यूआईडीएआई की बड़ी उपलब्धि, 1 करोड़ से ज्यादा स्कूली बच्चों का बायोमेट्रिक अपडेट किया पूरा
नई दिल्ली, 8 फरवरी (आईएएनएस)। आईटी मंत्रालय की ओर से रविवार को जारी एक बयान के अनुसार, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने अपने चल रहे मिशन-मोड अभियान के तहत एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यूआईडीएआई ने देश भर के 83,000 स्कूलों में पढ़ने वाले 1 करोड़ से ज्यादा स्कूली बच्चों के अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) पूरे कर लिए हैं।
यूआईडीएआई ने यह विशेष एमबीयू अभियान सितंबर 2025 में शुरू किया था। यह अभियान यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई+) ऐप से तकनीकी जुड़ाव के बाद संभव हो पाया। इससे स्कूलों में बच्चों के बायोमेट्रिक अपडेट की स्थिति आसानी से पता चलने लगी और जिन बच्चों का अपडेट बाकी था, उनकी पहचान की जा सकी।
इस तकनीकी सुविधा की मदद से यूआईडीएआई और स्कूलों ने मिलकर उन बच्चों की पहचान की, जिनका एमबीयू जरूरी था। इसके बाद स्कूलों में विशेष कैंप लगाए गए, जहां बच्चों का बायोमेट्रिक अपडेट पूरा किया गया।
5 साल से कम उम्र के बच्चे का आधार बनवाते समय केवल फोटो, नाम, जन्मतिथि, लिंग, पता और जन्म प्रमाण पत्र लिया जाता है। इस उम्र में बच्चों की उंगलियों के निशान और आंखों की पुतली (आइरिस) पूरी तरह विकसित नहीं होती, इसलिए इन्हें रिकॉर्ड नहीं किया जाता।
जब बच्चा 5 साल और 15 साल की उम्र पार कर लेता है, तब आधार में फिंगरप्रिंट और आइरिस अपडेट कराना जरूरी होता है। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो सरकारी योजनाओं का लाभ लेने या एनईईटी, जेईई, सीयूईटी जैसी परीक्षाओं में रजिस्ट्रेशन के समय परेशानी हो सकती है।
बच्चों को बायोमेट्रिक अपडेट के लिए प्रेरित करने के लिए यूआईडीएआई ने 7 से 15 साल के बच्चों के लिए 1 अक्टूबर 2025 से एक साल तक शुल्क माफ कर दिया था। इसके अलावा 5-7 साल और 15-17 साल के बच्चों के लिए एमबीयू पहले से ही निःशुल्क है।
स्कूलों के अलावा बच्चे देश भर के आधार नामांकन केंद्रों और आधार सेवा केंद्रों पर जाकर भी अपना एमबीयू करा सकते हैं। इस दौरान लगभग 1.3 करोड़ बायोमेट्रिक अपडेट ऐसे केंद्रों पर पूरे किए गए।
यूआईडीएआई के सीईओ भुवनेश कुमार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर इस अभियान की जानकारी दी और स्कूलों में एमबीयू कैंप लगाने के लिए सहयोग मांगा।
देशभर में स्थित यूआईडीएआई के 8 क्षेत्रीय कार्यालयों ने पिछले 5 महीनों में शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन, स्कूल प्रबंधन और यूआईडीएआई रजिस्ट्रार के साथ मिलकर यह बड़ा अभियान पूरा किया है। यह मिशन-मोड अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक देश के सभी विद्यालयों को इसमें कवर नहीं कर लिया जाता।
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत का लक्ष्य 1,000 क्यूबिट्स और 2,000 किमी का क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क स्थापित करना: डॉ. जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली, 8 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास नेशनल क्वांटम मिशन है, जिसका लक्ष्य 1,000 क्यूबिट्स वाला क्वांटम कंप्यूटर और 2,000 किलोमीटर का क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क स्थापित करना है, जिससे रक्षा, साइबर सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव आएगा।
इस मिशन के लिए लगभग 6,000 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। यह मिशन देश के 17 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित 43 संस्थानों में लागू किया जा रहा है। इसे चार मुख्य क्षेत्रों में बांटा गया है-क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन, क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी, और क्वांटम मैटेरियल्स व डिवाइसेज।
आंध्र प्रदेश में अमरावती क्वांटम वैली के शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस मिशन के तहत अगले 8 वर्षों में 1,000 फिजिकल क्यूबिट्स वाला क्वांटम कंप्यूटर विकसित करने, सुरक्षित क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क स्थापित करने, लंबी दूरी के क्वांटम संचार को सक्षम बनाने और 2,000 किमी तक शहरों के बीच सुरक्षित क्वांटम के डिस्ट्रीब्यूशन का लक्ष्य रखा गया है।
मंत्री ने कहा कि क्वांटम तकनीक अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि रणनीतिक जरूरत बन चुकी है। अगर भारत आने वाले वर्षों में अपनी संचार व्यवस्था, रक्षा प्रणाली, स्वास्थ्य नवाचार और वैश्विक तकनीकी पहचान को सुरक्षित रखना चाहता है तो उसे इस क्षेत्र में आगे रहना ही होगा।
शिलान्यास कार्यक्रम में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, राज्य मंत्री नारा लोकेश, सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
मंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश में पिछले एक साल में जो तेज विकास हुआ है, वह केंद्र और राज्य के सहयोग का अच्छा उदाहरण है। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डबल इंजन मॉडल बताया जाता है, जिसमें केंद्र और राज्य मिलकर काम करते हैं।
उन्होंने विशाखापट्टनम में बने नेशनल सेंटर फॉर ओशन साइंसेज का उदाहरण देते हुए बताया कि यह परियोजना 2006 में शुरू हुई थी, लेकिन करीब 20 साल तक अटकी रही। मौजूदा राज्य सरकार के आने के बाद इसे कुछ ही महीनों में पूरा कर लिया गया था।
--आईएएनएस
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