ऑनलाइन गेमिंग को लेकर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, 1 मई से लागू होंगे नए नियम, अधिसूचना जारी
केंद्र सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग नियम 2026 को अधिसूचित किया है। जिसके तहत ऑनलाइन गेमिंग से संबंधित कई बदलाव होने वाले हैं। नए नियम (Online Gaming Rules) 1 मई 2026 से लागू होंगे। ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (OGAI) की स्थापना भी की गई है। जिसमें 6 सदस्य शामिल होंगे। वहीं इस प्राधिकरण के अध्यक्ष इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव होंगे। इसका उद्देश्य देश में ऑनलाइन गेमिंग को रेगुलेट करना है।
ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया इस क्षेत्र के लिए एक एकाकृत और डिजिटल फर्स्ट नियामक के रूप में काम करेगा। यह एक डिजिटल ऑफिस के तौर पर काम करेगा। ऑनलाइन मनी गेम्स की सूची बनाए रखना और प्रकाशित करेगा। शिकायतों की जांच करना और इनका निवारण करेगा। निर्देश और आदेश जारी करना, शिकायतों पर सर्विस प्रोवाइडर के फैसलों के खिलाफ अपील पर सुनवाई करना, पेनल्टी इत्यादि की जिम्मेदारी भी OGAI की होगी।
गेमिंग सर्टिफिकेट की वैधता बढ़ी
गेमिंग सर्टिफिकेट की वैधता को दो गुना कर दिया गया है। जिससे गेमिंग कंपनियों को राहत मिलेगी। पहले सर्टिफिकेट की अवधि जहां 5 साल थी, अब उसे बढ़ाकर 10 साल करने का फैसला लिया गया है। इतना ही नहीं अब गेम डेवलपर को बार-बार रिन्यूएबल की प्रक्रिया से भी बार-बारगुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
रजिस्ट्रेशन के लिए नए नियम
अब रजिस्ट्रेशन की जरूरत तभी होगी, जिसे सरकार यूजर्स (बच्चों सहित) के लिए जोखिम, भागीदारी का पैमाना, वित्तीय लेनदेन, देश का ऑरिजन और ई-स्पोर्ट्स के तौर पर पेश करने का इरादे के तौर पर अधिसूचित करेगी। रजिस्ट्रेशन होने पर अथॉरिटी एक डिजिटल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी करेगी। जिसमें एक यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर होगा और जो 10 साल तक की अवधि के लिए वैध माना जाएगा। कोई भी ऑनलाइन पैसे वाला गेम राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम 2025 के तहत ई-सपोर्ट के तौर पर मान्यता या रजिस्ट्रेशन के लिए पात्र नहीं होगा। रजिस्टर सर्विस देने वालों के लिए यह जरूरी है कि वह इंटरफेस पर जिसके जरिए गेम पेश किया गया है, उसके रजिस्ट्रेशन का विवरण साफ तौर पर दिखाएं। साथ संपर्क के लिए एक व्यक्ति नियुक्त करें। डेटा बनाए रखने से जुड़े दिशा निर्देशों का पालन करें। पेमेंट की सुविधा से जुड़े निर्देशों का भी पालन अनिवार्य होगा।
इन नियमों को भी जान लें
- यूजर सुरक्षा फीचर की उपलब्ध करवाया जाएगा। जिसमें उम्र की पुष्टि, उम्र सीमा तय करना, समय की पाबंदी, माता-पिता का नियंत्रण, यूजर रिपोर्टिंग टूल, काउंसलिंग सहायता, निष्पक्ष खेल और ईमानदारी की निगरानी शामिल है। रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करते समय अपने यूजर्स सुरक्षा फीचर और शिकायत निवारण के बारे में जानकारी भी देनी होगी।
- ऑनलाइन गेम सर्विस प्रोवाइडर को एक शिकायत निवारण व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। यदि यूजर इससे असंतुष्ट होते हैं, तो वे अथॉरिटी के पास 30 दिनों के भीतर शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। जिसका निवारण 30 दिनों के भीतर किया जाएगा।
- कार्यवाही ऑनलिनर मोड में की जाएगी, जब तक की भौतिक उपस्थिति जरूरी न मानी जाए। शिकायत मिलने के 90 दिनों के अंदर इसका निवारण होगा।
WhatsApp यूजर्स के लिए जरूरी खबर, ऑनलाइन फ्रॉड रोकने के लिए सरकार उठाया बड़ा कदम, 1 मार्च से लागू होगा यह नियम
अगर आप WhatsApp, Telegram, Signal या Snapchat जैसे इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। 1 मार्च से इन सभी प्लेटफॉर्म्स पर एक नया सुरक्षा नियम लागू होने जा रहा है, जिसे ‘सिम बाइंडिंग’ कहा जाता है। केंद्र सरकार ने ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराधों पर नकेल कसने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है।
दूरसंचार विभाग (DoT) ने नवंबर में इन कंपनियों को यह नियम लागू करने के लिए 90 दिनों का समय दिया था, जिसकी समय सीमा 28 फरवरी को समाप्त हो रही है। सरकार ने साफ कर दिया है कि इस डेडलाइन में कोई विस्तार नहीं किया जाएगा, जिसका मतलब है कि 1 मार्च से सभी कंपनियों को इस नियम का पालन करना होगा।
आखिर क्या है सिम बाइंडिंग?
