उत्तराखंड SDRF को मिला ISO 9001:2015 सर्टिफिकेट, CM धामी ने जवानों को दी बधाई
देहरादून। उत्तराखंड SDRF को ISO 9001:2015 सर्टिफिकेट मिला है। यह सर्टिफिकेट बेहतर मैनेजमेंट, तय प्रक्रिया के मुताबिक काम और उसकी गुणवत्ता को लेकर दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि पर SDRF के अधिकारियों और जवानों को बधाई दी है।
सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को देखते हुए SDRF की जिम्मेदारी काफी अहम है। आपदा हो या दूसरी कोई इमरजेंसी, SDRF के जवान राहत और बचाव के लिए मौके पर पहुंचते हैं। मुश्किल हालात में लोगों की जान बचाने और प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाने में टीम लगातार काम कर रही है।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) उत्तराखण्ड को ISO 9001:2015 प्रमाणपत्र प्राप्त होने पर बल के समस्त अधिकारियों एवं जवानों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि को प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताते हुए कहा कि यह SDRF की कार्यकुशलता, अनुशासन, समर्पण और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में गुणवत्ता एवं उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य में SDRF की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक आपदाओं एवं अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों के माध्यम से SDRF के जवान लोगों की जान बचाने और प्रभावित परिवारों को सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। कठिन परिस्थितियों में साहस, तत्परता और सेवाभाव के साथ कार्य करना SDRF की विशिष्ट पहचान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ISO 9001:2015 प्रमाणपत्र प्राप्त होना संगठन में प्रभावी प्रबंधन व्यवस्था, निर्धारित प्रक्रियाओं, कार्यों की गुणवत्ता और निरंतर सुधार के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। यह उपलब्धि SDRF के अधिकारियों एवं जवानों की मेहनत, समर्पण और टीम भावना का परिणाम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि SDRF भविष्य में भी आपदा प्रबंधन एवं राहत-बचाव कार्यों में दक्षता और उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करता रहेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रबंधन तंत्र को आधुनिक, सक्षम और प्रभावी बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। सरकार का उद्देश्य आपदाओं के दौरान जन-धन की हानि को न्यूनतम करना तथा प्रभावित लोगों तक समय पर राहत एवं सहायता पहुंचाना है। उन्होंने SDRF के सभी अधिकारियों और जवानों से इसी सेवाभाव, तत्परता एवं समर्पण के साथ कार्य करते रहने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि के लिए सेनानायक SDRF श्री अर्पण यदुवंशी सहित समस्त अधिकारियों, जवानों एवं संबंधित कार्मिकों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
— CM Office Uttarakhand (@ukcmo) October 10, 2026
मुख्यमंत्री ने ISO सर्टिफिकेट को SDRF की टीम के काम और बेहतर मैनेजमेंट का नतीजा बताया। उन्होंने कहा कि सरकार भी आपदा से निपटने की व्यवस्था को लगातार बेहतर कर रही है, ताकि जरूरत के समय लोगों तक जल्द मदद पहुंच सके और जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।
सीएम ने SDRF के सेनानायक अर्पण यदुवंशी सहित पूरी टीम को बधाई देते हुए आगे भी इसी तरह काम करने की उम्मीद जताई।
Navratri 2026: आज से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत, नोट करें पूजा व घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
Navratri 2026: आज यानी 11 अक्टूबर 2026 से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है. पहले दिन घटस्थापना की जाती है. हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का खास महत्व होता है. यह साल की आखिरी नवरात्र होती है. आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नौ दिनों तक यह त्योहार मनाया जाता है. आज लोग घर में पूजा-पाठ करेंगे और दुर्गा माता को स्थापित करेंगे. इसके बाद पूरे 9 दिनों तक विधि-विधान के साथ उनका पूजन किया जाएगा. कई लोग आज से पूरे 9 दिनों के व्रत रखेंगे जबकि कुछ लोग पहले दिन और आखिरी दिन का व्रत रखते हैं.
दूसरी तरफ आज नवरात्रि प्रारंभ के साथ दुर्गा पूजा की शुरुआत भी हो चुकी है. दुर्गा मां के भव्य पंडाल लगाए जाएंगे. चलिए अब जानते हैं घटस्थापना का मुहूर्त क्या है.
शारदीय नवरात्रि 2026 का आज से प्रारंभ
द्रिक पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ 10 अक्टूबर 2026 को 9 बजकर 19 मिनट पर होगा और समापन 11 अक्टूबर को 9 बजकर 30 मिनट पर होगा. वहीं, घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 8 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 3 मिनट तक रहेगा. यानी आपको 3 घंटे 55 मिनट का समय मिल रहा है. वहीं, घटस्थापना के दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 37 मिनट से लेकर दोपहर 12:24 तक रहेगा.
