सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी का भारत दौरा: मुंबई और चेन्नई दौरा पूरा कर पहुंचे दिल्ली
नई दिल्ली, 8 फरवरी (आईएएनएस)। सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी रविवार को दिल्ली पहुंचे। हवाई अड्डे पर केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने उनका स्वागत किया।
हर्मिनी इससे पहले मुंबई और चेन्नई में आयोजित कुछ बिजनेस इवेंट्स में शामिल होने गए थे।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर तस्वीरों संग इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया: सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी चेन्नई और मुंबई में अहम कार्यक्रमों को संपन्न कर यहां पहुंचे। वहां उन्होंने शासन, उद्योग, तटीय प्रबंधन और स्वास्थ्य क्षेत्र सहित अहम स्टेकहोल्डर्स से मुलाकात की।
उन्होंने आगे कहा, एयरपोर्ट पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने उनका गर्मजोशी से विधिवत स्वागत किया। सेशेल्स भारत का एक प्रमुख समुद्री पड़ोसी है और भारत के विजन महासागर और ग्लोबल साउथ के प्रति उसकी प्रतिबद्धता में एक महत्वपूर्ण भागीदार है।
एमईए द्वारा जारी बयान के अनुसार, हर्मिनी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर पांच दिवसीय (5-10 फरवरी) राजकीय यात्रा पर गुरुवार को भारत पहुंचे। दिल्ली यात्रा के दौरान, वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने और पीएम मोदी के साथ आपसी हित के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत करने वाले हैं।
मुंबई में उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की, और दोनों नेताओं ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की, खासकर पोर्ट-आधारित विकास, कोस्टल मैनेजमेंट, और महाराष्ट्र और सेशेल्स के बीच बेहतर सहयोग को लेकर वार्ता की गई।
सीएम फडणवीस ने एक्स पोस्ट में अपनी खुशी जाहिर करते हुए लिखा, महाराष्ट्र सेशेल्स का स्वागत करता है! मुंबई के ताज महल पैलेस में खूबसूरत देश सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी और मंत्रियों का स्वागत करते हुए बहुत खुशी हुई। मैंने उन्हें और सेशेल्स के लोगों को स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ और इस साल भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे होने पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं!
उन्होंने राष्ट्रपति के साथ हुई वार्ता को शानदार बताया। कहा, विभिन्न विषयों पर शानदार बातचीत हुई, खासकर पोर्ट-आधारित विकास, तटीय प्रबंधन और महाराष्ट्र और सेशेल्स के बीच बेहतर सहयोग को लेकर। मैं माननीय मंत्रियों विदेश मंत्री बैरी फॉरे, वित्त मंत्री पियरे लापोर्टे, परिवहन मंत्री वेरोनिक लापोर्टे और पर्यटन और संस्कृति मंत्री अमांडा बर्नस्टीन का भी स्वागत करता हूं।
6 फरवरी को, हर्मिनी ने चेन्नई में फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) द्वारा आयोजित भारत-सेशेल्स बिजनेस फोरम में भाग लिया। इसे लेकर फिक्की ने एक्स पर एक बयान जारी किया।
फिक्की ने कहा, फोरम के हिस्से के रूप में, एक खास सीईओ राउंडटेबल भी आयोजित की गई, जहां भारत के प्रमुख उद्योगपतियों ने माननीय राष्ट्रपति और सेशेल्स से आए मंत्री स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ सीधे बातचीत की।
--आईएएनएस
केआर/
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बांग्लादेश चुनाव में महिला उम्मीदवारों पर हो रहे साइबर हमले, जानबूझकर बनाया जा रहा निशाना
