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'Bigg Boss 20' के पहले वाइल्डकार्ड मनीष गोयल कौन हैं? जीत चुके हैं ये फेमस रियलिटी शो, टीवी की दुनिया से भी है खास नाता

Who is Manish Goel: सलमान खान का रियलिटी शो आए दिन दर्शकों को एक नया झटका दे रहा है. घर में घरवालों के बीच के समीकरण बिगड़ते नजर आ रहे हैं. कुछ रिश्ते बिगड़ रहे हैं, तो कुछ पनप रहे हैं. अब तक शो से ईशा रिखी, रीति तिवारी और रोहिद खान बेघर हुए हैं. इसके बाद भी घर में राशन की कमी है और यही कमी घरवालों के बीच तनातनी की वजह बनी हुई है. वहीं, वीकेंड के वार पर सलमान खान ने घरवालों को एक बड़ा सप्राइज दे दिया है. 

बिग बॉस 20 में उसके पहले ऑफिशियल वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट की एंट्री हो चुकी है. वीकेंड के वार एपिसोड में सलमान खान ने बड़े ही खास अंदाज में वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट्स से घरवालों को मिलवाया. बीबी 20 में मनीष गोयल ने पहले वाइल्ड कार्ड के तौर पर एंट्री ले ली है. ऐसे में फैंस बहुत कंफ्यूज हैं कि आखिर ये मनीष गोयल है कौन? आइए जानें, 'बिग बॉस 20' (Bigg Boss 20) के पहले वाइल्डकार्ड मनीष गोयल कौन हैं? मनीष गोयल क्या करते हैं? 

मनीष गोयल ने खास अंदाज में ली एंट्री

टीवी इंडस्ट्री के जाने-माने एक्टर मनीष गोयल 'बिग बॉस 20' के वीकेंड के वार पर सलमान खान के साथ स्टेज पर अपने किसी अपकमिंग प्रोजेक्ट के प्रमोशन के सिलसिले में गेस्ट के तौर पर आए थे. हालांकि, ये केवल एक सप्राइज था, जो सलमान खान घरवालों को देना चाहते थे. सलमान ने इसके बाद घरवालों को बताया कि मनीष गोयल भी उनके साथ इस शो का हिस्सा बनने आए हैं. 

कौन हैं मनीष गोयल?

अगर बात करें मनीष गोयल के टेलीविजन करियर की, तो वह पिछले दो दशकों से ज्यादा समय से इंडियन एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का एक अहम हिस्सा रहे हैं. उन्होंने 'भाभी', 'कहानी घर घर की', 'कसौटी जिंदगी की', 'देवी', 'भाग्यलक्ष्मी', 'आयुष्मान भव', 'तंत्र' और 'हमारी वाली गुड न्यूज' जैसे कई पॉपुलर हिंदी सीरियल्स में शानदार काम किया है. इसके अलावा, उन्होंने टीवी के सबसे पॉपुलर शो 'अनुपमा' में राघव सिंह के किरदार में भी अपनी बेहतरीन छाप छोड़ी है.

मनीष गोयल की फिल्मों की लिस्ट

टेलीविजन के अलावा मनीष ने फिल्मों में भी हाथ आजमाया है. उनकी फिल्मों में 'हम फिर मिलें न मिलें' शामिल है, जिसके लिए उन्होंने एक राइटर के रूप में भी अपना टेलेंट दिखाया था. इसके अलावा वह फिल्म 'हनक' में भी नजर आ चुके हैं. हालांकि उनकी मुख्य पहचान छोटे पर्दे के एक मंजे हुए एक्टर के रूप में ही है, लेकिन इन फिल्मी प्रोजेक्ट्स ने उन्हें एक नया मौका दिया. 

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किस रियलिटी शो के विनर रहे हैं मनीष गोयल?

मनीष गोयल अब तक कई फेमस रियलिटी शोज का हिस्सा रह चुके हैं. मनीष बिग बॉस 20 का हिस्सा बनने से पहले डांस रियलिटी शो 'नच बलिए' सीजन1 में अपनी पत्नी पूनम नरूला के साथ शामिल हुए थे, जहां ये जोड़ी रनर-अप रही थी. वहीं, मनीष 'जरा नचके दिखा', 'से शवा शवा' और 'उस्तादों का उस्ताद' जैसे शोज में भी अपना जलवा दिखा चुके हैं.

बीबी 20 मनीष के लिए कोई पहली रियलिटी शो नहीं है. इससे पहले उन्होंने सेलिब्रिटी कुकिंग रियलिटी शो 'वेलकम, बाजी मेहमान नवाजी की' में भी जीत हासिल की थी. 

वाइल्ड कार्ड पर कैसा था घरवालों का रिएक्शन?

बीबी 20 के होस्ट सलमान खान ने जैसे ही अपने स्टाइल में मनीष गोयल की वाइल्डकार्ड एंट्री की ऑफिशियल अनाउंसमेंट की, वैसे ही घरवालों के रिएक्शन देखने लायक थे. मनीष की एंट्री से अगर कोई सबसे ज्यादा खुश दिखा, तो वो हैं माही विज और लव गिल. माही विज और मनीष गोयल एक दूसरे को अपने टीवी बैकग्राउंड की वजह से पहले से जानते हैं. वहीं, बाकी घरवाले भी काफी हैरान दिखे.

