झारखंड में राशन वितरण को मिलेगी नई रफ्तार, जमशेदपुर में ग्रेन एटीएम का ट्रायल सफल; 5 मिनट में मिलेगा 50 किलो अनाज
झारखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को अधिक पारदर्शी, तेज और सुविधाजनक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है. जमशेदपुर में स्थापित ग्रेन एटीएम यानी ‘अन्नपूर्ति मशीन’ का ट्रायल सफल रहा है. इस आधुनिक तकनीक से राशन कार्डधारकों को निर्धारित कोटे के अनुसार गेहूं और चावल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है. मशीन की मदद से महज पांच मिनट में 50 किलोग्राम तक अनाज प्राप्त किया जा सकेगा.
तकनीक से मजबूत होगी राशन व्यवस्था
जमशेदपुर प्रखंड कार्यालय परिसर में स्थापित इस मशीन का शुक्रवार को परीक्षण किया गया. इस दौरान अनाज निकालने और उसके वजन की सटीकता की जांच की गई. ट्रायल सफल होने के बाद अब मशीन के औपचारिक उद्घाटन और नियमित संचालन की तैयारियां की जा रही हैं.
सरकार की पहल से लाभुकों को मिलेगी राहत
झारखंड सरकार की इस पहल का उद्देश्य राशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ाना और लाभुकों को होने वाली परेशानियों को कम करना है. पारंपरिक राशन दुकानों पर लंबी कतारों, समय की बर्बादी और तौल में गड़बड़ी जैसी शिकायतों से राहत मिलने की उम्मीद है. स्वचालित मशीन से अनाज मिलने पर निर्धारित मात्रा में राशन वितरण सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी.
बायोमेट्रिक सत्यापन से मिलेगा राशन
ग्रेन एटीएम के जरिए राशन प्राप्त करने के लिए लाभार्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा. सत्यापन पूरा होने के बाद मशीन से निर्धारित मात्रा में अनाज सीधे थैले में निकलेगा. इससे वितरण प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और व्यवस्था की जवाबदेही बढ़ सकती है.
रांची और धनबाद तक विस्तार की योजना
झारखंड में ग्रेन एटीएम परियोजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है. इसके लिए जमशेदपुर के साथ रांची और धनबाद को भी चुना गया है. जमशेदपुर में सफल परीक्षण राज्य में डिजिटल और तकनीक आधारित राशन वितरण व्यवस्था को विस्तार देने की दिशा में अहम कदम है. भविष्य में इस मॉडल की सफलता के आधार पर अन्य क्षेत्रों में भी इसका विस्तार किया जा सकता है.
इस पहल से राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को तकनीक से जोड़ने, राशन वितरण को अधिक प्रभावी बनाने और पात्र लाभार्थियों तक अनाज पहुंचाने के प्रयासों को मजबूती मिलने की उम्मीद है.
भागलपुर के स्कूल में मिड डे मील में मिली छिपकली, खाना खाते ही 12 बच्चों की बिगड़ी तबीयत; अस्पताल में भर्ती
Toxic Mid Day Meal Case: बिहार के सरकारी स्कूलों में मिलने वाले मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. भागलपुर जिले के सुल्तानगंज प्रखंड से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां स्कूल में मासूम बच्चों को परोसे गए खाने में छिपकली पाई गई. यह दूषित भोजन खाते ही एक साथ 12 बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी. देखते ही देखते स्कूल परिसर में अफरातफरी और चीख पुकार मच गई. बच्चों को पेट दर्द, उल्टी और बेचैनी की शिकायत होने लगी, जिसके बाद शिक्षकों और ग्रामीणों की मदद से सभी बीमार बच्चों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया. इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बच्चों की जान के साथ किस तरह खिलवाड़ किया जा रहा है.
थाली में चावल परोसते ही दिखी छिपकली की पूंछ
यह पूरी घटना सुल्तानगंज प्रखंड के कठहरा पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय आजाद नगर पन्नाशाला की है. शनिवार को रोज की तरह कक्षाएं चल रही थीं और दोपहर के समय बच्चों को मध्याह्न भोजन परोसने की तैयारी की गई. बच्चे जमीन पर कतार बनाकर बैठे थे और खाना खाने लगे. इसी दौरान स्कूल में पढ़ने वाले छात्र गुरु कुमार की थाली में जैसे ही चावल परोसा गया, उसकी नजर चावल के बीच में पड़ी. चावल के दानों के बीच एक छिपकली की कटी हुई पूंछ साफ दिखाई दे रही थी. यह नजारा देखते ही छात्र डर गया और उसने तुरंत शोर मचाना शुरू कर दिया. थाली में छिपकली देखकर आसपास बैठे दूसरे बच्चों के भी होश उड़ गए.
शिक्षकों ने तुरंत रुकवाया भोजन लेकिन तब तक हो चुकी थी देर
बच्चे का शोर सुनकर रसोई के पास खड़े शिक्षक और शिक्षिकाएं दौड़कर वहां पहुंचे. थाली में छिपकली की पूंछ देखते ही उनके हाथ पांव फूल गए. शिक्षकों ने बिना एक पल गंवाए सभी बच्चों को खाना खाने से तुरंत रोक दिया. बर्तनों को अलग हटा दिया गया और बाकी बच्चों की थालियां छीन ली गईं. हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी. करीब 12 बच्चे उस खाने को खा चुके थे. खाना पेट में जाते ही थोड़ी ही देर में मासूम बच्चों के चेहरों का रंग उड़ने लगा. उन्हें पेट में तेज मरोड़ और उल्टी की शिकायत होने लगी. कुछ बच्चे चक्कर खाकर जमीन पर बैठ गए और रोने लगे.
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