोस्त अमेय नाईक से संपर्क करने की कोशिश की थी। उन्होंने 8 अक्टूबर की सुबह करीब 2:30 बजे वॉट्सऐप पर मैसेज भेजकर तबीयत ठीक नहीं होने की जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने अमेय को फोन भी किया। पुलिस के मुताबिक, अमेय नाईक ने नाना पाटेकर का मैसेज सुबह करीब 3:30 बजे देखा। इसके बाद वे तुरंत उनके डोना पावला स्थित घर पहुंचे। वहां उन्होंने नाना को सोफे पर बेहोश पाया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अमेय ने सुरक्षा गार्ड की मदद से अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं से संपर्क किया। इसके बाद नाना पाटेकर को मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु का केस दर्ज किया था नाना पाटेकर की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए 8 अक्टूबर को बांबोली स्थित गोवा मेडिकल कॉलेज में पोस्टमॉर्टम किया गया। नाना पाटेकर के निधन की सूचना मिलने के बाद पणजी पुलिस ने पुलिस स्टेशन में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 194 के तहत आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज किया था। गोवा से नाना पाटेकर का पार्थिव शरीर पुणे लाया गया था। यहां देर रात डोंजे गांव में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार हुआ था। अंतिम संस्कार से जुड़ी तस्वीरें देखें- ………….. यह खबर भी पढ़ें… रेपिस्ट के रोल पर नाना ने डायरेक्टर को गालियां दीं:'परिंदा' के क्लाईमैक्स में आग से झुलसे, आर्मी जॉइन करने के लिए रक्षामंत्री को फोन किया नाना पाटेकर ने अपने करीब पांच दशक के करियर में कई यादगार किरदार निभाए थे। नाना अपने बेबाक और गुस्सैल अंदाज के लिए भी जाने जाते थे। एक बार डायरेक्टर रवि चोपड़ा ने उन्हें फिल्म में रेपिस्ट का रोल ऑफर किया तो नाना भड़क गए और उन्हें गालियां तक दे दीं। बाद में स्मिता पाटिल के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ और नाना को फिल्म में अहम विलेन का किरदार मिला। (परिंदा) की शूटिंग के दौरान भी उनका डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा से विवाद हुआ था। पूरी खबर यहां पढ़ें…
ट्रम्प बोले- अटलांटिक या पैसिफिक का नाम ‘ट्रम्प ओशन’ रखेंगे:कार्यकाल खत्म होने से पहले नाम बदलकर रहूंगा; होर्मुज को भी 'ट्रम्प स्ट्रेट' बता चुके
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अटलांटिक या पैसिफिक ओशन का नाम बदलकर ‘ट्रम्प ओशन’ या ‘ओशन ऑफ द अमेरिका’ रखने का सुझाव दिया है। ट्रम्प ने शनिवार को एक चुनावी रैली के दौरान कहा कि 2028 में अपना कार्याकाल खत्म होने से पहले वह एक महासागर और एक बड़ी नदी का नाम बदलना चाहते हैं। उनकी इस बात पर रैली में मौजूद लोग हंसने लगे और तालियां बजाने लगे। इससे पहले भी ट्रम्प खुद के नाम पर कई जगहों के नाम रखने का सुझाव दे चुके हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कई बार होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिकी इलाका बताते हुए कहा कि क्या इसका नाम बदलकर ‘ट्रम्प स्ट्रेट’ कर देना चाहिए। पहले भी कई जगहों के नाम बदल चुके हैं ट्रम्प… मेक्सिको गल्फ को ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ किया पिछले साल ट्रम्प ने मेक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ कर दिया था। इस फैसले के बाद मेक्सिको के साथ कूटनीतिक तनाव बढ़ गया था। इस नाम को लेकर ट्रम्प प्रशासन और अमेरिकी न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) के बीच भी विवाद हुआ। AP ने खाड़ी के नए नाम को हर जगह इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद राष्ट्रपति के कार्यक्रमों में एजेंसी की पहुंच को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई थी। लेक ओंटारियो को भी ‘लेक अमेरिका’ किया इस साल अगस्त में ट्रम्प ने अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य और कनाडा के बीच स्थित लेक ओंटारियो का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ कर दिया था। द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, यह फैसला कनाडा के नेताओं के साथ व्यापार और टैरिफ को लेकर चल रहे तनाव के बीच आया था। न्यू मेक्सिको राज्य का नाम बदलने का भी सुझाव दिया ट्रम्प ने अमेरिका के न्यू मेक्सिको राज्य का नाम बदलकर ‘न्यू अमेरिका’ रखने का सुझाव भी दिया था। पिछले महीने उन्होंने यह विचार सामने रखा था। हालांकि, बाद में उन्होंने कहा कि इस बारे में फैसला राज्य के लोगों को ही करना होगा। द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, न्यू मेक्सिको में रिपब्लिकन पार्टी के एक उम्मीदवार के समर्थन में वीडियो संदेश में ट्रम्प ने कहा था, 'मैं इस पर जोर नहीं दूंगा, लेकिन बहुत से लोगों को यह नाम काफी पसंद है।' क्या अमेरिका अकेले नाम बदल सकता है? अमेरिकी सरकार अपने आधिकारिक दस्तावेजों, सरकारी नक्शों और रिकॉर्ड में किसी जगह के लिए नया नाम इस्तेमाल करने का फैसला कर सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरे देश भी उस नाम को स्वीकार करने के लिए बाध्य होंगे। अंटलांटिक और पैसिफिक ओशन नॉर्थ से साउथ अमेरिका तक फैला हुआ है। इसलिए यह ओशन कई देशों से जुड़ा है। इसलिए अगर अमेरिकी सरकार अपने दस्तावेजों में इसे ‘ट्रम्प ओशन’ कहना शुरू भी कर दे, तो भी दूसरे देश और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं अमेरिकी नाम को अपने आप अपनाने के लिए बाध्य नहीं होंगी। यानी नाम बदलने से महासागर का मालिकाना हक नहीं बदल जाएगा। नया नाम इस्तेमाल करने से यह अमेरिकी क्षेत्र नहीं बन जाएगा। महासागर का नाम बदलने का अभी कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं ट्रम्प ने अटलांटिक या पैसिफिक ओशन का नाम बदलने की बात केवल रैली के दौरान कही। उन्होंने अभी तक इस बारे में कोई औपचारिक प्रस्ताव पेश नहीं किया है। द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यकारी अधिकारों का इस्तेमाल करके समुद्र, झीलों और दूसरी भौगोलिक जगहों के नाम बदल सकते हैं। ट्रम्प प्रशासन की ओर से बदले गए नामों को ऑनलाइन नक्शा बनाने वाली कंपनियों ने भी आम तौर पर अपनाया है। --------------------- यह खबर भी पढ़ें… हूती विद्रोही सऊदी अरब को यमन में कैसे फंसा गए:UAE ने गलत फैसलों की वजह से साथ छोड़ा; ट्रम्प ने भी मदद नहीं की सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अपने देश को तेल की कमाई से निकालकर दुनिया का बड़ा निवेश और पर्यटन केंद्र बनाना चाहते हैं। लेकिन जिस यमन युद्ध से वे पिछले 11 साल से निकलने की कोशिश कर रहे थे, उसी ने उन्हें फिर घेर लिया है। पूरी खबर पढ़ें…
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