मनीष की एंट्री से फैंस की उम्मीदें भी काफी ज्यादा बढ़ गई हैं. अब देखने वाली बात ये है कि मनीष इस गेम में क्या नया एलिमेंट देने वाले हैं, जो अब तक बाकी सदस्यों में मिसिंग रहा है. 

अगला वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट कौन होगा?

इसी एपिसोड के लास्ट में सलमान खान ने फैंस की एक्साइटमेंट को और बढ़ा दिया. सलमान ने अनाउंस किया है कि आज के वीकेंड के वार एपिसोड में एक और वाइल्ड कार्ड एंट्री होने वाली है. हालांकि, अभी तक ये खुलासा नहीं हुआ है कि अगला वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट कौन होने वाला है. इस खबर ने फैंस के बीच एक्साइटमेंट को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है. 

 फैंस और सोशल मीडिया यूजर्स का मानना है कि शो का अगला चेहरा इन्फ्युलेंसर नकुल धुल (Nakul Dhull) होंगे, जो सोशल मीडिया पर 'मिट्ठू डॉन' (Mitthu Don) के नाम से फेमस हैं.

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Explainer: क्या होता है प्रिवेंटिव अरेस्ट? जिसके तहत हिरासत में लिए गए अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका

Explainer: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से पहले पार्टी के प्रमुख नेताओं अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को पुलिस ने हिरासत में ले लिया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने तीनों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की. ये धाराएं शांति व्यवस्था बनाए रखने और संभावित संज्ञेय अपराध को रोकने से संबंधित हैं. 

इस कार्रवाई के बाद एक अहम सवाल उठता है कि क्या पुलिस किसी व्यक्ति को अपराध किए बिना भी गिरफ्तार कर सकती है? अगर हां, तो इसके लिए किन परिस्थितियों में कानूनी अनुमति है? क्या सिर्फ विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने या पुलिस को कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका होने के आधार पर किसी को हिरासत में लिया जा सकता है? आइए समझते हैं प्रिवेंटिव अरेस्ट का पूरा कानूनी पहलू.

क्या होता है प्रिवेंटिव अरेस्ट?

प्रिवेंटिव अरेस्ट को हिंदी में निवारक गिरफ्तारी कहा जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य किसी संभावित अपराध को होने से पहले रोकना है. सामान्य आपराधिक कार्रवाई में पुलिस किसी कथित अपराध के होने के बाद जांच करती है और परिस्थितियों के अनुसार आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है. इसके विपरीत, निवारक गिरफ्तारी का मकसद ऐसी स्थिति को रोकना है, जिसमें संज्ञेय अपराध होने की आशंका हो.

उदाहरण के लिए, अगर पुलिस के पास ऐसी ठोस जानकारी है कि कोई व्यक्ति किसी संज्ञेय अपराध को अंजाम देने की योजना बना रहा है और उसे रोकने का कोई दूसरा प्रभावी तरीका नहीं है, तो कानून की निर्धारित शर्तों के तहत पुलिस उसे गिरफ्तार कर सकती है.

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पुलिस किसी भी व्यक्ति को अपनी आशंका के आधार पर मनमाने तरीके से हिरासत में ले सकती है. कानून में इसके लिए स्पष्ट शर्तें निर्धारित हैं.

BNSS की धारा 170 में क्या प्रावधान है?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 170 संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए गिरफ्तारी से संबंधित है. यह संहिता 1 जुलाई 2024 से लागू हुई और इस प्रावधान का संबंध पहले लागू दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 151 से है. 

इस धारा के तहत पुलिस अधिकारी बिना मजिस्ट्रेट के आदेश और बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकता है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि उसे किसी संज्ञेय अपराध को अंजाम देने की योजना की जानकारी हो. साथ ही, अधिकारी को यह प्रतीत होना चाहिए कि उस अपराध को किसी अन्य तरीके से रोका नहीं जा सकता.

इस प्रावधान में दो बातें खास हैं. पहली, किसी संभावित अपराध के बारे में कानूनी रूप से प्रासंगिक जानकारी होनी चाहिए. दूसरी, गिरफ्तारी जरूरी होनी चाहिए, क्योंकि अपराध रोकने का कोई दूसरा तरीका उपलब्ध नहीं है.

इसलिए केवल किसी व्यक्ति का प्रदर्शन में शामिल होना, सरकार की आलोचना करना या प्रशासन के खिलाफ नारे लगाना अपने आप में धारा 170 के तहत गिरफ्तारी का पर्याप्त आधार नहीं है. पुलिस की कार्रवाई संबंधित परिस्थितियों और कानून की शर्तों पर निर्भर करेगी.

क्या अपराध किए बिना भी हो सकती है गिरफ्तारी?

हां, कुछ परिस्थितियों में ऐसा संभव है. प्रिवेंटिव अरेस्ट की अवधारणा ही संभावित अपराध को रोकने पर आधारित है. इसलिए हर मामले में यह जरूरी नहीं कि संबंधित अपराध पहले ही हो चुका हो.

