एप्पल ने iPhone 18 Pro मॉडल्स का टेस्ट प्रोडक्शन किया शुरू, जानें लॉन्च से पहले A20 Pro चिप और नए कलर जैसे अपग्रेड्स
टेक्नोलॉजी की दुनिया में बेसब्री से इंतजार किए जा रहे ऐप्पल के iPhone 18 Pro और 18 Pro Max को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने इन दोनों प्रीमियम मॉडल्स का टेस्ट प्रोडक्शन शुरू कर दिया है, जिससे यह लगभग तय हो गया है कि इन्हें सितंबर में ही लॉन्च किया जाएगा। यह डेवलपमेंट उन यूजर्स के लिए खुशखबरी है जो नए आईफोन का इंतजार कर रहे हैं।
टेस्ट प्रोडक्शन मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया का एक अहम चरण होता है। इसमें कंपनी पूरी असेंबली लाइन चलाने के बजाय उसके कुछ हिस्सों पर नए कंपोनेंट्स के साथ डिवाइस तैयार करके उनकी गुणवत्ता, फिट और फंक्शन की जांच करती है। इस प्रक्रिया के सफल होने के बाद ही मास प्रोडक्शन यानी बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया जाता है।
सितंबर लॉन्च की राह पर ऐप्पल
टेस्ट प्रोडक्शन का शुरू होना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि ऐप्पल अपनी पारंपरिक सितंबर लॉन्च टाइमलाइन के साथ आगे बढ़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी अगले एक से दो महीनों में इन प्रो मॉडल्स का मास प्रोडक्शन शुरू कर देगी ताकि लॉन्च के समय बाजार में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया जा सके। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि iPhone 18 के स्टैंडर्ड वेरिएंट के लिए ग्राहकों को अगले साल मार्च तक का इंतजार करना पड़ सकता है।
A20 Pro चिप और कैमरा होंगे सबसे बड़े अपग्रेड
रिपोर्ट्स में इस बात पर जोर दिया गया है कि प्रोडक्शन टेस्टिंग के दौरान कंपनी का मुख्य ध्यान दो प्रमुख कंपोनेंट्स पर है। पहला, 2nm प्रोसेस पर बना नया A20 Pro प्रोसेसर, जिससे परफॉर्मेंस और एफिशिएंसी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। दूसरा, मेन कैमरे में दिया जाने वाला मैकेनिकल वेरिएबल अपर्चर, जो फोटोग्राफी को और बेहतर बनाएगा।
इसके अलावा, आईफोन 18 प्रो मॉडल्स में कई अन्य बड़े बदलावों की भी उम्मीद है, जिनमें शामिल हैं:
- अंडर-डिस्प्ले फेसआईडी: इससे नॉच या डायनामिक आइलैंड का आकार छोटा हो सकता है, जिससे यूजर्स को ज्यादा स्क्रीन स्पेस मिलेगा।
- बड़ी बैटरी: खासकर iPhone 18 Pro Max में अब तक की सबसे दमदार बैटरी दी जा सकती है।
- नए कलर ऑप्शन: कंपनी एक नए ‘रेड वाइन’ शेड पर काम कर रही है, जो मौजूदा रेड कलर से ज्यादा डार्क और प्रीमियम होगा। इसे कॉस्मिक ऑरेंज जैसा यूनिक लुक मिल सकता है।
कुल मिलाकर, iPhone 18 Pro सीरीज परफॉर्मेंस, कैमरा और डिजाइन के मामले में एक महत्वपूर्ण अपग्रेड होने जा रही है, जिसकी तैयारी अब अंतिम चरण में पहुंच गई है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल Macworld द्वारा साझा की गई जानकारी के आधार पर बनाया गया है, किसी भी जानकारी की पुष्टि के लिए पहले Apple के आधिकारिक स्त्रोतों से कंफर्म अवश्य करें।)
12 टीमों का हो सकता है अगला वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप:जिम्बाब्वे, आयरलैंड और अफगानिस्तान की एंट्री; एक मैच की टेस्ट सीरीज के भी पॉइंट्स जुड़ेंगे
वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप यानी WTC का अगला साइकल मौजूदा 9 टीमों के बजाय 12 का हो सकता है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के CEO टॉड ग्रीनबर्ग ने संकेत दिए हैं कि 2029-31 के WTC में जिम्बाब्वे, आयरलैंड और अफगानिस्तान को शामिल करने की तैयारी है। इसके लिए एक बड़ा बदलाव यह भी हो सकता है कि एक टेस्ट की सीरीज को WTC के पॉइंट्स में शामिल किया जाए। इस फैसले पर अगले महीने बाली में होने वाली ICC बैठकों में निर्णय आने की उम्मीद है। मौजूदा WTC 2019 से 9 टीमों के साथ खेला जा रहा है। हर टीम दो साल में 6 टेस्ट सीरीज खेलती है। 3 घर में और 3 विदेशी जमीन पर। अभी WTC सीरीज में कम से कम 2 टेस्ट होना जरूरी है। 12 टीमों को शामिल करने की वजह क्या है? ग्रीनबर्ग के मुताबिक 12 टीमों का मॉडल इसलिए जरूरी है, क्योंकि हर टेस्ट खेलने वाले देश को WTC में जगह देने की कोशिश की जा रही है। लेकिन उनका मानना है कि यह मॉडल लंबे समय तक आर्थिक रूप से कितना टिकाऊ रहेगा, यह बड़ा सवाल है। उन्होंने साफ कहा कि अगर ICC से मिलने वाली आमदनी मौजूदा स्तर पर नहीं रहती या बोर्ड अपने FTP यानी फ्यूचर टूर प्रोग्राम से पर्याप्त कमाई नहीं कर पाते, तो लगातार कमाई से ज्यादा खर्च करना संभव नहीं होगा। यही समस्या ग्लोबल क्रिकेट के कुछ हिस्सों में पहले से दिखाई दे रही है। टेस्ट क्रिकेट महंगा है, सिर्फ 11 खिलाड़ी जुटाना काफी नहीं ग्रीनबर्ग का तर्क सिर्फ मैच आयोजित करने की लागत तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक किसी देश के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने का असली खर्च पूरे सिस्टम को तैयार करने में है। रेड-बॉल क्रिकेटर्स तैयार करने के लिए घरेलू ढांचा, खिलाड़ी विकास और लंबे समय की व्यवस्था चाहिए। उनका मानना है कि आने वाले समय में कुछ सदस्य देश टेस्ट क्रिकेट खेलना बंद कर सकते हैं। कुछ देशों को अपने घरेलू मुकाबलों से ज्यादा विदेशी जमीन पर टेस्ट खेलने पड़ सकते हैं, ताकि उनके यहां टेस्ट क्रिकेट पूरी तरह खत्म न हो। यही वजह है कि ग्रीनबर्ग ने मौजूदा होम-एंड-अवे की बराबर व्यवस्था पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि यही पारंपरिक व्यवस्था कुछ देशों को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचा सकती है। ऑस्ट्रेलिया चाहता है साउथ अफ्रीका के साथ 5 टेस्ट ऑस्ट्रेलिया भविष्य में साउथ अफ्रीका के खिलाफ 5 टेस्ट की सीरीज खेलना चाहता है। हालांकि दोनों देशों के क्रिकेट कैलेंडर में समान समय पर अपने घरेलू सीजन होने के कारण यह आसान नहीं है। पाकिस्तान भी ऑस्ट्रेलिया के लिए लंबे टेस्ट सीरीज का विकल्प हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया में बड़ी पाकिस्तानी प्रवासी आबादी को देखते हुए ग्रीनबर्ग ने इसे कमर्शियल रूप से उपयोगी बताया। पाकिस्तान दिसंबर 2027 में ऑस्ट्रेलिया का दौरा करेगा, जहां 3 टेस्ट खेले जाएंगे। इसके बाद फरवरी 2028 में श्रीलंका का दौरा प्रस्तावित है। वनडे को भी बचाने की कोशिश ग्रीनबर्ग ने वनडे क्रिकेट के भविष्य पर भी बात की। दुबई में मल्टीलेटरल टूर्नामेंट के आइडिया पर चर्चा हुई। इसमें एक सुझाव इंटरकॉन्टिनेंटल कप का भी था, जिसमें अलग-अलग महाद्वीपों की शीर्ष टीमें आमने-सामने आ सकती हैं। ग्रीनबर्ग के मुताबिक हाई परफॉर्मेंस से जुड़े लोग वनडे को खिलाड़ियों के टैलेंट डेवलपमेंट के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं। वहीं ICC स्तर पर वनडे वर्ल्ड कप को ग्लोबल क्रिकेट की कमर्शियल कमाई के लिए अहम माना जाता है। ऑस्ट्रेलिया का अगला टेस्ट FTP लगभग तय ऑस्ट्रेलिया का 2027-31 का घरेलू टेस्ट फ्यूचर टूर प्रोग्राम भी लगभग तय हो चुका है। 2027-28 में पाकिस्तान और श्रीलंका के बाद 2028-29 में भारत ऑस्ट्रेलिया का दौरा करेगा। इसके बाद 2029-30 में इंग्लैंड आएगा। 2030-31 के घरेलू सीजन के लिए विपक्षी टीम अभी तय नहीं हुई है।
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