ढाका, 8 फरवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश में 12 फरवरी को संसदीय चुनाव हो रहे हैं। चुनावी तैयारियों और अभियानों के बीच बांग्लादेश में महिलाओं की आत्मनिर्भरता, रोटी और रोजगार एक अहम मुद्दा बना हुआ है। खासतौर से जमात-ए-इस्लामी की तरफ से महिलाओं को लेकर की गई टिप्पणी के बाद से देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी ने तूल पकड़ लिया।
दरअसल, बांग्लादेश में जो चुनाव होने वाला है, उसमें महिला उम्मीदवारों का आंकड़ा सिर्फ चार फीसदी के आसपास है। यहां आधी आबादी महिलाओं की है, लेकिन बैलेट पेपर पर उनका नाम मुश्किल से ही आता है।
स्थानीय मीडिया ने बताया कि कई चुनाव क्षेत्रों की महिला उम्मीदवारों ने ऑनलाइन और जमीनी स्तर पर साइबरबुलिंग, चरित्र हनन, यौन उत्पीड़न और धमकियों की रिपोर्ट की है। इन कृत्यों का मकसद महिला उम्मीदवारों को डराना और उनके चुनावी कैंपेन को रोकना है।
ढाका-19 से नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) उम्मीदवार दिलशाना पारुल ने कहा कि उन्हें लगातार ऑनलाइन ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा है, खासकर हेडस्कार्फ पहनने के उनके फैसले को लेकर।
बांग्लादेशी अखबार द ढाका ट्रिब्यून ने उनके हवाले से कहा, न सिर्फ विरोधी पार्टियों के समर्थकों बल्कि जो लोग खुद को प्रोग्रेसिव कहते हैं, वे भी इसमें शामिल हैं। मेरा मानना है कि मुझे सबसे ज्यादा निशाना बनाया गया है।
पारुल ने आरोप लगाया है कि उनके अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं को शारीरिक नुकसान पहुंचाने की धमकियां भी मिली हैं।
उन्होंने कहा, हाल ही में, मेरी टीम पर एक गांव की बिजली साइट पर हमला हुआ। मुझे यह भी चेतावनी देने वाले कॉल आए कि अशुलिया में एक पूर्व वार्ड कमिश्नर मेरी महिला श्रमिकों को वोट देने से रोकने के लिए धमका रहा है। जब भी ऐसा लगता है कि बीएनपी हार सकती है, तो धमकियां बढ़ जाती हैं।
लिंग आधारित टारगेटिंग पर जोर देते हुए, पारुल ने कहा कि पुरुष नेताओं की ज्यादातर आलोचना भ्रष्टाचार या नीतियों को लेकर होती है, जबकि महिलाओं पर उनके चरित्र को लेकर हमला किया जाता है। इसके बावजूद, मैं फील्ड में काम करती रहूंगी और अपने चुनाव क्षेत्र के विकास पर ध्यान दूंगी।
द ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, ढाका-20 से एनसीपी उम्मीदवार नबीला तस्नीद ने कहा, हमारे बैनर और फेस्टून फाड़ दिए गए हैं। जब हमने अधिकारियों को इसकी सूचना दी, तो उन्होंने फोटो या वीडियो सबूत मांगे, जिससे पता चलता है कि इंस्टीट्यूशनल समर्थन कहां है।
तस्नीद ने गठबंधन समर्थित समूहों पर गलत जानकारी फैलाने और महिला नेतृत्व पर सवाल उठाने का आरोप लगाया। वे दावा करते हैं कि समाज महिला नेताओं को स्वीकार नहीं करेगा। ऑनलाइन प्रोपेगेंडा और चरित्र पर हमला उनका मुख्य हथियार है।
तस्नीद ने कहा कि उनका कैंपेन एजेंडा खेती, किसानों के अधिकार, रोजगार, तकनीकी शिक्षा और महिलाओं के लिए विदेशों में अवसरों पर फोकस करता है। ढाका-12 से गोनोशोंगहोटी आंदोलन की उम्मीदवार तस्लीमा अख्तर ने कहा कि ऑनलाइन उत्पीड़न इसलिए बढ़ता है क्योंकि बिना नाम बताए हमला करना आसान होता है।
उन्होंने कहा, जब टारगेट कोई महिला होती है, तो यह और भी आसान हो जाता है। डराने-धमकाने से वह महिलाओं के अधिकारों, बारहवीं क्लास तक मुफ्त शिक्षा और भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और ड्रग सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगी।
आयोग की तरफ से जारी आंकड़े के अनुसार चुनाव लड़ रही 51 दलों में से 30 पार्टियों ने एक भी महिला उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारा है। रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि बढ़ती कानून-व्यवस्था महिलाओं को चुनाव लड़ने से रोकने वाली एक मुख्य वजह है।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
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