लेकिन इसका अर्थ यह भी नहीं है कि केवल सामान्य आशंका के आधार पर किसी को गिरफ्तार किया जा सकता है. धारा 170 में संज्ञेय अपराध को अंजाम देने की योजना की जानकारी और अपराध को अन्य तरीके से रोक पाना संभव न होने की शर्त शामिल है.

मान लीजिए, किसी सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हिंसा करने की ठोस योजना की जानकारी पुलिस को मिलती है. यदि परिस्थितियों में उस अपराध को रोकने के लिए गिरफ्तारी आवश्यक प्रतीत होती है, तो पुलिस इस प्रावधान का इस्तेमाल कर सकती है.

इसके उलट, अगर कोई व्यक्ति शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहा है, तो सिर्फ असहमति या विरोध के आधार पर उसे अपराध की योजना बनाने वाला मान लेना उचित नहीं होगा. प्रत्येक मामले में उपलब्ध जानकारी, परिस्थितियों और पुलिस की कार्रवाई की वैधता का आकलन जरूरी है.

गिरफ्तारी के बाद 24 घंटे का नियम क्या है?

धारा 170 का एक महत्वपूर्ण पहलू हिरासत की अवधि है. इस प्रावधान के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के समय से 24 घंटे से अधिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता, जब तक BNSS के किसी अन्य प्रावधान या किसी दूसरे लागू कानून के तहत आगे हिरासत की अनुमति न हो. 

इसका मतलब है कि धारा 170 का इस्तेमाल अनिश्चित समय तक किसी व्यक्ति को पुलिस हिरासत में रखने के लिए नहीं किया जा सकता.

यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि 24 घंटे पूरे होने का अर्थ हर परिस्थिति में अपने आप रिहाई नहीं है. यदि किसी अन्य वैधानिक प्रावधान के तहत आगे हिरासत अधिकृत है, तो स्थिति अलग हो सकती है. इसलिए यह देखना जरूरी होता है कि पुलिस ने कार्रवाई किन धाराओं के तहत की है और हिरासत जारी रखने का कानूनी आधार क्या है.

CJP नेताओं के मामले में क्या हुआ?

अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए दिल्ली पहुंचे थे. उनका प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़ा था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने उन्हें इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद हिरासत में लिया और धारा 126 तथा 170 के तहत कार्रवाई की. 

यहां धारा 126 और धारा 170 के बीच अंतर समझना जरूरी है. धारा 126 शांति बनाए रखने के लिए संबंधित व्यक्ति से बंधपत्र या जमानतदार के साथ बंधपत्र लेने की कार्यवाही से जुड़ी है, जबकि धारा 170 संभावित संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए गिरफ्तारी का प्रावधान करती है.

दिल्ली में प्रदर्शन से पहले BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए जाने की भी रिपोर्ट आई थी. यह धारा तत्काल रोकथाम के लिए आदेश जारी करने से संबंधित है. हालांकि, किसी विशेष व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई कानूनी रूप से उचित थी या नहीं, इसका निर्धारण केवल धाराओं के नाम से नहीं किया जा सकता. इसके लिए पुलिस के आधार, संबंधित आदेशों और मामले की परिस्थितियों की जांच आवश्यक होगी. 

क्या प्रिवेंटिव अरेस्ट का मतलब व्यक्ति दोषी है?

नहीं. निवारक गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने या सजा दिए जाने के बराबर नहीं है. इसका उद्देश्य संभावित अपराध को रोकना है, न कि किसी व्यक्ति को पहले से अपराधी घोषित करना.

भारत में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और विरोध-प्रदर्शन करने का संवैधानिक महत्व है. वहीं, पुलिस की जिम्मेदारी सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी है. इन दोनों के बीच संतुलन जरूरी है.

यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसे गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया है, तो वह वकील की सहायता लेकर उपलब्ध कानूनी उपायों का इस्तेमाल कर सकता है. गिरफ्तारी और हिरासत की वैधता की जांच संबंधित तथ्यों तथा लागू कानून के आधार पर की जाती है.

पुलिस के पास अधिकार हैं, लेकिन मनमानी की छूट नहीं

प्रिवेंटिव अरेस्ट पुलिस को संभावित संज्ञेय अपराध रोकने का अधिकार देता है, लेकिन यह अधिकार कानून की निर्धारित शर्तों के अधीन है. BNSS की धारा 170 के तहत अपराध की योजना की जानकारी और उसे दूसरे तरीके से रोक पाना संभव न होने जैसी शर्तें महत्वपूर्ण हैं. इसके अलावा, इस धारा के तहत हिरासत पर सामान्यतः 24 घंटे की सीमा लागू होती है, जब तक किसी अन्य कानूनी प्रावधान के तहत आगे हिरासत अधिकृत न हो.

यह भी पढ़ें - दिल्ली में फिर CJP का प्रदर्शन, जंतर-मंतर कूच करेंगे प्रदर्शनकारी; 30 जगहों पर ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका

 

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