सिम बाइंडिंग एक सुरक्षा फीचर है जो यह सुनिश्चित करता है कि आप जिस मोबाइल नंबर से मैसेजिंग ऐप का अकाउंट चला रहे हैं, उसका सिम कार्ड उसी डिवाइस में मौजूद और सक्रिय हो। अभी तक यह संभव था कि आप एक बार अपने नंबर से WhatsApp पर OTP के जरिए लॉगिन कर लें और फिर सिम कार्ड निकालकर भी वाई-फाई की मदद से ऐप का इस्तेमाल करते रहें। लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा।
नए नियम के तहत:
अगर आप अपने मोबाइल से वह सिम कार्ड निकाल देते हैं जिससे आपका WhatsApp या Telegram अकाउंट लिंक है, तो ये ऐप्स उस डिवाइस पर काम करना बंद कर देंगे। ऐप को दोबारा चलाने के लिए आपको सिम कार्ड वापस फोन में डालना होगा और लॉगिन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?
इस नियम को लागू करने के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य तेजी से बढ़ रहे वित्तीय फ्रॉड, खासकर ‘सिम स्वैप’ जैसी घटनाओं को रोकना है। हाल के दिनों में साइबर अपराधी यूजर्स के सिम कार्ड का डुप्लीकेट बनवाकर या किसी तरह उनके नंबर का एक्सेस लेकर उनके मैसेजिंग ऐप्स को कंट्रोल कर लेते थे। इसके बाद वे उस अकाउंट का इस्तेमाल वित्तीय धोखाधड़ी या अन्य अवैध गतिविधियों के लिए करते थे। सिम बाइंडिंग लागू होने से हैकर्स के लिए ऐसा करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा, क्योंकि ऐप चलाने के लिए फिजिकल सिम कार्ड का फोन में होना जरूरी होगा।
आम यूजर्स पर क्या होगा असर?
अधिकतर यूजर्स के लिए चिंता की कोई बात नहीं है। अगर आप अपने जिस फोन में WhatsApp चला रहे हैं, उसी में संबंधित सिम कार्ड भी इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपके लिए कुछ भी नहीं बदलेगा और आपका ऐप पहले की तरह सामान्य रूप से काम करता रहेगा।
हालांकि, अगर आप अक्सर सिम कार्ड बदलते हैं या किसी दूसरे फोन में अपना सिम लगाकर अपने प्राइमरी फोन में वाई-फाई पर ऐप चलाते हैं, तो आपको असुविधा हो सकती है। सिम हटाने पर आपका ऐप अस्थायी रूप से निष्क्रिय हो जाएगा। इसके अलावा, इन ऐप्स के वेब वर्जन (जैसे WhatsApp Web) पर भी सुरक्षा बढ़ाई गई है। नए नियम के मुताबिक, वेब अकाउंट हर 6 घंटे में अपने आप लॉग-आउट हो जाएगा और आपको दोबारा इस्तेमाल करने के लिए QR कोड स्कैन करके फिर से लॉग-इन करना होगा।
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