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प्रथम दिन का पंचांग
शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करनी चाहिए, आज प्रतिपदा तिथि रात 9 बजकर 30 मिनट तक है. वहीं, आज नक्षत्रों की बात करें तो सुबह 10 बजकर 32 मिनट तक चित्रा नक्षत्र रहेगा और फिर स्वाति नक्षत्र शुरू होगा. आज के दिन दो योगों का संयोग बन रहा है. वैधृत्ति योग रात 9 बजकर 5 मिनट तक रहेगा और फिर विष्कंभ योग लगेगा.
आज का शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त- प्रात:काल 04:30 ए एम से 05:19 ए एम
प्रातः सन्ध्या- प्रात:काल 04:54 ए एम से 06:08 ए एम
अभिजित मुहूर्त- सुबह 11:37 ए एम से लेकर दोपहर 12:24 पी एम
अमृत काल- दोपहर 03:55 पी एम से शाम 05:34 पी एम
गोधूलि मुहूर्त- शाम 05:53 पी एम से 06:17 पी एम
द्विपुष्कर योग- रात 09:30 पी एम से 10:32 पी एम
आज राहुकाल का समय दोपहर 4 बजकर 25 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 53 मिनट तक रहने वाला है.
घटस्थापना का महत्व
नवरात्रि के महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक घटस्थापना होती है. यह नौ दिनों के उत्सव के आरंभ का प्रतीक होता है. हमारे शास्त्रों द्वारा नवरात्रि के पहले दिन एक निश्चित समयावधि में घटस्थापना करने के नियम एवं दिशानिर्देश बताए गए हैं. घटस्थापना देवी शक्ति के आह्वान की प्रक्रिया होती है तथा हमारे शास्त्रों की चेतावनी के अनुसार, अशुभ काल में घटस्थापना करने से देवी शक्ति कुपित हो सकती हैं. अमावस्या तथा रात्रिकाल में घटस्थापना वर्जित होता है. प्रतिपदा तिथि के दिन का पहला एक तिहायी भाग घटस्थापना हेतु सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है.
घटस्थापना सामग्री
- एक चौड़ा एवं खुला मिट्टी का पात्र
- स्वच्छ मिट्टी
- सात भिन्न-भिन्न प्रकार के अन्न के बीज
- मिट्टी का कलश
- कलश में भरने के लिए शुद्ध जल अथवा गंगा जल
- मौली
- इत्र
- सुपारी
- कलश में डालने हेतु सिक्का
- अशोक वृक्ष अथवा आम के पांच पत्ते
- कलश ढकने हेतु एक पात्र का ढक्कन
- कलश के ऊपरी पात्र में रखने के लिए कच्चे चावल अथवा बिना टूटे हुए चावल जिन्हें अक्षत के नाम से जाना जाता है.
- ना छिला हुआ जटा वाला नारियल
- नारियल लपेटने हेतु लाल वस्त्र
- फूल
- दूर्वा घास
इन सभी सामग्रियों के साथ देवी-देवताओं के आवाहन से कलश निर्माण किया जाता है.
घटस्थापना पूजन विधि
आज के दिन प्रात:काल स्नान आदि करके साफ-सुथरे वस्त्र पहनें. इसके बाद मंदिर व पूजा स्थल की सफाई करें. गंगाजल से शुद्ध करें. इसके बाद एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं. इसके बाद माता की मूर्ति को चौकी पर स्थापित करें. कलश स्थापना के लिए तांबे या मिट्टी के कलश में जल, गंगाजल, सुपारी, सिक्का, अक्षत और दूर्वा डालें. कलश के ऊपर मुख में आम के पत्ते रखकर उस पर नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर रखें. इसके बाद एक साफ पात्र में, आप चाहे तो मिट्टी का पात्र ले सकते हैं. इसमें खेत की पवित्र मिट्टी डालें. उसमें जौ के बीज बोएं. इन्हें नौ दिनों तक जल से सींचा जाता है. इसके बाद धूप-दीया जलाएं. अखंड ज्योत जलाएं. माता रानी को श्रृंगार सामग्री अर्पित करें. उन्हें फलों का भोग लगाएं. अंत में आरती करके पूजा का समापन करें. वहीं, संध्याकाल में दोबारा विधि-विधान के साथ पूजा व आरती करें.
पहले दिन व्रत पारण कब करें?
शाम की पूजा करने के बाद व्रत खोले. नवरात्रि व्रत में फलों का सेवन कर सकते हैं. दूध पी सकते हैं. जो लोग नवरात्रि व्रत में नमक का सेवन कर रहे हैं, उन्हें सेंधा नमक खाना चाहिए और समा के चावल, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा तथा आलू खा सकते हैं.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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